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Sushma Vyas

Tragedy

4  

Sushma Vyas

Tragedy

उपेक्षित देवीपूजन

उपेक्षित देवीपूजन

2 mins
750

रेखा को बहुत तेज बुखार था।हाथ -पैर दर्द से टूटे जा रहे थे। ऊंगलियां भी नहीं मुड़ रही थी, शायद चिकनगुनिया हो गया था। रेखा उठकर बैठने की भी हालत में नहीं थी फिर काम पर कैसे जा सकती थी? परन्तु आज तो अष्टमी है। नवरात्री चल रही है। अधिकतर घरों में कन्या भोजन भी किया जा रहा है। सबके घरों में बर्तनों का ढेर हो जाता है और जिनके घरों में रेखा काम करती है , उन भाभियों, आंटीयों के व्रत रहते हैं तो वे लोग घर का काम करने में थक जाती है, लेकिन ऐसी हालत में रेखा काम पर कैसे जाये? रेखा ने अपनी 13 साल की बेटी नन्दिनी को कहा—"बेटी तुम चली जाओ आज बरतन मांजने।नहीं तो बाई हैं न ड़ांटेंगी।" नन्दिनी को स्कूल जाना था वो मना करने लगी - “ मैं नहीं जाऊंगी, मेरी पढ़ाई छूट जाती है परन्तु रेखा आग्रह करने लगी। "चली जा बेटी, मैंने आज खाना नहीं बनाया है, तेरे को वही खाना मिल जायेगा और फिर निधि आंटी के यहां तो आज कन्या भोज भी है।तेरे को गरमागरम खीर – पूड़ी खाने को मिलेगी।" नन्दिनी को भूख तो लगी थी। स्कूल में खाना भी दोपहर में मिलेगा। "हां यही ठीक है, मैं चली जाती हूं।" नन्दिनी के कदम तेजी सेसबसे पहले निधि आंटी के घर की तरफ बढ गये।निधि आंटी के घर का गेट खोलते हीगरमा-गरम पूड़ी और भजिये की सुगंध ने नन्दिनी की भूख और तेज कर दी।घर के अंदर घुसते ही उसने बहुत सी छोटी – बड़ी बच्चियों को खीर, पूड़ी , भजिये खाते देखा। निधि आंटी बहुत ही आग्रह से उन्हें खिला रही थी और कुछ बच्चियां नहीं खाना करके नखरे बता रही थी। नन्दिनी को देखते ही निधि एकदम बिफर गई। "11बज रहे हैं।बरतनों का ढेर लगा है। तेरी मम्मी को पता था आज मेरे यहां कन्या –भोजन है, पर अभी तक तेरी मम्मी के पते नहीं है।कहां है तेरी मम्मी?" नन्दिनी ने कहा—"आंटी मम्मी को तो बुखार है। वो उठ भी नहीं पा रही है, इसलिऐ मैं आयी हूं।मैं मांज देती हूं बरतन।"

"रहने दे, अब आज कन्या भोज के दिन मैं तुझ कन्या से बरतन मंजवाऊंगी।तू रहने दे।तुम लोगों का यही हाल है।जब काम पड़ता है तुम लोग बहाने बनाते हो। पैसे किस बात के लेते हो।नहीं मंजवाना बरतन, तू जा मैं पड़ोस वालों की बाई को बुलाकर मंजवा लूंगी।" नन्दिनी को झिड़ककर निधि फिर से बच्चियों को परोसने में व्यस्त हो गई और भूखी नन्दिनी निधि के घर के बाहर जाती हुई सोच रही थी – "काश! आंटी ने आज बरतन मंजवा लिये होते तो ये गरमा-गरम खीर पूड़ी मुझे भी खाने मिल जाते।"



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