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डाॅ.मधु कश्यप

Tragedy

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डाॅ.मधु कश्यप

Tragedy

फिर से अजनबी बन जाए

फिर से अजनबी बन जाए

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"अभि यह तुमने क्यों किया मेरे साथ ? काश तुम मेरी जिंदगी में ना आए होते। तुमसे पहले मेरी जिंदगी के हर पल के अलग मायने थे पर आज हर बात तुम से शुरू होकर तुम पर ही खत्म हो जाती है ।मैंने अपनी जिंदगी में तुम्हारे रास्ते पर चलनी लगी और तुमने मुझे सिर्फ एक गली समझा, तभी तो ऐसा कह रहे।" यह कैसे फालतू के इल्जाम लगाए जा रही हो पाखी? मेरे लिए तुम ही सब कुछ हो और प्यार जानबूझकर तो नहीं किया जाता है, हो जाता है, तुमसे हो गया। पर अब हालात ऐसे नहीं है कि हम एक हो सके। हमारे परिवार वाले हमारे बारे में ना सोच कर एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं।

"मुझे माफ कर दो पाखी। सारी मेरी गलती है। ना मैं तुम्हें अपने मन की बात कहता ना तुम.....।"

" ऐसे मत बोलो अभि। मैंने भी तो तुमसे प्यार किया तभी तो आज एक दूसरे के बिना रहने के बारे में हम सोच भी नहीं पा रहे हैं। काश मैं फिर से वह दिन वापस ला पाती, तो मैं खुद को रोक लेती। काश हम फिर से अजनबी बन जाते अभि, एक दूसरे के लिए ,तो आज दोस्त बनकर ही एक दूसरे के साथ जिंदगी भर रहते।"

"वह तो अभी भी रहेंगे पाखी। रेल की पटरियों की तरह साथ चलेंगे पर कभी मिल ना पाएँगे। दोनों एक दूसरे के गले लग कर रो पड़े। शायद यह उनकी अंतिम मुलाकात थी जो काश कभी ना आती।


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