रोज़ ड़े--गुलाब वाला दिन
रोज़ ड़े--गुलाब वाला दिन
इस साल रोज- डे पर राज बहुत उदास था, सोच रहा था निधि को कैसे इस साल भी गुलाब का फूल दूंगा ? हर साल राज वेलेंटाईन रोज डे पर निधि को एक गुलाब का खुबसूरत खिला फूल बड़े ही रोमांटिक अंदाज में देता था। करीब 15 साल पहले रोज- ड़े पर ही गुलाब का फूल देकर राज ने निधि को प्रपोज किया था और निधि उसकी इस अदा पर फिदा हो गयी थी। फौरन उसने शादी के लिये सहमति दे दी।
तब से हर साल गुलाब देने का ये सिलसिला बरकरार था। लेकिन पिछले साल जैसे ही रोज डे पर राज ने निधि को गुलाब दिया, निधि रो पड़ी थी" राज तुम हर साल मुझे गुलाब देते हो मैं इन 15 सालों में तुम्हे एक फूल भी ना दे सकी। मुझे माफ कर दो।" मां ना बनने का दर्द निधि को दुखी कर गया था, राज उसके दुख में दुखी हो गया था। निधि हम दोनों का प्यार ही हमारा सहारा है कहकर राज ने उसे समझाया भी।
परन्तु राज जानता था निधि को ये दुख दिन रात सालता है और वो एक ड़ाॅक्टर होकर भी कुछ नहीं कर पाया है।
अचानक भूज में भूकम्प आने पर ड़ाॅ राज की वहां इमरजेंसी ड़्यूटी लग गयी और राज को वहां जाना पड़ा। अस्पताल में अनगिनत मरीज आ रहे थे और लाशों का ढेर पड़ा था। एक ड़ाॅ होते हुए भी राज वहां का दृश्य देखकर अत्यंत द्रवित हो गया।
अचानक उसकी दृष्टि एक दो साल की छोटी बच्ची पर पड़ी। उसके मां-बाप की लाश पड़ी थी और उनके बीच में वो बच्ची बैठी रो रही थी। राज ने बच्ची को उठाकर अपने पास रख लिया और रोज पूछताछ करने लगा कि बच्ची का कोई रिश्तेदार मिल जाये परन्तु कोई नहीं मिला। 15 दिन हो गये, राज की ड़्यूटी पूरी हो गयी थी, वो आज अहमदाबाद वापस जा रहा था, अचानक उसे याद आया आज तो रोज ड़े है।
राज ने एक निर्णय लिया और खुशी खुशी घर के लिये निकल पड़ा। निधि राज की राह देख ही रही थी, बेल बजने पर निधि ने दौड़कर दरवाजा खोला, दरवाजा खुलते ही राज ने निधि के हाथ में एक फूल सी बच्ची दे दी। " हैप्पी रोज डे ड़ार्लिंग" देखो आज मैं तुम्हारे लिये कितना सुंदर गुलाब लाया हूं कहकर राज हंस दिया। आज सही मायनों में हमारा रोज-डे है है ना राज कहकर इस खूबसूरत गुलाब को चुमते हुए आज निधि निहाल हुए जा रही थी।

