Dr Jogender Singh(Jaggu)

Drama

4.6  

Dr Jogender Singh(Jaggu)

Drama

पुन्नू

पुन्नू

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निचले होंठ को खींच कर, एक मटर के दाने के बराबर काला तारकोल जैसा कुछ रखा उसने। फिर बोला, मस्त होकर रहो। यहीं एक ही गद्दे पर सो जायेंगे दोनों। मैंने हां में सिर हिलाया। एमबीबीएस में मेरा दाखिला देर से हुआ था। उस वर्ष कोर्ट केस की वजह से सीबीएसई पीएमटी के दाखिले देर से हुए थे। पुनीत से पहली मुलाकात ऐसे ही हुई थी। पिता जी मुझे छोड़ कर घर चले गए थे। हॉस्टल मिल नहीं पाया था। एक सीनियर ने बताया पीछे कॉलोनी में कुछ फर्स्ट ईयर के लड़के रहते हैं, जाकर देखा दो कमरे, एक बाथरूम था। रहने वाले पांच लोग, चार लोग बड़े कमरे में बिस्तर लगाए थे, पांचवा बिस्तर छोटे कमरे में लगा था, पुनीत का। छठे बिस्तर की गुंजाइश नहीं थी।

पुनीत आगे आकर बोला साथ में सो जायेंगे। मैं हिचका, पर पिता जी बोले ठीक है, कुछ दिनों की बात है, फिर हॉस्टल मिल जाएगा। पिता जी कुछ पैसे देकर चले गए थे। 

पुनीत से बातचीत शुरू हुई, बाकी सब लोग खुश नहीं थे, एक और हिस्सेदार। रफीक, अमन और प्रकाश ने तो बात तक नहीं की। राजेश तटस्थ था। प्रकाश तो पुनीत से लड़ने लगा था, सबसे पूछे बगैर क्यों रख लिया ? पुनीत ने चिड कर कहा था मेरे बिस्तर पर सोएगा, तुम्हे क्या? और लैट्रिन/बाथरूम। वो तुम्हारी तरह एक घंटा नहीं लगाएगा।कैसे पता ? प्रकाश ने हाथ नचाकर पूछा था। मुझ से नहीं रहा गया, मुझे ऐसी कोई तकलीफ़ नहीं है। देख लो अभी से कितना बोल रहा है। रैगिंग होगी तो ठीक हो जाएगा रफीक बोला था। पुनीत ने मुझे चुप रहने का इशारा किया।

मैंने अपना सामान सेट कर लिया। वीआईपी की अटैची, होल्डोल, एक बाल्टी और एक मग। अलमारी का एक कोना दुर्गा मां की मूर्ती के लिए पुन्नू (पुनीत) से जगह ले ली। दुर्गा मां की तस्वीर और अगरबत्ती का एक पैकेट।

मेरी आदत जल्दी सोने और तड़के उठने की थी। पुन्नू की पता नहीं, पर वो भी जल्दी सोने लगा। सुबह उठ कर जब मै पूजा करता, वो भी पूजा करने लगा। राजेश,प्रकाश और अमन का आपस में देर रात तक जग कर पढ़ने का मुकाबला होता, हर रोज़। जब रात ज़्यादा हो जाती प्रकाश लाइट बन्द कर देता। उसकी और अमन की लड़ाई से नींद खुल जाती। राजेश ने अपने बिस्तर के ऊपर दीवार में एक टेबल लैंप लगा रखा था। उसकी देखा देखी अमन भी एक टेबल लैंप ले आया था। रफ़ीक को पढ़ाई लिखाई से कम मतलब था।

मेरा एडमिशन होने के चार दिन बाद स्ट्राइक हो गई, पंद्रह दिनों के लिए। सब लोग अपने अपने घर चले गए।

पंद्रह दिन बाद वापिस आया तो, एनाटॉमी का एक पार्ट खत्म हो गया था। उसका एग्जाम हुआ, परन्तु देर से आने के कारण मुझे एग्जाम देने को नहीं मिला। दो दिन बाद रिजल्ट आया, राजेश को छोड़ बाकी सब फेल, पुन्नू भी। मेरा माथा ठनका, किन गलत लोगों के साथ रहने लगा मैं? 

सुबह उठ कर हम सभी समर की दुकान पर नाश्ता करते थे। बन /मक्खन और चाय। मैं चाय नहीं पीता था। समर से दूध के लिए बोला तो उसने बताया दूध नहीं मिल पाएगा। किसी तरह पानी के साथ बन खाता था। मैने देखा पुनीत अक्सर क्लास नहीं जाता था। कोई न कोई बहाना बनाता रहता। आज मैनुअल पूरी करनी है, आज पढ़ना है। जब रोज़ रोज़ यही करने लगा, तो एक दिन मैंने उससे पूछा क्या बात है, सही सही बताओ। तो बोला सीनियर्स मारते हैं। सिर्फ तुम्हे, बाकी लोग भी तो जाते हैं? उसने कहा एक लड़की अपने बैच की है, बहुत सुंदर सीनियर मुझे उसके कारण मारते हैं। उसके कारण क्यों? अरे तुम नहीं समझोगे, वो मेरी सीट पार्टनर है इसलिए। खैर मैं चुपचाप चला गया, परन्तु उसकी बात हज़म नहीं हुई।

रात का खाना दो अंडो का आमलेट और चार स्लाइस ब्रेड, वो भी डेढ़ किलोमीटर पैदल चलने के बाद मिलता था। जो ढाबे थे उस तरफ सीनियर्स मिल जाते थे। इसलिए छह महीनों तक यही हम लोगो का डिनर था। रात को खाना पैक करा कर ले आते और कमरे पर आ कर खाते थे।

उस दिन जब खाना पैक कराने गए, तो रास्ते में मैंने पुन्नू से पूछा, पापा क्या करते हैं तुम्हारे? सरकारी नौकरी में है, ज्यादा बड़ी पोस्ट नहीं है। और भाई/बहन? एक छोटा भाई और छोटी बहन है, क्यों पूछ रहे हो? तुम्हारे पिताजी ने तुम्हे पढ़ने भेजा है ना ? वो सोचने लगा, फिर बोला हां। तो क्या तुम पढ रहे हो? देखो रोज़ क्लास करो। पर मुझे पीछे का याद नहीं है। तो क्लास न जाने से याद हो जाएगा? अब वो मेरा मुंह देख रहा था। देखो मैं भी देर से आया हूं दोनों मिल कर पढ़ेंगे। पर सारी किताबें अंग्रेज़ी में है,तुम तो इंग्लिश मीडियम में पढ़े होंगे,मेरा क्या होगा? मैं भी हिंदी मीडियम का हूं। उसके चेहरे से चिंता की लकीरें कम हुई। फिर कैसे होगा? एक इंग्लिश डिक्शनरी और एक मेडिकल डिक्शनरी साथ रखेंगे। कुछ ठीक लगा उसको यह आइडिया। क्योंकि अगले दिन से वो क्लास जाने लगा।

हालांकि रफीक ने उसको फुसलाने की बहुत कोशिश की, चल यार बाज़ार घूम कर आते हैं? पर शायद वो अपने परिवार को याद कर, क्लासेज करने लगा। जिस दिन फाइनल रिज़ल्ट आया तो मैं, पुनीत और अमन ही पास हो पाए थे। तीनों प्रोफ़ेशनल एग्जाम में पास होने वाले हमारी क्लास के चंद लड़कों में मेरा और पुनीत का भी नाम था। फाइनल प्रोफ़ेशनल के रिजल्ट के दिन जब पुन्नू पास हुआ था, तो मेरे गले लग गया था, तुम न आते तो मैं आज शायद डाक्टर न बन पाता। थैंक्स। मेरी भी आंख भर आई थी, पागल मैने क्या किया? सब तुम्हारी मेहनत है। धीरे से उसका कंधा थपथपाते हुए कहा था। सच मै यार, तुम ने बहुत संभाला। खैनी नहीं छुड़वा पाए बस। हंसते हुए खैनी निचले होंठ के नीचे रख, पुड़िया को संभाल कर मोड़ा और पैंट की पीछली जेब में रखा। चल पिक्चर देखते हैं। खाना भी बाहर खायेंगे, पैसे अपने अपने। कंजूस मैंने प्यार से कहा।


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