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Kalpesh Patel

Children Stories Drama Classics

4.7  

Kalpesh Patel

Children Stories Drama Classics

शेर का न्याय.

शेर का न्याय.

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“शेर का न्याय"
जंगल में मिला शव
एक सुंदर और घने जंगल में सुबह-सुबह अजीब हलचल मच गई। जंगल के एक कोने में एक छोटा सा चूहे का शव मिला। जंगल के इतिहास में यह एक सनसनीखेज घटना थी। बात फैलते ही पूरा जंगल इकट्ठा हो गया।
इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए जंगल के सिपाही यानी समझदार और वफादार कुत्ता भैया को बुलाया गया। कुत्ता सिपाही ने तुरंत अपनी पैनी नाक से घटनास्थल की छानबीन शुरू की। सूंघते-सूंघते और पैरों के निशान देखते हुए कुत्ता सिपाही सीधे जाकर बिल्ली मौसी के घर के सामने रुका।
बिल्ली मौसी घबराई हुई बाहर आईं। कुत्ता सिपाही ने कड़क आवाज में कहा, "बिल्ली मौसी, सबूत गवाही दे रहे हैं कि इस मासूम चूहे के शव के पीछे तुम्हारा ही हाथ है!" बिल्ली मौसी अपनी मूंछें खुजलाने लगीं और आखिरकार उन्होंने अपनी गलती मान ली कि उन्होंने ही चूहे को दबोचा था।
दोषी साबित होने पर बिल्ली मौसी को तुरंत जंगल के राजा शेर के दरबार में पेश किया गया।
शेर राजा अपनी विशाल गुफा में तख्त पर बैठे थे। उनका चेहरा बेहद गंभीर था। बिल्ली मौसी ने कांपते हुए हाथ जोड़कर कहा, "महाराज, मुझे माफ कर दीजिए!"
शेर राजा ने अपनी भारी और गूंजती आवाज में फैसला सुनाया, "अपराध चाहे छोटे जीव का हो या बड़े का, कानून सबके लिए बराबर है। बिल्ली मौसी, तुमने एक बेकसूर की जान ली है। इसलिए तुम्हें आज से एक महीने तक जंगल की नदी से रोज पानी भरकर लाना होगा और गरीबों की सेवा करनी होगी।"
बिल्ली मौसी ने सिर झुकाकर सजा स्वीकार की। जंगल के सभी जानवरों ने शेर राजा के न्याय की भूरि-भूरि प्रशंसा की और जंगल में फिर से शांति और अमन-चैन छा गया।



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