#रंग बरसे#प्रेम का रंग
#रंग बरसे#प्रेम का रंग
शादी के बाद रिया की ससुराल में पहली होली थी।वो अपने पति ऋषभ और ससुराल वालों के साथ होली खेलने को बेहद आतुर थी। घर में भी खूब जोर शोर से होली की तैयारियां चल रही थी। रिया भी अपने ससुराल के रीति-रिवाजों को देख परख रही थी। सब कुछ उसके मायके के रीति रिवाज से बहुत ही अलग था।फिर भी वह खुशी-खुशी अपने सास के कहे अनुसार सब कार्य कर रही थी।शुरू से ही रिया को होली का त्योहार बहुत पसंद था। सुबह सुबह उठते ही वह सब के साथ होली खेलने के लिए तैयार हो जाती थी। बहुत प्यार था उसे रंगों से..... दोपहर तक सब होली खेल खेल कर थक जाते थे लेकिन रिया शाम तक होली खेलती रहती थी।उसे अच्छा लगता था लाल, पीले, हरे, नीले और गुलाबी रंगों में खुद को रंगे हुए देखना...आज ससुराल में रसोई घर में खाना बनाते बनाते उसे अपने मायके की भी बहुत याद सता रही थी। वहीं दूसरी ओर....
अपने सपनों के राजकुमार के साथ होली खेलने के ख्याल से ही उसका मन रोमांचित हो रहा था।तभी सासू मां की आवाज आई,""रिया बहू! यूं अकेले अकेले क्यों मुस्कुरा रही हो..? मुझे भी तो बताओ जरा...""नहीं मम्मी जी! ऐसा कुछ भी नहीं है.... मैं तो बस ऐसे ही कुछ सोच रही थी ... मुझे होली का त्यौहार बहुत पसंद है..."रिया ने चहकते हुए कहा"फिर तो अच्छा है ना बहू! खूब धूमधाम से यह त्यौहार मनाएंगे। और एक दूजे को होली के रंगों के साथ साथ अपने प्रेम के रंगों में भी रंग लेंगे ताकि हर बंधन मजबूती से जुड़ा रहे और हमारा यह घर आंगन खुशियों से महकता रहे...""
"हां हां.. क्यों नहीं मम्मी जी, जरूर ऐसा ही होगा.."रिया ने कहाउधर, ऋषभ भी अपनी मां और पत्नी की आपसी समझ और बातचीत सुनकर मन ही मन खुश हो रहा था।फिर होली से 4-5 दिन पहले रिया की बुआ सास का बेटा आकाश आया।घर पर सबसे आकाश बहुत खुले दिल से बातें करता था।वैसे भी उम्र में आकाश,ऋषभ से 1 साल ही छोटा था इसलिए वो रिया से भी देवर होने के नाते काफी हंसी मजाक करने लगा।पर रिया ने नोटिस किया कि आकाश उसे किसी न किसी बहाने से छूने की कोशिश करता था।ये सब उसने ऋषभ को भी बताना चाहा लेकिन घर में कोई हंगामा ना हो और हर कोई उसे ही गलत न समझ बैठे...इसलिए वो चुप ही रही।लेकिन हद तो तब हो गई जब होली के दिन आकाश ने रंग लगाने के बहाने रिया को गलत तरीके से छुआ।अब रिया से बर्दाश्त नहीं हुआ।
और उसने जोर का तमाचा आकाश के गाल पर जड़कर कहा," इस होली के रंगों के साथ साथ ....तुम्हारे गालों पर पड़े थप्पड़ के ये लाल निशान तुम्हे याद दिलाएंगे कि औरत को छेड़ने का हक किसी को भी नहीं है!".."सब लोग उन दोनो को एकटक देखने लगे। आकाश वहां से शर्मिंदा होकर वापस चला गया।सारी बात पता लगने पर ऋषभ और रिया के सास ससुर ने भी रिया का समर्थन किया और फिर धूमधाम से होली का त्योहार मनाया।और रिया अपने होली के रंगो के साथ साथ पति संग प्रेम के रंग में रंग गई। कहानी का सार बस इतना सा है कि अगर किसी महिला के साथ कुछ भी गलत हो तो वो चुप रहने की बजाए अगर विरोध करती है तो गलत करने वाले की भी हिम्मत टूट जाती है। और हर परिवार को अपनी बहू, बेटी का साथ हमेशा देना चाहिए।

