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Kalpesh Patel

Comedy Drama

4.5  

Kalpesh Patel

Comedy Drama

आज के ज़माने की डायन.

आज के ज़माने की डायन.

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20

आज के ज़माने की डायन

गाँव में एक समय डायन की बड़ी चर्चा हुआ करती थी।
कहा जाता था कि डायन रात में निकलती है, सुनसान रास्ते पर मिलती है और लोगों को डरा देती है।

लेकिन वह पुराने ज़माने की बात थी।

आजकल डायन को रात में निकलने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

वह आपके घर में बैठी है।

आपके हाथ में है।

और उसका नाम है—इंटरनेट!

सुबह-सुबह शर्मा जी ने जैसे ही आँखें खोलीं, पत्नी ने पूछा—

“उठ गए?”

“हाँ।”

“तो मोबाइल क्यों उठा लिया?”

शर्मा जी बोले,
“देख रहा हूँ आज मौसम कैसा रहेगा।”

दस मिनट बाद पत्नी ने देखा तो शर्मा जी मौसम नहीं, अमेरिका का चुनाव, जापान का भूकंप और किसी बाबा का चमत्कार देख रहे थे।

पत्नी बोली—

“मौसम देखा?”

“हाँ।”

“क्या रहेगा?”

“पता नहीं।”

“तो फिर?”

“लेकिन अमेरिका में क्या हुआ, वह पता चल गया!”

पत्नी ने माथा पीट लिया।

तभी मोबाइल पर एक संदेश आया—

“अगर आपने यह संदेश दस लोगों को नहीं भेजा तो आपके घर में दुर्भाग्य आएगा।”

शर्मा जी घबरा गए।

उन्होंने तुरंत दस लोगों को भेज दिया।

पत्नी ने पूछा—

“आप पढ़े-लिखे आदमी हैं या नहीं?”

शर्मा जी बोले—

“पढ़ा-लिखा हूँ, तभी तो दस लोगों को भेजा है। मैं अकेला क्यों भुगतूँ?”

इंटरनेट की डायण का यही कमाल था।

वह किसी के घर में घुसती नहीं थी,
लोग खुद उसे घर में बुलाते थे।

पहले घर में कोई बीमारी होती तो लोग डॉक्टर के पास जाते थे।

अब बीमारी हो तो पहले इंटरनेट पर खोजते हैं—

“सिर दर्द क्यों होता है?”

इंटरनेट जवाब देता है—

“इसके पीछे 47 कारण हो सकते हैं।”

आदमी घबरा जाता है।

फिर पढ़ता है—

“इनमें से पाँच कारण गंभीर हैं।”

अब सिर दर्द से ज्यादा डर होने लगता है।

फिर नीचे लिखा मिलता है—

“घबराइए नहीं, हमारी यह वीडियो पूरी देखें।”

आदमी वीडियो देखने बैठ जाता है।

वीडियो खत्म होते-होते उसे लगता है कि सिर दर्द नहीं, पूरी मेडिकल की किताब उसके सिर में घूम रही है।

दूसरे दिन शर्मा जी ने पत्नी से कहा—

“मुझे लगता है मुझे कोई बड़ी बीमारी है।”

पत्नी बोली—

“डॉक्टर ने कहा?”

“नहीं।”

“फिर?”

“इंटरनेट ने कहा है!”

पत्नी ने जवाब दिया—

“तो इंटरनेट से ही दवा भी मँगवा लो। डॉक्टर को क्यों परेशान करना?”

शर्मा जी चुप हो गए।

इंटरनेट की डायण सिर्फ बीमारी नहीं बताती थी।

वह रिश्ते भी चलाती थी।

एक दिन बहू ने सास को व्हाट्सऐप पर एक संदेश भेजा—

“आजकल की बहुएँ सास की सेवा कैसे करें—पाँच आसान उपाय।”

सास ने तुरंत जवाब दिया—

“और आजकल की सासें बहुओं को कैसे समझें—दस आसान उपाय।”

बहू ने मोबाइल बंद कर दिया।

सास ने भी मोबाइल बंद कर दिया।

लेकिन दोनों ने मन ही मन तय कर लिया—

डायण से बदला बाद में लिया जाएगा।

सबसे बड़ा जादू तो सोशल मीडिया का था।

पहले आदमी पड़ोसी से पूछता था—

“कैसे हो?”

अब फेसबुक पर लिखता है—

“Feeling blessed.”

अंदर से परेशान, बाहर से प्रसन्न!

जिसका जन्मदिन हो, उसे सौ लोग शुभकामनाएँ देते हैं।

जिनमें से नब्बे को याद भी नहीं होता कि जन्मदिन किसका है।

बस फेसबुक ने याद दिलाया—

“आज इनका जन्मदिन है।”

लोग लिखते हैं—

“Happy Birthday dear!”

और पाँच मिनट बाद भूल जाते हैं कि किसे लिखा था।

इंटरनेट की डायण का सबसे खतरनाक जादू था—फेक न्यूज़।

एक दिन शर्मा जी को संदेश मिला—

“सरकार ने घोषणा की है कि कल से सुबह 5 बजे उठने वालों को मुफ्त में पाँच हजार रुपये मिलेंगे।”

शर्मा जी सुबह चार बजे उठ गए।

पत्नी ने पूछा—

“आज इतनी जल्दी?”

“पाँच हजार लेने हैं।”

सुबह पाँच बजे तक शर्मा जी दरवाजे पर बैठे रहे।

छह बजे तक बैठे रहे।

सात बजे पड़ोसी भी आ गया।

पूछा—

“क्या हुआ?”

शर्मा जी बोले—

“सरकार का इंतजार कर रहा हूँ।”

पड़ोसी ने मोबाइल देखा और हँसते हुए कहा—

“यह खबर तो मजाक थी!”

शर्मा जी ने गुस्से में मोबाइल देखा।

फिर बोले—

“कोई बात नहीं।”

“क्यों?”

“कम से कम आज डायण ने मुझे समय पर जगा तो दिया!”

धीरे-धीरे लोगों को समझ आने लगा कि इंटरनेट सिर्फ जानकारी नहीं देता।

वह समय खाता है, ध्यान खाता है, नींद खाता है और कभी-कभी रिश्ते भी खा जाता है।

पहले बच्चे माँ से पूछते थे—

“माँ, यह क्या है?”

अब माँ कहती है—

“गूगल से पूछो।”

बच्चा बड़ा होकर माँ से पूछता है—

“माँ, आप कौन हैं?”

माँ कहती है—

“गूगल से पूछो!”

एक दिन गाँव के बुजुर्गों ने पंचायत बुलाई।

विषय था—

“इस नई डायण से गाँव को कैसे बचाया जाए?”

सबने सुझाव दिए।

किसी ने कहा—

“मोबाइल बंद कर दो।”

दूसरे ने कहा—

“इंटरनेट बंद कर दो।”

तीसरे ने कहा—

“वाई-फाई का पासवर्ड बदल दो।”

तभी शर्मा जी खड़े हुए।

उन्होंने गंभीर आवाज में कहा—

“डायण को भगाने की जरूरत नहीं है।”

सब उनकी तरफ देखने लगे।

उन्होंने कहा—

“बस इतना याद रखिए कि मोबाइल हमारे हाथ में है, हम मोबाइल के हाथ में नहीं।”

पंचायत में तालियाँ बजने लगीं।

तभी शर्मा जी का मोबाइल बजा।

उन्होंने जेब से मोबाइल निकाला।

देखा—

“आपका स्क्रीन टाइम इस सप्ताह 38 प्रतिशत बढ़ गया है।”

शर्मा जी ने मोबाइल तुरंत जेब में रख लिया।

और धीरे से बोले—

“लगता है डायण ने मेरी बात सुन ली!”

पूरा गाँव हँस पड़ा।

और उस दिन से गाँव में एक नया कहावत चल पड़ा—

“पुराने जमाने की डायण रात में डराती थी,
आज के जमाने की डायण दिन-रात नोटिफिकेशन बजाती है!”



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