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Priya Silak

Abstract Drama Inspirational

4.5  

Priya Silak

Abstract Drama Inspirational

"पहला दिन"

"पहला दिन"

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“पहला दिन”
रिया ने अपने कांपते हुए हाथों से अपनी ID कार्ड को सीधा किया और कांच की उस ऊँची इमारत के सामने खड़ी हो गई, जिसके अंदर उसका नया सफर शुरू होने वाला था।
यह सिर्फ एक नौकरी नहीं थी…
यह उसके सपनों की शुरुआत थी।
बचपन से उसने यही सुना था—
“पढ़-लिखकर कुछ बनना है, ताकि जिंदगी बदल सके…”
आज वही दिन था।
लेकिन जितना बड़ा सपना था, उतना ही बड़ा डर भी था।
उसने गहरी सांस ली और अंदर कदम रखा।
अंदर की दुनिया बिल्कुल अलग थी—
हर कोई तेजी से चल रहा था, किसी के पास रुकने का समय नहीं था। चेहरे गंभीर थे, आँखें स्क्रीन पर टिकी हुई थीं… जैसे हर कोई किसी अदृश्य दौड़ में भाग रहा हो।
रिया को लगा जैसे वह किसी मशीन की दुनिया में आ गई हो।
HR ने उसे उसकी सीट दिखाई—एक कोना, जहाँ से पूरा ऑफिस दिखता था, लेकिन कोई उसे नहीं देख रहा था।
“Welcome, Riya. First day है, आराम से observe करो,” HR ने मुस्कुराकर कहा।
रिया ने हल्की सी मुस्कान दी, लेकिन उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।
कुछ देर बाद उसका manager, अंशुल, उसके पास आया।
“रिया, हमारे पास एक urgent client project है। आज ही report चाहिए। Can you handle it?”
रिया के अंदर कुछ हिल गया।
पहला दिन… और इतना बड़ा काम?
लेकिन उसने खुद को संभालते हुए कहा—
“Yes sir, I’ll try my best.”
“Try नहीं… deliver,” अंशुल ने सख्त आवाज में कहा और आगे बढ़ गया।
रिया की उंगलियाँ कीबोर्ड पर चलने लगीं, लेकिन दिमाग खाली था।
नया सिस्टम… नया software… unfamiliar data…
वह बार-बार फाइल खोलती, फिर बंद कर देती।
पास में बैठे लोग बिना रुके काम कर रहे थे।
कोई किसी से मदद नहीं मांग रहा था… और न ही कोई किसी को help दे रहा था।
धीरे-धीरे रिया को महसूस हुआ—
यहाँ survive करने के लिए मजबूत बनना पड़ेगा।
समय तेजी से निकल रहा था।
दोपहर से शाम हो गई… लेकिन उसका काम अभी अधूरा था।
उसकी आँखें स्क्रीन पर थीं, लेकिन दिमाग में एक ही बात घूम रही थी—
“अगर मैं fail हो गई तो?”
तभी उसे पीछे से आवाज आई—
“First day?”
रिया ने मुड़कर देखा। एक लड़की, नेहा, खड़ी थी।
रिया ने धीरे से कहा, “हाँ…”
नेहा हल्का सा मुस्कुराई,
“Relax… यहाँ सब ऐसे ही शुरू करते हैं।”
रिया को थोड़ी राहत मिली।
लेकिन तभी manager की आवाज गूंजी—
“रिया, report ready?”
उसका दिल जैसे रुक गया।
उसके सामने स्क्रीन पर अधूरी report थी।
उस पल में उसके सामने दो रास्ते थे—
👉 पहला:
कुछ भी data भरकर report submit कर दे, ताकि काम पूरा लगे
👉 दूसरा:
सच बोले कि उसे समझने में समय लग रहा है
उसने खुद से पूछा—
“क्या मैं सिर्फ impress करने के लिए गलत काम कर दूँ?”
उसका दिल कह रहा था—
“सब यही करते होंगे… तुम भी कर लो…”
लेकिन अंदर कहीं एक आवाज आई—
“गलत शुरुआत… हमेशा गलत ही रहती है…”
रिया ने गहरी सांस ली।
उसके हाथ ठंडे पड़ चुके थे।
वह धीरे-धीरे उठी और manager के केबिन की तरफ चली।
हर कदम भारी था।
“Sir…” उसकी आवाज हल्की काँप रही थी,
“मैंने कोशिश की… लेकिन मुझे कुछ चीज़ें समझने में time लग रहा है। मैं incomplete या गलत report नहीं देना चाहती।”
कुछ सेकंड के लिए पूरा कमरा जैसे शांत हो गया।
रिया ने अपनी आँखें नीचे कर लीं।
उसे लगा—अब डाँट पड़ेगी… शायद job भी खतरे में आ जाए।
लेकिन अंशुल ने कुर्सी से पीछे झुकते हुए कहा—
“Good.”
रिया ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
“कम से कम तुमने सच बोला,” उसने कहा।
फिर उसने थोड़ा नरम होकर कहा—
“Corporate में सबसे बड़ी गलती ये होती है कि लोग गलती छुपाने लगते हैं।”
उसने नेहा को बुलाया—
“नेहा, help her out.”
नेहा मुस्कुराई और बोली—
“चलो, मैं दिखाती हूँ कैसे करना है।”
रिया वापस अपनी सीट पर आई।
अब उसके अंदर थोड़ा confidence था।
दोनों ने मिलकर काम किया।
धीरे-धीरे report तैयार हो गई।
रात हो चुकी थी, ऑफिस लगभग खाली था।
रिया ने finally “Submit” बटन दबाया।
उसके चेहरे पर थकान थी… लेकिन एक सुकून भी था।
जब वह बाहर निकली, तो वही बिल्डिंग अब अलग लग रही थी।
सुबह उसे ये जगह डरावनी लगी थी…
लेकिन अब उसे लगा—
“मैं यहाँ अपनी जगह बना सकती हूँ…”
रास्ते में चलते हुए उसने खुद से कहा—
आज उसने सिर्फ एक job start नहीं की…
आज उसने खुद को खोने से बचा लिया।
उसने समझ लिया—
“Corporate दुनिया में आगे बढ़ना जरूरी है… लेकिन खुद को खोकर नहीं। असली जीत वही है, जहाँ आप सही रहकर भी सफल बनें।”
उस रात, बहुत दिनों बाद, उसे नींद सुकून से आई।


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