Hansa Shukla

Inspirational


4.5  

Hansa Shukla

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पेरेंटिंग टुडे

पेरेंटिंग टुडे

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रमणीक स्कूल से आकर मम्मी को स्कूल की बाते बता रही थी आज हिंदी की क्लास में ये हुआ, म्यूजिक टीचर नही थी हम सब बच्चे अन्ताक्षरी खेले खूब मजा आया मम्मी हाँ -हाँ करते हुवे तैयार हो रही थी।रमणीक ने खीझकर कहा मम्मा आप मेरी बातें नही सुन रही हो आपका ध्यान कहा है? मिसेज भाटिया ने कहा रमणीक मुझे किटी में खुराना आंटी के यहाँ जाना है मैं जल्दी आ जाउंगी फिर स्कूल की बात बताना अभी मुझे जाने दो बेटा, तुम अंदर से दरवाजा बंद कर लो, तुम्हारा मनपसंद नवरत्न पुलाव बनवाकर टेबल में रख दी हूँ, खाकर होमवर्क करना तब तक मैं आ जाउंगी।

रमणीक ने एक बार फिर कहा मम्मा प्लीज आज किटी में मत जाओ मेरे साथ रहो मुझे अकेले अच्छा नही लगता।मिसेज भाटिया उसके माथे को चूमकर बोली बेटा मम्मी जल्दी आ जायेगी वहां सब इंतजार कर रहे होंगे मेरी समझदार बिटिया रानी मुझे जाने दो ।माँ के जाने के बाद उदास रमणीक ने सोचा मम्मी-पापा के पास तो मेरे लिए टाइम ही नही है, पापा टूर में बिजी होते है और घर मे रहेंगे भी तो मोबाइल में बात करते है या मेसज देखते है, मम्मी स्कूल से आकर कभी किटी, कभी गाला पार्टी तो कभी सहेलियों के साथ शॉपिंग में जाती है।

मेरे लिए तो टाइम ही नही है! यह सोचते सोचते वह सो गई, मिसेज़ भाटिया नौ बजे पार्टी से वापस आई दूसरी चाबी से दरवाजा खोलकर अंदर आई तो खाना टेबल में ही रखा था और रमणीक सो गई थी वह बड़-बड़ा रही थी एक दिन अपने से खाना नही खाई आजकल के बच्चें। रमणीक आठवीं क्लास में थी, घर मे सुख-सुविधा के सारे साधन थे, उसकी सभी फरमाइशे तुरंत पूरी हो जाती थी फिर भी रमणीक खुश नही थी उसे लगता था मम्मी-पापा उसकी सारी माँग पूरी करते है केवल उसके लिए समय नही है। दूसरे दिन सवेरे रमणीक ने कहा मम्मी मैं आज स्कूल नही जाउंगी, मिसेज़ भाटिया ने कहा ये क्या हर चौथे दिन तुम्हारा नया राग आज स्कूल नही जाऊंगी, क्या हो गया? तुम जल्दी तैयार हो जाओ मैं स्कूल के लिए लेट हो रही हूँ मेरे स्कूल में आज प्रोग्राम है रमणीक, तुम क्या बच्चों जैसी रट लगाती हो स्कूल नही जाना है टिफ़िन  लेकर नीचे आ जाओ तुम्हारा ऑटो आ रहा होगा। रमणीक को लग रहा था कि वो माँ से चिपक जाये और बताये आज स्पोर्ट्स पीरियड है सर ग्राउंड में जम्प करवाते है और स्कर्ट ऊपर होने पर वो जिस तरह देखते है उसे बिल्कुल अच्छा नही लगता पर मम्मी तो कभी मेरी बात सुनती ही नही उसे आज मम्मी पर बहुत गुस्सा आ रहा था।                       

मिसेज भाटिया को स्कूल में प्रिंसिपल ने कहा आप नवमी से बारहवीं तक के सभी बच्चों को हाल में बिठाइए आज के स्पीकर पेरेंटिंग टुडे में माता-पिता और बच्चों की बीच बढ़ती दूरी की समस्या पर बच्चों से बात करेंगे और उनकी कॉउंसलिंग करेंगे। सभी बच्चे हाल में आ गए काउंसलर ने गर्मजोशी से अभिवादन के साथ अपनी बात शुरू की छोटी सी कहानी के बाद उन्होंने बच्चों से पूछा बच्चों आपके मम्मी-पापा आपको बहुत प्यार करते है फिर भी कभी आपको लगता है कि आपकी कोई ऐसी बात है जिसे आप उनसे कह ना पाते हो या आपको लगता है कि उनके पास आपके लिए समय नही है।थोड़ी देर हॉल में सन्नाटा रहा फिर एक लड़की ने कांपती आवाज में कहा सर मेरे मम्मी-पापा मेरी हर डिमांड पूरी करते है लेकिन मुझे लगता है मेरी बात सुनने के लिए उनके पास टाइम नही है, कई बार ऐसा होता है कि मैं स्कूल की बात या कोई वाकया शेयर करना चाहती हूँ पर मेरे पास उस समय कोई नही होता है सर मम्मी-पापा ये क्यों नही समझते कि हमे उनकी जरूरत होती है। लड़की के आँखों में आँसू थे वह रोते हुये आगे बोली सर अकेलेपन का गुस्सा मैं पेरेंट्स के आने पर उनसे बात ना करके या उनके बात का रूखा जवाब देकर करती हूँ क्योंकि मुझे लगता है जब मुझे इनकी जरूरत थी तो ये नही थे तो जब ये मुझसे बोलना चाहते है तो मैं बात क्यों करूं? धीरे- धीरे और बच्चों ने अपने मन की बात कही।

काउंसलर सब सुनने के बाद बोले बच्चों आपको भी ये समझने की कोशिश करनी होगी कि पेरेंट्स आपके लिए ही काम करते है इसलिए उनके काम के समय आपको एडजस्ट करना होगा।कभी आप बोलना चाहते है तो उनके पास समय नही होता और जब उनके पास समय होता है तो आप नाराज हो जाते है इससे आपके बीच दूरी बढ़ती है जिस समय पेरेंट्स आपके साथ है उस समय को एन्जॉय करिये यह अच्छा हो कि आप उन्हें समझाये की आपको उनका साथ, उनसे बात करना अच्छा लगता है इसलिये घर मे होने पर वह पूरा समय आपको दे फिर उन्होंने पेरेंट्स और टीचर से कहा ये इन बच्चों की ही नही आपके बच्चें की भी समस्या है आप जरूरी काम को तवज्जो दे लेकिन आपके लिए सबसे मूल्यवान आपके बच्चे है आप उन्हें समय दीजिये उनकी भावनाओं को समझिये अगर आपका बच्चा आपसे दूर हो जाये तो आप इस कमी को किसी भी दौलत से पूरी नही कर पायेंगे।मिसेज़ भाटिया को उस बच्ची में रमणीक नजर आ रही थी कैसे रमणीक मुझे किटी में जाने के लिए मना करती है पर मैं कभी उसकी भावनाओं को समझ नही पाई  हमेशा सोचती रही मेरे दो-तीन घंटे बाहर रहने से क्या होगा ये तो उसके होमवर्क का टाइम है उसे आगे काउंसलर की कोई बात सुनाई नही दे रही थी, लग रहा था वह उड़कर रमणीक के पास पहुँच जाए।

कार्यक्रम खत्म होते ही वह प्राचार्य से अनुमति लेकर कार स्टार्ट कर घर की ओर बढ़ गई रास्ते मे बेकरी से रमणीक के पसंद के पैटीज लिए, घर पहुँच कर रमणीक का इंतजार करने लगी उसके आते ही उसे चेंज करने बोल उसका नाश्ता गरम किया और उसके साथ टेबल में बैठकर स्कूल की बातें पूछने लगी।रमणीक बहुत खुश थी वह मम्मी को अपने फ्रेंड्स, टीचर और स्कूल की सारी बाते चहक-चहक कर बता रही थी। मिसेज़ भाटिया को एहसास हो रहा था कि बच्चों को समय देने से वो कितना खुश होते है आज  उन्हें लग रहा था रमणीक स्कूल की बाते बताती रहे और वो सुनती रहे।उन्होंने रमणीक को कहा चलो टेबल टेनिस खेलते है फिर मैं तुम्हारा मन पसंद खाना बनाऊँगी तब तक तुम होमवर्क कर लेना।रमणीक ने कहा माँ आप मेरे साथ रहिये आज बाहर से कुछ मँगा लेते है माँ ने प्यार से कहा जैसा मेरी बिटिया रानी चाहे। थोड़ी देर में मिसेज भाटिया के मोबाइल में मिसेज खुराना का फोन आया अरे कहा हो आज किटी में सब तुम्हारा इंतजार कर रहे है जल्दी आओ फिर गेम शुरू करेंगे मिसेज भाटिया ने मुस्कुराकर जवाब दिया आज तो मैं नही आ पाउंगी आप लोग एन्जॉय करिये मेरे घर मे जरूरी काम है।   रमणीक सब सुन रही थी वह दौड़कर मम्मी के गले लग गई मिसेज भाटिया ने मन ही मन पेरेंटिंग टुडे को धन्यवाद दिया जिनके कारण आज वह अपनी बेटी की भावनाओं को समझ पाई।


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