लोहा, या लड्डू?
लोहा, या लड्डू?
🎭 लोहा, या लड्डू?"
– स्टेज नाटक
पात्र:
* प्यारे लालजी – लोहा ट्रेडर्स के मालिक, थोड़े गुस्से वाले लेकिन दिल से मस्तीखोर
* हीना – पर्सनल सेक्रेटरी, होशियार और चुटीली
* रामू भंडारी – चपरासी, कम टाइपिस्ट, कम डिलीवरी बॉय, ऑल इन वन इन लोहा ट्रेडर्स, मस्तीखोर, हमेशा गलतियां करने वाला लेकिन ऑफिस का हंसी का फव्वारा
* भरत भावनगरवाला – कस्टमर, सीरियस लेकिन गुस्से में भी गलती माफ कर हंसने को तैयार
दृश्य – १
(ऑफिस में प्यारे लाल टेबल पर बिल देख रहे हैं। हीना साइड में फाइलें सेट करती है। रामू चाय लेकर आता है।)
प्यारे लाल: (गुस्से से)
हीना! इस बिल में एक क्विंटल के बदले दस क्विंटल लिखा गया है! यह किसने किया?
हीना: (हल्की सी मुस्कान)
सर, लिखावट रामू की होगी, मैंने तो ड्राफ्ट बराबर बनाया था, इस रामू ने टाइपिंग में गलती कर दी होगी।
प्यारे लाल:
रामू! तुम यहाँ आओ!
रामू: (भय मिश्रित मुस्कान के साथ)
हाँ सर… यह मोतियाबिंद आ गया है, इन गोल-मटोल मींडों (शून्यों) की माया! मैंने जितना लोहा देखा, उतना ही लिखा। शायद उस दिन आँखों में थोड़ा कोहरा होगा, पर खाता देखिए उसमें बराबर जत्था और रकम ही उधार की है।
प्यारे लाल: (हंसते हुए)
कोहरा आँखों में नहीं, मेरे दिमाग पर है जो तुम्हें पाल रखा है!
(सब हंसते हैं)
दृश्य – २
(कस्टमर भरतभाई भावनगरवाला आते हैं।)
भरतभाई:
प्यारे लालजी, मेरा बिल कहाँ है?
हीना: (फाइल खोलकर पढ़ती है, अचानक हंस पड़ती है)
सर… यहाँ तो “भरत भानवगर” लिखा हुआ है!
भरतभाई: (गुस्से में)
मैं भावनगर का हूँ, लेकिन आपने तो मुझे भानवगर (बिना होश वाला) ही बना दिया। अब आऊंगा पैसे लेने, जब मुझे भान (होश) आएगा!
प्यारे लाल:
रामू! क्या इसमें किसी की इज्जत का कोई ख्याल नहीं रखा जाता, गलत उपनाम (अटक) किसने लिखी?
रामू: (कंधे उचकाते हुए)
सर, कल क्रिकेट मैच देख रहा था – वह कोहली नौ रन पर सस्ते में आउट हो गया, शायद हाथ कान के हिसाब से चल गया होगा!
भरतभाई: (हंसते हुए)
अरे प्यारेजी, मेरी घरवाली तो दिन में पचास बार मुझे भान भूला हुआ कहती है, कोई बात नहीं! अब लोग मुझे “भरत भानवगर” कहकर ही बुलाएंगे!
प्यारे लाल:
रामू, अब तुम पहले तो कड़क अदरक डालकर चाय बनाओ, तुम भी पियो और भरतभाई को भी पिलाओ। उसके बाद, नया बिल बनाओ – लेकिन ध्यान से!
दृश्य – ३ (क्लाइमेक्स)
(नए सरकारी ब्रिज के लिए लोहे के एक बड़े ऑर्डर की इन्क्वायरी आई। प्यारे लाल ने लोहा ट्रेडर्स का कोटेशन बनाने के लिए कहा।)
प्यारे लाल:
रामू, सरकारी काम है इसलिए एक बार ध्यान से लिखना, इस बार गलती मत करना भाई।
रामू:
साहब, आपका हुकुम सिर आँखों पर!
(थोड़ी देर में रामू गर्व से कोटेशन लेकर आता है।)
प्यारे लाल: (पढ़कर आश्चर्यचकित)
अरे! यहाँ लिखा है – “अरे रामुड़ा, इस बिडिंग डॉक्यूमेंट में लोहा ट्रेडर्स की जगह लाडू ट्रेडर्स!” यह क्यों लिखा... 😟😟😟
हीना: (कुर्सी से नीचे गिर पड़े ऐसे हंसते हुए)
सर, अब तो आप प्यारेलाल से मिठाईवाले बन गए – लाडू प्यारे!
भरतभाई: (हंसकर)
अब तो ऐसा लगता है कि प्यारेलाल की कंपनी लोहा नहीं, बल्कि लड्डू बेचेगी, ऐसी बातें बाजार में फैलने लगेंगी!
प्यारे लाल: (हंसते-हंसते)
काम करो तो गलती होती है, चलो अच्छा है कि मेरी नजर पड़ गई। हीना, अगर तुम्हारी हंसी बंद हो गई हो तो जान लो कि आज से रामू, तुम्हारा काम सिर्फ चाय बनाने का रहेगा। इसे कह देना कि कल से अपने लड़के को ले आए। हम उसे पगार देंगे। वह सिर्फ टाइपिंग करेगा, कोईचुटपुट काम नहीं।
और ओ रामू, तुम्हारा काम सिर्फ मस्त चाय बनाना और ऑफिस में जो आए उन्हें हंसाना होगा। मेहरबानी करके बिल मत बनाना – वरना आखिर में मेरी ही कंपनी का नाम बदल जाएगा, और लोग मेरा बारवां (श्राद्ध) कर लड्डू की डिलीवरी मांगने लगेंगे तो बड़ी उपाधि (मुसीबत) हो जाएगी!
रामू: (गर्व से)
“मैं तो लोहा ट्रेडर्स का रामू हूँ, लड्डू का कर्मचारी नहीं!” “अब यह बंदा किसी बिल-वील की पंचायत में नहीं पड़ेगा, सिर्फ चाय उबालूंगा!”
और हाँ, मेरे प्यारे शेठ! कल से बिल मैं नहीं, मेरा बेटा छापेगा और जोक्स मैं छापूँगा!
(ऑफिस में सब लोग जोरदार ठहाका लगाते हैं। लाइट धीमी होती है।)
पर्दा गिरता है 🎭
डिस्क्लेमर:
यह नाटक “लोहा के लाडू” पूरी तरह काल्पनिक है। पात्र, संवाद, स्थान, पात्रों के नाम और घटनाएं केवल हास्य और मनोरंजन के लिए रची गई हैं। किसी भी व्यक्ति, संस्था, शहर या व्यवसाय से यदि कोई समानता होती है तो वह केवल एक संयोग है। रामू की गलतियां, प्यारेलालजी का गुस्सा, हीना की चुटकियां, और भरतभाई की दरियादिली—यह सब केवल मनोरंजन के लिए है! इस नाटक का उद्देश्य केवल हंसाना और मन हल्का करना है—किसी को ठेस पहुंचाना नहीं।
