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Priyanka Mudgil

Others


4.5  

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दो अधूरे:- एक दूसरे के पूरक

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3 mins 252 3 mins 252

"अरे.. अरे.. देखोे। वो बच्चा गिर गया है".. सब लोग चिल्लाने लगे। 

8 साल का गोलू सड़क पर साइकल चलाते- चलाते गिर पड़ा। उसके हाथ और पैर में कुछ चोटें आई थी और वो रोने लगा। सब उससेे उसके घर का पता पूछ रहे थे लेकिन गोलू बस रोये जा रहा था। फिर वही भीड़ में रीमा भी थी। उसने गोलू के सिर पर हाथ फेरा तो वो रीमा से चिपक गया और रीमा ने भी उसे प्यार से सहलाया। फिर उसे उसके घर तक छोड़के आई। जब रीमा वापस जा रही थी तो गोलू एकटक उसे देखे ही जा रहा था क्योकि रीमा की शक्ल बहुत हद तक गोलू की स्वर्गवासी माँ से मिलती थी जो कि 2 साल पहले किसी बीमारी के चलते भगवान को प्यारी हो गयी थी।


जब शाम को गोलू के पिता अनुज जी घर आये तो गोलू की दादी ने उन्हे सब बताया।जब से अनुज जी की पत्नी का देहांत हुआ था वो बहुत उदास रहने लगे थे लेकिन अपने बेटे गोलू के लिए उसके सामने खुश होने का नाटक करते थे क्युकि वो उसे हर हाल मे खुश रखना चाहते थे। लेकिन अनुज जी की माँ अपने बेटे की तकलीफ अच्छे से समझती थी। वो बार बार अनुज जी को दूसरा विवाह करने के लिए बोलती थी ताकि उन्हे एक जीवनसाथी और गोलू को एक माँ मिल जाए। फिर एक दिन उन्होंने एक फैसला किया और चल पड़ी रीमा के बारे में पता करने।


रीमा जो कि 30 बसंत देख चुकी थी उसके मन में शादी के नाम से ही नफरत थी क्योकि उसके पिता ने उसकी माँ को कभी भी खुशी से रहने नही दिया। दोनो हर रोज किसी ना किसी बात पर लड़ते- झगड़ते रहते थे। फिर एक दिन रीमा की माँ भी किसी रोड़ एसिडेंट में मारी गयी लेकिन उसके पिता ने उसकी माँ के मरने के तुरंत बाद अपने साथ काम करने वाली लड़की से शादी कर ली। उस समय रीमा 10 वर्ष की थी। उसकी सौतेली माँ उसे हमेशा डांटती फटकारती रहती थी और उससे घर का सब काम भी करवाती थी। जिससे रीमा के बालमन को बहुत आघात लगा। उसके पिता भी सब जानते थे लेकिन अपनी नयी पत्नी के मोह में कुछ बोल नही पाते थे। जब रीमा बड़ी हुई तो उसने एक स्कूल में आध्यापिका की नौकरी शुरू की। फिर 


एक दिन जब गोलू अपनी दादी के साथ स्कूल में दाख़िला लेने गया तो उसे वहाँ रीमा दिखाई दी। रीमा को देखकर गोलू खुशी से उछल पड़ा और उससे वापिस से चिपक गया। अब दादी ने भी देर ना करते हुए रीमा का हाथ अपने बेटे अनुज के लिए मांग लिया। लेकिन रीमा ने शादी के लिए साफ- साफ इंकार कर दिया। लेकिन उसके बावजूद दादी रीमा के घर का पता लेकर उसके घर उसके माता- पिता से मिलने चली गई। रीमा के माता और पिता भी रीमा से पीछा छुड़ाना चाहते थे इसलिए वो तुरंत शादी के लिए तैयार हो गए।


रीमा शादी नहीं करना चाहती थी लेकिन जब गोलू की दादी ने उसे गोलू और उसकी माँ के बारे में बताया तो रीमा को गोलू मे अपना बचपन दिखाई देने लगा। उसके मासूम चेहरे को देखकर रीमा के मन में ममता उमड़ पड़ी। उसने गोलू को सीने से लगाते हुए शादी के लिए हामी भर दी। और मन ही मन फैसला किया कि अब से गोलू मेरा सौतेला बेटा दुनिया की नजर में होगा लेकिन मेरे लिए वो मेरे अपनों से बढ़कर रहेगा। और अपनों से भी ज्यादा प्यारा होगा। फिर रीमा चल दी गोलू के साथ खेलने.. उसका हाथ पकड़कर। शायद आज से पहले दोनों इतना खुश कभी नही हुए। और दो अधूरे एक- दूसरे के पूरक बन गए।



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