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Sushma Vyas

Tragedy

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Sushma Vyas

Tragedy

सेवा की खड़ीपाईत

सेवा की खड़ीपाईत

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एक दिन मेरी एक सखी मेरे घर आयी। वो दुखी लग रही थी।मुझसे आकर पूछने लगी—एक गृहिणी के घर में किये गये कौनसे कार्य को तुम सेवा कहोगी? सेवा करने का अर्थ क्या होता है?"मैं समझ नहीं पायी वो क्या कहना चाहती है? मैं प्रतिउत्तर में उसका मुंह ताकने लगी। तब उसने अपने मन की बात बतायी। उसकी अपनी सासु मां से किसी बात पर बहस हो गयी थी और सासु मां ने यह उठाकर कह दिया था कि आज तक अपने सास ससुर की कौनसी सेवा की तुमने? कुछ भी तो नहीं करना पड़ा तुम्हे। उनके ये शब्द तीर की तरह चुभ गये।उसका कहना था वो एक मैरिट होल्ड़र रही है, अच्छी नौकरी के भी ऑफर थे परन्तु शादी के बाद बड़े परिवार की साज सम्हाल,सारे कार्य प्रेम और स्नेह से करने के संस्कार और दो बेटियों के लालन पालन में उसने अपनी नौकरी की तीव्र इच्छा का बलिदान कर दिया, क्या ये सेवा नहीं है? हर आने जाने वाले,पहचान वाले , रिश्तेदार सबकी हंसकर आवभगत करना, सबका मान-सम्मान और खानपान का ध्यान रखना क्या ये सेवा नहीं है? परिवार में कोई बीमार है तो दौड़कर जाकर उसकी साज सम्हाल करना,परिवार की महिलाओं की ड़ीलेवरी में जच्चा बच्चा का खयाल रखना क्या ये सेवा नहीं है? घर के बाहर के सारे कार्य जैसे बिजली का बिल, बच्चों की फीस, घर का बजट कुशलता से मैनेज करना सेवा में नहीं आता। घर के बुजुर्गों की समय पर सालों से नाश्ता पानी भोजन देती आ रही हूं( चाहे वो खुद बीमार हो या शारीरिक परेशानी हो) वो भी हंसते हुऐ और आदर के साथ क्या ये सेवा नहीं है? परिवार के सदस्यों की पसंद और नापसंद का खयाल रखते आ रही हूं क्या ये सेवा नहीं है? मेरी इच्छाओं और सपनों को भूलाकर, मेरी प्रतिभा और योग्ता को दबाकर घर के सदस्यों का ऊत्साहवर्धन करती आ रही हूं क्या ये सेवा नहीं है? मां किस सेवा की बात कर रही हैं सखी।वो मुझे उसका अर्थ बतादें मै वो सेवा करने के लिये भी तैयार हूं पर हम गृहिणियों को इतने हलके में क्यों लिया जाता है? क्या हमारे किये गये कार्यों का कोई मोल नहीं है। ये प्रश्नचिन्ह वाकई मेरे जेहन में छोड़कर वो चली गई। अधिकतर घरों में यही देखा है । मां -बहनें-बहुऐं-इनके कार्यों को साधारण कार्य क्यों माना जाता रहा है?

इस प्रश्नचिन्ह पर खड़ीपाईत कब लगेगी।




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