सपने सुहाने
सपने सुहाने
सपने सुहाने
बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में गुड्डू नाम का एक दस साल का लड़का रहता था। गुड्डू को अंतरिक्ष और आसमान के तारे बहुत पसंद थे।
वह हर रात अपनी छत पर लेटकर चमकते हुए चाँद को देखता और सोचता— "काश! मैं भी कभी चाँद पर जा पाता।"
गुड्डू के पास एक जादुई कल्पना-शक्ति थी। वह अपने घर के पुराने कबाड़ से तरह-तरह के रॉकेट और अंतरिक्ष यान के मॉडल बनाया करता था।
जादुई रॉकेट का निर्माण
एक दिन, गुड्डू को अपने घर के पुराने स्टोर रूम में कुछ चमकता हुआ सामान मिला। उसमें कुछ अजीब से नट-बोल्ट, एक पुरानी घड़ी और नीले रंग की रोशनी देने वाला एक छोटा सा यंत्र था।
गुड्डू ने अपनी कलाकारी और इन चीज़ों की मदद से एक शानदार खिलौना रॉकेट तैयार किया। जैसे ही उसने उस नीले यंत्र को रॉकेट के बीच में फिट किया, एक चमत्कारी घटना घटी!
रॉकेट से धीरे-धीरे नीली रोशनी निकलने लगी और वह सचमुच हवा में तैरने लगा।
अंतरिक्ष की सैर
गुड्डू खुशी से उछल पड़ा और झटपट अपने छोटे स्पेस सूट (जो उसने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में पहना था) को पहनकर उस रॉकेट में बैठ गया।
रॉकेट ने 'शूं...' की आवाज़ के साथ आसमान की तरफ उड़ान भरी।
* खिड़की से बाहर देखने पर गुड्डू को करोड़ों तारे टिमटिमाते हुए दिखाई दिए।
* उसने रास्ते में खूबसूरत बृहस्पति (Jupiter) ग्रह को भी देखा, जिसके चारों ओर सुंदर छल्ले थे।
* कुछ ही पलों में, उसका रॉकेट चमकते हुए चाँद की सतह पर उतर गया।
चाँद पर मस्ती और अचानक आया ट्विस्ट!
जब गुड्डू ने चाँद पर कदम रखा, तो वह हैरान रह गया।
गुरुत्वाकर्षण कम होने के कारण वह ज़मीन पर एक कदम रखते ही बहुत ऊँचा हवा में उड़ जाता था। उसने चाँद के बड़े-बड़े गड्ढों (Craters) के पास घूमकर खूब मजे किए और चाँद की मिट्टी को छुआ।
वहाँ उसे एक नन्हा सा एलियन (Alien) मिला, जिसका रंग हरा था और उसके सिर पर एक छोटा सा एंटीना चमक रहा था। एलियन ने हँसकर गुड्डू का स्वागत किया और दोनों ने मिलकर चाँद की धूल पर अंतरिक्ष वाले खेल खेले।
खेलते-खेलते अचानक एलियन ने गुस्से में अपना एंटीना हिलाया और ज़ोर से पैर पटका, जिससे चाँद पर तेज़ भूकम्प आ गया! गुड्डू का संतुलन बिगड़ गया और वह अंतरिक्ष में गोता खाते हुए नीचे गिरने लगा— "बचाओ! बचाओ!" चिल्लाते-चिल्लाते अचानक...
धड़ाम!
आँख खुली तो गुड्डू अपने ही बिस्तर से नीचे ज़मीन पर गिरा हुआ था। उसका वह जादुई रॉकेट उसके पास ही टूटा हुआ पड़ा था और वह समझ गया कि वह कोई और नहीं, बल्कि उसकी गहरी नींद का एक सुहाना सपना था!
वह मुस्कुराया और राहत की साँस लेते हुए अपने बिस्तर पर वापस लेट गया।
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शीर्षक (Title):
सपने सुहाने
उप-शीर्षक (Sub-title):
एक साहसिक बाल वार्ता
लेखक का नाम (Author Name):
लेखक: कल्पेश पटेल
