STORYMIRROR

Kalpesh Patel

Romance

4  

Kalpesh Patel

Romance

खामोशियाँ

खामोशियाँ

1 min
0

खामोशियाँ

बारिश की रिमझिम छत पर गिर रही थी। हर बूँद एक धुन थी, पर उस धुन को सुनने और समझने का तरीका हर किसी का अलग होता है। मोना उसे सुन सकती थी, पर कह नहीं सकती थी। मोहन उसे सुन नहीं सकता था, पर महसूस कर सकता था।

मोना खिड़की के पास बैठी बारिश को निहार रही थी। चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, जैसे बूँदें उसके मन में कोई पुरानी याद जगा रही हों। तभी मोहन कमरे में आया। उसने मोना की आँखों में चमक देखी और खिड़की के पास बैठ गया।

मोना ने हाथों से बारिश की ओर इशारा किया। मोहन ने उसकी मुस्कान पढ़ ली। उसने अपनी उंगलियाँ हवा में उठाईं और ऐसे हिलाईं जैसे बूँदें उसकी हथेली पर गिर रही हों। दोनों की खामोशियाँ एक-दूसरे से बातें कर रही थीं।

मोना ने कागज़ पर लिखा—

“बारिश बोलती है, बस हमें सुनने का अपना तरीका ढूँढना होता है।”


मोहन ने कागज़ पढ़ा और खिड़की से बाहर हाथ फैलाया। मोना ने भी अपना हाथ उसके साथ बाहर कर दिया। ठंडी बूँदें दोनों की हथेलियों पर एक साथ गिरीं। उस क्षण में न आवाज़ की ज़रूरत थी, न शब्दों की।

बारिश की वह शाम दोनों के लिए एक सीख बन गई—
अहसासों की भाषा सबसे गहरी होती है, और उसी खामोशी में उनकी दोस्ती एक अनकही, अटूट कहानी बन गई।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Romance