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Anita Jain

Abstract


2.5  

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रात गई बात गई

रात गई बात गई

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“तुम आरोपमुक्त साबित हो गये हो | ये बहुत खुशी की बात है और अब तुम अपनी पढाई भी फ़िर से शुरू कर सकते हो | जाओ बाहर! तुम्हारे घरवाले तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं | ”दो साल से बाल सुधार घर में चोरी के इलज़ाम में बंद राज को सुधार घर के संचालक गोपाल जी ने खबर दी |

"कौन सा घर? कौन सा स्कूल और पढाई !! क्या सब पहले जैसा रहा होगा अब भी वहाँ?"

"राज, "रात गई बात गई" समझ कर भूल जाओ पुरानी बातें | इनसे क्या होगा? एक नया सवेरा तुम्हारे स्वागत में बाहें फैलाये खडा है |तुम भी आगे बढो |"

"हाँ! झूठे इलज़ाम की कालिख तो मेरे मुँह लगी है, ज़िंदगी मेरी बदल गई | और आप कहते हो कि सब भूल जाऊँ! 

"ठीक है, मैं अभी बयान देता हूँ कि आप यहाँ बच्चों का शोषण करते हो | फ़िर समाज का नज़रिया भूल पाओगे आप? बताओ, क्या भूल पाओगे?

नही, पता था नही भूल पाओगे |

उनके माथे पर आई पसीने की बूँद को देख वो एक फीकी हँसी हँसा और बोला

कहना आसान है "रात गई बात गई " क्या भूलने देगा ये समाज!! इस इलज़ाम के नश्तर...

 


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