बनवारी लाल, भूूत और तेल की दुकान.
बनवारी लाल, भूूत और तेल की दुकान.
“बनवारी लाल,
भूूत और तेल की दुकान”
😂 हास्य कथा — “बनवारी लाल, भूत और तेल की दुकान”🧑🌾 पात्र परिचयबनवारी लाल — गणवा गाँव का तेल व्यापारी।
तोंदवाला, दिमाग से थोड़ा शिथिल, और हर बात में तेल का तड़का लगाने वाला।सुंदरीदेवी — बनवारी की पत्नी।
नाम सुंदरी, पर गुस्से में पूरा भूकंप हिला दे ऐसा स्वभाव।चीकू — बनवारी का बेटा।
हर बात पर एक ही सवाल: “पापा, ये क्या कर रहे हो?”🌙 कहानी — डरावनी भी, मजेदार भीएक रात बनवारी लाल दुकान बंद करके घर लौट रहा था।
अंधेरा गहरा था, हवा सरसराती थी, और बनवारी की तोंद रास्ते में पहले से ही हिल रही थी।अचानक एक पेड़ के पीछे से आवाज आई—
“ऊऊऊऊऊ… मैं भूत हूँ…”बनवारी लाल के हाथ से तेल का डिब्बा गिर गया।
वह काँपते हुए बोला,
“भूत? गणवा गाँव में? अरे भाई, टेक्स तो हमसे मुखी ले लेता है… अब डराना भी शुरू कर दिया?”पेड़ के पीछे से फिर आवाज आई—
“ऊऊऊऊऊ… मैं तुम्हारा तेल पी जाऊँगा…”बनवारी लाल चिल्लाया,
“अरे! तेल पीने वाला भूत? मैंने तो खून पीने वाले सुने थे! ये तो नया मॉडल है!”🏠 घर पहुँचकर हंगामाघर पहुँचते ही उसने सुंदरीदेवी को सब बताया।
सुंदरीदेवी ने तुरंत बेलन उठाया और बोली,
“कहाँ है वो तेल पीने वाला भूत? अभी बेलन से ठोककर भूत को तूत बना दूँगी!”चीकू ने मोबाइल उठाते हुए पूछा,
“पापा, भूत को भी आपका तेल चाहिए? क्या वो भी फ्राई करता है?”बनवारी ने गंभीरता से कहा,
“हाँ बेटा, आजकल भूत भी मॉडर्न हो गए हैं।”🌃 अगली रात — भूत पकड़ने का मिशनपूरा परिवार तैयार होकर निकला—सुंदरीदेवी बेलन लेकर,चीकू मोबाइल में वीडियो बनाने की तैयारी में,और बनवारी लाल खोरू हुआ सरसों का तेल लेकर।पेड़ के पास पहुँचते ही वही आवाज फिर आई—
“ऊऊऊऊऊ… मैं भू—”सुंदरीदेवी गरजी,
“बाहर निकल! कौन है?”पेड़ के पीछे से निकला…
गाँव के मुखी का बेटा पप्पू!पप्पू बोला,
“अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था… कल रात अंधेरा था, सोचा काका को डराऊँ।”बनवारी ने राहत की साँस ली और बोला,
“तो ये भूत नहीं, पप्पू-प्रेत है!”चीकू वीडियो बनाते हुए बोला,
“पापा, ये तो आज वायरल होगा!”🤣 अंत में पूरा गाँव हँस पड़ाबनवारी लाल ने अपनी दुकान पर बोर्ड लगा दिया—
“यहाँ तेल मिलता है, भूत नहीं।”सुंदरीदेवी ने पप्पू को चेतावनी दी—
“अगली बार भूत बने तो बेलन की पूजा करवा दूँगी।”चीकू ने वीडियो का टाइटल रखा—
“गणवा गाँव का तेलवाला और नकली भूत”
