हवा महल
हवा महल
हवा महल
(एक अंधविश्वासी मोहल्ले की महाकथा)
शहर के बीचोंबीच एक पुराना मकान था — नाम था हवा महल, लेकिन हवा उसमें आती नहीं थी, जाती थी।
मकान के मालिक, पंडित धनीराम जी, स्वघोषित वास्तु-विशेषज्ञ, तंत्र-मंत्राचार्य और WhatsApp यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट थे।
धनीराम जी का मानना था कि मकान के दरवाज़े पर नींबू-मिर्ची लटकाने से बुरी हवा उल्टी लौट जाती है।
(हालांकि पड़ोसी कहते थे कि बुरी हवा तो धनीराम जी के मूड से आती है।)
एक दिन मोहल्ले में अफवाह फैली — हवा महल में रात को चुड़ैल घूमती है!
सबने पूछा: "किसने देखा?"
जवाब मिला: "मोहन की बुआ के देवर के साले के बेटे ने सपना देखा था।"
बस, फिर क्या था —
धनीराम जी ने तुरंत उपाय किया:
- दरवाज़े पर 11 नींबू, 7 मिर्ची, और 3 लहसुन की माला
- घर के चारों कोनों में गोबर के दीपक
- और बीच में एक तांत्रिक DJ नाइट रखी — जिसमें भूत भगाने के लिए भजन-EDM मिक्स चला।
रात को मोहल्ले वाले इकट्ठा हुए —
चुड़ैल नहीं आई, लेकिन बिजली चली गई।
धनीराम जी बोले: "देखा! मेरी पूजा से चुड़ैल डर गई और बिजली भी!"
अगले दिन, बिजली विभाग ने बताया — गोबर के दीपक से ट्रांसफार्मर फूंक गया।
अब मोहल्ले में नया अंधविश्वास फैला:
"हवा महल में पूजा करने से WiFi गायब हो जाता है!"
धनीराम जी ने इसका भी समाधान निकाला —
उन्होंने घर के ऊपर तांत्रिक टॉवर लगवाया —
जिसमें हर रविवार को भूत भगाओ, नेटवर्क पाओ योजना चलाई जाती।
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निष्कर्ष:
अंधविश्वास वो हवा है —
जो हवा महल में नहीं,
हमारे दिमाग में घूमती है।
और जब तक धनीराम जी जैसे लोग हैं,
हवा महल की खिड़कियाँ कभी बंद नहीं होंगी।
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