STORYMIRROR

Kalpesh Patel

Abstract Children Stories Classics

4.5  

Kalpesh Patel

Abstract Children Stories Classics

पहली बूँद

पहली बूँद

2 mins
119

पहली बूँद

सावन का पहला दिन था। हवा में उमस थी, बादल घने थे, और धरती किसी बेसब्र प्रेमिका की तरह प्रतीक्षा में थी। गाँव की गलियों में एक अजीब सी खामोशी पसरी थी, जैसे सब कुछ थम सा गया हो—बस एक संकेत का इंतजार था। 

छोटी **गुड़िया** छत की मुंडेर पर बैठी थी, उसकी मासूम आँखें आकाश को टकटकी लगाए थीं। वह सोच रही थी—**"क्या सच में बारिश की पहली बूँद धरती को चूमती है?"** उसके बाल हल्की हवा में उड़ रहे थे। उसकी हथेलियाँ आकाश की ओर फैली थीं, मानो पहली बूँद को पकड़ने की कोशिश कर रही हो। 

तभी अचानक— 
**टप्...** 
**टप्...** 
**टप्...** 

एक नन्ही बूँद उसकी हथेली पर आकर गिरी। ठंडी, मुलायम और एक अजीब सा अहसास लिए हुए। उसकी उंगलियों ने बूँद को छुआ—और वह चौंक गई। जैसे कोई जादुई परी आई हो। 

**"तू कौन है?"** गुड़िया ने फुसफुसाते हुए पूछा। 

बूँद हल्के से चमकी और मुस्कुराते हुए बोली— 
**"मैं हूँ पहली बूँद—बादलों का संदेश।"** 

गुड़िया ने उत्सुकता से पूछा, **"क्या तुम हर साल आती हो?"** 

बूँद धीरे से हँसी, **"नहीं, छोटी... हर बार कोई और आता है—कोई हँसता है, कोई रोता है, कोई जल्दी बिखर जाता है। लेकिन पहली बूँद हमेशा ख़ास होती है। क्योंकि मैं उम्मीद हूँ, राहत हूँ, और नए सपनों की शुरुआत भी।"** 

गुड़िया ने साँस रोकी। उसे लगा मानो कोई दबी हुई खुशबू उसके भीतर समा रही हो। उसकी हथेली से लुढ़ककर बूँद मिट्टी में मिल गई, और उसी पल एक अद्भुत सोंधी महक हवा में घुल गई। 

गुड़िया मुस्कुराई, आँखें बंद की और धीरे से कहा— 
**"धन्यवाद, पहली बूँद... अब मेरा सावन शुरू हुआ।"** 

उस दिन से गुड़िया हर साल पहली बूँद का इंतज़ार करती है। उसे यक़ीन है— 
**"पहली बूँद में खुदा की कोई खास बात छुपी होती है।"** 

---



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract