Raunak Singh

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4.5  

Raunak Singh

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फर्क - अमीरी गरीबी का

फर्क - अमीरी गरीबी का

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एक बालक एक छोटे से गांव में रहता था जो की एक किसान का बीटा था उसे आमिर और गरीब में फर्क क्या होता है वो जानना चाहता था तो उसने एक दिन अपने पिता से पूछा "पिताजी ये आमिर और गरीब में क्या अंतर होता है?" उसके पिता ने बताया के कहा बेटा हम तो किसान है इसीलिए हम गरीब है और जिसके पास पैसे होते है वो आमिर होता है पर बालक को यह जवाब कुछ समझ ना आया. उसने अपने पिता से बोला पर पिताजी हमे तो पेट भर खाना मिल जाता है तो हम गरीब कैसे हुवे? पिता मुस्कुराया और बोला मुझे तो इतना ही पता जितना तुम्हे बताया।

 बालक की जिज्ञासा उसे चैन से सोने नहीं देती थी तो उसके एक दोस्त ने उसे बताया की पास के मंदिर में एक बाबा रहते है तू उनसे क्यों नहीं ये पूछता शायद तुझे तेरा सही जवाब वही से मिल जाए फिर क्या था बालक ने उस मंदिर की तरफ कुच किया, वह पहोच कर बालक ने देखा एक बाबा अपने आंखे बंद कर भगवान् का जाप कर रहे थे तो उस बालक ने उनके पारो को छूवा और बोला "बाबा मेरे मन में एक प्रश्न है और उसका जवाब मुझे मिल नहीं पा रहा है क्या आप मेरी प्रश्न का उत्तर दे पाएंगे?"

 बाबा ने आंखे खोली और कहा " बोलो बालक क्या प्रश्न है तुम्हारा? मैं कोशिश करूँगा जवाब देने की पर निर्भर तुमपर करता है की तुम जवाब कैसे समझोगे"

 बालक ने कहा " बाबा मेरा प्रश्न ये है की आमिर और गरीब में क्या अंतर होता है ?"

 बाबा ने मुस्कुराया और कहा बालक आमिर और गरीब में बस इतना अन्तर होता है की गरीब को साड़ी उम्र संघर्ष करना पड़ता है और आमिर को मन चाहा फल उसकी अच्छा हेतु मिल जाता है 

बालक ने कहा - बाबा मैं कुछ समझ नहीं पाया। 

 बाबा ने कहा - इसका अर्थ तुम्हे पास की नदी ही बता पायेगी।  

बालक ने कहा - नदी इसका अर्थ मुझे कैसे समझाएगी बाबा ? 

बाबा ने एक पत्थर और एक लकड़ी बालक को दी और कहा तुम उस नदी के पास जाओ वह तुम्हे इसका अर्थ समझ आ जायेगा  

बालक ने बाबा से वो लकड़ी और पत्थर लेकर नदी की तरफ चला गया, नदी के पास पहोच कर बालक नदी की तरफ देखने लगा, कुछ पल बीते फिर कुछ घंटे और अब शाम होने वाली थी पर नदी से बालक को कोई जवाब नहीं आया तो बालक ने अपने हाथ में राखी लकड़ी नदी में फेक दी, लकड़ी नदी में गिरी, कुछ पल डूबी फिर बहार आयी, तैरने लगी, फिर लेहेरो से लड़ने लगी, फिर डूबी फिर बहार आयी फिर पत्थरों से तकरी फिर डूबी फिर बहार आयी फिर तैरने लगी, फिर लेहरो से लड़ने लगी, फिर डूबी फिर बहार आयी फिर चट्टानों से टकराई फिर तैरने लगी, बालक ने लकड़ी का ये बर्ताव तब तक देखा जब तक वो लकड़ी आँखों से ओझल न 

फिर बालक ने हाथ में बचे पत्थर को नदी में फेका तो देखा की पत्थर तुरंत नदी से मिल गया और उसे नदी ने सहारा दे दिया और अपने अंदर समां लिया   

बालक को अब बाबा की कही हुई बात समझ में आ गयी थी की आमिर और गरीब में क्या फर्क होता है।


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