Yogesh Mali

Drama


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Yogesh Mali

Drama


पैरेलल युनिवर्स

पैरेलल युनिवर्स

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यह कहानी शुरू होती है मुंबई की गलियों से। जहाँ चौबीसों घंटे लोगों की भीड़ जस की तस बनी रहती है। जहाँ देखो लोग अपने आप को एक नई दिशा की ओर ढ़ालते हुए दिखाई देते हैं।

सभी को देखकर ऐसा लगता है जैसे कि सभी एक स्पर्धा में दौड़ रहें हैं। उन्हीं के बीच सपनों को अपने पलकों पर सजाए मैं अपने एक हाथ में गुलेल और दूसरे हाथ में नल्ली का पैकेट लिए लोगों को देखता हुआ मस्ती में चला जा रहा हूँ। गुलेल को अपने जेब में रखकर नल्ली का पैकेट खोल दिया। नल्ली का स्वाद लेते हुए एक जगह बैठ गया। वहाँ से गुजरने वाले सभी लोगों को देख रहा हूँ। किसी के कदम जल्दी जल्दी बढ़ रहे हैं। तो किसी के धीमे धीमे। कोई खुश दिख रहा है तो कोई दुखी। कोई सोचता हुआ जा रहा है तो कोई गुनगुनाते हुए।

मेरी आदत है कि रोज सुबह और शाम इसी तरह चौराहे के दिवार पर बैठकर लोगों को देखता हूँ। क्योंकि मेरे घर पर कोई टिव्ही नहीं है। नाही कोई मनोरंजन का साधन। लोगों के अलग अलग व्यवहार को देखना ही मेरा मनोरंजन है। मैंने अपना नाम आपको नहीं बताया। तो मैं बता दूँ कि मेरा नाम मिट्ठू है।

मेरी उम्र 12 वर्ष है। माता पिता का पता नहीं। यहीं इस गली को अपना घर और मोहल्ले को अपना परिवार मानता हूँ। कुछ लोग हैं कि मुझे खाने के लिए कुछ न कुछ दे देते हैं। कभी पेट भर जाता है तो कभी कभी खाली पेट ही संतुष्ट हो जाता हूँ। अब बारह वर्ष का हो चुका हूँ। सोचता हूँ कुछ काम करके पेट भरूँ।

पर कोई नोकरी नहीं देता। उन्हें लगता है कि वह मुझे नोकरी देंगे तो शायद उन्हें जेल हो जाए। यह समाज के लोग भी अजीब प्राणी हैं। हम पेट भरने के लिए नौकरी करें तो बाल कर्मचारी मतलब अपराध।

वहीं फ़िल्म में काम करने वाले बाल कलाकार। आजकल तो लोग हमें भीख भी नहीं देते और कहतें है काम करके खाओ। काम देते भी नहीं। लोगों का जोश ऐसा है कि जो हमें काम देता है उनपर कारवाही करने के लिए खुब पैसा लगा देतें हैं। पर हमारी ओर देखते भी नहीं। दो दिन से उस बनिये का सुक्र गुजार हूँ।

क्योंकि वह मुझे नल्ली का पैकेट ले लेता है। आज ही मैंने बन लिया है कि अब मैं खुद का काम करूँगा। बनिये के पास ही एक भंगार की दुकान है। वो सभी तरह के जुने पूराने प्लास्टिक, लोहा, व रद्दी लेकर पैसे देता है। मेरे नल्ली का पैकेट खत्म हो चुका है अब जा रहा हूँ बनिये से एक गोनी माँगने। जितना भी भंगार जुटाऊँगा। उसे बेचकर पेट भर खाना खाऊँगा। यही सोचकर मैं बनिये की तरफ चल पड़ा। बनिये के दुकान पर पहुंचकर कहा, काका।

बनिये ने मेरी ओर देखकर कहा, क्या रे! अभी तो दिया था खाने को। आज ज्यादा भूख लगी क्या तेरे को। मैंने कहा, नहीं काका। एक गोनी चाहिए। काका ने मेरी ओर देखकर कहा, करता करेगा गोनी का? मैंने कहा, भंगार जमा करके बेचूंगा। मैं भी बिजनेस करूंगा। बड़ा आदमी बनूंगा। पैसा कमाऊंगा। बनिये ने कहा, अच्छा ठीक है, पर एक बात सुन, सिर्फ भंगार जमा करना। कभी किसी का सामान चोरी मत करना। मेहनत करके रोटी कमाना। मैंने कहा, जरूर चाचा। बनिये ने एक बड़ी सी प्लास्टिक की गोनी दी। साथ में एक खाली प्लास्टिक के डब्बे भी दिए। और कहा, ये शुरुआत मेरी ओर से। हँसते हुए उन्होंने मुंह मेरी ओर से मोड़कर ग्राहक संभालने लगे।

मैं गोनी को अपने कंधे पर लटकाकर भंगार ढूंढने निकल पड़ा। आज मैं बहुत खुश हूँ। मेरी आँखो के सामने मेरे सभी सपने चलचित्र की तरह घूम रहें हैं। खूली आँखों से अपने सपनों को देख रहा था। मन खुश था कि अब से मैं स्वयं पैसे कमाऊंगा। अपने पसंद का पेट भर कर खाना खाऊंगा। अपने लिए नए कपड़े खरीदूंगा।

अपने लिए नए चप्पल भी लूंगा। मैं कुछ दूर गया ही था कि गली के अंत से भौंकते हुए मेरा दोस्त मेरे पास आ गया। मेरा दोस्त भी मेरी तरह ही है। बस फर्क इतना ही है कि वह एक जानवर है। उसका भी मेरे अलावा कोई नहीं है। उसे भी उसके माता पिता के बारे में कुछ नहीं पता। वह भी मेरी तरह दुसरो के दिए हुए रोटी से पेट भरता है। मेरे दोस्त का नाम सोनू है। मैंने ही इसका नाम रखा है। मेरा नाम भी मैंने ही रखा है। मैंने सोनू से कहा, सोनू चल मेरे साथ। अब से हम दोनों साथ मिलकर काम करेंगे। सोनू ने भी पूंछ हिलाते हुए सहमती जताई।

हम दोनों साथ साथ कागज, प्लास्टिक, लोहे, कचरों की ढेर से निकालने लगे। पूरे दिन हम इसी तरह घूम घूमकर भंगार एकत्र करते रहे। शाम हो गई थी। गोनी भी भर गई थी। जैसे तैसे गोनी को लेकर हम भंगार की दुकान पर पहुंचे। भंगार वाले ने आगे बढ़कर गोनी थाम ली। गोनी के सामान का वजन कर उसने चालीस रूपए दिए। मेरे मेहनत की पहली कमाई मेरे हाथ में थी। सोनू और मैं दोनों ही खुशी से उछल पड़े। हम दोनों पैसे लेकर बनिए काका के पास गए। मैंने १० रूपए के दो बिस्कुट का पैकेट खरीद लिया। यह सोनू के लिए था। मैंने अपने लिए भी १० रूपए की डबलरोटी खरीद ली। हम दोनों ने पेट भर खाया। आज सोनू और मैं हम दोनों का पेट भरा हुआ था। दोनों ही मेहनत करके थक चुके थे। सड़क के किनारे पानी के बड़े पाईप में हम दोनों ही सो गए।

 सुबह के 4 बजे थे कि मेरी नींद खुली। क्योंकि मेरा कुत्ता, मेरा दोस्त सोनू भौंकने लगा था। मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा कि सोनू एक दिशा की ओर मुंह किए भौंक रहा है। मैंने भी उसी ओर देखा। मैंने देखा कि एक छ: फूट का लंबा आदमी, जिसके पूरे साल सफेद थे। उसने एक लंबा सा कुर्ता और पाजामा पहन रखा था।

उसके सिर पर एक गोल टोपी थी। वह व्यक्ति दिखने में तो सुंदर और जवान था। परंतु उसके बाद सफेद थे। उसने जो टोपी पहन रखी थी वह काले रंग की बहुत जूनी टोपी लग रही थी। वह हम दोनों को ही देखें जा रहा था। मैं आँख मलते हुए उठा। मैं उसे बड़े गौर से देख रहा था। सोनू भौंके जा रहा था। उसने मेरी ओर देखा और मुस्कराते हुए अपने पास बुलाया। मैंने सोनू को इशारा किया तो उसने भौंकना बंद कर दिया। मैं उसके पास जाँऊ या नहीं, यही सोच रहा था। तभी उसने कहा, मिट्ठू डरो मत, मेरे पास आओ। मैं घबरा गया कि इस व्यक्ति को मेरा नाम कैसे पता है ?

फिर मैंने सोचा कि यह शायद मुझे जानता है। शायद यह मेरी कोई मदद करना चाहता है। या फिर इसे मुझसे कुछ चाहिए। यह सोचते ही मैंने झट से अपनी गोनी अपने पीछे छुपा ली। कहीं यह मेरी गोनी ना छीन ले। बड़ी मुश्किल से यह गोनी मिली है। यही हमारे पेट भरने का साधन है। क्या पता, यह क्या चाहता है हमसे। मैं उसकी ओर बढ़ा। सोनू भी मेरे पीछे पीछे छुपकर चलने लगा। मैं दो हाथ की दूरी पर रूक गया।

मैंने कहा, बोलो क्या काम है ? कर्मों बूला रहे थे मुझे ? उस व्यक्ति ने मुस्कराते हुए कहा, मुझसे इतना क्यों डर रहे हो? भला अपने पिताजी से भी कोई डरता है। यह सुनकर मैं हक्का-बक्का रह गया। मुझे मेरे कानों पर यकीन नहीं हो रहा था। मुझे ऐसा लगा कि यह व्यक्ति जो बोल रहा है वह सच है या कोई सपना। मैं डरकर थोड़ा पीछे हटा। मुझे पीछे हटता देख उस व्यक्ति ने फिर से कहा, बेटा मेरे पास आओ। डरो मत, मैं जानता हूँ की मैं एक अच्छा पिता नहीं हूँ। पर सच्चाई यही है कि मैं ही तुम्हरा पिता हूँ। मैंने अपने आप को संभालते हुए कहा, सच सच बताओ तुम कौन हो ?

इस तरह का नाटक मेरे साथ ना करो। मैं अभी अभी बड़ा हूँ। मैंने कल से काम करना भी शुरू कर दिया है। अब चार पैसे कमाकर अपना पेट भर सकता हूँ। लोग सही कहते हैं कि जहाँ चार पैसे हाथ में आए वहाँ नए नए रिश्तेदार पैदा हो जाते हैं। एक बात कान खोलकर सुन लो। इस तरह का झुट बोलने से मैं तुम्हें अपने साथ नहीं रखने वाला। नाही अपनी गोनी तुम्हें दुगाँ। जाओ यहाँ से। उस व्यक्ति ने हँसते हुए कहा, बेटा मैं तो देख ही रहा हूँ कि तुम बड़े हो गए हो और समझदार भी। अब तुम १२ वर्ष के भी हो चुके हो। अब वो वक्त आ गया है कि मैं तुम्हें अपने साथ ले चलूं।

मैंने चौंककर कहा, साथ ले चलूं। मतलब करता है तुम्हारा? मैं तुम्हारे साथ कहीं नहीं जाऊँगा। मुझे कहीं नहीं जाना। उन्होंने कहा, बेटा मेरी पूरी बात तो सुन लो। तुम मेरे बेटे हो। मैंने कहा, तुम झुठ बोल रहे हो? तुम मेरे पैसे लेने आए हो। उसने कहा, बेटा मैं झुठ क्यों बोलूंगा? तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे पैसे लेने आया हूँ।

देखो मेरे पास कितने पैसे हैं। यह कहकर उसने ताली बजाई। ताली बजाते ही चारों ओर से पैसे बरसने लगे। इतने सारे पैसे मेरे उपर बरसने लगे कि मैं कुछ समझ ही नहीं सका कि यह पैसे कहाँ से आ रहे हैं। मैं उन पैसों को बटोरने लगा। तभी उन्होंने कहा, बेटा छोड़ दो इन्हें उठाना। मेरे पास बहुत धन है। उस पूरे धन के मालिक तुम्ही हो। मैंने कहा, अच्छा, तो यह बताओ? इतने वर्षों से तुम कहाँ थे जब मैं यहीं भूखा सोता था। उस समय कहाँ थे जब मैं बिमार होकर भी लोगों से दवा नही बल्कि रोटी माँगता था। आज अचानक तुम आकर कहते हो कि तुम मेरे पिता हो।

तो पहले यह बताओ कि अब तक कहाँ थे? मुझे शाबीत करो कि तुम मेरे पिता हो। उन्होंने कहा, तुम्हारे पास एक गुलेल है। वो कब से है? मैंने कहा, जब मैं इस गली में आया तब से। उन्होंने कहा, किसने दी थी? मैंने कहा, बनिया काका कहते हैं कि जब मैं दो वर्ष का था तब उन्हें मैं रोता हुआ इस गली में दिखाई दिया था। यह गुलेल भी मेरे गले मे ही मेरे पास थी। उन्होंने कहा, हाँ। क्योंकि यह गुलेल मैंने तुम्हें दी थी। मैं ही तुम्हें इस गली में छोड़ गया था।

एक बार उस गुलेल के नीचे देखो। मैंने उस गुलेल के नीचे देखा तो उनकी ही तस्वीर थी। मैंने कहा, गुलेल पर तस्वीर होने से गुलेल तुम्हरा होगा पर मैं नहीं। उन्होंने अपना हाथ हवा में घुमाया। हाथ हवा में घुमाते ही एक रोशनी ही प्रकट हुई। उस रोशनी में एक चलचित्र शुरू हो गया। जिसमें एक छोटा सा बालक अपने पिता के साथ खेल रहा है। बालक के हाथ में गुलेल है। उसका पिता उस बालक को गुलेल से निशाना लगाना सिखा रहा है। उस बालक के हाथ में वैसी ही गुलेल है जो मेरे पास है। उस बालक के पीठ पर एक निशान हैं जो हु-ब-हू मेरे पीठ के निशान की तरह है।

उस बालक का पिता वहाँ और कोई नहीं बल्कि यह सामने खड़ा व्यक्ति हैं। चलचित्र समाप्त होकर अदृश्य हो गया। सामने खड़े युवक ने अपने बाँहो को खोलकर गले से लगाने का इशारा किया। उनके आँखो से आँसू बहे जा रहे थे। मैं भी दौड़कर गया और उनके बाँहो से लिपट गया। मेरे आँखो से भी आँसूओ की धारा बह चली थी। मैंने शिशकते हुए अपने पिताजी से पूछा, क्या आप मुझसे प्रेम नहीं करते थे? जो इस तरह मुझे, इस अनजान गली में छोड़ गए थे। उन्होंने मेरी ओर देखा और कहा, नहीं बेटा। मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ। मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं गया था। हमेशा ही मेरी नज़र तुम पर रहती है। बस यह है कि मेरी दुनिया अलग है और यह दुनिया अलग है।

पिताजी ने मुझसे कहा, बेटा मेरी नज़र हमेशा ही तुमपर लगी रहती थी। बस यह है कि हमारी दुनिया अलग है और यह दुनिया अलग। मैंने पिताजी से कहा, हाँ सही कहा, आप के पास बहुत सारे पैसे थे। तो आपकी दुनिया तो अलग होगी ही। एक हमारी दुनिया है जिसमें बिस्कुट और डबल रोटी लेने के लिए पूरा दिन मेहनत करना पड़ता है।

पिताजी ने कहा, नहीं बेटा। मैं ऐसी दुनिया की बात कर रहा हूँ जहाँ हमारा अपना घर है। वहाँ पर किसी को भूखा नहीं रहना पड़ता। वह जादूई दुनिया है। इस दुनिया से बिल्कुल अलग।

पर है तो इसी दुनिया की परछाई। जिस दुनिया में तुम हो, यह सबसे अलग दुनिया है। बेटा फिर भी तुम सही कह रहे हो क्योंकि तुम्हारी दुनिया अलग अलग भागों में बंटी हुई है। जैसे, अमीरों की दुनिया अलग तो गरीबों की अलग। राजनैतिक नेताओं की दुनिया अलग, तो जनता की दुनिया अलग। रोजगार वालों की दुनिया अलग तो बेरोजगारी से लाचार लोगों की अलग। बेटा तुम्हारी दुनिया में लोग सुख के पीछे दौड़ रहे हैं।

जो कि सुख तो कहीं है ही नहीं। क्योंकि जिस सुख को लोग पाना चाहते हैं वो छुपी है संतुष्टि में। और उसे लोग ढुंढते हैं भौतिक साधनों और पैसों में। जितना मिलता जाता है, उतना ही उसे बढ़ाने की चिंता उन्हें खाएं जाती है। तो बेटा यह जो तुम्हारी दुनिया है वो सबसे अलग है। तुम्हारे दुनिया में रहने वाले लोग सुख को पाने के चक्कर में दुसरो को दुखी कर देता है। कोई कोई तो दुसरों का भला करने के चक्कर में और नाम बड़ा करने के चक्कर में लाखों लोगों को दुखी कर देता है। बेटा तुम्हें इस दुनिया में छोड़ जाना मेरी मजबूरी थी। मैं नाचाहकर भी तुम्हें इस भयानक दुनिया में छोड़ गया था। हमारी दुनिया में तुम्हें खतरा था। परंतु अब वो खतरा टल गया है। मै तुम्हे अपनी दुनिया में वापस ले जाने आया हूँ।

चलो बेटा अब देर ना करो। मैंने कहा, पिताजी मेरी एक शर्त है। मैं तभी चलूंगा जब तुम यह बताओगे कि हमारी दुनिया से आपकी दुनिया कितनी दूर है। पिताजी ने कहा, बेटा बस दस कदम ही दूर है। मैंने कहा, दस कदम की दूरी पर तो सड़क के उस पार पहुंच जाएंगे। पिताजी ने कहा, बस वहीं से हमारी दुनिया शुरू होती है। मैंने हँसते हुए कहा, अच्छा तो आप सड़क के उस पार भोला नगर में रहते हो। पिताजी ने हँसते हुए कहा, हाँ वहीं समझो। अब चलो मेरे साथ। मैंने कहा, सोनू को भी ले चलो। उसका मेरे सिवाय कोई नहीं। पिताजी ने कहा, ठीक है। हम तीनों उस ओर बढ़े। पिताजी ने हाथ घुमाया और सड़क के उस पार धुंध ही धुंध फैल गई। मैं अपने पिताजी के साथ उसी धुंध में प्रवेश कर गया।

पलक झपकते ही मेरे सामने उजाला ही उजाला था। मैंने कहा, अभी अभी तो अँधेरा था। पिताजी ने कहा, अब सुबह हो गई। मुझे थोड़ा अजीब लगा पर मैंने कुछ नहीं कहा। उसी समय

मैंने देखा कि बनिया काका सायकल पर बैठकर उसी धुंध की ओर जा रहे हैं। मैंने उन्हें आवाज दी। काका काका! तभी उन्होंने मुझे पीछे मुड़कर देखा और कहा, बेटा अब पिताजी के साथ रहना। उन्हें छोड़कर ना जाना। यह कहकर वह उसी धुंध में कहीं खो गए। मैंने मन में ही सोचा, बनिया काका को कैसे पता कि यह मेरे पिताजी है। शायद उन्हें सब पता था फिर भी मुझसे छिपाया। पिताजी ने कहा, चलो बेटा। वह रहा हमारा घर।

मैंने देखा तो एक आलीशान महल सामने खड़ा था। मैं देखकर ही चौंक गया। मैंने कहा, पिताजी मै कल ही इस नगर में भंगार चुने थे। पर यह आलीशान महल कल तक तो नहीं था। यहाँ पर एक बहुत बड़ी बस्ती थी। एक रात में इतना बड़ा महल। पिताजी ने कहा, बेटा मैंने कहा था ना कि हमारी दुनिया अलग है। यहाँ पर सिर्फ हमारी हुकूमत चलती है। हम यहाँ के राजा हैं और तुम यहाँ के राजकुमार हो। पिताजी ने जैसे ही महल के अंदर प्रवेश किया तो मैं देखते ही रह गया। इतनी साज सजावट तो मैने कहीं नहीं दिखी थी। इत्र भव्य और सुंदर महल देखकर मन भ्रमित हो गया। मैंने कहा, क्या सच में यह महल हमारा है? पिताजी ने कहा, हाँ, यह हमारा ही है। मैंने कहा, अगर आप राजा हैं तो बाकी की प्रजा कहाँ है।

पिताजी ने कहा, बेटा, अब हमारी प्रजा तो यहाँ पर नहीं हैं। पर कुछ उम्मीदें बाकी रह गयी है कि मेरी प्रजा एक ना एक दिन वापस जरूर मिल जाएगी। मैंने कहा, आखिर आपकी प्रजा हैं कहाँ? और कहाँ चली गई है? पिताजी ने कहा, पहले बैठो आराम से। उसके बाद सब बताता हूँ। हमने थोड़ा भोजन किया। जब विश्राम कक्ष में पहुंचे तो पिताजी ने मुझे बताना शुरू किया।

पिताजी ने कहा, बेटा यह उस समय की बात है, जब तुम पैदा हुए थे। उस समय यह राज्य बड़ा ही खुशहाल था। तुम्हारे जन्म के खुशी में तुम्हारे दादाजी ने यह राजपाठ छोड़कर मुझे राजा बनाने की घोषणा कर दी। इस खबर से पुरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई। मैं भी बहुत खुश था। तुम्हारे दादाजी ने कहा, ठीक दस दिन बाद मेरा राजतिलक करने का निर्णय लिया गया। चारों ओर तुम्हारे जन्म के खबर के साथ साथ मेरे राजा बनने की खबर खुशीयों को दुगूना कर रही थी। पर वहीं राज्य में कुछ लोग थे जो कि इस खबर से दुखी थे। मैंने कहा, कौन थे वह ?

जो आपके राजा बनने पर खुशी नहीं थे। पिताजी ने कहा, बेटा वह कोई बाहर के नहीं थे। वह हमारे घर के ही थे। वह मेरे सगे भाई थे। मुझसे छोटे मेरे दो भाई थे। वह हमेशा से ही मेरे तरक्की से जलते थे। उन लोगों ने एक जादुगरनी के साथ मिलकर एक साज़िश रचा। वह मेरे भाईयों के सीने की ऐसी आग थी, जिसने पूरा राज्य जलाकर रख दिया। उस साजिश में मेरा पुरा राज्य तो बर्बाद हुआ ही। मेरे भाइयों का भी परिवार नष्ट हो गया। उस जादुगरनी ने अपने जादूई शक्ती से पूरे राज्य पर कब्जा कर लिया। मैंने कहा, पिताजी यह जादूई शंकरजी करता होती है? करता यह कोई हथियार है? पिताजी ने कहा, नहीं बेटा। यह कोई हथियार नहीं है। यह विज्ञान और मन की शक्ति का बेमिसाल जोड है।

हमारे अंदर अद्भूत शक्ति है। बस हम उसे जानते नहीं। इन्हीं शक्तियों को विज्ञान की सहायता से दुनिया के सामने परोसना ही जादू कहलाता है। लोग इसे चमत्कार भी कहते हैं। मैंने कहा, पिताजी यह मन की शक्ति कहाँ मिलती है? और यह विज्ञान करता होता है? मन की शक्ती यह हमारे दिमाग से जुड़ी होती है। जिसे हम मस्तिष्क कहते हैं। मस्तिष्क के दो भाग होते हैं। एक जागृत और दुसरा अजागृत। जागृत मस्तिष्क के पास सिर्फ १०% शक्ति होती है। तथा अजागृत मन के पास ९०% होती है। हम पूरे दिन जो भी कुछ करते हैं, वह जागृत मस्तिष्क के द्वारा ही करते हैं।

अजागृत मस्तिष्क अपना कार्य करती रहती है। पर हमें पता नहीं चलता। जैसे सोते समय स्वपन आना। और हाँ जागृत मन को शक्ति भी अजागृत मन से ही मिलती है। मैंने कहा, पिताजी क्या यह शक्ति मेरे अंदर भी होगी? क्या मेरे पास भी जागृत और अजागृत मस्तिष्क है? क्या मैं भी जादू कर सकता हूं ? पिताजी ने कहा, हांँ बेटा तुम्हारे पास भी ऐसे ही शक्ति है। बस जानने की जरूरत है। मैंने कहा ठीक है, पर यह विज्ञान क्या है ? पिताजी ने कहा, बेटा आज तक तुम कभी स्कूल नहीं गए। तुम्हें शिक्षा नहीं मिली, इसलिए तुम्हें पता नहीं कि विज्ञान क्या होता है ?

विज्ञान एक ऐसा ज्ञान है जो कि हमारे धरती पर उपस्थित जो भी कुछ पदार्थ है। उन पदार्थों को शास्त्रीय पद्धति से अच्छी तरह जांच पड़ताल करके नई-नई वस्तुओं का खोज करना विज्ञान कहलाता है। अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए नए नए तकनीक का उपयोग करना भी विज्ञान कहलाता है। बेटा विज्ञान का उपयोग कैसे करेंगे। वह मैं तुम्हें बताऊंगा। मैंने कहा, ठीक है पिताजी, आप तो मुझे मिल गए। पर मेरी माता जी कहां है। मैंने मां को अभी तक नहीं देखा। पिताजी ने कहा, चलो मैं तुम्हारी माता से मिलाता हूंँ। पिताजी मुझे एक कमरे में ले गए।

जहां पर लाल कपड़े से कुछ ढँका हुआ था। पिताजी ने उस लाल कपड़े को हटाया तो मैं हैरान हो गया। उसके नीचे एक ताबूत रखा हुआ था। पिताजी ने उसको हटाया और मैंने देखा ताबूत के अंदर मेरी माता सोई हुई थी। मैंने कहा, पिताजी क्या मेरी माता इसी में सोती है? उठाओ ना इन्हें। मैं माँ के गले से लगना चाहता हूँ। बात करना चाहता हूँ। पिताजी ने कहा, बेटा यह बहुत ही गहरी नींद में सो चुकी है। मैंने कहा, तो कब उठेगी माँ।

पिताजी ने कहा, बेटा तुम्हारी माँ को नींद से जगाना बहुत मुश्किल है। यह आज से नहीं बल्कि १० वर्षों से सो रही है। उस जादुगरनी ने तुम्हारी माता को अपने मायावी शक्ति से सुला दिया। मैंने कहा, तो आप भी जानते हैं जादू। आप क्यों नहीं उठा देते। पिताजी ने कहा, बेटा यह काम मैं नहीं कर सकता। यह काम सिर्फ तुम कर सकते हो। तुम्हें उस जादुगरनी से बचाने के लिए मैंने तुम्हें उस दुनिया में भेज दिया था। अब तुम १२ वर्ष के हो चुके हो। अब तुम अपनी माता के लिए कुछ कर सकते हो। मैंने कहा, क्या कर सकता हूँ मैं? मुझे तो कुछ नहीं आता ?

मुझे तो जादू भी नहीं आता। पिताजी ने कहा, सुनो बेटा। तुम वो कर सकते हो जो कोई नहीं कर सकता। तुम्हें सिर्फ तुम्हारी माँ को ही ठीक नहीं करना बल्कि पूरे राज्य को उस जादूगरनी से बचाना है। मैंने कहा, पिताजी मैं तो एक छोटा सा १२ वर्ष का बच्चा हूँ। मैं उस जादूगरनी से पूरे राज्य को कैसे बचाऊंगा। जब पूरे राज्य के इतने सारे लोग अकेली जादुगरनी को नहीं हरा सके और उसके जादू का शिकार हो गए। तो मैं उसका क्या बिगाड़ सकता हूँ।

वह तो मुझे चुटकी में मसल देगी। पिताजी ने कहा, देखो बेटा। तुम ही हो जिसे उपर वाले ने उस जादूगरनी को नष्ट के लिए चुना है। अब सुनो, तुम उस जादूगरनी को कैसे हराओगे। पिताजी ने कहा, बेटा, पृथ्वी सिर्फ एक है। यह सभी मानते हैं। पर मैं तुम्हें बता दूँ कि पृथ्वी तो सिर्फ एक है पर उसकी छ: और परछाई है। जिस तरह पृथ्वी पर जीवन है, उसी तरह बाकी के पृथ्वी पर भी जीवन है। इन सभी पर रहने वाले लोगों का रूप एक जैसा ही होता है परंतु उनकी जीवन शैली अलग अलग होती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि तुम्हारे साथ रूप और है। तुम जहाँ पर थे वह असली पृथ्वी है। वह दुनिया अलग थी। पर इस समय तुम उसकी परछाई में हो। जहां पर तुम इस समय खड़े हो उसी जगह पर तुम्हारी दुनिया में बहुत से गरीबों के छोटे छोटे घर है। पर इस दुनिया में, उसी जगह पर खड़ा है यह आलीशान महल।

तो बेटा सातों दुनिया में तुम अपने ही रूप को ढूँढकर उनका हथियार हासिल करोगे। जिस तरह से तुम्हारे पास यह गुलेल है। वैसे ही तुम्हारे हर रूप के पास एक हथियार है। वो सब हथियार एकत्र करना है। मैंने कहा, फिर उनका क्या करना है? पिताजी ने कहा, बेटा तुम सिर्फ इतना काम ही पूरा करो। आगे का काम मैं पूरा करूंगा। मैंने कहा, ठीक है। तो कब निकलना है मुझे? पिताजी ने कहा, दो दिन मेरे पास रहो, उसके बाद जाना। मैंने कहा, ठीक है।

पिताजी के कहे अनुसार मैं दो दिन के लिए उनके पास रूक गया। मैने देखा कि पिताजी सुबह सुबह उठकर ध्यान साधना में बैठे हुए थे लगातार 2 घंटों तक ध्यान साधना के बाद अपनी आंखें खोली मैंने पिताजी से कहा पिताजी आप इतनी देर तक आंखें बंद करके ध्यान साधना क्यों करते हो ?

पिताजी ने कहा, बेटा यह ध्यान साधना ही मुझे ऊर्जा देती है। मैंने कहा, आँखे बंद करके बैठने से ऊर्जा कैसे मिलती है। पिताजी ने कहा, तुमने अलादीन का नाम सुना है ? मैंने कहा, हाँ, अलादीन के बारे में मैंने सुना है। उसके पास जादुई चिराग था। जिसके घिसने पर जीनी बाहर आता था।

पिताजी ने कहा, हाँ सही कहा। उसी प्रकार हम है अलादीन। हमारा दिमाग है चिराग और जीन है हमारी सोच। हमारी कल्पना शक्ति। हम जो भी कल्पना करते हैं उसे प्राप्त करने के लिए सोचना ज़रूरी है। पर सोचते कैसे हैं? इसका तरीका क्या है? यह किसी को नहीं पता। सोचने का भी एक तरीका है। यदी हम सही तरीके से सोचें तो हर नामुमकिन कार्य को मुमकिन कर सकते हैं। या फिर होने वाली तबाही को रोक भी सकते हैं। मैंने कहा, पिताजी यह कला मुझे भी सिखाओ। पिताजी ने कहा, पहले आँखे बंद करके ध्यान करना सिखों।

मैं भी आँखे बंद करके बैठ गया। पिताजी ने मुझे ध्यान करना और सोचने की पध्दती सिखाई। मैंने पिताजी से कहा, पिताजी मुझे भी आपके तरह जादू सिखना है। पिताजी ने कहा, बेटा तुम सिर्फ ध्यान केन्द्रित करो। जादू तुम्हारे खून में है। बेटा ईश्वर ने तुम्हें एक महान कार्य को पूरा करने के लिए चुना है। तो ईश्वर तुम्हें खाली हाथ नहीं भेजेगा। मैंने यहाँ बड़ी तपस्या से यह सिखा है। पर यह शक्तीयाँ तुम्हारे पास जन्म से ही है। तुम्हें सिर्फ उसे पहचानने की आवश्यकता है। तुम्हारे पास बड़ी सी बड़ी आपदा को नियंत्रित करने की महान शक्ति है।

समय आने पर तुम्हें इसका आभास हो जाएगा। इस तरह से पिताजी से बहुत सारी बातें करते हुए मैंने दो दिन बिताए। अब मुझे मेरे मंजिल की ओर बढ़ना था। पृथ्वी के सात रूप से मुझे अपने ही रूप अर्थात अपने छवी को ढूंढ कर उनके हथियार एकत्र करने थे। कुल छह रूप और छः हथियार। इतनी बड़ी दुनिया में अपने ही छवी को ढुंढना बड़ा ही मुश्किल कार्य था। पिताजी ने कहा, बेटा तुम जब भी किसी पृथ्वी पर प्रवेश करोगे।

तो अपनी छवी से १ किलोमीटर की दूरी पर ही रहोगे। बस उसे ढूंढने और हथियार हासिल करने में तुम्हें कठिनाई होगी। मैंने कहा, ठीक है। पिताजी ने मुझे हर पृथ्वी पर तुम्हारे कार्य को पूरा करने के लिए तुम्हारे पास सिर्फ ३० दिनों का समय होगा। यदि तुम ३० दिनों में वह कार्य पूरा न कर सके तो वहीं रह जाओगे। वापस लौटकर नहीं आ पाओगे। मैं यह सुनकर घबरा गया। पर पिताजी ने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, बेटा मुझे तुम पर विश्वास है कि तुम अवश्य यह कार्य समय पर पूरा कर लोगे। मैंने भी साहस जुटाया और पिताजी का हाथ पकड़कर उन्हें आश्वासन दिया।

कि मैं जरूर यह कार्य पूर्ण करूंगा। पिताजी ने कहा, सुनो बेटा, जब भी तुम अपने छवी के आस पास रहोगे तुम्हे एहसास हो जाएगा। क्योंकि वह तुमसे जुड़ा हुआ है। मैंने कहा, ठीक है पिताजी। अब कैसे जाना है यह बताइए मुझे। पिताजी ने कहा, बेटा सामने तुम्हें वह धुंध दिखाई पड़ रहा है। मैंने कहा, हाँ। पिताजी ने कहा, उसमें प्रवेश कर जाओ। जब भी तुम एक हथियार हासिल करोगे। ठीक ऐसा ही धुंध तुम्हारे सामने होगा।

मैंने कहा, हाँ। मैं और मेरा कुतरता सोनू धुंध की ओर बढ़ने लगे। धुंध में प्रवेश करते ही मैंने पीछे मुड़ कर देखा। पिताजी के आँखो में आँसू थे। अचानक सामने धुंध बढ़ गई। और आँखो के सामने से सब कुछ ओझल हो गया। मैंने सामने देखा तो हैरान हो गया। मेरे सामने थी एक लंबी सी सड़क। सड़क ऐसी की दोनों तरफ से गाड़ीयाँ चल रही थी। मैने संभल कर सड़क पार की। तभी सड़क के किनारे चाय की टपरी से एक आदमी आया। मेरे हाथ को पकड़कर कहा, क्या ये मरने है क्या? ऐसा रास्ते के बीच में कायको को खड़ा था। मैंने मुंह लटका कर कहा, पता नहीं था कि यहाँ सड़क होगी। यह सुनकर वो आदमी बोला, इतनी बड़ी सड़क तेरेको दिखती नहीं क्या ? अलीबाग से आया क्या ?

खुद भी मरेगा और इस कुत्ते को भी मारेगा। चल भाग इधर से। वो आदमी फिर से चाय की टपरी की ओर गया। मैं भी उसके पीछे पीछे चल दिया। मैंने चाय वाले से पूछा, भाई ये कौन सा शहर है ? चाय वाले ने मेरी ओर देखा और कहा, ये अंधेरी का हाईवे है। मुंबई। तु किधर से आया। तेरा घर किधर है ? घूम गया क्या ? मैंने कुछ जवाब नहीं दिया। उस ने फिर से पूछा। मैंने कहा, मेरा घर बांद्रा में है। चाय वाले ने कहा, फिर इधर कैसे आया? किसके साथ आया। किधर को जाने का है तेरे को? मैंने कहा, कहीं नहीं। बस इधर ही आना था। क्योंकि पिताजी ने कहा था। तुम यहाँ से जाने पर अपने छवी के १ किलोमीटर के दायरे में ही रहोगे। उसे ढूंढने का काम मेरा था।

मैंने कहा, मुझे वो सामने वाली बस्ती में जाना है। बस कोई सड़क पार करा दो। चायवाले ने गुस्से से कहा, आजकल के मां बाप को अपनी औलाद का चिंता ही नहीं। छोटे से बच्चे को छोड़ दिया अकेले घूमने को। वो भी एक आवारा कुत्ते के साथ। यह सुनकर सोनू गुरर्राया। चाय वाला डर गया। वहाँ बैठे आदमी ने कहा, टेंशन मत ले । चाय खत्म करके चलता है आपून तेरे साथ। आपून भी वोहीच बस्ती में रेहता है। छोड़ देगा तेरे को में।

उस आदमी ने चाय खत्म की और मेरा हाथ पकड़कर चलने लगा। सोनू भी पीछे पीछे चलने लगा। उस आदमी ने कहा, तेरा नाम क्या है? मैने कहा, मेरा नाम सोनू है और ये सोनू। उस आदमी ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे सड़क पार कराई। और बोला किधर है तेरा घर? मैंने कहा, बस वहीं उस दूकान के पीछे। उस आदमी ने मुझे ध्यान से देखा। बोला चल मैं तेरे को उधर छोड़ता है। मैंने कहा, मैं चला जाऊँगा। आप जाओ। उस आदमी ने मेरा हाथ पकड़कर कहा, चल ना मैं चलता है तेरे साथ। वो मुझे वहाँ जबरदस्ती ले गया। बोला कौन से घर में रहता है ? मैंने कहा, इस घर में रहता हूँ। उस आदमी ने दरवाजा खोला और बोला, ये तीनों घर मेरा हैं। उसने मुझे और मेरे सोनू को अंदर धकेला और कहा, बोल कौन है तू? किधर से आया? वरना बहोत मारेगा तेरे को। पोलिस के हवाले कर देगा तेरे को। यह सूनकर मैं रोने लगा। वह आदमी मुझे और मेरे सोनू को उस झोपड़े के अंदर बंद करके चला गया। जाते जाते बोल गया। थोड़ा काम है मेरे को। आने के बाद तेरे को देखता हूँ। यह सूनकर मैं डर गया। मैं सोनू को देख रहा था और सोनू मुझे..........

वो आदमी हम मुझे और सोनू को उस घर में बंद करके चला गया था। हम दोनों ही एक दूसरे को देख रहे थे। समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर करें क्या? इसने हमें क्यों बंद किया? सोनू अपनी पूंछ हिलाते हुए यहाँ वहाँ सूंघने लगा। अचानक उसने जोर से भौंका। मै समझ गया कि उसे कुछ तो मिल गया है। मैंने जाकर देखा। तो उस पतरे का घर से एक पतरा थोड़ा सा डगमगा रहा था। आखिर था तो एक झोपड़ा।

मैंने और सोनू ने जोर लगाकर उस पतरे को खोला। जैसे ही हम बाहर निकले उस दूकान दार ने पकड़ लिया। जो मकान के बाहर ही था। उसने मुझे एक झापड़ मारा और कहा, चोरी करने घुसा था उस घर में। मुझे मारते देख सोनू उस दूकान दार पर टूट पड़ा। डरकर दूकान दार पीछे हटा ही था कि मैं और सोनू वहाँ से भागने लगे। तभी उस दूकान दार ने जोर जोर चिल्लाना शुरू किया। चोर, चोर, चोर। चोरी करके भाग रहा है। वहाँ खड़े लोगों ने पहले कभी इतनी फूर्ती नहीं दिखाई होगी। जितनी फूर्ती से उन्होंने मुझे पकड़ा। मुझे पकड़कर मेरा हाथ मड़ोरा ही था कि वहाँ पर पोलिस आ गई। लोगों ने पोलिस के हवाले कर दिया। पोलिस ने सोनू और मुझे पोलिस स्टेशन ले जाकर बैठा दिया।

सोनू ने अचानक दीवार पर देखकर भौंकना शुरू किया। मैंने भी दीवार पर देखा तो चौंक गया। मेरी तस्वीर दीवार पर लगी थी। मैं समझ गया। जिसकी मुझे तलाश थी वह यही है। यह तो हुबहू मेरे तरह दिख रहा है। अब इसे कैसे ढुंढा जाए। मैंने एक हवलदार से पूछा, यह जो तस्वीर में लड़का है वो मुझे कहाँ मिलेगा। हवलदार ने तस्वीर देखी और एक झापड़ लगा दिया। कहा, वाह रे! आपून को सेंडी लगाता है। छोटा सा लड़का आपून को मामू बना रहा है। तेरी तस्वीर दिखाके बोलता है ये किधर मिलेगा। बहोत दिन से तेरी तलाश थी। बहोत से लोगों को तुने चूना लगाया है।

आज हाथ में आने पर बहोत मासूम बन रहा है। उसने दूसरे हवलदार को आवाज दी। ए गण्या, कर लें त्याला आत। ध्यान दें इसपे। वरना भाग जाएगा। दूसरे हवलदार ने कहा, दो घंटे से बैठा है। अभी तक तो भागा नहीं। तभी इंस्पेक्टर साहब आ गए। उन्होंने मुझे देखते ही कहा, वाह ! आज पोलिस चौकी में आ ही गया। बोल कितना बड़ा हाथ मारा। मैंने कहा, साहब मैंने किसी को नहीं मारा। इंस्पेक्टर ने कहा, अरे! किसका माल उड़ाया।

मैंने कहा, किसी को भी नहीं उड़ाया। बल्कि ये हवलदार मुझे लाया और इधर बिठाया। उनको पूछ लो मैंने कुछ नहीं किया। इंस्पेक्टर ने हवलदार को देखा, और कहा, क्या रे। किधर से पकड़ा। हवलदार ने कहा, पब्लिक ने इसको पकड़ के दिया। बोला चोर है। पर इसके पास चोरी का कुछ नहीं था।

मैंने का साहब मैंने कुछ नहीं चुराया। इंस्पेक्टर ने मुझे ध्यान से देखा और बोला। क्या ये! आज कुछ नशा किया क्या? इतना मासूम बन रहा है। बता पिछले हफ्ते तुने जो मार्केट के बनिया का गल्ला उड़ाया। उसका क्या किया? हफ्ता देने को भारी पड़ता है। और अभी मासूम बनता है। मैंने कहा, साहब आप जो समझ रहें हैं, वो मैं नहीं हूँ। इंस्पेक्टर ने डांटकर कहा, आज तेरे को अंदर करता हूँ। मेरे को चूना लगाएगा। तभी मेरा हमशक्ल वहाँ आ गया। आते ही उसने इंस्पेक्टर को कहा, सलाम साहब। वो थोड़ा आपून बिज़ी हो गया था। इसलिए हफ्ता देने को लेट हो गया। दोनों हवलदार और इंस्पेक्टर ध्यान से उसे देखते और फिर मुझे। तभी उसकी नज़र मुझपर पड़ी। वो मुझे देखते ही चौंक गया।

और कहा, मायला, ये कौन रे? एक आपून का काॅपी लग रहा है। कौन रे तू? किधर से आया। मैंने हँसते हुए कहा, भाई मै तुम्हे ही ढुंढ रहा था। अच्छा हुआ आप आ गए। मेरे हमशक्ल ने कहा, देख आपून ने बहोत सारी जुड़वां भाई की फिल्म देखी है। मैं समझ गया तु आपून का जुड़वां भाई है ना। आपून के पास बाप है तो माँ तेरे पास होएगी ना। बोल ना रे! बोल ना। आपून कभी माँ को नहीं देखा। तभी इंस्पेक्टर ने कहा, देख पप्पू। फटाफट हफ्ता दे। लेके जा अपने भाई को इधर से। बाहर जाके तेरी पिक्चर पूरी कर इसके साथ। मेरे हमशक्ल पप्पू ने जे से कुछ पैसे निकाल कर इंस्पेक्टर के हाथ में दिए। इंस्पेक्टर ने कहा, शाबाश। टाईम से हफ्ता देने का। पप्पू ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, सलाम साहब। अभी आपून जाता है भाई को लेकर। पप्पू मेरे साथ बाहर आया। उसने सोनू को देखकर कहा, मस्त कुत्ता है ये तेरे पास। कुछ खाया की नहीं। ये मामू लोग भी ना तेरे को आपून समझ के पकड़ लिया। तु टेंशन मत ले। आपून का बहोत वट है। ये लोग भी क्या करेगा।

आपून चोरी नहीं करेगा तो खाएगा क्या? ये पोलिस लोग आपून को बंद करके फोकट का खाना खिलाएगा नहीं। ये लोग हफ्ता लेकर मेरे को तो छोड़ देता है, पर जो चोरी का सामान मेरे से खरीद कर अपने दुकान में बेचने वाले बड़े पार्टी को पकड़ता है। जिसका सामन उसको मील जाता है। बड़ चोर को फटका पड़ जाता है। मेरे खोली पे चल कुछ खाते हैं। मेरा भाई है तू। मैंने भी कंधे पर हाथ रखकर चलने में भलाई समझी।

मुझे पता है कि यह मेरा भाई नहीं है बल्कि मेरी ही छवी है। वो भी इस पृथ्वी का। पर पप्पू ने तो फिल्में बहुत देखी है। उसपर तो फिल्म का भूत सवार है। वह खुश हैं कि उसका एक जुड़वां भाई भी है। इसके जरिए मुझे माँ मील जाएगी। मैं जब उसके घर पहुंचा तो हैरान रह गया।

मेरे पिताजी इसके घर पर। पर कुछ पल में ही समझ भी गया कि यह तो मेरे पिताजी के छवी हैं। पप्पू का घर छोटा सा था वो भी एक चॉल में। पर था बड़ा सुंदर। पप्पू के पिताजी ने कहा, अरे यह कौन है? इसे कहाँ से ले आया? पप्पू ने कहा, मेरा जुड़वां भाई। माँ ने भेजा होगा। तभी मुझे ढ़ूढंते हुए यहाँ तक आया है। आपने तो कभी मुझे माँ के बारे में नहीं बताया। अब यह बताएगा। पप्पू के पिताजी मुझे ध्यान से देख रहे थे। पर कुछ बोले नहीं।

पप्पू दौड़कर बाहर गया। मेरे लिए भजिए और सोनू के लिए बिस्किट ले आया। जब मैंने खा लिया तो उसका पहला सवाल यही था माँ कैसी है? मैं कहता भी क्या ? मैं चुपचाप उसके पिताजी को देखने लगा। पप्पू के पिताजी ने पप्पू से कहा, बेटा निराश मत हो। मैं तुझे आज तेरी माँ के बारे में बताता हूँ।

बहुत समय पहले की बात है। मैं एक बार चोरी करने एक पैसे वाले के घर गया था। वो घर तेरी माँ का था। रात के समय खिड़की से जब मैं उस घर में घुसा तो घर में काफी अँधेरा था। खिड़की खोलने पर चाँद की रोशनी तुम्हारी माँ पर पड़ी। उसका सुंदर चेहरा देखकर मैं उसी समय उसपर मोहित हो गया। मैंने उस समय चोरी नहीं की। पर रोज तुम्हारी माँ को देखने उसके घर के पास पहुंच जाता था। मैं खिड़की से उसे देखता और वो मुझे देखती।

हम दोनों एक दुसरे को चाहने लगे। हमने तुम्हारे नाना के डर से भागकर शादी कर ली। शादी के बाद मैंने चोरी करना छोड़ दिया था। दो वर्ष बाद तुम पैदा हुए। तुम्हारे पैदा होने के बाद हम दोनों खुश थे। एक दिन मैं तुम्हें बाजार लेकर गया था। जब वापस घर आया तो तुम्हारी माँ बेहोश पड़ी हुई थी। मैं तुंरत उसे अस्पताल ले गया। वहाँ डाॅक्टर ने बहुत ईलाज किया। पर वह होश में नही आई। डाक्टर का कहना था कि वह कोमा में चली गई हैं। उस दिन ऐसा क्या हुआ उसके साथ यह मुझे पता नहीं। पर इतना मालूम हुआ कि कोई आया था मेरे घर। लोगों ने उसे घर के अंदर आते देखा था पर बाहर जाते नहीं देखा। आज भी तुम्हारी माँ अस्पताल में है।

मैंने चोरी करना फिर से शुरू कर दिया। जो भी पैसा मिलता है। उसमें से आधा अस्पताल में चला जाता है। मैं एक बार एक मंदिर में गया था वहाँ एक बाबा ने कहा था। जिस दिन तुम्हारे घर तुम्हारे बेटे का हमशक्ल आएगा। वहीं तुम्हारी पत्नी को ठीक करने का कारण बनेगा। उस समय कुछ समझा नहीं था।

पर आज तुम्हें देखकर उस बूढ़े व्यक्ति की बात याद आ गई। इसलिए जब तुम आए तो मैं तुम्हें देखता रह गया। मन में खुशी भी हुई कि मेरी पत्नी ठीक हो जाएगी। मैंने भी कहा, हाँ ठीक हो जाएगी। जैसे पप्पू की माँ बिस्तर पर है वैसे ही मेरी माँ भी बिस्तर पर है। उन्हें ठीक करने में मुझे आपकी मदद चाहिए।

पप्पू ने कहा, तू चिंता मत कर। तू जो बोलेगा आपून सब करेगा। मैंने कहा, तुम्हारे पास तुम्हरा कौन सा हथियार है जो तुम्हें बहुत पसंद है। जिसे तुम हमेशा अपने पास रखते हो। पप्पू ने कहा, नहीं मेरे पास ऐसा कोई हथियार नहीं है। मैंने कहा, तुम्हें वो हथियार तुम्हारे पिताजी ने दी होगी। याद करो।

पप्पू ने कहा, देख पिताजी इधर ही बैठे हैं। इन्होंने सिर्फ तिजोरी खोलना सिखाया मेरे को। और कुछ भी दिया नहीं। बस ये चुंबक (मैग्नेट) दिया था मेरे को। तिजोरी खोलने के वास्ते। ये मैं हमेशा अपने पास रखता हूँ। गले में पहनकर रखता हूँ। पप्पू ने कहा, हाँ मैंने भी इसे सिर्फ यह चुंबक ही दिया है।

क्योंकि यह मेरा था। मैंने कहा, बस यही चाहिए मुझे। पप्पू ने कहा, ये मामूली सा चुंबक हथियार है। ऐसा तो बहोत मिलता है, मार्केट में। मैंने कहा, हाँ यह मामूली सा चुंबक ही मेरी और मेरी माँ की जान बचा सकता है। तुम यह मुझे दे दो। यह सुनकर पप्पू ने मुझे वह चुंबक उतार कर दे दिया। पप्पू के पिताजी ने कहा, अब क्या करोगे? मैंने कहा, मेरे पास यह दो हथियार हो गए हैं। अब पांच और एकत्र करने हैं। अब मैं चलता हूँ। पप्पू ने कहा, मैं भी चलता हूँ। मैंने कहा, नहीं तुम यहीं रहो अपने पिताजी के पास। तुम्हारी शक्ती अब मेरे पास है। जल्दी ही तुम्हारी माँ ठीक हो जाएगी। मैंने उस चुंबक को अपने गुलेल पर रखा और चुंबक गुलेल में समा गया। सामने ही धुंध ही धुंध फैल गया। मैं सोनू के साथ उस धुंध में प्रवेश कर गया।

धुंध से बाहर निकलते ही मेरे सामने था.........

मैं उस धुंध से बाहर निकला तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गई। मेरे सामने ही एक नदी बह रही थी। मेरे पीछे 200 फिट की दीवार की तरह एक पहाड़ खड़ा था। ऐसा लगा जैसे मैं उसी पहाड़ से अभी अभी निकला। दूर दूर तक वहाँ कोई दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसा लगा जैसे यहाँ इंसानों का दूर दूर तक नामों निशान नहीं है। पिताजी ने कहा था कि मैं हमेशा अपने रूप के एक किलोमीटर के अंतर्गत ही रहूँगा। पर यहाँ तो इंसान ही नहीं दिख रहें हैं। मैं और सोनू नदी के किनारे पहुंच गए। हम नदी के किनारे गोल गोल पत्थरों को पानी में फेंकने लगे।

पानी इतना साफ था कि उसमें तैरने वाली मछलियों भी साफ साफ दिखाई पड़ रही थी। तभी एक भयानक आवाज ने मेरे होश उड़ा दिए। मुझे ऐसा लगा कि कोई भयानक जानवर मेरे आसपास ही है। मैंने यहाँ वहाँ देखा, पर कोई भी जानवर दिखाई नहीं दिया। तभी मेरे सोनू ऊपर देखकर जोर जोर से भौंकने लगा। मैंने भी ऊपर देखा और पानी में छँलाग लगा दी। एक भारी भरकम जीव आकाश से उड़ता हुआ आया और सोनू पर झपट्टा मारा। मैंने पहली बार ऐसा उड़ता हुआ जानवर देखा था। मगरमच्छ सा मुंह, लंबी सी पूँछ और चमगादड़ की तरह लंबे लंबे पंख।

सोनू को उठाकर वह हवा में उड़ने लगा। मैं 12 वर्ष का बच्चा आखिर करता भी क्या? बस उसे देखते ही जा रहा था। वह सोनू को उठाकर उसी पहाड़ी में बने एक गुफा में ले गया। मैं अपने सोनू को इस तरह देख नहीं सका। मेरे आंँखो में दर्द के आँसू बहने लगे। पर मैंने अपने आँसू पोछें। उसके बाहर आने के पूर्व मैंने वहाँ से भाग जाना उचित समझा। मैं उस नदी से बाहर आया। वहाँ से भागते हुए मैं पहाड़ी के किनारे किनारे दौड़ने लगा। पता नहीं पर क्यों मेरे दौड़ने की गति सामान्य से कहीं अधिक तेज थी। दौड़ते दौड़ते मैने एक पत्थर से छंलाग लगाई।

पर छंलाग लगाते ही मैं काफी ऊंचाई तक उड़ा। और दूसरे पत्थर पर पहुंच गया। उस समय सोचने का वक्त नहीं था कि मेरे पास यह शक्ती कहाँ से आई। क्योंकि डर और सोनू के बिछड़ने की तकलीफ़ ने मेरे हृदय को अंदर से झकझोर दिया। मैं दौड़ते दौड़ते पर्वत के दूसरी तरफ पहुंच गया। वहाँ से लगभग बहुत दूर एक बस्ती दिख रही थी। वह बस्ती अर्थात कुछ झोपड़ दिख रहे थे। मैं उसी रफ्तार से उस ओर दौड़ा।

उस बस्ती के पास पहुंचा तो देखा कि वह एक छोटा सा गांँव है। सभी मकान घास फूस और लकड़ियों से बने हुए हैं। लोग वहाँ बाजारों में सामान की खरीदारी कर रहें हैं। कुछ लोग लकड़ीयाँ काटकर ला रहे हैं। कुछ लोग तलवार बना रहे हैं। कुछ लोग वहाँ बोझा ढोने का काम कर रहे हैं। सभी के कपड़े फटे पूराने दिख रहे थे। तभी मेरी नजर वहाँ के दुकानों पर गई। वहाँ पर हर दुकान में दुकानदार महिला थी। उनके कपड़े बड़े ही सुंदर थे। तभी वहाँ मैंने एक औरत की आवाज सुनी। वह जोर से चिल्लाए जा रही थी। वह एक ऊंचे स्थान पर खड़ी होकर कह रही थी। ले लो, ले लो, अच्छे और तगड़े गुलाम। गोरे गुलाम, काले गुलाम। तरह तरह के गुलाम लाई हूँ। उसके पीछे एक बड़ा सा पिंजरा था। पिंजरे में लगभग १० से १२ हट्टे कट्टे नौजवान थें। वह स्वंय एक २० या २२ वर्ष की युवती अर्थात नौजवान लड़की थी।

उस युवती के साथ कुछ और महिलाएं थी। जो सैनिकों का वस्त्र धारण किए हुए थी। सभी के हाथों में हथियार था। हथियार अर्थात किसी के हाथ में तलवार तो किसी के हाथ में भाला था। उस युवती के आवाज देने पर बहुत सी महिलाएं वहाँ आ गई। उस युवती ने पिंजरे से एक गुलाम बाहर निकाला और उसकी किस्मत बताई। वहाँ उपस्थित सभी महिलाएं बारी बारी से उसके दाम बोलने लगी। एक महिला ने अधिक कीमत देकर उस गुलाम को खरीद लिया। उस युवती ने उस गुलाम के गले में एक रस्सी डालकर उसे उस महिला के हवाले कर दिया। जिसने उसे खरीदा था। वह महिला उसे जानवरों की तरह खिंचते हुए ले गई। मुझे यह बड़ा ही अजीब लगा। वहाँ मुझे कोई बालक नजर नहीं आ रहा था।

मैंने पहली बार ऐसा दृश्य देखा था। जहाँ महिलाऐं अपना हुकूम कर रही थी और पुरुष उनकी गुलामी कर रहे थे। और गुलामों की प्रथा यहाँ अभी भी जिन्दा थी। बल्कि हमारे पृथ्वी पर यह प्रथा समाप्त हो चली थी। यह भले सच्चाई है कि हमारे पृथ्वी पर भी महिलाओं का ही राज है। हमारे यहाँ भी पुरुषों को महिलाएं ऊंगली पर नचाती हैं। यह बात अलग है कि हमारे पुरूष घर के अंदर गुलाम होते हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है।

पर यहाँ तो पुरूषों को बेचा जा रहा है। वो भी गुलाम के रूप में। और यहाँ महिलाओं का ही राज है। यहाँ पर तो पुरूषों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। मैंने सोचा, यहाँ से भागना ही उचित होगा। तभी उस युवती की नजर मुझ पर पड़ी। मैं वहाँ से भागता, उसके पहले ही वह युवती रोते हुए मेरी ओर दौड़ पड़ी। मैंने भागना चाहा, तो उसके सैनिकों ने मुझे घेर लिया। वह दौड़ते हुए मेरे पास आई। मुझे गले से लगाकर बोली। मेरा भाई जीवित है। मेरा प्यारा भाई जीवित है। उसने मेरे माथे को चूमकर बोली, मैंने तो सोचा, कि वो दैत्य तुम्हें निगल गया होगा। तुम उसके चंगुल से कैसे बचें।

सभी मुझे ध्यान से देखने लगे। सभी एक दुसरे से खुसर फुसर कर रहे थे। सभी के चेहरे की हैरानी साफ साफ दिखाई दे रही थी। मैं भी समझ चुका था कि मैं इसका भाई नही हूँ। पर मुझे जिसकी तलाश है वह इसका भाई है। उस युवती ने मेरे कपड़े की ओर देखा और कहा, यह कैसे कपड़े पहन रखें हैं। ऐसे कपड़े किसने दिए तुम्हें। उसने मेरे कपड़े को हाथ लगाकर देखा और कहा, इतने मुलायम और रंगीन कपड़े।

यह किस चीज से बने हुए हैं? यह किसने दिए ? अब मैं क्या कहता, वहाँ तो सभी ने चमड़े की पोशाक पहनी हुई थी। मेरा चेहरा देखकर उसने कहा, थक गया होगा तू। घर चल बैठकर बातें करते हैं। मैंने कहा, ठीक है ले चलो। उसने मेरी आवाज़ सुनकर कहा, तेरी आवाज़ और बोली को क्या हो गया है? मैंने खाँसकर चेक किया। तो उसने कहा, हां भूख प्यास के मारे ऐसी हालत हो गई है तेरी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे एक घोड़े पर बिठा लिया। मैं आगे और वह मेरे पीछे बैठकर घोड़ा दौड़ाने लगी। कुछ ही दूरी पर एक बड़ा सा गाँव था। उस गाँव में बड़े बड़े आलीशान घर थे।

वहीं पर एक बड़ा सा महल भी था। पर वह युवती एक बड़े से आलीशान घर के बाहर उतरी। मैंने देखा घर के चारों ओर और घर के बाहर महिला सैनिक खड़ी हैं। मुझे देखने के लिए पूरी भीड़ एकत्र हो गई थी। उसमें से एक ने कहा, वाह! दैत्य के चंगुल से वापस आ गया। यह जब राजकुमारी सुनेंगी तो बहुत खुश होंगी। आखिर उनका पसंदीदा गुलाम लौट आया है। घर के अंदर प्रवेश किया तो घर में भी चार गुलाम थे जो घर का काम-काज कर रहे थे। मैं बस यहाँ वहाँ ध्यान से देख रहा था। उसने पीछे से आवाज दी। वीनी, वीनी। मैं जब नहीं पलटा तो वो मेरे पास आकर बोली, वीनी क्या हो गया है तुम्हें? वहाँ बाजार में भी तुम भागने की कोशिश कर रहे थे। क्या तुम मुझे पहचान नहीं रहे ?

मैं तुम्हारी बहन हूँ, वीना। मैंने कहा, देखो वीना मुझे तुमसे कुछ बातें करनी हैं। वीना ने कहा, कहो क्या कहना चाहते हो? मैंने कहा, यहाँ नहीं। अकेले में। वीना ने कहा, ठीक है। उसने मुझे एक कमरे में बिठाया। और बहुत से फल और मेवा खाने के लिए मँगवाया। मैंने कहा, वीना ध्यान से सुनो और बताओ। मैं तुम्हरा भाई नहीं हूँ। मैं तुम्हारे भाई का हमशक्ल हूँ। मैं बड़ी दूर से यहाँ आया हूँ। मैं तुम्हारे भाई को ढूँढते हुए यहाँ तक आया हूँ।

वीना ने कहा, मेरे भाई को ढूंढते हुए यहाँ तक आ गए। ऐसा क्या काम है तुम्हें? तुम तो मेरे भाई जैसे ही हुबहू दिखते हो। मैंने कहा, मैं क्यों आया हूँ यह तुम्हें जरूर बताऊँगा। पर यह बताओ, तुम्हारे भाई को कौन सा दैत्य उठा ले गया? वीना ने कहा, वह दैत्य पहाड़ी पर बने एक गुफा में रहता है। वह सिर्फ बच्चों और छोटे जानवरों का शिकार करता है। चाहे छोटा बच्चा हो या कोई भी छोटा प्राणी। वह उसे उठाकर अपनी गुफा में ले जाता है। उस दैत्य ने ही मेरे पिताजी को भी घायल कर दिया। जब वो वीनी को उससे छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे। उस दैत्य ने आज के करीब दस वर्ष पूर्व मेरी माता को भी घायल कर दिया था। उस समय मेरी माता यहाँ की सेनापति थी। राजकुमारी को बचाने में उन्होंने अपने प्राण संकट मे डाल दिए। उस दैत्य ने मेरी माँ को घायल कर दिया। तभी से वह मुर्छित हैं। इसलिए उनके योगदान को देखते हुए रानी साहिबा ने पिताजी को राजमहल में नौकरी दी,और मेरे भाई को भी राजकुमारी के देखरेख के लिए रखा। अब पिताजी भी मुर्छित पड़े हैं। भाई को भी दैत्य ले गया। इसलिए मैंने गुलामों का व्यापार करना आरंभ किया। अब कुछ तो करना ही पड़ेगा। मैंने कहा, तो उस दैत्य को मार क्यों नहीं देते। वीना ने कहा, इतने बड़े दैत्य को मारने की हिम्मत किसी में नहीं है। मैंने कहा, तुम्हारे यहाँ सिर्फ रानी है, और तुम्हारे राज्य का राजा कहाँ हैं? वीना ने कहा, हमारे पिताजी ने हमें बताया था यह राज। क्योंकि पिताजी रानी साहिबा के गुलाम थे। रानी की आयु लगभग ५०० वर्ष से भी अधिक है। वह सभी मर्द जाति से नफ़रत करती है। रानी साहिबा को एक समय एक पुरुष से बेहद अधिक प्रेम था। वह उसे दिलोजान से चाहती थी। पर वह पुरूष धोखेबाज था।

उस पुरुष ने किसी और के साथ नाजायज संबंध बनाए। यह बात रानी साहिबा को पता चल गई। रानी साहिबा एक बहुत बड़ी जादुगरनी भी है। उन्होंने उस पुरूष पर जादू करके उड़ने वाला दैत्य बना दिया। और उस स्त्री को पत्थर का बनाकर उस गुफा में रख दिया। तब से वह दैत्य उसी गुफा में रहता है। जब तक वह दैत्य जीवित रहेगा तब तक वो रानी साहिबा जीवित रहेंगी। इसलिए वह जानबूझकर उस दैत्य का शिकार करने नहीं देती। हाँ पिताजी ने बताया था कि उस दैत्य को आसानी से नहीं मारा जा सकता। रानी साहिबा के पास एक ऐसी तलवार थी जिससे उसे मारा जा सकता था। भाई ने उस दैत्य को मारने के लिए वह तलवार राजमहल से चुरा ली थी। वो उसे मार भी देता अगर पिताजी घायल नहीं हुए होते तो। पिताजी के घायल होने पर तलवार जमीन पर गिर गई। वो पिताजी की ओर दौड़ा। वो दैत्य वीनी को उठाकर ले गया। मैंने कहा, वो बच्चों और जानवरों को ले जाकर क्या करता है? वीनी ने बताया, वो दैत्य हर अमावस्या को एक जानवर और एक बच्चे को साथ में बली देता है उस पत्थर के सामने। यह अमावस्या आखिरी है।

इस अमावस्या को अगर उसने यह बली दे दी। तो वह अपनी प्रेमिका को फिर से जीवित कर देगा और खुद भी बहुत शक्तिशाली हो जाएगा। फिर वह रानी साहिबा को मारकर इस राज्य को भी नष्ट कर देगा। उसकी प्रेमिका भी एक जादूगरनी है। उसने मेरे भाई वीनी को तो ले गया पर एक जानवर मिलना बहुत मुश्किल है। हम सभी लोगों ने अपने सभी जानवरों को अपने घर में छुपा रखा है। मैंने कहा, तब तो बड़ा ही अनर्थ हो गया। वह मेरे कुत्ते सोनू को ले गया है। वीना ने माथे पर हाथ रख लिया। वीना ने कहा, अब इस राज्य को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। रानी साहिबा निश्चिंत हैं। उन्हें लगता है वो तलवार उनके पास ही है। उन्हें कोई नहीं मार सकता। अमावस्या को अब सिर्फ दो दिन ही रह गया है। मेरा भाई वीनी भी अब मारा जाएगा। मैंने कहा, तुम चिंता मत करो। वो तलवार अब रानी साहिबा की नहीं बल्कि तुम्हारे भाई की है। क्योंकि उसने अपनी साहस से उसे चुराया था। वो तलवार इस समय कहाँ हैं? वीना ने कहा, मेरे पास है। मैंने कहा, फिर तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं। वो तलवार मुझे लाकर दो। इस समय मैं तुम्हारे दुनिया में हूँ।

अगर तुम्हारा मरेगा तो मेरा भी अंत हो जाएगा। हम दोनों एक तार से जुड़े हुए हैं। मैं इस दुनिया से नहीं बल्कि दूसरे दुनिया से आया हूँ। तुम्हारा भाई मेरा ही एक रूप है। अगर तुम्हारा भाई मरा तो मैं भी जीवित नहीं बचूंगा। मुझे अपनी जान बचाने और दो और लोगों की जान बचाने के लिए उस दैत्य से लड़ना होगा। वीना हैरान होकर सब सुन रही थी। मैंने कहा, जाओ वीना वो तलवार लाकर मुझे दो। मैं उससे लडूँगा। वीना ने कहा, पर तुम अभी बहुत छोटे हो। मैंने कहा, मैं भले ही छोटा हूँ पर मेरी शक्ति और मेरा साहस बहुत बड़ा है। वीना दौड़कर गई और वो तलवार ले आई।

वीना ने कहा, मैं भी चलूंगी तुम्हारे साथ। मैंने कहा, नहीं। तुम अपनी जान खतरे में मत डालो। मैंने वीना के हाथ से तलवार ले ली। मैंने वीना से कहा, तुम मेरी एक मदद करो। मुझे उस पहाड़ तक छोड़ दो। वीना ने मुझे घोड़े पर बिठाया और खुद पीछे बैठकर घोड़ा तेज गति से दौड़ाने लगी। कुछ ही समय में मैं उस पहाड़ के करीब आ गया। मैंने वीना से कहा, तुम मुझे यहीं उतार दो। वीना ने मुझे पहाड़ के नीचे उतार दिया। मैंने तलवार को अपनी कमर में बाँध लिया। और पहाड़ चढ़ना प्रारंभ किया। शाम हो चुकी थी। मैंने तेज़ गति से पहाड़ चढ़ना प्रारंभ किया। अंधेरा छा गया था। रात का समय और भी भयानक महसूस हो रहा था। साथ में उस दैत्य की लंबी लंबी सांसे और उसकी भयानक आवाज से पूरा शरीर काँप जा रहा था। मैंने गुफा के अंदर देखा तो काफी अंधेरा था। मैंने झट से एक बड़ी सी लकड़ी ले ली।

गुफा के अंदर काफी काई जमा थी। मैंने अपना शर्ट निकाल कर उस लकड़ी से बांध दिया। मैंने दो पत्थरों को एक दूसरे पर मारकर आग उत्पन्न की और मशाल जला ली। एक हाथ में मशाल और दुसरे हाथ में तलवार लेकर मैं गुफा के अंदर घुसा। पैर तो थर थर काँप रहे थे। पर मैंने सोच लिया था। बेवजह मरने से अच्छा है लड़कर मरूं। थोड़ा हौसला भी था कि मेरे पास शक्तिशाली तलवार थी। गुफा काफी लंबी थी मैं धीरे धीरे अंदर बढ़ता चला जा रहा था। मुझे सोनू के भौंकने की आवाज आई तो मन में तसल्ली हुई की सोनू अभी भी जीवित हैं। मैंने देखा कि एक तरफ सोनू खड़ा है और दूसरी तरफ वीनी जमीन पर बेहोश पड़ा है। वो दैत्य बीचोबीच आँखें बंद करके लेटा हुआ था। मैंने सोचा दबे पांँव आगे बढूँ और इसकी गर्दन उड़ा दूँ। जैसे ही मैं आगे बढ़ा वैसे ही सामने के पत्थर से आवाज आई। मूसा उठो, उठो मूसा। देखो ये लड़का तुम्हें मारने आया है। यह हम दोनों को अलग करना चाहता हैं। इसे जीवित मत छोड़ना उठो।

उसकी आवाज सुनकर वह दैत्य जाग गया। उसने जगह से बीना हिले सिर्फ अपनी पूंछ से मुझे मारा। उसकी पूंछ के मार से मैं गुफा के दीवार पर जा गिरा। मेरे हाथ से वो तलवार छुटकर गिर पड़ी। और मशाल दूसरी तरफ जा गिरी। चारों ओर अँधेरा छा गया। मुझे इतने जोर से लगी थी कि उठने की हिम्मत नहीं थी। फिर भी मैं कहराते हुए खड़ा हुआ। वह दैत्य अँधेरे में मेरी ओर बढ़ने लगा। शायद उसे अँधेरे में दिखाई दे रहा था। मुझे उसके मुंह से निकलती हुई साँस की बदबू के झोंके से एहसास हो रहा था। अँधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तभी सोनू ने जलती हुई मशाल उठा ली और उजाला हो गया। जैसे ही वो दैत्य मुझपर झपटा वैसे ही मैं उछलकर उसके सिर पर बैठ गया। अपने दोनों हाथों को उसके आँखो में घुसा दिया। उसने अपना सिर बहुत यहाँ वहाँ झटका पर मैं उसके आँखो में हाथ गड़ाए रखा। तभी उसकी जोर दार चीख निकली। वो दैत्य अचानक जमीन पर गिर पड़ा। मैं उसके सिर से नीचे उतरा तो देखा सामने वीनी हाथ में तलवार लिए खड़ा था। वीनी पूरी तरह से उस दैत्य के खून से सना हुआ था। मैंने वीनी को गले से लगाया। वीनी ने अब तक मेरा चेहरा ध्यान से देखा नहीं था। मैं वीनी और सोनू को लेकर गुफा से बाहर आया। वीनी मुझे देखता उससे पहले वह बेहोश हो गया।

मैं सोनू और वीनी को लेकर पहाड़ से नीचे उतरा तो वीना और कुछ सिपाही खड़ी थी। वीना को देख मैं आश्चर्य चकित हो गया। वीना ने कहा, रानी साहिबा जीवित नहीं रहीं। उनके मौत की खबर सुनकर मैं समझ गई कि तुमने उस दैत्य को मार दिया है। मैंने कहा, मैंने दैत्य को नहीं मारा। वीनी ने दैत्य को मारा है। वीना ने मुझे, वीनी और सोनू को अपने साथ घर ले आई। जब वीनी को होश आया तब वीनी ने मुझे देखा। वीनी मुझे देखकर बहुत हैरान हुआ। मैंने उसे पूरी कहानी बताई और अपने बारे में बताया। मैंने तलवार हाथ में लेकर राजमहल के अन्दर घूस गया। वीनी को वहाँ का राजा घोषित करके वीना को राजकाज सँभालने का अनुग्रह किया। मैंने वीनी और वीना से कहा, अब गुलाम प्रथा बंद करो। हो सके तो स्त्री पुरुष मिलकर अपने राज्य को प्रगति के पथ पर ले जाएँ। वीना ने कहा, उस पत्थर का क्या हुआ? कहीं वो फिर से असल रूप में आ गई तो।

मैंने कहा, ऐसा कुछ नहीं होगा। वीनी ने कहा, तुम भी हमारे साथ यहीं रह जाओ। मैंने कहा, नहीं मैं यहाँ नहीं रह सकता। मेरी मंजिल कुछ और है। बस मेरी एक मदद करो। मुझे अपनी मंजिल पर जाने के लिए इस जादुई तलवार की जरूरत है। वीनी ने कहा, अब इस तलवार की मुझे जरुरत नहीं है। इसे तुम रख लो। मैंने खुशी से वह तलवार ले लिया। मैंने जैसे ही उस तलवार पर अपना गुलेल रखा वैसे ही उस तलवार से एक रोशनी निकली।

मैंने सभी को अलविदा किया और उस रोशनी में प्रवेश कर गया।

जब मैं रोशनी से बाहर आया तो मेरी आंखों के सामने ऐसा मंजर था कि मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा। हवा में धूल और मिट्टी का तुफान, अजीबो गरीब दर्द भरी आवाज और घोड़ों की टाप और घोड़ों की हिनहिनाहट। मैंने पीछे देखा तो एक बड़ा सा पेड़ था। मैं ठीक उसके पीछे छूप गया। सोनू भी मेरे साथ था। धीरे धीरे सामने का मंजर साफ साफ दिखाई देने लगा। मेरे सामने एक कच्ची सी सड़क और उस पर घोड़ों पर सवार कुछ लोग तलवार और भाले से लड़ाई लड़ रहे थे। लड़ाई दो समूहों में हो रही थी। एक समूह ने सफेद कपड़ा तो दूसरे समूह ने काला कपड़ा पहन रखा था। अचानक उनके बीच से एक लड़का भागता और उछलता हुआ जंगल की ओर भागा। दोनों समूह युद्ध छोड़कर उस लड़के के पीछे दौड़े। जैसे ही वो लोग वहाँ से चले गए। मैं पेड़ के पीछे से बाहर आ गया। मैं धीरे से संभलते हुए यहाँ वहाँ देखते हुए उसी कच्ची सड़क पर आ गया। अब उस सड़क के दोनों तरफ देखा और एक ओर चलने लगा। कुछ दूर चलने पर मुझे एक सुंदर सा गाँव दिखाई दिया।

वह गाँव इतना सुंदर इसलिए दिख रहा था क्योंकि उस गाँव के सभी घर लकड़ी के बने हुए थे। पर पूरे गाँव में सन्नाटा था। कोई भी गाँव में दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने पूरा गाँव देखा। गाँव के सभी घर के सामने एक छोटा सा कुआँ और बगीचा था। गाँव में कोई भी जानवर तक नहीं दिख रहा था। मैंने एक घर का दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा अपने आप खुल गया। मैंने घर के बाहर से ही आवाज दी। कोई है घर में? कोई जवाब नहीं आया। मैंने फिर से आवाज दी। पर कोई आवाज नहीं आया। मैंने घर के अंदर जाकर देखा, पर कोई नही था। मैं घर से बाहर आया। मैंने उस गाँव के बहुत से घर देखें पर कोई नही था। मैंने वहाँ से चले जाना ही उचित समझा। तभी मेरी नजर वहाँ के मंदिर पर गई।

मैंने सोचा जरा मंदिर में जाकर देखूं, वहाँ कोई तो होगा। मैं मंदिर मे गया, तो चौंक गया। मंदिर के अंदर कोई मूर्ति नहीं थी। सिर्फ एक आसन बना हुआ था। तभी पीछे से एक आहट हुई और सोनू ने जोर से भौंका। मैंने पीछे मूड़ कर देखा और हट गया। वरना तलवार से मेरी गर्दन अलग हो जाती। मै जमीन पर गिर पड़ा। उसने दूसरा वार किया कि मैंने अपने तलवार से उसके वार को रोक लिया। मैंने जोर से धक्का दिया और सामने का व्यक्ति जमीन पर गिर गया। मैंने गौर से देखा तो वह व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि सफेद वस्त्र धारण किए मेरे पिताजी के ही रूप थे। मैंने तलवार एक तरफ रखकर उन्हें उठाया। उन्होंने कहा, तुम कौन हो? यहाँ क्यों आए हो? जरूर तुम्हें उस जादूगरनी ने मेरे बेटे का रूप देकर मुझे भ्रमित करने के लिए भेजा है।

मैंने कहा, नहीं। मुझे किसी ने नहीं भेजा। मैं स्वंय यहाँ आया हूँ। उन्होंने कहा, सच सच बताओ वरना तुम्हारी जान ले लूँगा। मैंने कहा, मैं सच बोल रहा हूँ। मैं यहाँ का नहीं हूँ। मैं बड़ी दूर से आया हूँ। बल्कि मैं तो इस लोक का भी नहीं हूँ। बस आपके बेटे से मिलने आया हूँ। उन्होंने कहा, मेरे बेटे से क्यों मिलना चाहते हो? मैंने कहा, मैं आपको सब विस्तार से बताऊंगा। पहले ये बताओ कि यह गाँव इतना सूना सूना क्यों हैं। यहाँ के लोग कहाँ गए ?

आप यहाँ अकेले क्यों हो? इस मंदिर के देवता कहाँ हैं? उन्होंने कहा, तुम्हारे इन सवालों से ही ऐसा लगता है कि तुम इस लोक के नहीं हो। इस मंदिर में कोई देवता नहीं क्योंकि हम देवता की नहीं शक्ति की पूजा करते हैं। यहाँ गाँव में जीतने भी लोग हैं वह सभी इस मंदिर के शक्ति की रक्षा करते हैं। मैंने कहा, फिर वह शक्ति कहाँ हैं? उन्होंने कहा, वह शक्ति एक उल्का पिंड का टुकड़ा हैं। जो करीब 500 वर्षों से यहाँ हैं। हम सभी उसकी रक्षा करने हेतु यहाँ रहते हैं। यहाँ सभी एक योद्धा हैं। मैं इस मंदिर का पुजारी हूँ। मैने कहा, फिर वो उल्का पिंड मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहा? उन्होंने कहा, वो उल्कापिंड लेने के लिए जादुगरनी के भेजे गए योद्धा यहाँ आए थे। हमारे योद्धा और उन योद्धाओं के बीच युद्ध हुआ। मेरा बेटा मौका पाकर उस शक्ति को बचाने के लिए यहाँ से ले भागा। दोनों पक्ष के योद्धा उसके पीछे गए हैं। मैं हैरान होकर नीचे बैठा ही था कि घोड़ों की टाप की आवाज सुनाई दी। करीब १५ से २० सफेद कपड़े वाले योद्धा वहाँ आ गए।

उन्होंने मेरे पिताजी के रूप को कहा, वो लोग आपके बेटे टोटू को उठा ले गए। साथ में उस शक्ति को भी ले गए। अब पूरी दुनिया पर वह जादुगरनी हुकूमत करेगी। हम हार गए। मेरे पिताजी ने कहा, डरो मत। वह शक्ति तब तक काम नहीं करेंगी जब तक वह टूटे हुए तारे से बनाया गया वह छोटा सा छल्ला उसे नहीं मिल जाता। उसका राज सिर्फ मुझे और मेरे बेटे को पता है। मैंने कहा, कहाँ हैं वो छल्ला। उन्होंने कहा, वह छल्ला मेरे बेटे के गले में है। चाहे कुछ भी हो जाए मेरा बेटा उन्हें वो राज कभी नहीं बताएगा। मैंने कहा, वो जादूगरनी आखिर कहाँ रहती हैं? मैं जाऊँगा आपके बेटे को वापस लाने। उन्होंने हंसते हुए कहा, तुम छोटे से बालक आखिर उस जादुगरनी को छू भी नहीं सकते। वो जहाँ रहती है वो एक कब्र है। वो भी ऐसा कब्र जो कि बहुत से मायावी शक्ति यों से भरी पड़ी है। वह एक जाल है जिसमें जाने पर कोई वापस नहीं लौट पाता। मैंने कहा, आपका बेटा मुश्किल में है। उसकी जान खतरे में है। और आप ऐसी बातें कर रहें हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा एक वीर है। उसके मरने का मुझे कोई ग़म नहीं है। मैंने कहा, पर मुझे बहुत ग़म हैं। क्योंकि अगर उसकी जान जाती है तो मैं भी मर जाऊंगा।

क्योंकि मैं भी उसका ही एक रूप हूँ। इस समय मैं तुम्हारे दुनिया में हूँ। मैंने कहा, आपके बेटे का कोई प्रिय हथियार है जो हमेशा उसके पास रहता हैं। उन्होंने कहा, हाँ है। पर आज वो उसके पास नहीं है। तभी तो वह उसे पकड़ सके। मैंने कहा, क्या है वो हथियार? उन्होंने कहा, मेरे पूर्वजों ने टूटे हूए तारे से दो हथियार बनाया था। एक वो छल्ला जो उसके गले में है। दूसरा यह नानचाकू। जिसमें अशिम शक्ति है। पर इसे मेरे वंश का व्यक्ति ही उठा सकता है। क्योंकि वह बहुत भारी है। उसके एक वार से चट्टान तक चूर चूर हो जाएगी। मैंने कहा, वो हथियार मुझे दो मैं उसीके लिए यहाँ आया हूँ। उन्होंने कहा, नहीं मैं वो तुम्हें नहीं दे सकता। वैसे भी तुम उसे उठा नहीं सकते। मैंने कहा, मैं उसी हथियार को लेने दुसरी दुनिया से आया हूँ। मैंने उन्हें अपनी कहानी बताई। मैंने उन्हें विश्वास दिलाया कि जब तक मैं आपके बेटे और उस शक्ति को आपके पास वापस नहीं पहुंचा देता तब तक मैं यहाँ से नहीं जाऊँगा। मेरे पिताजी ने कहा, मेरे पास तुम पर विश्वास करने के अलावा और कुछ नहीं है। इतने बड़े बड़े योद्धा वहाँ से वापस लौट आए और अपने घरों में बैठें हैं।

किसी की हिम्मत नहीं कि वो मेरे बेटे को वापस ले आए। मैंने उनका हाथ पकड़कर कहा, चिंता ना करो। मैं अपना वादा जरूर पूरा करूँगा। शायद इस काम के लिए ही मेरा आगमन हुआ है। मैंने उस नानचाकू को उठा लिया। उसे जब चलाया तो उसमें बिजली की तरंगें निकलने लगी। उन्होंने कहा, बेटा आजतक मेरे बेटे के अलावा इसे कोई उठा भी नहीं सकता था। जितनी रफ्तार से तुमने इसे चलाया है उतनी रफ़्तार से तो मेरा बेटा भी इसे चला नहीं सकता। तुम कोई सामान्य बालक नहीं हो। जाओ मेरे बेटे को छुड़ा लाओ। उसके बाद यह नानचाकू तुम्हरा हो जाएगा। मैंने उस नानचाकू को गले में लटकाया और अपनी तलवार हाथ में ले ली। मैंने उनसे कहा, जब तक मैं लौटकर नहीं आता तब तक आप मेरे कुत्ते सोनू का ध्यान रखें। यह कहकर मैं उसी समय निकल गया। चलते चलते रात हो गई थी। पर वह कब्र कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। मैंने सोचा क्यों ना एक जगह बैठकर रात बीता लूँ। रात के अँधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैं यहाँ वहाँ अच्छी सी जगह देखने लगा कि मेरी नजर जंगल की ओर गई। जहाँ से हल्की सी रोशनी दिखाई पड़ रही थी। मैंने सोचा जाकर देखता हूँ। शायद किसी ने आग जलाई हो। मैं उसी ओर चल पड़ा। जब मैं पास पहुँचा तो देखा एक गुफा के सामने दो पहरेदार खड़े हैं। वो रोशनी उस गुफा के सामने लगे मशाल से आ रही थी। पहरेदार खड़े होकर आपस में बातें कर रहें थे। मैंने उनकी बातें सुननी चाही।

इसलिए एक बड़े से पत्थर के पीछे छूप गया। एक पहरेदार दूसरे पहरेदार से कह रहा था। देख मेरे भाई, हम भी तो इंसान हैं। फिर हमारा और उन शक्तियों के रक्षक का क्या बैर। आज उन्होंने हमारे बहुत से साथियों को मार दिया। हमने भी उनके बहुत से साथियों को मार दिया। जादूगरनी सिर्फ वो शक्ति चाहती है। वो अपने मतलब के लिए ही हमारा उपयोग कर रही है। मरते तो हम हैं। दूसरे ने कहा, कुछ भी मत बोल। वैसे भी हमारी मजबूरी है उसकी गुलामी करना। अगर किसी ने सुन लिया तो हम भी मरेंगे और हमारा परिवार भी। उन रक्षकों का कोई परिवार नहीं। इसलिए जादुगरनी से लड़ते रहते हैं। हमारा तो परिवार है। वैसे भी वो शक्ति मील ही गई है जादूगरनी को। अब वो सबसे शक्तिशाली बन जाएगी।

पहले पहरेदार ने कहा, देख भाई अगर वो अपने मकसद में कामयाब हो जाती है तो इस धरती के सभी इंसानों को अपना गुलाम बना देगी। साथ ही साथ बहुत से हैवानों को जीवित कर देगी। मानवों का जीवन मौत से भी अधिक बत्तर हो जाएगी। दूसरे पहरेदार ने कहा, वैसे भी वो शक्ति अभी तक अधूरी है। जब तक जादूगरनी को वो छल्ला नहीं मील जाता। तब तक वह उस शक्ति का उपयोग नहीं कर सकती। पहले पहरेदार ने कहा, अच्छा तभी तो उस लड़के को जीवित रखा है। वरना वो डायन कब का उसे मार देती। मैंने सूना है कि वह लड़का जानता है कि वह छल्ला कहाँ हैं। उनकी बातें सुनकर मैं हैरान था। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि जादुगरनी के लिए काम करने वाले भी जादुगरनी के सच से अवगत हैं। मैं तुरंत ही उनके सामने आ गया। मुझे देखकर वो चौंक गए। उन्हें लगा मैं कैद से आजाद कैसे हो गया। दोनों मुझे पकड़ने के लिए दौड़े पर मैंने अपने हाथ पैर भी नहीं हिलाए। मैं चाहता था कि वो मुझे पकड़ लें। दोनों ने मुझे पकड़ लिया। एक ने कहा, इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद बाहर आ गया उनके कैद से। सब सो रहें हैं करता? दूसरे ने कहा, इसे भाग जाने देते हैं।

वरना जादुगरनी का मकसद पूरा हो जाएगा। बाकी तो बेवकूफ हैं उन्हें अपनी परवाह नहीं। दोनों ने सहमति जताई और कहा, भाग जा यहाँ से। दुबारा दिखना भी नहीं। मैंने कहा, पकड़ो मुझे और ले चलो। जहाँ पहले कैद किया था। वहीं कैद करो। पहरेदार ने कहा, फिर भागा क्यों वहाँ से? बड़ा शौक है तुझे मरने का। मैंने कहा, पहले ले चलो मुझे। एक पहरेदार ने हँसते हुए कहा, देखो तो इसे। हथियार लेने गया था यह। लगता है जादूगरनी से लड़ने के लिए वापस आया है। मैने कहा, हाँ। दूसरे पहरेदार ने कहा, बच्चा है तू। भाग जा यहाँ से। वह बहुत निर्दयी है। मार डालेगी तुझे। मैंने कहा, मानवों की रक्षा भी करना चाहते हो और जादूगरनी से डरते भी हो। पहले पहरेदार ने कहा, हम कर भी क्या सकते हैं। हमरा परिवार भी तो है। जो कि उसके कैद में है। मैंने कहा, कहाँ हैं तुम्हारा परिवार? मुझे बताओ, मैं उन्हें आजाद कराऊँगा। दूसरे पहरेदार ने कहा, बेटा तुम है छोटा सा पर तेरे अंदर हिम्मत अधिक है। चल तुझे ले चलते हैं। तुझे अगर मरने का शौक है तो हम कर भी क्या सकते हैं? उन्होंने मुझे पकड़कर गुफा के अंदर धकेला। मैंने कहा, आराम से ले चलो। मैं भाग नहीं रहा खुद ही चल रहा हूँ। वह मुझे अंधेरे गुफा से लेकर दूसरी ओर बाहर निकाले तो मेरी आँखों को जो नजारा दिखा। उसपर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। रंग-बिरंगी रोशनी के बीचों-बीच जगमगाता सुंदर सा महल, बड़े बड़े बगीचे और खुबसूरत फलों से लदे हुए पेड़। चारों तरफ रौनक ही रौनक। वहीं पहाड़ीयों के दरारों में बने हुए कैद खाने। जिसे देखकर ही भय लग रहा था। सभी दरारों में महिलाएं और बच्चे मरे हुए थे। मैंने पुछा, इतनी सारी महिलाओं को कैद क्यों कर रखा है? उस पहरेदार ने कहा,

यहाँ हम सभी योद्धाओं के परिवार कैद हैं। जादूगरनी को कोई भी स्त्री फूटीं आँख नहीं भाती। उसका बस चले तो सभी को मार दें। हमारी गुलामी के कारण ही उन्हें जीवित रखा है। मुझे वह पहाड़ों

पर लगी सिढ़ीयो से मुझे उपर की ओर ले जाने लगे। जहाँ पर टोटूकैद था। जैसे ही मैं वहां पहुंचा। टोटू मूझे देखकर उठ खड़ा हुआ। पहरेदार भी हम दोनों को देखकर आश्चर्य चकित हो गए। मैंने अपने गले से नानचाकू निकालकर उसकी ओर फेंका। उसने उस नानचाकू से एक ही वार मैं कैदखाने का गेट तोड़ दिया। मैंने उन दोनों पहरेदारों को कहा, जाओ सभी के परिवारों को आजाद करो। हम जादुगरनी से निपट लेंगे। टोटू ने मुझसे कहा, तुम कौन हो? मेरा हथियार तुम्हारे पास कैसे आया? मैंने कहा, यह कहानी सुनाने का समय नहीं है। तुम्हारे पिताजी ने भेजा है। चलो उस शक्ति को जादूगरनी से हासिल करें। टोटू ने कहा, मुझे पता है कि उसने वो शक्ति कहाँ रखा हैं। मैंने कहा, तुम इस समय शक्ति को वापस लाओ मैं जादुगरनी से निपटता हूँ। टोटू ने कहा, जादूगरनी के हाथ में एक कड़ा है। उसकी सभी जादुई शक्ति उसी मे है। अगर वो कड़ा तुम्हारे हाथ लग जाए तो वह तुम्हरा कुछ नहीं कर सकती। अभी वो सो रही है। और सभी सैनिक भी आराम कर रहें हैं। अच्छा मौका है। मैंने कहा ठीक है। दोनों पहरेदारों ने चुपचाप कैदखाना खोलकर लोगों को भगाना शुरू किया।

टोटू और मैं महल के अंदर घुसे। हम दोनों जैसे ही अंदर घुसे कि योद्धाओं ने हम पर हल्ला बोल दिया। टोटू अपने नान चाकू के वार से योद्धाओं को अधमरा कर दे रहा था और मैं महल के अंदर घूस गया। जादूगरनी के कमरे के अंदर जाकर देखा तो जादूगरनी नदारद। अचानक पीछे से मुझपर बिजली सी चमकती रोशनी का प्रहार हुआ पर मुझ पर उसका कोई प्रभाव नहीं हुआ। पिताजी ने कहा था कि मुझमें असीम जादूई शक्तियां हैं। पर समय आने पर उसका एहसास होगा। मैंने जैसे ही अपनी तलवार को उसकी ओर मोड़ा वैसे ही एक तेज ज्वाला मेरे तलवार से निकली। जादूगरनी उस ज्वाला से बचते हुए गायब हो गई। वह छूप छूपकर मुझपर प्रहार कर रही थी। जैसे ही मैं उसकी ओर मुड़ता वह गायब हो जाती। इस बार जैसे ही वो मेरे पीछे आई और प्रहार के लिए हाथ उठाया, मैं बिना पीछे मुड़े ही अपने तलवार को पीछे की ओर घूमा दिया। जिससे जादूगरनी का वो हाथ कट गया जिसमें उसने वो जादूई कड़ा पहना था। मैंने झट से वो कड़ा उठाकर अपने हाथ में पहन लिया। मैं उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ा ही था कि उसने बांज (चील) पक्षी का रूप धारण कर लिया और वह उड़ गई। मैंने उसके जादूई कड़े को हासिल कर उसकी आधे से अधिक शक्ति छीन ली थी। अब वो बेहद कमजोर थी इसलिए उसने वहाँ से भागना ही उचित समझा। बांज के रूप में उसे भागते हुए सभी ने उसे देखा। सभी योद्धाओं ने टोटू से लड़ना बंद कर दिया। टोटू भागकर गया और उस उल्का पिंड को ले आया जिसे वो शक्ति मानते हैं।

उन सभी योद्धाओं के परिवार मुक्त हो चुके थे। इसलिए सभी योद्धा खुश थे। घायल योद्धा भी बहुत खुश थे कि जादूगरनी के गुलामी से उन्हें आजादी मिल चुकी थी। हम दोनों ही अपने गांँव की ओर बढ़े। जैसे ही हम दोनों गाँव में घूसे वैसे ही टोटू के पिताजी ने हमें गले से लगा लिया। हमने हंसी-खुशी एक दूसरे का साहस उन्हें बता रहे थे। मैंने जब वो जादूई कड़ा टोटू के पिताजी को देना चाहा तो उन्होंने कहा, बेटा इसे तुमने हासिल किया है इसलिए उस कड़े की शक्ति तुम्हारी गुलाम है। इसे तुम अपने साथ ले जाओ। यहाँ यह रहेगा तो जादूगरनी अपनी चालाकी से फिर इसे पा लेगी। अगर उसे उसकी शक्ति मिल गई तो वह हमें तबाह कर देगी। उन्होंने टोटू से कहा, बेटा यह तुम्हारा हथियार नानचाकू इसे दे दो। मैंने इससे वादा किया था। टोटू ने कहा, नहीं यह मेरा प्रिय हथियार है मैं इसे नहीं दुंगा। टोटू के पिताजी ने कहा, बेटा यह लड़का इस हथियार को पाने के लिए बड़ी दूर से आया है। इस हथियार के लिए ही इसने अपना जान जोखिम में डाला। इसने तुम्हारी जान भी बचाई और शक्ति को भी। वादा के अनुसार इसे दे दो। टोटू ने अपना हथियार नानचाकू मुझे थमाया। मैंने उस नानचाकू को अपने तलवार पर रखा और वह तलवार उस नानचाकू में समा गया। नानचाकू का वजन और शक्ति इतनी बढ़ गई कि उसे कोई भी सामान्य व्यक्ति उठा नहीं सकता था। मैंने उस नानचाकू को अपने गले में लटका लिया। गले में लटकाते ही मंदिर के पीछे रोशनी हुई। मैंने टोटू और उसके पिताजी से अलविदा कहा और उस रोशनी में सोनू के साथ प्रवेश कर गया।.........

जब मैं रोशनी से बाहर आया तो मेरी आंखों के सामने ऐसा मंजर था कि मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा। हवा में धूल और मिट्टी का तुफान, अजीबो गरीब दर्द भरी आवाज और घोड़ों की टाप और घोड़ों की हिनहिनाहट। मैंने पीछे देखा तो एक बड़ा सा पेड़ था। मैं ठीक उसके पीछे छूप गया। सोनू भी मेरे साथ था। धीरे धीरे सामने का मंजर साफ साफ दिखाई देने लगा। मेरे सामने एक कच्ची सी सड़क और उस पर घोड़ों पर सवार कुछ लोग तलवार और भाले से लड़ाई लड़ रहे थे। लड़ाई दो समूहों में हो रही थी। एक समूह ने सफेद कपड़ा तो दूसरे समूह ने काला कपड़ा पहन रखा था। अचानक उनके बीच से एक लड़का भागता और उछलता हुआ जंगल की ओर भागा। दोनों समूह युद्ध छोड़कर उस लड़के के पीछे दौड़े। जैसे ही वो लोग वहाँ से चले गए। मैं पेड़ के पीछे से बाहर आ गया। मैं धीरे से संभलते हुए यहाँ वहाँ देखते हुए उसी कच्ची सड़क पर आ गया। अब उस सड़क के दोनों तरफ देखा और एक ओर चलने लगा। कुछ दूर चलने पर मुझे एक सुंदर सा गाँव दिखाई दिया। वह गाँव इतना सुंदर इसलिए दिख रहा था क्योंकि उस गाँव के सभी घर लकड़ी के बने हुए थे। पर पूरे गाँव में सन्नाटा था। कोई भी गाँव में दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने पूरा गाँव देखा। गाँव के सभी घर के सामने एक छोटा सा कुआँ और बगीचा था। गाँव में कोई भी जानवर तक नहीं दिख रहा था। मैंने एक घर का दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा अपने आप खुल गया। मैंने घर के बाहर से ही आवाज दी। कोई है घर में? कोई जवाब नहीं आया। मैंने फिर से आवाज दी। पर कोई आवाज नहीं आया। मैंने घर के अंदर जाकर देखा, पर कोई नही था। मैं घर से बाहर आया। मैंने उस गाँव के बहुत से घर देखें पर कोई नही था।

मैंने वहाँ से चले जाना ही उचित समझा। तभी मेरी नजर वहाँ के मंदिर पर गई। मैंने सोचा जरा मंदिर में जाकर देखूं, वहाँ कोई तो होगा। मैं मंदिर मे गया, तो चौंक गया। मंदिर के अंदर कोई मूर्ति नहीं थी। सिर्फ एक आसन बना हुआ था। तभी पीछे से एक आहट हुई और सोनू ने जोर से भौंका। मैंने पीछे मूड़ कर देखा और हट गया। वरना तलवार से मेरी गर्दन अलग हो जाती। मै जमीन पर गिर पड़ा। उसने दूसरा वार किया कि मैंने अपने तलवार से उसके वार को रोक लिया। मैंने जोर से धक्का दिया और सामने का व्यक्ति जमीन पर गिर गया। मैंने गौर से देखा तो वह व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि सफेद वस्त्र धारण किए मेरे पिताजी के ही रूप थे। मैंने तलवार एक तरफ रखकर उन्हें उठाया। उन्होंने कहा, तुम कौन हो? यहाँ क्यों आए हो? जरूर तुम्हें उस जादूगरनी ने मेरे बेटे का रूप देकर मुझे भ्रमित करने के लिए भेजा है। मैंने कहा, नहीं। मुझे किसी ने नहीं भेजा। मैं स्वंय यहाँ आया हूँ। उन्होंने कहा, सच सच बताओ वरना तुम्हारी जान ले लूँगा। मैंने कहा, मैं सच बोल रहा हूँ। मैं यहाँ का नहीं हूँ। मैं बड़ी दूर से आया हूँ। बल्कि मैं तो इस लोक का भी नहीं हूँ। बस आपके बेटे से मिलने आया हूँ। उन्होंने कहा, मेरे बेटे से क्यों मिलना चाहते हो? मैंने कहा, मैं आपको सब विस्तार से बताऊंगा। पहले ये बताओ कि यह गाँव इतना सूना सूना क्यों हैं। यहाँ के लोग कहाँ गए? आप यहाँ अकेले क्यों हो? इस मंदिर के देवता कहाँ हैं? उन्होंने कहा, तुम्हारे इन सवालों से ही ऐसा लगता है कि तुम इस लोक के नहीं हो। इस मंदिर में कोई देवता नहीं क्योंकि हम देवता की नहीं शक्ति की पूजा करते हैं। यहाँ गाँव में जीतने भी लोग हैं वह सभी इस मंदिर के शक्ति की रक्षा करते हैं। मैंने कहा, फिर वह शक्ति कहाँ हैं ?

उन्होंने कहा, वह शक्ति एक उल्का पिंड का टुकड़ा हैं। जो करीब 500 वर्षों से यहाँ हैं। हम सभी उसकी रक्षा करने हेतु यहाँ रहते हैं। यहाँ सभी एक योद्धा हैं। मैं इस मंदिर का पुजारी हूँ। मैने कहा, फिर वो उल्का पिंड मुझे दिखाई क्यों नहीं दे रहा? उन्होंने कहा, वो उल्कापिंड लेने के लिए जादुगरनी के भेजे गए योद्धा यहाँ आए थे। हमारे योद्धा और उन योद्धाओं के बीच युद्ध हुआ। मेरा बेटा मौका पाकर उस शक्ति को बचाने के लिए यहाँ से ले भागा। दोनों पक्ष के योद्धा उसके पीछे गए हैं। मैं हैरान होकर नीचे बैठा ही था कि घोड़ों की टाप की आवाज सुनाई दी। करीब १५ से २० सफेद कपड़े वाले योद्धा वहाँ आ गए। उन्होंने मेरे पिताजी के रूप को कहा, वो लोग आपके बेटे टोटू को उठा ले गए। साथ में उस शक्ति को भी ले गए। अब पूरी दुनिया पर वह जादुगरनी हुकूमत करेगी। हम हार गए। मेरे पिताजी ने कहा, डरो मत।

वह शक्ति तब तक काम नहीं करेंगी जब तक वह टूटे हुए तारे से बनाया गया वह छोटा सा छल्ला उसे नहीं मिल जाता। उसका राज सिर्फ मुझे और मेरे बेटे को पता है। मैंने कहा, कहाँ हैं वो छल्ला। उन्होंने कहा, वह छल्ला मेरे बेटे के गले में है। चाहे कुछ भी हो जाए मेरा बेटा उन्हें वो राज कभी नहीं बताएगा। मैंने कहा, वो जादूगरनी आखिर कहाँ रहती हैं? मैं जाऊँगा आपके बेटे को वापस लाने। उन्होंने हंसते हुए कहा, तुम छोटे से बालक आखिर उस जादुगरनी को छू भी नहीं सकते। वो जहाँ रहती है वो एक कब्र है। वो भी ऐसा कब्र जो कि बहुत से मायावी शक्ति यों से भरी पड़ी है। वह एक जाल है जिसमें जाने पर कोई वापस नहीं लौट पाता। मैंने कहा, आपका बेटा मुश्किल में है। उसकी जान खतरे में है। और आप ऐसी बातें कर रहें हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा एक वीर है। उसके मरने का मुझे कोई ग़म नहीं है। मैंने कहा, पर मुझे बहुत ग़म हैं। क्योंकि अगर उसकी जान जाती है तो मैं भी मर जाऊंगा। क्योंकि मैं भी उसका ही एक रूप हूँ। इस समय मैं तुम्हारे दुनिया में हूँ। मैंने कहा, आपके बेटे का कोई प्रिय हथियार है जो हमेशा उसके पास रहता हैं। उन्होंने कहा, हाँ है।

पर आज वो उसके पास नहीं है। तभी तो वह उसे पकड़ सके। मैंने कहा, क्या है वो हथियार? उन्होंने कहा, मेरे पूर्वजों ने टूटे हूए तारे से दो हथियार बनाया था। एक वो छल्ला जो उसके गले में है। दूसरा यह नानचाकू। जिसमें अशिम शक्ति है। पर इसे मेरे वंश का व्यक्ति ही उठा सकता है। क्योंकि वह बहुत भारी है। उसके एक वार से चट्टान तक चूर चूर हो जाएगी। मैंने कहा, वो हथियार मुझे दो मैं उसीके लिए यहाँ आया हूँ। उन्होंने कहा, नहीं मैं वो तुम्हें नहीं दे सकता। वैसे भी तुम उसे उठा नहीं सकते। मैंने कहा, मैं उसी हथियार को लेने दुसरी दुनिया से आया हूँ। मैंने उन्हें अपनी कहानी बताई। मैंने उन्हें विश्वास दिलाया कि जब तक मैं आपके बेटे और उस शक्ति को आपके पास वापस नहीं पहुंचा देता तब तक मैं यहाँ से नहीं जाऊँगा। मेरे पिताजी ने कहा, मेरे पास तुम पर विश्वास करने के अलावा और कुछ नहीं है। इतने बड़े बड़े योद्धा वहाँ से वापस लौट आए और अपने घरों में बैठें हैं। किसी की हिम्मत नहीं कि वो मेरे बेटे को वापस ले आए। मैंने उनका हाथ पकड़कर कहा, चिंता ना करो। मैं अपना वादा जरूर पूरा करूँगा। शायद इस काम के लिए ही मेरा आगमन हुआ है।

मैंने उस नानचाकू को उठा लिया। उसे जब चलाया तो उसमें बिजली की तरंगें निकलने लगी। उन्होंने कहा, बेटा आजतक मेरे बेटे के अलावा इसे कोई उठा भी नहीं सकता था। जितनी रफ्तार से तुमने इसे चलाया है उतनी रफ़्तार से तो मेरा बेटा भी इसे चला नहीं सकता। तुम कोई सामान्य बालक नहीं हो। जाओ मेरे बेटे को छुड़ा लाओ। उसके बाद यह नानचाकू तुम्हरा हो जाएगा। मैंने उस नानचाकू को गले में लटकाया और अपनी तलवार हाथ में ले ली। मैंने उनसे कहा, जब तक मैं लौटकर नहीं आता तब तक आप मेरे कुत्ते सोनू का ध्यान रखें। यह कहकर मैं उसी समय निकल गया। चलते चलते रात हो गई थी। पर वह कब्र कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। मैंने सोचा क्यों ना एक जगह बैठकर रात बीता लूँ। रात के अँधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैं यहाँ वहाँ अच्छी सी जगह देखने लगा कि मेरी नजर जंगल की ओर गई। जहाँ से हल्की सी रोशनी दिखाई पड़ रही थी। मैंने सोचा जाकर देखता हूँ। शायद किसी ने आग जलाई हो। मैं उसी ओर चल पड़ा। जब मैं पास पहुँचा तो देखा एक गुफा के सामने दो पहरेदार खड़े हैं। वो रोशनी उस गुफा के सामने लगे मशाल से आ रही थी।

पहरेदार खड़े होकर आपस में बातें कर रहें थे। मैंने उनकी बातें सुननी चाही। इसलिए एक बड़े से पत्थर के पीछे छूप गया। एक पहरेदार दूसरे पहरेदार से कह रहा था। देख मेरे भाई, हम भी तो इंसान हैं। फिर हमारा और उन शक्तियों के रक्षक का क्या बैर। आज उन्होंने हमारे बहुत से साथियों को मार दिया। हमने भी उनके बहुत से साथियों को मार दिया। जादूगरनी सिर्फ वो शक्ति चाहती है। वो अपने मतलब के लिए ही हमारा उपयोग कर रही है। मरते तो हम हैं। दूसरे ने कहा, कुछ भी मत बोल। वैसे भी हमारी मजबूरी है उसकी गुलामी करना। अगर किसी ने सुन लिया तो हम भी मरेंगे और हमारा परिवार भी। उन रक्षकों का कोई परिवार नहीं। इसलिए जादुगरनी से लड़ते रहते हैं। हमारा तो परिवार है। वैसे भी वो शक्ति मील ही गई है जादूगरनी को। अब वो सबसे शक्तिशाली बन जाएगी। पहले पहरेदार ने कहा, देख भाई अगर वो अपने मकसद में कामयाब हो जाती है तो इस धरती के सभी इंसानों को अपना गुलाम बना देगी। साथ ही साथ बहुत से हैवानों को जीवित कर देगी। मानवों का जीवन मौत से भी अधिक बत्तर हो जाएगी। दूसरे पहरेदार ने कहा, वैसे भी वो शक्ति अभी तक अधूरी है। जब तक जादूगरनी को वो छल्ला नहीं मील जाता। तब तक वह उस शक्ति का उपयोग नहीं कर सकती। पहले पहरेदार ने कहा, अच्छा तभी तो उस लड़के को जीवित रखा है। वरना वो डायन कब का उसे मार देती। मैंने सूना है कि वह लड़का जानता है कि वह छल्ला कहाँ हैं। उनकी बातें सुनकर मैं हैरान था। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि जादुगरनी के लिए काम करने वाले भी जादुगरनी के सच से अवगत हैं। मैं तुरंत ही उनके सामने आ गया। मुझे देखकर वो चौंक गए। उन्हें लगा मैं कैद से आजाद कैसे हो गया। दोनों मुझे पकड़ने के लिए दौड़े पर मैंने अपने हाथ पैर भी नहीं हिलाए। मैं चाहता था कि वो मुझे पकड़ लें। दोनों ने मुझे पकड़ लिया। एक ने कहा, इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद बाहर आ गया उनके कैद से। सब सो रहें हैं करता? दूसरे ने कहा, इसे भाग जाने देते हैं। वरना जादुगरनी का मकसद पूरा हो जाएगा। बाकी तो बेवकूफ हैं उन्हें अपनी परवाह नहीं। दोनों ने सहमति जताई और कहा, भाग जा यहाँ से। दुबारा दिखना भी नहीं। मैंने कहा, पकड़ो मुझे और ले चलो। जहाँ पहले कैद किया था।

वहीं कैद करो। पहरेदार ने कहा, फिर भागा क्यों वहाँ से? बड़ा शौक है तुझे मरने का। मैंने कहा, पहले ले चलो मुझे। एक पहरेदार ने हँसते हुए कहा, देखो तो इसे। हथियार लेने गया था यह। लगता है जादूगरनी से लड़ने के लिए वापस आया है। मैने कहा, हाँ। दूसरे पहरेदार ने कहा, बच्चा है तू। भाग जा यहाँ से। वह बहुत निर्दयी है। मार डालेगी तुझे। मैंने कहा, मानवों की रक्षा भी करना चाहते हो और जादूगरनी से डरते भी हो। पहले पहरेदार ने कहा, हम कर भी क्या सकते हैं। हमरा परिवार भी तो है। जो कि उसके कैद में है। मैंने कहा, कहाँ हैं तुम्हारा परिवार? मुझे बताओ, मैं उन्हें आजाद कराऊँगा। दूसरे पहरेदार ने कहा, बेटा तुम है छोटा सा पर तेरे अंदर हिम्मत अधिक है। चल तुझे ले चलते हैं। तुझे अगर मरने का शौक है तो हम कर भी क्या सकते हैं? उन्होंने मुझे पकड़कर गुफा के अंदर धकेला। मैंने कहा, आराम से ले चलो।

मैं भाग नहीं रहा खुद ही चल रहा हूँ। वह मुझे अंधेरे गुफा से लेकर दूसरी ओर बाहर निकाले तो मेरी आँखों को जो नजारा दिखा। उसपर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। रंग-बिरंगी रोशनी के बीचों-बीच जगमगाता सुंदर सा महल, बड़े बड़े बगीचे और खुबसूरत फलों से लदे हुए पेड़। चारों तरफ रौनक ही रौनक। वहीं पहाड़ीयों के दरारों में बने हुए कैद खाने। जिसे देखकर ही भय लग रहा था। सभी दरारों में महिलाएं और बच्चे मरे हुए थे। मैंने पुछा, इतनी सारी महिलाओं को कैद क्यों कर रखा है? उस पहरेदार ने कहा, यहाँ हम सभी योद्धाओं के परिवार कैद हैं। जादूगरनी को कोई भी स्त्री फूटीं आँख नहीं भाती। उसका बस चले तो सभी को मार दें। हमारी गुलामी के कारण ही उन्हें जीवित रखा है। मुझे वह पहाड़ों

पर लगी सिढ़ीयो से मुझे उपर की ओर ले जाने लगे। जहाँ पर टोटू

कैद था। जैसे ही मैं वहां पहुंचा। टोटू मूझे देखकर उठ खड़ा हुआ। पहरेदार भी हम दोनों को देखकर आश्चर्य चकित हो गए। मैंने अपने गले से नानचाकू निकालकर उसकी ओर फेंका। उसने उस नानचाकू से एक ही वार मैं कैदखाने का गेट तोड़ दिया। मैंने उन दोनों पहरेदारों को कहा, जाओ सभी के परिवारों को आजाद करो। हम जादुगरनी से निपट लेंगे। टोटू ने मुझसे कहा, तुम कौन हो? मेरा हथियार तुम्हारे पास कैसे आया? मैंने कहा, यह कहानी सुनाने का समय नहीं है। तुम्हारे पिताजी ने भेजा है। चलो उस शक्ति को जादूगरनी से हासिल करें। टोटू ने कहा, मुझे पता है कि उसने वो शक्ति कहाँ रखा हैं। मैंने कहा, तुम इस समय शक्ति को वापस लाओ मैं जादुगरनी से निपटता हूँ। टोटू ने कहा, जादूगरनी के हाथ में एक कड़ा है। उसकी सभी जादुई शक्ति उसी मे है। अगर वो कड़ा तुम्हारे हाथ लग जाए तो वह तुम्हरा कुछ नहीं कर सकती।

अभी वो सो रही है। और सभी सैनिक भी आराम कर रहें हैं। अच्छा मौका है। मैंने कहा ठीक है। दोनों पहरेदारों ने चुपचाप कैदखाना खोलकर लोगों को भगाना शुरू किया। टोटू और मैं महल के अंदर घुसे। हम दोनों जैसे ही अंदर घुसे कि योद्धाओं ने हम पर हल्ला बोल दिया। टोटू अपने नान चाकू के वार से योद्धाओं को अधमरा कर दे रहा था और मैं महल के अंदर घूस गया। जादूगरनी के कमरे के अंदर जाकर देखा तो जादूगरनी नदारद। अचानक पीछे से मुझपर बिजली सी चमकती रोशनी का प्रहार हुआ पर मुझ पर उसका कोई प्रभाव नहीं हुआ। पिताजी ने कहा था कि मुझमें असीम जादूई शक्तियां हैं। पर समय आने पर उसका एहसास होगा। मैंने जैसे ही अपनी तलवार को उसकी ओर मोड़ा वैसे ही एक तेज ज्वाला मेरे तलवार से निकली। जादूगरनी उस ज्वाला से बचते हुए गायब हो गई। वह छूप छूपकर मुझपर प्रहार कर रही थी। जैसे ही मैं उसकी ओर मुड़ता वह गायब हो जाती। इस बार जैसे ही वो मेरे पीछे आई और प्रहार के लिए हाथ उठाया, मैं बिना पीछे मुड़े ही अपने तलवार को पीछे की ओर घूमा दिया। जिससे जादूगरनी का वो हाथ कट गया जिसमें उसने वो जादूई कड़ा पहना था। मैंने झट से वो कड़ा उठाकर अपने हाथ में पहन लिया। मैं उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ा ही था कि उसने बांज (चील) पक्षी का रूप धारण कर लिया और वह उड़ गई। मैंने उसके जादूई कड़े को हासिल कर उसकी आधे से अधिक शक्ति छीन ली थी। अब वो बेहद कमजोर थी इसलिए उसने वहाँ से भागना ही उचित समझा। बांज के रूप में उसे भागते हुए सभी ने उसे देखा।

सभी योद्धाओं ने टोटू से लड़ना बंद कर दिया। टोटू भागकर गया और उस उल्का पिंड को ले आया जिसे वो शक्ति मानते हैं। उन सभी योद्धाओं के परिवार मुक्त हो चुके थे। इसलिए सभी योद्धा खुश थे। घायल योद्धा भी बहुत खुश थे कि जादूगरनी के गुलामी से उन्हें आजादी मिल चुकी थी। हम दोनों ही अपने गांँव की ओर बढ़े। जैसे ही हम दोनों गाँव में घूसे वैसे ही टोटू के पिताजी ने हमें गले से लगा लिया। हमने हंसी-खुशी एक दूसरे का साहस उन्हें बता रहे थे। मैंने जब वो जादूई कड़ा टोटू के पिताजी को देना चाहा तो उन्होंने कहा, बेटा इसे तुमने हासिल किया है इसलिए उस कड़े की शक्ति तुम्हारी गुलाम है। इसे तुम अपने साथ ले जाओ। यहाँ यह रहेगा तो जादूगरनी अपनी चालाकी से फिर इसे पा लेगी। अगर उसे उसकी शक्ति मिल गई तो वह हमें तबाह कर देगी। उन्होंने टोटू से कहा, बेटा यह तुम्हारा हथियार नानचाकू इसे दे दो। मैंने इससे वादा किया था। टोटू ने कहा, नहीं यह मेरा प्रिय हथियार है मैं इसे नहीं दुंगा। टोटू के पिताजी ने कहा, बेटा यह लड़का इस हथियार को पाने के लिए बड़ी दूर से आया है। इस हथियार के लिए ही इसने अपना जान जोखिम में डाला। इसने तुम्हारी जान भी बचाई और शक्ति को भी। वादा के अनुसार इसे दे दो। टोटू ने अपना हथियार नानचाकू मुझे थमाया। मैंने उस नानचाकू को अपने तलवार पर रखा और वह तलवार उस नानचाकू में समा गया। नानचाकू का वजन और शक्ति इतनी बढ़ गई कि उसे कोई भी सामान्य व्यक्ति उठा नहीं सकता था। मैंने उस नानचाकू को अपने गले में लटका लिया। गले में लटकाते ही मंदिर के पीछे रोशनी हुई। मैंने टोटू और उसके पिताजी से अलविदा कहा और उस रोशनी में सोनू के साथ प्रवेश कर गया।..........

रोशनी से बाहर निकला तो मुझे प्यास लग रही थी। सोचा यहीं आस पास पानी मिल जाता तो प्यास बूझा लेता। अचानक सोनू मेरा कुत्ता भौंकते हुए आगे भागा। उसे मैंने आवाज़ दी पर वो रूका नहीं। मैं भी उसके पीछे दौड़ा। पर सोनू रूकने का नाम नहीं ले रहा था। वह एक ऊँचे स्थान पर जाकर खड़ा हो गया। मैं भागकर वहाँ पहुंचा तो देखा सोनू अपने पैरों को चाट रहा था। मुझे लगा शायद इसे कुछ चुभ गया होगा या फिर चोट लगी होगी। मैंने उसके पैरों को उठाकर देखा तो उसमें काँटे चुभे हुए थे। मैंने उसके पेट पर देखें तो खून निकल रहा था। वहाँ पर भी बहुत से काँटे लगे हुए थे। मैंने उन कांटों को निकालना शुरू किया। मैंने गौर से उन कांटों को देखा तो मैं आश्चर्य चकित हो गया। वह कांटे सुई की तरह पतले थे। उनका आगे का भाग धातू का था। वह छोटे छोटे भाले थे जिस पर नक्काशी की गई थी। और बहुत से छोटे छोटे तीर भी थे। मैं हैरान हो गया कि इतनी बारीक तीर और भाले किसने बनाए होंगे। वहाँ तो कोई था भी नहीं। यह तीर और भाले उस जमीन से चलाए गए थे। क्या यहाँ के कीड़े मकोड़े भी तीर और भाले से वार करते हैं। मैंने अपने जूते पर नजर दौड़ाई तो मेरे जूते पर भी बहुत से तीर भाले थे। मैंने देखा कि एक छोटी सी तलवार भी मेरे जूते में फँसी हुई है। तभी एक मक्खियों का एक झुंड मेरे कंधे पर बैठ गए। पर वह भिन भिनाने के बजाए गुटर गूं कर रहे थे। मैंने देखा तो वह सभी कबूतर थे। मैंने नीचे जमीन पर देखा तो हैरान हो गया। जमीन पर छोटी छोटी झाड़ियों के बीच चींटियों की भीड़ जैसा कुछ दिख रहा था। मैंने झाड़ियां को हाथ से हटाकर देखा तो वह चींटी नहीं बल्कि दो पैरों पर चलने वाले मनुष्य थे। जो यहाँ वहाँ भागने लगे और छुपने लगे। मैं इन्हें देखकर हैरान हो रहा था कि इस दुनिया में लोग कितने छोटे छोटे हैं। अब मैं अपने रूप को कैसे ढूंढ पाऊँगा। यहाँ के तो मानव, प्राणी, पंक्षी सभी छोटे छोटे हैं। तभी एक ऊँची आवाज सुनाई दी। मैंने ध्यान से देखा तो, एक छोटा सा युवक भौंपू लेकर चिल्ला रहा था। मैंने सोचा चलो इन्होंने इतनी तरक्की तो कर ही ली है कि अपनी आवाज मुझ तक पहुंचा रहे हैं। मैंने गौर से सुना, वो चिल्लाकर कह रहा था। हे दैत्य हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था। जो हमारे खेत नष्ट कर दिए। अभी अभी हमने अपने खेतों में बीज बोए थे। अब वहाँ बड़े बड़े खड्डे हैं। हमारे घर तोड़ दिए और हमें बेघर कर दिया। अगर तुम यहाँ से नहीं गए तो हम तुम्हें जीवित नहीं छोड़ेंगे। यह सुनकर मैंने कहा, मुझे माफ़ कर दो आप सभी। मुझसे यह गलती अनजाने में हो गई। पर आप लोग चिंता ना करें। मैं अभी सब ठीक कर दुँगा।

और हाँ मैं कोई दैत्य नहीं हूँ। मैं भी आप लोगों की तरह ही मानव हूँ। मैं जहाँ से आया हूँ वहाँ सभी की लंबाई ऐसी ही रहती है। मेरे हाथ में उस जादूगरनी का जादूई कड़ा था। मैंने सिर्फ हाथ घुमाया और उनके सभी घर फिर से बन गए। उनकी खेती फिर से ठीक हो गया। मैंने अपने कुत्ते सोनू के ज़ख्म पर हाथ फेरा तो वह भी ठीक हो गया। वहाँ के सभी लोग खुशी से नाचने लगे। मैंने वहाँ के सभी लोगों से कहा, आप मुझसे डरो मत। मुझे अपना ही दोस्त समझो। यह सुनकर उन्होंने फिर से भौंपू में चिल्लाकर कहा, क्या पता अभी तुमने हमें दोस्त बोला और दोस्ती में ही हमें खाकर अपनी भूख मिटाने लगोगे। मैंने कहा, नहीं मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा। बस मैं आप लोगों से एक मदद चाहता हूँ। भौंपू से आवाज आई, कैसी मदद? मैंने कहा, आप लोगों के यहाँ मेरी तरह दिखने वाले को ढूंढ रहा हूँ। क्या आप लोग उसे ढूंढने में मेरी मदद करोगे? भौंपू से आवाज आई, पर आपका चेहरा इतना बड़ा है कि हम ठीक से देख नहीं पा रहे कि आप दिखते कैसे हो ?

हाँ तुम्हारी तरह का एक दैत्य है जो तुमसे भी बड़ा है। वो एक ज्वालामुखी पहाड़ में रहता है। वो हमेशा यहाँ आता है और बहुत से लोगों को पकड़कर खा जाता है। उसने बहुत से गाँव उजाड़ दिए हैं। तुम उसे यहाँ से भगा दो तो हम तुम्हारी मदद करेंगे। मैंने कहा, ठीक है। बताओ वह दैत्य कहाँ रहता है। भौंपू से आवाज आई। वह यहाँ से सीधे जाने पर एक बहुत बड़ा ज्वालामुखी पर्वत है। पर वो तुम्हारे लिए छोटा सा ही होगा। मैंने कहा, अभी तो तुमने कहा, कि वह मुझसे भी बड़ा है तो छोटे से पर्वत में कैसे रहेगा। भौंपू से आवाज आई, उसके पास एक ऐसा पानी है जिसे पीने के बाद मानव अपना आकार बदल सकता है। पहले वो भी हमारी तरह का था। उसने दैत्य की पूजा करके उस पानी को पाया है। अब उसमें दैत्य के सभी गुण हैं। मैंने कहा, ठीक है। मैं अभी जाता हूँ। मैं और सोनू उसी दिशा की ओर चल पड़े। जहाँ वो ज्वालामुखी पर्वत है। उनके लिए वह पर्वत बहुत दूर था पर मेरे लिए वो सिर्फ सौ कदम के ही दूरी पर था। मैंने देखा की एक छोटा सा पर्वत था।

जिसमें रोशनी दिखाई दे रही थी। मैंने उस पर्वत के बीच में झांका तो बहुत अंदर एक छोटा सा आग का लावा दिख रहा था। पर्व़त के ऊपरी हिस्से पर एक मकान बना हुआ था। मैंने उस मकान कर उठाकर उसमें देखा तो कोई नहीं था। मैंने उस मकान को फिर से नीचे रख दिया। तभी मेरे पीछे से किसी ने मेरे बालों को पकड़कर खिंचा। मैंने देखा कि एक तगड़ा सा व्यक्ति मेरे पीछे खड़ा था। मैं कुछ कहता उसके पहले ही उसने मुझे उठाकर फेंक दिया। मैं जमीन से उठा और उस व्यक्ति से कहा, तुम उन लोगों को क्यों परेशान करते हो ? क्या बिगाड़ा है उन लोगों ने तुम्हारा। उसने हँसते हुए कहा, मैं तो गाँव वालों को मुर्ख समझता था। पर उन्होंने एक बच्चे को मुझसे लड़ने के लिए भेजा।

गाँव में तुम्हारे अलावा भी तो बहुत से मूर्ख हैं। तुम्हारे पिताजी ही आ जाते मुझसे लड़ने के लिए। वो भी तो एक नकारे हैं। देखो नानू तुम वापस चलें जाओ। मैं नहीं चाहता कि मैं तुम्हें कुछ नुकसान पहुंचाऊं। तुम्हारे पिताजी से मेरी कोई दुश्मनी नहीं। बल्कि बूरे समय में उन्होंने ही मेरी मदद की। पर यह बताओ कि तुम्हें यह शक्ति कहाँ से मिली। मैंने तो बहुत से लोगों की बली देकर यह शक्ति हासिल की है। मैंने देखा कि उसके गले में एक बोतल थी। जिसमें जल भरा हुआ था। मैंने कहा, तुमने अपने स्वार्थ के लिए अपने लोगों की बली दे दी। क्या करोगे ऐसी शक्ति का? उसने कहा, इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान बनूंगा। एक दिन पूरी दुनिया पर मेरी हुकूमत होगी। मैंने कहा, अच्छा। इतना ताकतवर बनकर भी क्या फायदा? आखिर अपनों से दूर अकेले जीवन काट रहे हो। कौन सा सुख मिल रहा है। इस मूर्खता को छोड़कर एक नया जीवन जियो। मैं तुम्हें माफ कर दुगाँ। उसने गुस्से से कहा, एक छोटा सा बच्चा कुछ शक्तियों को पाकर मुझे समझाने की कोशिश करता है। मैं तुझे भी बली पर चढ़ा दूंगा। तेरी शक्ति भी मुझे मील जाएगी। मैंने अपने गले से वह नानचाकू निकाला।

उसने भी अपना भाला निकाला। मैंने एक ही वार से उसके भाले के दो टुकड़े कर दिए। दूसरा वार उसके कंधे पर दे मारा। वह उसकी चोट सहन नहीं कर सका,और वो वहीं ढ़ेर हो गया। क्योंकि जादू से उसका शरीर बड़ा हो गया था दिमाग नहीं। मैंने उसके गले से वह बोतल निकालकर अपने जेब में रख ली। वह वहाँ बेहोश पड़ा हुआ था। मैंने उस बोतल से थोड़ा सा जल उसके मुंह में डाल दिया। वह फिर से छोटा हो गया। मैंने उसे उठा लिया और फिर से उसी जगह पहुंचा जहाँ लोग मेरा इंतजार कर रहे थे। मैंने उसे उन गाँव वालों के हवाले कर दिया। मैंने कहा, यह आप लोगों का अपराधी है। आप इसके साथ कुछ भी करें। गाँव वालों ने उसे एक पेड़ से बाँध दिया। भौंपू से आवाज आई, आप ने हमारे सिर से बहुत बड़ी परेशानी को खत्म कर दिया। अब आप जो बोलेंगे हम वो मदद आपकी करेंगे।

मैंने कहा, मुझे नानू से मिलना है। भौंपू से आवाज आई, वो तो एक बच्चा है। मैंने कहा, हाँ। मुझे उसी से मिलना है। भौंपू से आवाज आई, हमें लगता है आपको उसके पिताजी की जरूरत होगी। क्योंकि उड़ने वाली जादूई कालीन वो बनाते हैं। उनका बेटा नानू नहीं। मैंने कहा, नहीं मुझे नानू से ही काम है। नानू और उसके पिताजी वहीं खड़े थे। उन्होंने कहा, यह रहा नानू और उसके पिताजी। मैंने उस बोतल से थोड़ा सा जल निकालकर पी लिया। पीते ही मैं छोटे आकार में बदल गया। जितना आकार नानू का था। मुझे देखकर सभी हैरान हो गए। मैंने नानू के पिताजी से कहा, मुझे वो हथियार चाहिए जो नानू का अपना हो। नानू ने कहा, मेरे पास तो कोई भी हथियार नहीं जो तुम्हारे काम आ सके। नानू के पिताजी ने कहा, इसके पास ऐसा कुछ भी नहीं हैं। बस मेरी दी हुई एक जादूई कालीन है जो बहुत पुरानी हो गई है। जो कि मेरे पिताजी ने मुझे दे दी थी। अब उसे एक नई कालीन देने वाला हूँ। मैंने कहा, वो जादूई कालीन जो जुनी हो गई है। वो ही मुझे चाहिए। नानू के पिताजी ने कहा, तुम चाहो तो मैं तुम्हें अच्छी कालीन बनाकर दे सकता हूँ। यहाँ जादुई कालीन सभी के पास है। जिसका उपयोग हम यातायात के लिए करते हैं। मैंने कहा, नहीं, मुझे वो ही कालीन चाहिए। नानू ने वह कालीन मुझे दी। मैंने सभी को अलविदा कहा। मैंने बोतल से थोड़ा सा जल निकाला और पी गया। देखते ही देखते मैं अपने आकार में आ गया। मैंने उस कालीन को अपने नान चाकू पर रखा। नानचाकू से एक रोशनी निकली। इस बार वो कालीन नानचाकू में नहीं समाई। मेरे हाथ में वह एक रूमाल की तरह थी। मैंने उसे अपनी जेब में रखा और सोनू के साथ उसमें प्रवेश कर गया।

जब मैं और सोनू रोशनी से बाहर आए तो एक ऊँची सी ईमारत के छत पर थे। जहाँ भी नजर घुमाओ बस ऊँची ऊँची ईमारत। आसमान तो दिख नहीं रहा था। जहाँ भी नजरें घुमाओ, वहाँ आकाश में तेज रफ्तार से गाड़ीयां दौड़ रही थी। छोटी गाड़ीयां अलग लाईन में, बड़ी गाड़ीयां अलग लाईन में यहाँ तक की बीच बीच में पोलिस लिखी हुई गाड़ीयां भी खड़ी थी। छत से नीचे देखा तो सिर्फ कोहरा दिख रहा था। यह इमारत कितनी ऊँची है, यह तो पता नहीं पर मैं बहुत ऊँचाई पर था। नीचे से उपर तक गाड़ीयों का आवागमन देखकर मेरे पैर काँपने लगे थे। तभी किसी ने आवाज दी। मैंने मुड़कर देखा तो, एक आदमी एक उड़ती हुई दुकान से कह रहा था। कुछ खाओगे बेटा। मेरे पास गरमा गरम नाश्ता है। क्या खाओगे बोलो? मैंने कहा, मेरे पास पैसे नहीं हैं। पर भूख तो बहुत लगी थी। उन्होंने कहा, आ जाओ यहाँ। तुम्हें किसने कहा, मैं पैसे माँग रहा हूँ।

क्या तुम इस शहर में नए आए हो?कहाँ से आए हो ? क्या तुम्हारे शहर में खाने पीने के सामानों पर पैसे देने पड़ते हैं? मैंने कहा, क्यों आपके यहाँ खाने पीने के सामानों पर पैसे नहीं देने पड़ते ? उसने कहा, नहीं।

हमारे पास यह मशीन है। इस मशीन से हम लोगों को देखते हैं। जिसे भी भूख लगी होती है वह इसमें दिखने लगता है। हम खाना लेकर उसके पास पहुंच जाते हैं। यह हमारे सरकार का आदेश है कि जो कोई भूखा दिखे उसका पेट भरो। हमें इसी की तनख्वाह मिलती है। मैंने कहा, हम इतनी ऊंचाई पर क्यों है? यहाँ के लोग धरती पर नहीं रहते क्या? उसने कहा, नहीं। धरती इतनी बची ही नहीं की लोग उसपर घूमें फिरे। मैंने कहा, यह इमारत कितने मंजिल की है? उसने कहा, कभी गिनती नहीं की। हाँ इतनी ऊंची है कि गिनने में बहुत समय जाएगा। मैंने कहा, फिर सड़क तो खाली होगी। उसने कहा, नहीं। हमारे यहाँ सड़क नहीं होती। पहले सड़कें थीं। जब गाड़ीयां उड़ने लगी तो सड़क पर खेती की जाने लगी। क्योंकि खेती के लिए जमीन नहीं बची। जितने भी किसान वर्ग है वो नीचे के मंजिल पर रहते हैं और जो अन्य काम करते हैं वो उपर की मंजिल पर रहते हैं। अच्छा यह बताओ कि तुम हो कहाँ से हो? मैंने कहा, बड़ी दूर से आया हूँ।

उसने कहा, आप का पेट भर गया हो तो इस मशीन पर अपना हाथ रख दो। मैंने कहा, ठीक है। मैंने कहा, इससे क्या होगा? उसने कहा, इस पर हाथ रखने से तुम्हरा फिंगर प्रिंट इसपर आ जाएगा। जिससे दर्ज हो जाएगा कि हमने आपका पेट भर दिया है। उसने कहा, आपका डेटा हमारे पास नहीं है इसलिए मुझे दर्ज करना होगा। मैंने कहा, ठीक है। मैंने जैसे ही अपनी हथेली उस मशीन के तख्ते पर रखा कि सामने ही लगे स्क्रिन पर मेरी तस्वीर आ गई और स्पीकर से आवाज आई थेंक्यू जॉनी। उसने कहा, इस पर तो तुम पहले से ही दर्ज हो। यहाँ तो तुम्हारा पता भी है। तुम तो इसी शहर के हो। तुम तो मुझसे कह रहे थे कि तुम दूर से आए हो। मैंने कुछ कहा नहीं, क्योंकि मैं समझ गया कि यह इस दुनिया का मेरा ही रूप है।

तभी मेरे तस्वीर के नीचे एक हेडलाइन आने लगी। जिस पर लिखा था कि मैं दो दिनों से लापता हूँ। उस दुकानदार ने मुझे पकड़ लिया। उस दुकानदार ने कहा, घर से लापता होना भी जुर्म है। उसने एक बटन दबाया और पुलिस की गाड़ी आवाज करते हुए वहाँ पहुंच गई। उस दुकानदार ने मेरा पता पुलिस वाले को देकर मुझे और सोनू को गाड़ी में बिठा दिया। पुलिस ने मुझे डांटकर कहा, घर से भागते हों। अभी छोटे बच्चे हो वरना जेल में डाल देता। पुलिस ने गाड़ी को उड़ाया। कुछ ही पल में उसने एक इमारत के छत पर गाड़ी उतारी। पुलिस वाले मुझे लेकर इमारत में घुसे और एक घर का बेल बजाया। दरवाजा खुला तो मेरे पिताजी के रूप थे। मुझे देखकर वो बहुत खुश हुए। मैं भी बहुत खुश हुआ कि इस बार इन्हें ढ़ूढ़ने में परेशानी नहीं हुई। उन्होंने पुलिस वाले को थेंक्यू कहा और मुझे व सोनू को अंदर लेकर दरवाजा बंद कर दिया। मुझे उन्होंने गले से लगाकर कहा, बेटा में कितना परेशान हो गया था। आखिर जो हुआ वो बूरा हुआ पर तुम्हे उनके पीछे नहीं जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा, यह कुत्ता कहाँ से पकड़ लें आए? किसका है ये? देखो जिसका है उसे लौटा दो वरना हमें जेल हो जाएगी। मैंने कहा, आप जरा गौर से सुनें। मैं आपका बेटा नहीं हूँ। मैं उसी का छवी हूँ जो दूसरी दूनियाँ से यहाँ आया हूँ। यह कुत्ता भी मेरा ही है। मैं आपके बेटे से मिलने आया हूँ। आपके बेटे के पास कोई अनोखा हथियार है जो मुझे चाहिए। मेरे यह बोलते ही वह फूट-फूट कर रोने लगे। मैंने कहा, आप रो क्यों रहे हो? जॉनी जहाँ भी होगा हम उसे ढ़ूढ लाएंगे। आखिर हुआ क्या था? जॉनी यहाँ से क्यों चला गया? उन्होंने कहा, दो दिन पहले मैं रात को सो रहा था और वह अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था। मुझे लगा कुछ देर बाद वो भी सो जाएगा। जब मैं सुबह उठा तो जॉनी और उसका प्रोजेक्ट अपने कमरे में नहीं था। मैंने कहा, प्रोजेक्ट क्या था? उन्होंने कहा, वो एक ऐसा कपड़ा बना रहा था जिसे पहनने पर आदमी दिखाई नहीं देता।

मैंने कहा, ऐसे कैसे हो सकता है? मैंने वहाँ पर रखी जॉनी की प्रोजेक्ट बूक देखी। उसमें लिखा था कि जब कोई रोशनी किसी वस्तु पर पड़कर परावर्तित होकर हमारे आँखो पर पड़ती है तो वह वस्तु हमें दिखाई देने लगती है। यदि वह वस्तु उस रोशनी को परावर्तित नहीं होने दे बल्कि उस रोशनी को सोख लें या फिर उसकी दिशा बदल दे तो वह वस्तु हमें दिखाई नहीं देगी।जैसे कि काला रंग। काला रंग रोशनी को अवशोषित कर लेता है पर उसपर से भी कुछ रोशनी परावर्तित होती ही है। इसलिए हमें वह दिखाई देता है। पर इतना अधिक गहरा काला हो कि वह रोशनी को परावर्तित ना करें तो वह गायब हो सकता है। इतना अलग प्रोजेक्ट देखकर मेरा सिर चकरा गया। मैंने कहा, क्या कभी ऐसा हो सकता है ?

मैं हंसने लगा तो उन्होंने कहा, मेरे बेटे ने कहा था कि प्रोजेक्ट पूरा हो गया है बस सूट सिलने का कार्य कर रहा था। उसने ऐसे दो सूट बनाए हैं। दोनों ही गायब है। मैंने कहा, तब आपका बेटा खुद नहीं गया है। हो सकता है कि उसे किसी ने अगवाह किया हो। आप चिंता ना करें। मैं उसे ढ़ूढ कर लाऊंगा। आप मुझे इसी कमरे में कुछ देर के लिए छोड़ दें। उन्होंने कहा, ठीक है। वह मुझे उसी कमरे में छोड़कर दूसरे कमरे में चले गए। मैंने उस कमरे में नजर दौड़ाई। मैंने हर कोना, कपाट, डेस्क सभी को टटोला। पर कुछ सुराग नहीं मिला। मैंने तभी वहाँ पर रखे हुए कम्प्यूटर को देखा। मैं तो कभी स्कूल भी नहीं गया था। मुझे कम्प्यूटर चलाने कैसे आता। मैंने अपने जादूई कड़े को उस कम्प्यूटर पर रख दिया। उस कड़े ने कम्प्यूटर की सारी जानकारी एकत्र कर ली। मैंने उस कड़े को पहन लिया। अब मैंने उस कम्प्यूटर को शुरू किया। उसमें मैंने आखरी मैसेज देखा, वह एक टिना नाम की लड़की के लिए था। मैंने वह मैसेज खोला तो पाया कि उसमें लिखा था।

मेरा प्रोजेक्ट सफल हो गया है और कल मैं इसे विज्ञान स्पर्धा में जमा कर दुगाँ। तुरंत ही सामने से टिना का मैसेज आया था पर उसे देखा नहीं गया था। मतलब यह था कि मैसेज भेजने के तुरंत बाद ही वह घटना घटी होगी। क्योंकि जॉनी तो प्रोजेक्ट जमा करना चाहता था। मैंने सामने देखा तो खिड़की में एक काला सा छेद था जो कि चमक रहा था। मैंने उस छेद में झाँककर देखा तो वह एक छोटा सा कैमरा था। मैंने जॉनी के पिताजी से जाकर पूछा कि क्या यह कैमरा आपने लगाया है? जॉनी के पिताजी ने कहा, नहीं यह कैमरा हमने नहीं लगाया है‌। मैंने जॉनी के पिताजी से पूछा, कि इस प्रोजेक्ट के बारे में और किसे पता था? पिताजी ने कहा, उस प्रोजेक्ट के बारे में उसके शिक्षक, टिना और मुझे पता है।

मैंने फिर से वह कम्प्यूटर खोला और सभी मैसेज चेक करने लगा कि इस प्रोजेक्ट के बारे में और किसे पता है? मैंने देखा कि टिना के मैसेज बहुत कम और एक व्यक्ति का मैसेज बहुत अधिक था। मैने सभी मैसेज खोलकर पढ़ें तो पता चला कि यह व्यक्ति प्रोजेक्ट के पल पल की खबर ले रहा था। मैंने उस मैसेज पर उस व्यक्ति का नाम देखा। उसका नाम था। प्रोफेसर लॉकी। मैंने जॉनी के पिताजी से पूछा कि प्रोफेसर लॉकी कौन है? उन्होंने कहा, यही तो जॉनी के शिक्षक हैं। मुझे थोड़ा शंका हुई। मैंने कहा, क्या आपको पता है कि यह शिक्षक लॉकी कहाँ रहते हैं। उन्होंने कहा, मुझे तो नहीं पता पर टिना को पता है। मैंने कहा, यह टिना कहाँ रहती है? उन्होंने मुझसे कहा, यहीं तीन इमारत छोड़कर। मैंने कहा, आप चलो मेरे साथ। उन्होंने कहा, ठीक है चलो। उन्होंने दरवाजा खोला और कहा, मैं अभी गाड़ी बुलाता हूँ। मैंने कहा, उसकी जरूरत नहीं। मैंने अपने जेब से वह जादूई रूमाल निकाला जो देखते ही देखते बड़ी सी कालीन बन गई। मैं, सोनू और जॉनी के पिताजी उसपर सवार हो गए।

खिड़की से ही हम लोग उड़ते हुए उस इमारत की ओर जाने लगे जहाँ टिना रहती है। हम जल्दी ही उस इमारत के छत पर पहुंच गए। मैंने कालीन को फिर से रूमाल बनाकर अपनी जेब में रख लिया। जॉनी के पिताजी ने कहा, तुम्हारी सवारी तो बड़ी लाजवाब है। मैंने कहा, हाँ। यह भी मेरे ही एक रूप ने मुझे दी है। आपके बेटे से भी ऐसी ही अनोखा हथियार लेना है। जो उसके पास है। हम लिफ्ट से टिना के घर के सामने उतर गए। मैंने दरवाजा खटखटाया तो एक व्यक्ति ने दरवाजा खोला। वह मुझे देखकर चौंक गया। उसने मेरा हाथ पकड़कर कहा, जॉनी तुम यहाँ हो तो मेरी बेटी कहाँ हैं? मैंने तो सुना तुम दो दिनों से गायब हो। तुम्हारे साथ मेरी बेटी भी गई थी। वो कहाँ हैं। दो दिन से वह भी लापता हैं। मैंने कहा, क्या टिना यहाँ नहीं है? मैं तो उसी से मिलने आया था। टिना के पिताजी ने मेरा कॉलर पकड़कर कहा, सच सच बताओ मेरे बेटी कहाँ हैं ? वरना मैं अभी पुलिस को यहाँ बुलाता हूँ। मैंने कहा, क्या उस रात मैं लेने आया था उसे? टिना के पिताजी ने कहा, कैसी बात करते हो। तुम ही तो आए थे यहाँ। उसे लेने के लिए। मुझसे कहा, मैं अपना प्रोजेक्ट दिखाने ले जा रहा हूँ। क्या तुम्हे याद नहीं? तभी जॉनी के पिताजी ने टिना के पिताजी से कहा, भाई साहब आप थोड़ा शांत हो जाईए। मैं आपको बताता हूँ। जॉनी के पिताजी ने टिना के पिताजी को मेरे बारे में सब बताता। मैंने कहा, क्या आप लोगों को प्रोफेसर लॉकी का घर पता है? टिना के पिताजी ने मुझे प्रोफेसर लॉकी का पता दिया। मैंने कहा, जब तक मैं लौटकर नहीं आता तब तक आप लोग मेरे कुत्ते सोनू का ध्यान रखना। यह बोलकर मैंने अपना कालीन निकाला और खिड़की से बाहर निकल गया। कुछ ही दूर गया कि मुझे पोलिस की गाड़ी की आवाज सुनाई दी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो लगभग पोलिस की दस गाड़ीयां मेरा पीछा कर रही थी।........

मैं अपनी कालीन पर तेज गति से जा रहा था कि पीछे से पोलिस की गाड़ीयों की आवाज सुनाई देने लेगी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो हैरान हो गया। मेरे पीछे लगभग 10 पोलिस की गाड़ी रेस लगा रही थी। मैं भी किसी से कम थोड़ी ही हूँ। मैं भी और तेज गति से उड़ने लगा। पर उनकी आधुनिक मशीनों वाली गाड़ी भी कुछ कम नहीं थी। वह भी और तेज भागने लगी। मैं एक तरफ होकर झट से कालीन को रोक लिया। अब पोलिस की गाड़ीयों में यह तरीका नहीं था। वो झट से तो रूक नहीं सकते। बल्कि इस कोशिश में वह सभी एक दूसरे से भीड़ गए। मैं उन पर हँसा और अपनी कालीन को अपने मंजिल की ओर मोड़ लिया। पर भर में ही मैं उस प्रोफेसर के पते पर पहुंच गया। जो पता मुझे टिना के पिताजी ने दिया था। मैंने प्रोफेसर का दरवाजा खटखटाया तो एक व्यक्ति ने दरवाजा खोला। मैंने उसे ध्यान से देखा। वह काले कोयले जैसा काला और लंबा चौड़ा व्यक्ति था। उसके सिर पर एक भी बाल नहीं थे। मैंने कहा, क्या आप प्रोफेसर लॉकी हो? उसने हड़बड़ा कर कहा, नहीं मैं तो उनका नौकर हूँ। मैंने कहा, प्रोफेसर जी कहाँ हैं? मुझे उनसे मिलना है। उसने कहा, वो आज किसी जरूरी पार्टी में गए हैं।

मैंने कहा, कौन से पार्टी में? उसने कहा, मुझे नहीं पता? भाग जाओ यहाँ से वरना। मैंने कहा, वरना क्या? उसने कुछ ना बोलते हुए दरवाजा बंद कर दिया। मैंने फिर से दरवाजा खटखटाया। उसने फिर से दरवाजा खोला। उसके दरवाजा खोलते ही मैंने उसके दोनों पैरों के बीच एक लात मारी। वह कराहते हुए नीचे झुका कि मैंने अपने दोनों हाथों से उसके टकले पर जोर से घूंसा मारा। वह सीधे जमीन पर गिर पड़ा। उसके गिरते ही मैं घर के अंदर घुसा।

मैंने देखा वहाँ हैंगर में पाई लटकी हुई थी। मैंने एक टाई से उसके हाथ बाँध दिए और दूसरे टाई से उसके पैर बांँध दिए। मैंने घर की तलाशी लेनी शुरू की। पर घर के अंदर कुछ नहीं मिला। वहीं टेबल पर उनका कम्प्यूटर पड़ा हुआ था। मैंने उस कम्प्यूटर को चालू किया। कम्प्यूटर चालू करते ही जॉनी और टिना का कमरा साफ साफ दिखने लगा। इसका मतलब यह था कि यह प्रोफेसर उन पर नजर रखें हुए था। जरूर उन्हें गायब करने में इसका ही हाथ है। मैंने उसके कम्प्यूटर में और देखा पर कुछ मिला नहीं। तभी दीवार पर लगी तस्वीर पर मेरी नजर गई। वह तस्वीर बहुत ही प्यारी थी। उस पर एक घोड़े की तस्वीर थी। पर तस्वीर टेढ़ी लगी हुई थी। मैंने उस तस्वीर को सीधा किया। तस्वीर के सीधा करते ही कमरे के बीचों-बीच एक दरी थी जो हट गई। अब वहाँ एक सुरंग दिख रही थी। सुरंग में काफी अँधेरा दिखाई दे रहा था।

पर जॉनी को ढ़ूढ़ना भी जरूरी था। मैं सुरंग में कूद गया। मेरे मुंह से चीख निकल गई। वह सुरंग काफी गहरी थी। मैं चिखते हुए फिसलते चले जा रहा था। अचानक वह सुरंग खत्म हुई और मैं मुंह के बल गिर पड़ा। मेरे उठते ही चार हट्टे कट्टे पहलवान बंदूक लिए मुझे घेर लिए। मैं उन्हें गौर से देखने लगा। तभी उनमें से एक आगे बढ़ा और मेरे बालों को पकड़कर मुझे उठाया। हँसते हुए कहा, देखो तो भला, यह भागने की कोशिश में था। वो भी अकेले अकेले। दूसरे ने एक थप्पड लगाकर कहा, क्यों बेटा अपनी दोस्त को साथ नहीं ले जाओगे। मुझे घसीटते हुए वो प्रोफेसर लॉकी के पास ले गए। प्रोफेसर लॉकी ने कहा, इतनी भी क्या जल्दी है मेरे होनहार बच्चे। पहले मैं तुमसे अपना अधूरा काम तो पूरा करवा लूँ। उसने उन चारों से कहा, ले जाओ इसे दोबारा उसी लेब में। दुबारा यह भागा तो तुम्हारी जान ले लूँगा।

तब चारों पहलवानों में से दो पहरेदारी के लिए चले गए और दो मुझे उस लेब की ओर लेकर जाने लगे। मैं सिर्फ़ ध्यान से चारों ओर देख रहा था। उन्होंने लेब के बाहर एक लाल बटन दबाया और लेब का दरवाजा खूल गया। लेब का दरवाजा खुलते ही जॉनी ने एक पहलवान पर झपटा मारा और दूसरे पहलवान पर टिना ने। शायद दोनों ही इस मौके का इंतजार कर रहे थे। एक पहलवान ने जॉनी को उठाकर फेंक दिया और दुसरे ने टिना को। दोनों ही जमीन पर गिर पड़े। जॉनी और टिना दोनों ही दर्द से कराहने लगे। मैंने तुरंत अपना नान चाकू निकाला और घुमाते हुए दोनों को मारा। मेरे एक एक ही वार में दोनों धरासायी हो गए। मैंने जॉनी और टिना को उठाया। दोनों ही मुझे देखकर बहुत हैरान हुए। मुझे देखकर पीछे हट गए। मैंने कहा, चिंता मत करो मैं तुम्हें तुम्हारे घर ले जाने आया हूँ। जॉनी ने कहा, पर तुम हो कौन? और तुम बिल्कुल मेरी तरह दिख रहे हो। मैंने कहा, हाँ मैं तुम्हारा ही एक रूप हूँ। जो दूसरी दुनिया से आया हूँ। पहले यह बताओ कि तुम्हें इस प्रोफेशर ने इस तरह क्यों कैद कर लिया? लैब मे यह तुम्हें क्या करने के लिए कह रहा है? जॉनी ने कहा, यह मुझसे एक बड़ा सा गायब होनेवाला सूट बनाने के लिए कह रहा हैं। सूट बनाने के बाद यह हम दोनों को ही खत्म कर देगा।

अगर मैंने वो सूट बनाकर उसे दे दिया तो वह तबाही मचा देगा। वह बूरा व्यक्ति है। मैंने कहा, पर उसने टिना को क्यों कैद कर लिया? उसने कहा, क्योंकि टिना यह जानती है कि यह सूट मैंने बनाया है। मैंने कहा, ठीक है। तुम्हारा बनाया हुआ दोनों सूट कहाँ हैं। उसने कहा, वह दोनों सूट उसने एक तिजोरी में रखा है जो कि उसी के कमरे में है। मैंने कहा, क्या तुमने उसके लिए सूट बना दिया। उसने कहा, नहीं। मैंने कहा, ठीक है। तुम दोनों यहीं रहो। मैं अभी उसके कमरे से तुम्हारा बनाया हुआ दोनों सूट लेकर आता हूँ। मैंने उन दोनों को वहीं बिठाया और उस कमरे की ओर गया जहाँ वह तिजोरी थी। मैंने देखा कमरे के बाहर कोई नहीं था। मैंने कमरे के दरवाजे से झांककर देखा तो वह आईने के सामने खड़े होकर गुनगुना रहा था। उसके हाथ में जॉनी का बनाया हुआ वह सूट था। वह सूट छोटा होने के कारण वह उसे पहन नहीं सकता था। इसलिए वह कभी अपने बदन पर रखता। कभी अपने पेट पर तो कभी अपने हाथों पर। इस तरह वह अपने बदन को गायब करके खुश हो रहा था। मैं झट से अंदर घुसा। मुझे देखकर वह हड़बड़ा सा गया। उसने दाँत पीसकर कहा, तुम फिर से बाहर आ गए।

और वो निकम्मे क्या मर गए। जो तुम बार बार बाहर निकल आता है। वह जैसे ही दौड़कर मुझे पकड़ने के लिए आगे बढ़ा मैं उसके दोनों पैरों के बीच से दूसरी तरफ आ गया। मैंने उछलकर उसके पीठ पर एक लात मारी। वो औंधे मुंह जमीन पर गिर पड़ा। मैंने उसके हाथों से दोनों सूट छीन लिया। सूट छीन लेने के बाद उसे वहीं बाँध दिया। कमरे को बंद करके मैं तूरंत जॉनी और टिना के पास पहुंच गया। जॉनी अपना प्रोजेक्ट पाकर बहुत खुश हुआ। मैंने दोनों को वो सेट पहनने के लिए कहा। दोनों ने सूट पहन लिया और गायब हो गए। मैंने पहली बार किसी को गायब होते देखा था। मैंने कहा, अब बीना आवाज किए यहाँ से चलो। वो दोनों मेरे पीछे चलने लगे। मैं वहाँ से बाहर निकलने के लिए मुख्य दरवाजे पर आया।

तो उन दोनों पहलवानों ने मुझे देख लिया। जो मुझे पकड़कर लाए थे। वो दोनों ही आगे बढ़े कि एक पहलवान के पेट में जॉनी ने घूंसा मारा और दूसरे को टिना ने। दोनों ही गायब थे इसलिए वो दोनों पहलवान डर गए। उन्हें लगा कोई भूत है जो उन्हें मार रहा है। वह डरकर भागने लगे। मूझे हँसी तो बहुत आई पर वहाँ से निकलना बहुत जरूरी था। मैंने अपनी जेब से रूमाल निकाला। बाहर आते ही वह रूमाल बड़ी सी कालीन बन गई। हम तीनों ही उसपर सवार हो गए। मैंने झट से उस कालीन को उड़ाया और तेज गति से टिना के घर पहुंच गया।

मेरे घर आते ही जॉनी के पिताजी और टिना के पिताजी बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा, कहाँ हैं हमारे बच्चे। कहीं दिखाई नहीं दे रहे। तुम उनका पता लगाने गए थे ना। क्या कहा प्रोफेसर ने? टिना ने कहा, क्या कहता वो प्रोफेसर। धोखेबाज था वो। जॉनी ने कहा, मार ही देता वो हमें। अच्छा हुआ यह आ गया हमें बचाने। टिना के पिताजी ने कहा, आवाज तो आ रही है पर वो दिखाई क्यों नहीं दे रहे? दोनों ने वो अदृश्य सूट हटा दिया। टिना और जॉनी के पिताजी उन्हें देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने झट से अपने बच्चों को गले से लगा लिया। जॉनी के पिताजी ने मुझसे कहा, बेटा आज तुमने हमारे बच्चों की जान बचा ली। अब बताओ तुम कहाँ से आए हो? तुम जॉनी से क्यों मिलना चाहते हो ?

मैंने कहा, मैं दुसरी दुनिया से आया हूँ। मैं तो आपके बेटे का छवी हूँ उस दुनिया का। मुझे तो बस आपके बेटे का हथियार चाहिए। जॉनी ने कहा, हथियार। कैसा हथियार? मेरे पास तो ऐसा कोई भी हथियार नहीं है। मैंने कहा, हथियार तो है तुम्हारे पास। यह गायब कर देनेवाला सूट। जो तुमने बनाया है। मुझे बस यही चाहिए। जॉनी ने कहा, ये तो मैं दोबारा बना सकता हूँ। मेरे पास दो हैं। चाहो तो तुम एक रख सकते हो। मैंने कहा, ठीक है। पर एक बात कहूंगा। तुम दोबारा इस सूट को दुनिया के सामने नहीं लाओगे। मैं हर बार तुम्हें बचाने नहीं आऊंगा। यह अगर किसी गलत हाथ में चली गई। तो वह तबाही मचा सकता है। हो सके तो तुम इसका उपयोग अच्छे कामों के लिए करो।

इस राज को हमेशा राज रहने दो। जॉनी ने कहा, हाँ अब मैं किसी को नहीं बताऊंगा। पर दोस्तो को तो डरा सकता हूं ना इसे पहनकर। मैंने कहा, बिल्कुल भी नहीं। जॉनी ने हँसते हुए कहा, ठीक है कभी नहीं करूंगा, इसका उपयोग। उसने अपने हाथों से मुझे एक सूट दे दिया। मैंने सोनू को पुकारा। सोनू दुम हिलाते हुए मेरे पास आया। उसके मुंह में एक बैग था। मैंने उस बैग को उसके मुंह से निकालकर जॉनी को देना चाहा। जॉनी ने कहा, नहीं। इसे भी रख लो। यह तुम्हारे सोनू के लिए है। इसमें उसी सूट का कपड़ा है जो बच गए थे। यह कपड़ा बिल्कुल सोनू के माप का है। हमारी तरफ से सोनू को गिफ्ट। यह सुनकर सोनू भी दुम हिलाकर उछलने लगा। उसे देख हम सभी जोर जोर से खिलखिलाते हुए हँसने लगे। मैंने सभी अलविदा कहा। मैंने उस अदृश्य कर देनेवाले सूट को अपने नान चाकू पर रखा तो एक रोशनी हुई। मैं और सोनू तुरंत उस रोशनी में चले गए।

रोशनी के बाहर आए तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। चारों तरफ घनघोर अँधेरा था। हमें अचानक ही जोर से चिल्लाने की आवाज आई। हम दोनों ही उस ओर भागे। तभी मैं एक दीवार से टकराकर गिर पड़ा। तभी मुझे एक पक्की सड़क दिखी। जिसपर कुछ लोग दौड़ रहे थे। चारों तरफ घनघोर अँधेरा। सड़क पर लाईट जल रही थी।

चारों तरफ सन्नाटा सा पसरा हुआ था। आवाज आ रही थी सिर्फ भागते हुए कदमों की। मैंने गौर से देखा तो दो युवक भाग रहे हैं और उनके पीछे पीछे बीस से बाईस लोग। उन लोगों ने आखिर उन दोनों व्यक्तियों को पकड़ लिया। जानवरों जैसी भयानक आवाज निकालते हुए वह लोग उन दोनों व्यक्तियों को नोच नोचकर खाने लगे। मुझे मेरी आँखो पर विश्वास नहीं हो रहा था कि यह मानव है दानव। पर उनकी डरावनी आवाजें यही बयां कर रही थी कि वह दानव हैं। सड़क पर बहुत से वाहन खड़े थे। जिसपर धूल-मिट्टी पड़ी हुई थी। मैंने उनसे बचकर छूपकर रहना ही मुनासिब समझा। मैं जहाँ था वह एक इमारत थी। मैंने अपनी जादुई कड़े से रोशनी की और उसी इमारत में छुपकर सुबह का इंतजार करना उचित समझा।

मैं और सोनू उस इमारत के पहली मंजिल पर पहुंचे। सभी कमरे के दरवाजे खुले थे। मैं एक कमरे में घुसा। उस कमरे में चारों ओर खून के धब्बे थे। मैंने उन धब्बो को छूकर देखा। वह खून के धब्बे सुखे हुए थे। हमने तुरंत ही उस कमरे के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर ली। मैं और सोनू एक कोने में बीना आवाज किए चुपचाप बैठे थे। मैंने अभी तक सभी हथियार हासिल कर लिए थे। यह अंतिम दुनिया थी जहांँ से मुझे हथियार हासिल करना था।

मेरा पहला हथियार था मेरा गुलेल। दूसरा हथियार था चुंबक जो मैंने पप्पू से ली थी। जो कि मेरे गुलेल में ही समा गया था। मेरा तीसरा हथियार था जादुई तलवार। उस तलवार में मेरा गुलेल समा गया था।मेरा चौथा हथियार था वह नान चाकू। नान चाकू में वह तलवार समा गई थी। मेरा पांचवा हथियार था जादुई उड़ने वाली कालीन। छठा हथियार था अदृश्य कर देनेवाला सूट। साथ ही साथ मेरे पास था जादुगरनी का जादूई कड़ा और बेमिसाल अंदरूनी शक्ति। अब मेरे सामने थी अंतिम दुनिया और अंतिम हथियार ‌‌।

यहाँ का नजारा देखकर तो मेरी रूह तक काँपने लगी थी। पर मन में एक उम्मीद थी कि जब छ: चुनौती पार कर ही चुका हूँ तो यहाँ सातवां भी पूरा कर ही लूंगा। पूरी रात उस कमरे में गुजारनी थी। रह रहकर डरावनी आवाजें रोंगटे खड़े कर देती थी। जब तक सुबह नहीं हो जाती तब तक अपनी छवी को ढ़ूढ़ना मुश्किल था। मैं और सोनू पूरी रात जागते रहे कि कहीं वो दानव यहाँ न आ जाए। यही सोचते सोचते मुझे झपकी लग गई। तभी एक खड़खड़ाने की आवाज से मेरी आँख खुली। मैंने खिड़की से बाहर देखा तो मेरी आंखों पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। मैंने खिड़की से झाँक कर देखा तो पूरी सड़क दानवों से भरी पड़ी थी। सभी के चेहरे पर खून थे। पर पूरा शरीर मानवों की तरह था। सभी सड़क पर ऐसै घूम रहे थे जैसे कि भोजन की तलाश कर रहे हो।

पूरी सड़क उन दानवों से भरी पड़ी थी। वह चारों ओर घूम रहे थे।

उनमें से कुछ लोग पकड़ा पकड़ी जैसा खेल खेलने में लगे थे। कुछ लोग तो रास्ते पर पड़ी हड्डीयों को चूस रहे थे। वो हड्डीयां जानवरों की थी या किसकी यह पता नहीं। उन्हें देखकर मेरा शरीर थर थर काँपने लगा। साधारण इंसान तो कहीं नजर नहीं आ रहे थे। रास्ते पर बहुत सी जंग लगी बस और कार खड़ी थी। ऐसा लग रहा था बहुत वर्षों से यह यहाँ पड़ी हुई है। थोड़ी दूरी पर कुछ इमारतें नजर आ रही थी। मुझे लगा शायद वहाँ इंसान दिखाई दे। अब मेरे पास बस एक ही उपाय था। मैंने अपने बैग से गायब होनेवाला सूट निकाला और पहन लिया। सोनू को गायब होनेवाले कपड़े से ढंक दिया। मैंने अपना जादूई कालीन निकाला । खिड़की खोलकर हम उस जादुई कालीन पर सवार हो गए। उड़ते हुए मैंने नीचे देखा तो चारों ओर दानव ही दानव। ऐसा लगता था जैसे दानवों की ही दुनिया है ये। बड़ी बड़ी इमारतें भी खंडहर की तरह दिख रही थी। बहुत से इमारतों का कुछ हिस्सा ढह गया था। कुछ ईमारत तो इतने काले और पूराने दिख रहे थे कि मानों यह बहुत वर्षों पहली बनी हो। हमारी कालीन उन्हे दिख रही थी पर हम उन्हें नहीं दिख रहे थे। वह सभी दानव सिर उपर कर हमें देख रहे थे। तभी मैंने एक बहुत ऊंची दीवार देखी। उस दीवार की ऊंचाई लगभग दो सौ फिट होगी। शायद यह दीवार उन दानवों से बचने के लिए बनाई गई थी। उस दीवार के ऊपर कुछ लोग बंदूक लिए तैनात खड़े थे। उन बंदुक धारियों से बचते हुए जब हम उस पार पहुंचे बहुत बड़ा शहर बसा हुआ था। वह दीवार चारों तरफ से घिरी हुई थी। उस शहर में मैंने गौर से देखा तो लोग खेती कर रहे थे। कुछ लोग अपने पशुओं को चरा रहे थे। वहीं कुछ बच्चे खेल रहे थे। पर सभी के चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी।

सभी एक दूसरे से दूर खड़े होकर बातें कर रहे थे। मुझे लगा यहाँ उतरना ठीक होगा। मैंने अपने कालीन को एक झाड़ के पीछे उतारा। हमने आसपास देखा कोई नहीं था तो मैंने हम दोनों का गायब होनेवाला सूट उतारकर बैग में रख लिया। और कालीन को लपेटकर जेब में रख लिया। अब सोनू और मैं उन लोगों के बीच घूमने लगे। मैं उन लोगों के बीच अपनी छवी अर्थात अपने रूप वाले लड़के को ढ़ूढ़ने लगा। मैंने देखा की वहाँ कुछ लोग दो व्यक्तियों को पकड़कर एक कमरे में बंद कर रहे थे। उसके परिवार वाले जोर जोर से रो रहे थे। मैं वहाँ पर लोगों के बदन पर फटे पूराने कपड़े थे। सभी के चेहरे पर उदासी और डर था। तभी पीछे से एक बच्चे ने सोनू की पूंछ खिंचीं। सोनू जोर से भौंका तो सभी बच्चे दूर भाग गए। तभी एक लड़की ने कहा, ऐ गोलू। तेरा पिताजी तुझे ढ़ूढ रहा है। आज तेरी पिटाई होगी। मैंने उस लड़की से कहा, कहाँ हैं मेरे पिताजी? उसने सामने हाथ दिखाया। सामने से मेरे पिताजी हाथ में डंडा लेकर चले आ रहे थे। मैंने गौर से देखा तो वह मेरे पिताजी के ही रूप थे। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर मेरे पिछवाड़े पर चार डंडा जोर से लगाया। और कहा, कहाँ घूम रहा है सुबह से? उन्होंने मेरे कपड़ों को देखकर कहा, ये इतने अच्छे कपड़े कहाँ से लाया? ये कुत्ते के साथ यहाँ क्या कर रहा है? चल अच्छा ही है कुछ तो खाने के लिए लाया। वैसे भी बहुत दिनों से मांस नहीं खाया। मैंने कहा, इसे हाथ मत लगाओ। यह मेरा दोस्त है। मैं तुम्हरा बेटा नहीं हूँ। यह सुनकर उन्होंने दो डंडा और जमाया। बोले, बाप को उलटा बोलता है। तु मेरा बेटा नहीं है तो किसका है? चल घर तुझे बताता हूँ। अब तेरी माँ नहीं है जो तुझे बचाएगी। तुझे भी तेरी माँ के साथ दीवार के उस तरफ फेंक दिया होता तो अच्छा था। तभी किसी ने पीछे से कहा, बापू आप इसे क्यों मार रहे हो? मैं तो इधर हूँ। उसने मुझे देखा और मैंने उसे।

उसने मुझे देखते ही मुंह पर हाथ रख लिया। बापू ये चोर है। इसने मेरा चेहरा चूरा लिया। बापू मैं आपका बेटा हूँ ये नहीं। उसके पिताजी ने मुझे कसकर और दो डंडे जमाए। उन्होंने कहा, मेरे बेटे का ही चेहरा मिला था तुझे चुराने के लिए। धीरे धीरे वहां काफी भीड़ एकत्र हो गई। वहीं खड़े एक औरत ने कहा, अरे ये चेहरा चुराने वाला चोर है। ये लोगों का चेहरा चूरा कर लोगों को दीवार पार का शैतान बना देता है। देखो तो कितना छोटा सा है और चेहरा चोरी करता है। तभी दूसरी औरत ने कहा, मैंने अपनी दादी से सुना था कि पहले लोग शरीर के अंगों की चोरी करते थे। एक ने कहा, पर यह हमारे शहर में आया कैसे? उसी भीड़ में से किसी ने कहा, अरे शैतानों की चाल है। छोटा सा है इसलिए उपर से फेंका होगा।

मेरे दादा जी बताते थे कि बहुत पहले लोग आसमान में उड़ते थे। मैं उन लोगों की बातें सुनकर हैरान था। सोचा किन लोगों के बीच फंस गया। एक आदमी ने कहा, इसे दीवार के उस पार फेंक देते हैं। कुछ लोगों ने मुझे पकड़ा ही था कि पीछे से एक आवाज आई, रूको। लोग उसे देख शांती से खड़े हो गए। उसने कहा, मुझे बताओ क्या हुआ? आप लोग कब से फैसला लेने लग गए। इस शहर का मुखिया मैं हू़ँ। फैसला लेने का अधिकार सिर्फ मुझे है। सब मुझे छोड़कर पीछे हट गए। वह थोड़ा अधेड़ उम्र का था। वह मेरे पास आया। मुझे नजदीक से देखा और कपड़ो और जूते को देखकर कहा, कहाँ से आए हो? मैंने कहा, दुसरे दुनिया से। उसने कहा, क्यों आए हो? मैंने कहा, अपने छवी की तलाश में। उसने मेरे कान में कहा, क्या तुम्हें एक दुनिया से दूसरे दुनिया में जाने का रास्ता पता है? मैंने कहा, हाँ। पर वह रास्ता सिर्फ एक बार खुलता है। उस मुखिया ने जोर से कहा, गोलू और उसके बापू मेरे साथ आएंगे और बाकी सभी लोग अपने घर जाओ।

गोलू और उसके बापू मेरे साथ मुखिया के पीछे पीछे उसके घर की ओर चल दिए। मुखिया घर बहुत बड़ा था। हम उसके घर में घुसे तो चारों ओर पुस्तक ही पुस्तक थे। ऐसा लग रहा था जैसे की मैं किसी पुस्तकालय में आ गया हूँ। चारों ओर बड़ी बड़ी पुस्तक से भरी अलमारी और एक तरफ कुछ कम्प्यूटर भी पड़े थे। पर सभी पर बहुत धूल पड़े हुए थे। मुखिया ने हम तीनों एक जगह बिठाया और कहा, बोलो तुम। इस गोलू की तलाश में यहाँ क्यों आए हो? मैंने कहा, गोलू के पास ऐसा हथियार है जो मुझे चाहिए। गोलू और गोलू के पिताजी ने कहा, हमारे पास तो कोई हथियार नहीं हैं। हम तो सिर्फ दूसरे के खेतों में काम करते हैं। जो मिलता है वो खा लेते है। हमारे पास तो खुद का कुदाल भी नहीं हैं। मैंने कहा, जरूरी नहीं कि वो कोई हथियार हो। ऐसी कोई भी वस्तु जो गोलू के साथ हमेशा रहती है। गोलू के पिताजी ने कहा,

नहीं गोलू के पास ऐसी कोई भी वस्तु नहीं जो हमेशा उसके पास रहे। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। तभी मेरी नजर सोनू के गले पर पड़ी। उसने कुछ धागे में पिरोकर पहना था। मैंने कहा, वो जो गोलू ने गले में पहन रखा है। वो क्या है? गोलू के पिताजी ने कहा, ये तो ताबीज़ है जो कि खानदानी है। पहले यह मेरे दादाजी का था उन्होंने मेरे पिताजी को दिया। मेरे पिताजी ने मुझे और मैंने अपने बेटे गोलू को दे दिया। मैंने कहा, उसमें कोई तो राज है। यही मुझे चाहिए। गोलू के पिताजी ने कहा, नहीं नहीं यह हमारे खानदान की निशानी है। मैं इसे नहीं दुंगा। मुखिया ने मुझे देखकर कहा, पहले यह बताओ कि इस छोटी सी वस्तु के लिए तुम्हें अपनी दुनिया छोड़कर इस दुनिया में आने की जरूरत क्यों पड़ी ?

मैं जानता हूं वजह बड़ी होगी। ये लोग तुम्हें चोर समझ रहे थे पर मुझे तुम्हारे बातों पर विश्वास है। क्योंकि इस पूरे शहर में मैं ही हूँ जो पढ़ना जानता हूँ। इसलिए मैं इनका मुखिया हूँ। मैंने पढ़ा है कि हमारी दुनिया की तरह छ: और दुनिया है। जो कि हमारी दुनिया की परछाई कही जाती है। बहुत से लोगों ने इस पर खोज भी की पर सफल नहीं हुए। मैंने दुसरे दुनिया से आनेवाले लोगों की बहुत सी घटनाएं पढ़ी है। आज जब तुमने कहा कि मैं दुसरी दुनिया से आया हूँ। तो मैंने विश्वास कर लिया। अब तुम मुझे बताओ कि तुम्हें इस वस्तु की इतनी क्या आवश्यकता है। मैंने कहा, ठीक है मैं बताऊंगा कि मैं इस छोटी सी वस्तु के लिए यहाँ क्यों आया। पर पहले तुम बताओ कि आपके दुनिया में लोगों का ऐसा हाल क्यों हैं? बाहर इतने सारे दानव और आप लोगों के लिए यह घेरा। आखिर यहाँ ऐसा क्या हुआ था? आपके दुनिया का इतिहास क्या है ?

क्या आप मुझे बता सकते हैं। मुखिया ने कहा, हाँ मुझे पता है कि हमारी दुनिया पहले कैसी थी और इसका ये हाल कैसे हुआ। मैंने यह सब किताबों में पढ़ी जो हमारे पुर्वज लिखकर गए और जो मेरे पिताजी और दादाजी ने मुझे बताया। तो सुनो, यह दुनिया जैसी दिख रही है पहले वैसी नहीं थी। पहले यह दुनिया सिर्फ इंसानों से भरी पड़ी थी। पूरी दुनिया खुशहाल थी। चारों ओर आधुनिक तकनीक और विज्ञान ने अपना हाहाकार मचा रखा था। इंसान रात दिन प्रगति के पथ पर चल रहा था। इंसान बहुत सी मशीनों का अविष्कार कर रहा था। आसमान को छूने वाली इमारत बना रहा था। सड़कों पर तेज चलने वाली गाड़ी और आसमान से सफर करने के लिए हवाई जहाज था। सभी सुख सुविधाओं के बावजूद इंसानों में कुछ नया करने की चाहत थी। इंसानों ने विज्ञान और तकनीक की सहायता से हर बिमारी का इलाज ढूंढ लिया था जिससे मनुष्य अधिक जी सके। कुछ लोग ऐसी दवा की खोज कर रहे थे जिससे इंसान कभी मरे ही नहीं। यह प्रकृति को धोका देकर अमर होने की शक्ति ढूंढ रहे थे। उन लोगों में मेरे दादाजी के दादाजी भी शामिल थे। वो एक वैज्ञानिक थे।

वो रात दिन एक करके ऐसी दवा बनाने में जुट गए जो मनुष्य को अमर कर दे। इस काम में उनके साथ बहुत से वैज्ञानिक लगे हुए थे। आखिर उन्होंने एक ऐसी दवा बनाई जो शरीर के सभी अंगों को बीमारी से मुक्त कर दे हमेशा के लिए। उस दवा से मनुष्य का शरीर हमेशा जवान बना रहेगा। उन्होंने उस दवा का प्रयोग कुछ लोगों पर किया और वो सफल भी हो गए। पर अभी भी कुछ प्रयोग और निरीक्षण बाकी थे। पर दवाई कंपनी के मालिक और कुछ बड़े लोगों ने अमर होने के लिए तथा अधिक पैसा कमाने के लिए दवा को बाजार में लाने की अनुमति दे दी। उन्होंने उस दवा का उत्पादन जोरों से किया और पूरी दुनिया में वह दवा पहुंच गई। जितने भी पैसे वाले लोग थे उन्होंने अमर होने के लिए उस दवा का उपयोग किया। मेरे दादाजी के दादाजी ने निरक्षण किया कि जिन लोगों को पहले दवा दी गई थी वो लोग जवान और स्वस्थ थे पर उनका मस्तिष्क कमजोर हो गया था। क्योंकि वह उस दवा को झेल नहीं पा रहा था। इसलिए उनकी भूख अपने आप बढ़ने लगी।

यहाँ तक की वह भूख इतनी बढ़ गई कि लॅब में काम करने वाले लोगों को भी वो जिंदा चबा गए। मेरे दादाजी के दादाजी ने यह भी निरक्षण किया कि भोजन न मिलने पर यह किसी को भी खा सकते हैं। अगर इन्हें भोजन नहीं मिलें तो भी यह जीवित ही रहेंगे। क्योंकि इनके शरीर का हर अंग व मांसपेशियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह सिर्फ तभी मरेंगे जब उनके मस्तिष्क पर बिजली का जोरदार झटका लगे। मेरे दादाजी के दादाजी ने जब यह देखा तो कंपनी मालिक को सुचित किया परंतु दवा बट चुकी थी। सभी ने इसका उपयोग शुरू कर दिया था। उनमें अभी तक ऐसे कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे। क्योंकि इसके लक्षण पंद्रह दिनों बाद दिखाई देते थे। उन्होंने मेरे दादाजी के दादाजी और उनके मित्र जो कि गोलू के पूर्वज थे,

उनका मुंह बंद रखने के लिए खुफिया जेल में डाल दिया। इस समय हम जिस शहर में हैं वह पहले दुनिया का सबसे बड़ा जेल हुआ करता था। यहाँ पर बहुत से कैदी थे। कैदी भाग न जाए इसलिए इसके चारों तरफ बड़ी बड़ी दीवारें बनाई गई थी। जिस समय पूरी दुनिया में तबाही मची तो यह जेल ही सबसे सुरक्षित जगह थी। यहाँ के कैदी और पुलिस कर्मचारियों के अलावा और कोई नहीं बचा। क्योंकि इन्होंने इस दवा का उपयोग नहीं किया था। यहाँ कि मजबूत दीवार इनके लिए वरदान साबित हुई। मुझे लगता है कि हमारे शहर के अलावा भी दुनिया में जितने भी जेल होंगे वहाँ के लोग सुरक्षित होंगे। तभी से जेल के कैदी और उन पुलिसकर्मियों का वंश यहाँ जीवित है। यह जो मेरा घर है पहले पुस्तकालय हुआ करता था। हमारे पुर्वजों ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने बच्चों को पढ़ना सिखाया परंतु बाकी लोगों ने इसे श्राप समझा। गोलू के पिताजी के दादाजी के दादाजी भी बहुत बड़े वैज्ञानिक थे। पर इन लोगों ने पढ़ना नहीं सिखा। बस उनकी निशानी वह गोलू के गले का लॉकेट है। अब तुम बताओ। मैंने कहा, मैं एक शैतान जादुगर से अपने पिताजी के राज्य के लोगों को वापस लाने व अपनी माँ को बचाने के लिए इन सात दुनिया से अपने ही छवी के साथ हथियार हासिल कर रहा हूँ। उन हथियारों की सहायता से में उस शैतान को नष्ट करना चाहता हूँ। इसलिए मैंने अब तक सभी हथियार पा लिए हैं अब सिर्फ गोलू के गले का लॉकेट आखिरी हथियार है। यह सुनकर गोलू ने स्वंय वह लॉकेट निकालकर मेरे हाथ में रख दिया। मैंने उस लॉकेट को खोलकर देखा तो उसमें सिर्फ एक छोटी सी घड़ी थी और एक छोटा सा बटन। मैंने उस बटन को दबाया तो घड़ी रूक गई। फिर से दबाया तो चालू हो गई।

मैंने कहा, यह तो एक मामूली सी घड़ी है। मैंने उन्हें दिखाने के लिए फिर से बटन दबाया और उनको दिखाने के लिए सिर उठाकर उन्हें देखा तो मुखिया, गोलू और उसके बापू एक मूर्ति की तरह खड़े थे। हवा भी थम गई थी। मैंने फिर से बटन दबाया तो वह सभी अपने पुनः अवस्था में आ गए। मैं समझ गया कि यह साधारण समय देखनेवाली घड़ी नहीं बल्कि समय को रोक देनेवाली घड़ी है। मैंने सभी से अलविदा कहा। सोनू को अपने साथ रखकर मैंने उस लॉकेट को अपने नान चाकू पर रखा। सामने ही एक प्रकाश फैल गया। मैं और सोनू उस प्रकाश में प्रवेश कर गए।

मैं और सोनू रोशनी के अंदर प्रवेश कर चुके थे कि अचानक सोनू पीछे मुड़ा और बाहर आ गया। उसे देख मैं भी पीछे मुड़ गया। मैंने सोनू से चलने के लिए कहा, तो वह गोलू और मुखिया की ओर देखकर भौंकने लगा। मैं कुछ समझ नहीं सका। मैंने मुखिया के और गोलू के चेहरे पर देखा। सभी का चेहरा उदासी से भरा हुआ था। इस बार मुझे कोई खुशी से अलविदा नहीं कर रहा था। मैं समझ गया कि इस बार शायद मेरे अंदर ही कोई स्वार्थ था जो मैं इन्हें खुश किए बगैर ही जा रहा था। मैं उस रोशनी से पूरी तरह बाहर आ गया। रोशनी बंद हो गई। मुखिया ने कहा, करता हुआ बेटा ? वापस क्यों आ गए ?

मैंने कहा, अभी मेरे जाने का समय नहीं हुआ है। जब तक आपके चेहरे पर यह उदासी होगी मैं वापस नहीं जाऊंगा। यहाँ तक कि मैं जाते समय सभी को खुश करके जाऊँगा। यह सुनकर गोलू और उसके बापू के चेहरे पर भी एक चमक आ गई। मैंने मुखिया से कहा, मैं आप लोगों के चेहरे की उदासी नहीं देख पाया यह मेरी गलती है। मुझे माफ़ कर दो। मुखिया ने कहा, आओ मेरे साथ पहले कुछ खा लो। फिर बैठकर बातें करते हैं। हम सभी जमीन पर बैठ गए। मुखिया ने भोजन लाया। भोजन में रोटी और भूना आलू था। बिना नमक का और मसाले का भोजन मैंने पहली बार खाया था। आग में भूना होने के कारण आलू का स्वाद अच्छा था। भोजन के पश्चात हम सभी उठे और एक जगह लेट गए। मुखिया ने कहा, थोड़ा आराम कर लो। हम सभी लेटे हुए थे और मुखिया जी अंदर के कमरे में चले गए। कुछ देर बाद मुखिया जी बाहर आए। उनके हाथों में कुछ किताबें थीं। मैंने कहा, यह किताबें कैसी? उन्होंने कहा, मुझे पढ़ने का शौक है इसलिए मैं रोजाना पढ़ता हूँ। मैं उठ कर बैठ गया। मैंने कहा, क्या ऐसी कोई किताब है आपके पास जिसमें इन दानवों का नाश करने का उपाय लिखा हो।

उन्होंने कहा, नहीं। यह एक पुस्तकालय है जिसमें दुनिया भर की किताबें हैं। यहाँ सभी बिमारियों से लड़ने वाली दवाओं की किताब है परंतु ऐसी कोई किताब नहीं जिसमें यह लिखा हो कि इन दानवों का नाश कैसे करें। मैंने कहा, जिस तरह आप के पूर्वज वैज्ञानिक थे उसी प्रकार गोलू के पूर्वज भी वैज्ञानिक थे। गोलू के पूर्वज ने यह घड़ी बनाई। आपके पूर्वज ने हीं वह अमर करने वाली दवा बनाई थी। तो उसे नष्ट करने के लिए कुछ तो बनाया होगा। मुखिया ने कहा, मेरे पुर्व़ज और गोलू के पूर्वज साथ में ही रहते थे। मेरे दादाजी बताते हैं कि वह दो दो तीन तीन दिन एक साथ एक कमरे में रहकर कुछ कार्य करते रहते थे। मैंने कहा, क्या आप मुझे वहाँ ले चलोगे जहाँ वो एक साथ काम करते थे। मुखिया ने कहा, मेरे दादाजी ने कहा था कि यहाँ पर एक खुफिया कैमरा है जहाँ पर वो आम किया करते थे। मैंने बहुत ढुंढना पर वह खुफिया कैमरा हमें नहीं मिला। मैंने कहा, तो अब हमें वो कमरा ढुंढना ही होगा। यह काम हम सभी को मिलकर करना होगा। हम सभी अलग अलग होकर कपाट व दीवार व हर कमरे में छान बीन करने लगे। तभी सोनू के भौंकने की आवाज आई। मैं भागकर गया तो एक चूहा था। मेरे पहुंचते ही वह चुहा एक कपाट में घुस गया। मुखिया ने कहा, यह घुसा मेरी किताबों को काट खाएगा। उसे बाहर निकालना ही होगा। मैंने कपाट खोला तो चुहा गायब। मैंने सभी किताबों के पीछे देखा। पर वह कहीं नहीं दिखा।

मैंने निचे एक छोटा सा बील देखा। मुझे लगा शायद इसके पीछे कुछ है। मैंने कपाट के पीछे का हिस्सा जोर से खिंचा तो वह एक दरवाजे की तरह खुल गया। दरवाजे के खुलते ही रोशनी हो गई। मुखिया ने कहा, इस पूरे शहर में बिजली का नामों निशान नहीं हैं। फिर यहाँ लाईट कैसे चालू है। हम सभी अंदर घुसे। अंदर बड़े बड़े बक्से रखे हुए थे। मैंने वहाँ आस पास देखा तो चारों ओर धुल पड़े हुए थे। वहाँ एक बड़ी सी मशीन भी थी। उस मशीन के पास एक किताब थी। मैंने उस किताब को उठाया। किताब पर काफी धुल थी। मैंने उस किताब से धुल हटाई और उसे मुखिया के पास ले आया। मुखिया ने किताब खोला तो वह किताब की भाषा समझ नहीं आ रही थी। मुखिया को सिर्फ किताब पढ़ना था परंतु वैज्ञानिक भाषा और विज्ञान को समझना मुखिया के लिए मुमकिन नहीं था। मैंने कहा, कोई बात नहीं। मेरे पास इसका उपाय है। मैंने अपने हाथ से जादुई कड़ा निकाला और उस किताब पर रख दिया। उस जादुई कड़े ने किताब की भाषा और ज्ञान को सोख लिया। मैंने वह कड़ा पहन लिया। मैंने किताब को पढ़ना शुरू किया। किताब में लिखा था कि यह मशीन इलेक्ट्रिक ऊर्जा को टर्बो इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा में रूपांतरित करता है। इसपर लगा मैगनेट यह इलेक्ट्रिक के संपर्क में आकर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक टर्बो ऊर्जा का निर्माण करता है। जिस प्रकार चंद्रमा की गुरूत्वाकर्षण का असर पृथ्वी पर होता है। इसलिए पृथ्वी के समुद्र पर ज्वार और भाटा की स्थिति उत्पन्न होती हैं। यहां तक की चंद्रमा के गुरूत्वाकर्षण का असर मनुष्य के दिमाग पर भी होता है।

तभी तो पूर्णिमा के दिन दिमाग से बिमार मनुष्य अजीब अजीब हरकतें करते हैं। उन्हें शांत करने के लिए उनके दिमाग को बीजली के झटके दिए जाते हैं। यदि इस मशीन से निकलने वाले ऊर्जा को पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे किसी भी सैटेलाइट से जोड़ा जाए तो पृथ्वी के सभी कमजोर दिमाग वाले मनुष्य पर इसका सीधा असर होगा। दीमाग को झटका लगते ही उनका दिमाग नष्ट हो जाएगा। क्योंकि उस दवा को पीने के बाद सभी का शरीर तो अमर हो गया परंतु उनका दिमाग घायल हो गया। जिससे इन्हें अधिक भूख लगने लगी थी। इनका शरीर भले ही स्वस्थ हैं परंतु इनका दिमाग बहुत कमजोर है। आगे मशीन को शुरू करने का तरीका दिया हुआ था। उस बड़े बड़े बक्सों में इलेक्ट्रिक ऊर्जा भरी हुई थी। जो कि जमीन के भीतर बहने वाली पानी से उत्पन्न हो रही थी। उसमें एक उपकरण लगा हुआ था।

मैंने पुस्तक में देखकर मशीन चालू कर दी परंतु कुछ हो नहीं रहा था। मैंने पुस्तक में फिर से देखा तो मशीन के एक भाग में छोटी सी घड़ी लगी हुई थी। यह वही घड़ी थी जो मैंने गोलू से ली थी। मैंने उस घड़ी को उस मशीन के खाली जगह पर फिट कर दिया। घड़ी का बटन दबाते ही काटा जोर से घुमने लगा। मशीन पर लगे अटींने से एक बिजली की रोशनी निकली जो सीधे आसमान में चली गई। हम सभी घर से बाहर आकर आसमान में देखने लगे। कुछ देर लगातार वह बिजली आसमान में जाती रही फिर अचानक आसमान में एक धमाका हुआ और चारों तरफ वह रोशनी फैल गई। पूरा शहर बाहर निकलकर यह देख रहा था। तभी अचानक हमारे दिमाग पर एक झटका सा लगा और सभी अपने जगह पर ही गिर पड़े। यहाँ तक कि मैं भी गिर पड़ा। कुछ देर बाद मुझे होश आया। मेरा सिर चकरा रहा था।

मैंने देखा सभी धीरे धीरे खड़े हो रहे थे। सभी एक दुसरे को संभाल रहे थे। मुखिया ने मुझे देखकर कहा, इसका असर तो सीधा हमपर हुआ। क्या हम भी पागल हैं। मैंने कहा, हर मनुष्य थोड़ा पागल है। इसलिए बिजली का झटका सभी को लगा। मुखिया ने कहा, हमें कैसे पता चलेगा कि वो दानव नष्ट हुए या नहीं। मैंने कहा, आओ मेरे साथ। मैंने अपनी जादुई कालीन निकाली और उसपर मैं, मुखिया, गोलू और उसके पिताजी सवार हो गए। हमने उड़ते हुए दीवार पार किया। नीचे देखा तो चारों तरफ दानव जमीन पर गिरे पड़े थे। एक भी जीवित नहीं था। यह देखकर हम सभी बहुत खुश हुए। मैंने मुखिया से कहा, अब यह पूरी दुनिया दानवों से मुक्त हो गई। अब आप लोग आजादी से बीना डर के अपनी जिंदगी जी सकते हो। मुखिया ने कहा, सबसे पहले मैं उस दवा को नष्ट करूंगा। जिसने इतने वर्षों तक हमें मर मर के जीने को मजबूर कर दिया। मैंने कहा, जरूर। मैंने अपने जादूई कालीन को मुखिया के घर के सामने उतारा।

मुखिया ने आजादी की खबर पूरे शहर को दी। मैंने उस घड़ी को मशीन से निकाल लिया। मैंने वह पुस्तक मुखिया को सौंप दिया। मुखिया ने कहा, मैं इसका क्या करूंगा। मैंने कहा, इसमें मशीन बनाने व यह घड़ी बनाने की तकनीक दी गई है। शायद आगे चलकर आपको इसका उपयोग करना पड़े। यह कहकर मैंने दुबारा घड़ी को नान चाकु पर रखा। सामने रोशनी से भरा द्वार आ गया। इस बार जाते समय पूरा शहर वहाँ खड़ा था। सभी के चेहरे पर खुशी थी। सभी ने मुझे खुशी से अलविदा कहा। मैं और सोनू उस रोशनी में समा गए।

रोशनी में प्रवेश करने के बाद मैं और सोनू जैसे बेहोश हो गए। जब मेरी आँख खुली तो मैं एक बिस्तर पर लेटा हुआ था। वहीं पास में सोनू भी था। पहले तो कभी हम रोशनी में प्रवेश करने पर बेहोश नहीं हुए थे। इस बार ऐसा क्या हुआ कि मैं और सोनू दोनों बेहोश हो गए। हम आखिर हैं कहाँ यह भी पता नहीं। तभी मेरे पिताजी वहाँ कमरे में दाखिल हुए। मुझे देखते ही बोले, कैसे हो बेटा। इतने दिनों की यात्रा के बाद काफी थक गए होंगे। आराम करो तुम। मैं तब तक तुम्हारे भोजन का प्रबंध करता हूँ। मैंने कहा, पिताजी आप मेरे पास आईए। मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि मैं अब आपके पास आ गया हूँ। मुझे तो लगा था कि अब मेरी मुलाकात सीधे जादूगर से होगी। पिताजी ने कहा, हाँ अब तुम्हारा सामना उसी जादूगर से होगा। वह जादूगर हमारी दुनिया में है इसलिए तुम वापस यहाँ आ गए। मैंने पिताजी से कहा, पिताजी हम सातों दुनिया में गए। पर कभी बेहोश नहीं हुए। इस बार ऐसा क्या हुआ कि हम बेहोश हो गए। पिताजी ने मुस्कराते हुए कहा, बेटा इन सातों दुनिया से मिलकर एक चक्र का निर्माण होता है। इसे ही हम पैरेलल युनिवर्स का चक्र कहते हैं।

जो इस चक्र को पूरा पार करता है। उसे एक अद्भूत शक्ति प्राप्त होती है। उस चक्र को पूरा करने पर तुम्हारे साथ साथ सोनू को भी वह शक्ति प्राप्त हो गई। जिसे तुम दोनों का शरीर झेल नहीं पाया और बेहोश हो गए। ये वो महान शक्ति है ,जो शक्ति किसी के पास नहीं। जादूगर से लड़ने के लिए उसी शक्ति की जरूरत है। मैंने कहा, और यह सातों हथियार। पिताजी ने हँसकर कहा, बेटा यह तो तुम्हारे लिए खिलौने हैं। यह सभी खिलौने एक माध्यम थे एक दुनिया से दुसरे दुनिया में दाखिल होने के लिए। बेटा वह जादूगर बहुत मायावी और शक्तिशाली है। पर तुम्हारे पास उससे भी अधिक और दुनिया की सबसे महान शक्ति है। तुम्हारे शक्ति के सामने अब कोई नहीं टिक सकता। यह बात वह जादूगर जानता था। क्योंकि उसने अपना भविष्य देख रखा था। इसलिए वह तुम्हें मारना चाहता था। मैंने कहा, पर मुझे किसी भी शक्ति का कोई एहसास नहीं हो रहा है। क्या सोनू भी शक्ति शाली हो गया है? पिताजी ने कहा, हाँ। तुम दोनों शक्तिशाली हो।

पर तुम्हें अपनी शक्ति का उपयोग कैसे करना है वह पहले सिखना होगा। मैं तुम्हें पहले तुम दोनों को शक्ति को संतुलित करने और लड़ना सिखाऊँगा। उसके पश्चात शक्ति का उपयोग करना सिखाऊँगा। मैंने कहा, तो ठिक है। हम तैयार हैं। पिताजी ने कहा, पहले अभी आराम करो। कल से अभ्यास कराऊँगा। सोनू तो अभी भी हो रहा था। मैं भी बिस्तर पर मुंह डाल कर सो गया।

अगले दिन से पिताजी ने मुझे प्राणायाम करना सिखाया। उसके बाद योग-साधना। धीरे-धीरे पिताजी ने मुझे कराटे और कुश्ति का ज्ञान दिया। दिन पर दिन गुजर रहे थे। पिताजी मुझे और सोनू को लड़ने की कला सिखा रहे थे। युद्ध कला सिखाने के बाद पिताजी ने मुझे शक्ति का उपयोग करना सिखाया। जैसे, मुंह से वायू को खिंचना और मुंह से वायू को छोड़कर तुफान में बदल देना। तेज गति से दौड़ना सिखाया। पलक झपकते ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना। तेजी से तैरना और खड़े पर्वतों पर चढ़ना। अपने हाथों से अग्नि का गोला तैयार करना और उसका उपयोग दुश्मन पर करना। सोनू को भी ऐसी ही कुछ युद्द कौशल सिखाए। पर वह एक कुत्ता है इसलिए पिताजी ने उसे भी अच्छे तरह सब सिखाया। मैंने पिताजी से कहा, पिताजी वह तो सिर्फ अकेला जादुगर है। उसे हराने के लिए इतनी मेहनत क्यों ?

पिताजी ने कहा, उसे हराना इतना आसान नहीं हैं। उसने अपने चारों तरफ खतरनाक जाल बिछा रखा है। उस तक पहुंचना मतलब आग का दरिया पार करना। यमपुरी जाने के लिए जितनी यातनाओं का सामना करना पड़ता हैं, उतनी यातना तुम्हें इस सफर पर मिलेगी। मैंने कहा, ठीक है। पर मैं इस सफर पर अकेले जाऊँगा। सोनू को मैं आपकी रक्षा के लिए यहीं छोड़कर जाऊँगा। पिताजी ने कहा, बेटा मुझे तुम पर पूरा विश्वास है। तुम अवश्य सफल हो जाओगे। मैं तुम्हें बताता हूँ कि जब तुम उस जादुगर को मार दोगे उसके बाद क्या करोगे। उसके सिंहासन में बहुत से हीरे-जवाहरात लगे हैं। वह हीरे-जवाहरात तुम सिंहासन से निकाल लेना। मैंने पिताजी से कहा, आपके पास तो ऐसे बहुत से हीरे-जवाहरात हैं तो यह लालच क्यों? पिताजी ने कहा, बेटा उसके सिंहासन में लगे हीरे-जवाहरात ही मेरे राज्य की जनता है।

उसके कमरे में बहुत सी कठपुतलियां हैं। उन्हें भी एकत्र कर लेना। यहाँ तक उसके तालाब के सभी रंग बिरंगी मछलीयां और पिंजरे में बंद सभी पक्षीयों को एक जगह एकत्र कर लेना। उस जादुगर को मारकर उसके दाएं हाथ के अंगूठे को काटकर उससे निकलने वाला रक्त पानी में मिलाकर सभी पर डाल देना। सभी अपने असली रूप में आ जाएँगे। मैंने कहा, मम्मी कैसे ठीक होगी यह तो बताओ। पिताजी ने कहा, उसके मरते ही तुम्हारी माँ ठीक हो जाएगी। मैंने कहा, ठीक है। पिताजी ने कहा, आज रात तुम्हें यहाँ से निकलना होगा। सुबह सूर्य निकलने के पहले तुम्हें उस जंगल में प्रवेश करना होगा। जहाँ से उसके राज्य की सीमा शुरू होती है। सूर्य निकलने के बाद तुम उसमें प्रवेश नहीं कर सकते। वो एक मायावी द्वार है। मैंने कहा ठीक है। मैं अपनी तैयारी कर लेता हूँ। मैंने झट से भोजन किया और सभी हथियार को रखने लगा। मैंने गायब होनेवाला सूट पहन लिया। जादुई कालीन को जेब में रख लिया। जादुई कड़ा मेरे हाथ में था। आकार बढ़ाने वाले जल का बोतल मैंने जेब में रख लिया। मेरा नान चाकू मेरे गले में था। समय को रूका देनेवाली घड़ी को मैंने गले में पहन लिया।

मैं पूरी तैयारी के साथ पिताजी को अलविदा कहने गया। पिताजी मुझे देखकर हँस पड़े। पिताजी ने कहा, बेटा यह सूट पहनने से क्या फायदा? जिस तरह मैं तुम्हें देख सकता हूँ वैसे ही वह जादूगर भी तुम्हें देख सकता है। मैंने कहा था यह सब खिलौना है। मैंने कहा, भले ही यह खिलौना है पर जरूरत पड़ने पर काम आएगा। मेहनत से हासिल किया हुआ कोई भी वस्तु कभी खिलौना नहीं बन सकता। यह सभी पहले भी मेरे लिए हथियार थे और अभी भी रहेंगे। यह बोलकर मैंने पिताजी का आशीर्वाद लिया। अब मेरी नजर मेरे मंजिल की ओर था। मैंने अपनी जेब से अपना जादूई कालीन निकाला। कालीन पर सवार होकर मैं उड़ चला। मैंने नीचे देखा तो बहुत से गाँव दिखाई पड़ रहे थे। रात का समय और गाँव के घर और सड़क पर जलती लाईट और आसमान में निकला चाँद बड़ा ही अच्छा लग रहा था। तभी अचानक भयानक भयानक आवाजें आने लगी। मैंने नीचे देखा तो घनघोर जंगल था। मैं समझ गया कि यही वो जंगल है, जहाँ से होकर मुझे आगे जाना है। मैं नीचे उतर गया। मैंने जादुई कालीन को अपने जेब में रख लिया। जंगल के प्रवेश द्वार पर सिर्फ एक बड़ा से पत्थर की मूर्ति थी। शायद वह उसी जादूगर की थी। वहाँ ना कोई पहरेदार था नाहीं कोई खतरा दिखाई दे रहा था। मैं धीरे धीरे कदम आगे बढ़ाने लगा।

मैं जैसे ही मूर्ती को पार करके जंगल के भीतर घुसा कि चारों ओर रोशनी हो गई। शायद सबेरा हो गया था। अब वह पत्थर की मूर्ति कहीं गायब हो गई थी। पूरा जंगल सूनसान दिखाई पड़ रहा था। जंगल में ना कोई जानवर था नाहीं किसी पक्षी की आवाज। हवा भी जैसे कहीं गायब हो गई थी। मैंने तो गायब होनेवाला सूट पहन रखा था। अचानक पैर एक सूखी लकड़ी पर पड़ा और उस लकड़ी के टूटने की आवाज से मेरे पास खड़ा वृक्ष हिलने लगा। चारों ओर लता ही लता फैल गई। इस पास के सभी वृक्ष हिलडूल रहे थे। मैंने अपना जादूई कड़ा अपने माथे और आँखो को लगाया। मैंने देखा कि सभी वृक्ष एक दूसरे को देख देख कुछ कह रहे हैं। तभी मैंने अपने जादूई कड़े को अपने कान से लगाया। मुझे उनकी आवाज सुनाई देने लगी। एक वृक्ष दूसरे वृक्ष से कहा, शायद कोई हमारे जंगल में घुस आया है। दूसरे वृक्ष ने कहा, हाँ मुझे भी ऐसा लगता है।

पर कोई दिखाई नहीं दे रहा। शायद कोई जानवर होगा। तीसरे वृक्ष ने कहा, मेरी इच्छा है कि कोई भारी भरकम वजन वाला जानवर हो। बहुत दिनों से कोई मांस नहीं खाया है। अगर हाथ लगे तो पूरा पेट भर लूँ। दूसरे वृक्ष ने कहा, इस बार लालच मत करना। बराबर बराबर बाँट कर लेंगे। पिछले बार हमारे झगड़े में दानवों का फायदा हो गया। मैंने सोचा अच्छा हुआ कि मैंने यह सूट पहना है। मैं दौड़ते हुए आगे बढ़ने लगा। मेरे कदमों की आवाज ने पूरे जंगल को जगा दिया। यहाँ तक कि सभी वृक्ष मुझे यहाँ वहाँ देखने लगे। तभी एक वृक्ष को मेरे कदमों से दबती हुई घासों को देख लिया। उसने जोर से चिल्लाया। यहाँ कुछ ऐसा घुस आया है जो दिखाई नहीं देता। यह बात दानवों तक भी पहुंच गई थी। वो। भी तीर कमान लिए मेरी तलाश में निकल पड़े। मैंने, सोचा अगर इन नरभक्षी जंगल और दानवों से बचना है तो बस एक ही उपाय है।

मैंने झट से अपने गले में लटकते घड़ी का बटन दबा दिया। बटन दबाते ही पूरा जंगल सून्न पड़ गया। सभी वृक्ष, लताएं, और वह दानव मूर्ती की तरह एक ही अवस्था में स्थीर हो गए। मैं वहाँ से भागते जंगल को पार कर गया। सामने ही एक आलीशान अखाड़ा दिखाई दे रहा था। जिसमें कुछ लोग कराटे तो कुछ लोग कुश्ती का अभ्यास कर रहे थे। पर इस समय वह भी मूर्ती बने हुए थे‌। उस बड़े से अखाड़े के पार चार रास्ते दिखाई पड़ रहे थे। वे सभी मुझे देख तो नहीं सकते और नाही रोक सकते थे। । इसलिए मैं किसी भी रास्ते पर आराम से जा सकता था। परंतु इसमें से सही रास्ता तभी मालूम पड़ेगा जब मैं इन्हें हराकर आगे बढ़ूं। मैं अखाड़े के सामने आया और अपने गायब होनेवाले सूट को निकालकर बैग में रख लिया।

मैंने घड़ी का लाल बटन दबाया और सभी अपनी चेतन अवस्था में आ गए। मैंने अपना नान चाकू अपने हाथ में ले लिया। उनकी नजर मुझ पर पड़ी कि वह सब मेरी ओर दौड़ पड़े। मैंने भी कराटे और कुश्ती के सभी दाँव पेंच सिखे थे। पर इनके साथ मुकाबला करने के बजाए इन्हें रास्ते से हटाना ही ठीक होगा। क्योंकि यह लड़ने के लिए एक एक करके नहीं बल्कि एक साथ आ रहे थे। मैंने अपना नान चाकू तेज गति से चलाना शुरू किया। मेरे नान चाकू का वार पड़ते ही वह जमीन पर गिर पड़ते। देखते ही देखते वह रेत में बदल जा रहे थे। सभी को अपने नान चाकू से रेत में बदलते जा रहा था। तभी मेरा नान चाकू एक योद्धा के नानचाकु से उलझ गया। मेरे सामने दो योद्धा थे दोनों के हाथ में नान चाकू था।

वह भी बड़ी तेज गति से अपना नान चाकू चला रहे थे। मेरे हाथ पर उन्होंने मारा तो मेरा नान चाकू मेरे हाथ से गिर गया। उसने मेरे नान चाकू को उठाना चाहा। पर उठा न सका। क्योंकि मेरे नान चाकू का भार सिर्फ मैं ही उठा सकता था। मैंने अपने नान चाकू को उठाया और उसकी साखली में दोनों के गले को लेपट लिया। मैंने उनसे कहा, इनमें से सही रास्ता कौन सा है! एक ने अलग तो दूसरे ने अलग रास्ता बताया। मैंने दैनो का सिर शरीर से अलग कर दिया। वह दोनों भी रेत के बन गए। उनके रेत का बनते ही चार में से तीन रास्ते गायब हो गए‌‌। सही रास्ता मुझे दिखाई दे रहा था।

मैंने अपना बैग उठाया और उस रास्ते पर चल पड़ा। रास्ते में एक सुंदर सा भाग था। जिसमें एक छोटा सा पानी का कुंड था। उसमें रंग बिरंगी मछलीयां तैर रही थी। सामने ही बहुत से पक्षी पिंजरे में बंद थे। एक तरफ विशाल सा पेड़ था। जिसके नीचे एक सिंहासन रखा हुआ था। पूरा सिंहासन हीरे-जवाहरात से जुड़ा हुआ था‌। वहीं कुछ दूरी पर एक पलंग था। उस पलंग एक लंबी-लंबी मूंछ वाला व्यक्ति सफेद वस्त्र धारण किए हुए कठपूतलीयों के साथ खेल रहा था। मैंने अभी तक उसका चेहरा नहीं देखा था। मैं जब तक छुपता कि एक धीमी सी काँपती हुई आवाज आई, छुपने की कोशिश कर रहे हो मिठ्ठू। यहाँ कहाँ छिपोगे। मैं चुपचाप वहीं खड़ा रहा। आओ मिठ्ठू मेरे पास आओ। बहुत वर्षों से मैं यहाँ अकेला खेल रहा हूँ। करता कहकर भेजा उसने। मेरे अंगूठे का रक्त चाहिए। मुझे मारकर अपनी माता को जिवीत करोगे। मैंने कहा, हाँ अपनी माता को जिवीत करूँगा। तो आओ मार दो मुझे। कैसे मारोगे मुझे? कुछ लाए हो मुझ बुढ़े को मारने के लिए। वैसे भी अपने बाप को मारने के लिए हथियार की क्या जरूरत। मेरा गला दबा दो। मैं ऐसे ही मर जाऊँगा। वह व्यक्ति मेरी ओर मुड़ा। मैं उसका चेहरा देखते ही रह गया। क्योंकि उसका चेहरा और मेरे पिताजी का चेहरा एक जैसा था‌.......

मैंने उन्हें गौर से देखा, सच में उनका चेहरा मेरे पिताजी की तरह ही था। मैंने कहा, आप को क्या लगा कि आप मेरे पिताजी का चेहरा धारण कर लोगे तो मुझे उलझा दोगे। उन्होंने खाँसते हुए कहा, तुम्हें उलझा के मुझे क्या मिलेगा? उनकी बातें सुनकर मुझे बड़ा ही अजीब सा महसूस हो रहा था। मन में बहुत से सवाल उठ रहे थे। उन सवालों का जवाब मिले बीना इन्हें मार दूँ। यह मुझसे नहीं होगा। मैंने कहा, आपको आखिर क्या हासिल हुआ इन सभी लोगों को पक्षीं, मछली, और कठपूतली बनाकर? आपने मेरी माता को इस तरह अधमरा क्यों कर दिया ?

आखिर क्यों मुझे मारना चाहते थे? उन्होंने कहा, कुछ सवाल अपने आप से पूछो। तुम्हें अपने आप सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा। मैंने कहा, पूछो सवाल। क्या पूछना चाहते हो? उन्होंने कहा, पहला सवाल यह है कि आखिर क्यों मैं यहाँ दूनिया से अलग बैठा हूँ? ये सभी गाँववाले जिन्हें पक्षी, मछली और कठपूतली बनाया गया है उनके बीच मैं क्या कर रहा हूँ? जिसे तुम अपना पिता मानते हो उसके पास हवेली है और वो बिना डर के जी रहा है। मेरे पास कोई हवेली या नौकर चाकर क्यों नहीं है? मैं तो खुद बूढ़ा हो गया हूँ तुम्हें मारकर मैं क्या करूँगा। मैंने कुछ देर सोचा और फिर कहा, तो मेरे पिताजी ने ऐसा क्यों कहा, कि आप ही शैतान जादूगर हो। आपको मारने पर मेरी माँ जीवित हो जाएगी।

उन्होंने कहा, बेटा मैं कुछ कहूँ। मेरी बात मानोगे। मैंने कहा, आप बोलो। विश्वास करना ना करना मुझपर है। उन्होंने कहा, बेटा वहाँ जो वर्षों से बेहोश पड़ी है वो तुम्हारी माँ है। पर वहाँ जो इंसान हैं वो इंसान नहीं शैतान है। वह बहुत बड़ा जादूगर है। वह तुम्हारा पिता नहीं बल्कि मैं तुम्हारा पिता हूँ। उसने मुझे अपनी जादुई शक्ति से इन लोगों के साथ यहाँ कैद करके रखा है। मैंने कहा, अगर वह एक शैतान जादुगर है तो उसने मुझे क्यों नहीं मारा? उसने आपको क्यों नहीं मारा? अभी तक कैद करके क्यों रखा है? उन्होंने कहा, बेटा मैं कोई जादुगर नहीं हूँ पर अपने राज्य का राजा हूँ। हमारे राज्य में एक शक्ति छुपी हुई है जिसे पाकर इंसान अपार शक्तियों का मालिक बन जाएगा। यहाँ तक कि वह कभी बिमार नहीं होगा और नाहीं उसे कोई मार सकता है। उस शक्ति का पता सिर्फ तुम्हारी माँ को है।

उस अमृत को पीने के बाद उसे सिर्फ उसका बेटा ही मार सकता है‌। इसलिए मुझे मारने कि शक्ति सिर्फ तुम्हारे अंदर है। क्योंकि तुमने अभी अभी पैरेलल युनिवर्स का चक्र पूरा किया है। एक राजकुमार को उस पैरेलल युनिवर्स का चक्र पूरा करने के बाद ही वह शक्ति मीलती है, जिससे वह अपने पिता को मार सके। मेरे मरते ही तुम्हारी माँ जीवित हो जाएगी क्योंकि मैं नहीं चाहता कि तुम्हारी माँ उस शक्ति का पता उस जादुगर को दे।

यह सभी मेरे राज्य के लोग अपने आप जीवित हो जाएँगे क्योंकि उनका राजा हूँ मैं। तुम जैसे ही मुझे मारोगे वैसे ही वह जादूगर अमृत हासिल करके तुम्हें और तुम्हारी माता को भी मार देगा। मैंने कहा, आपने जो कुछ कहा, वो मैं कैसे मान लूँ। उन्होंने कहा, तुम इन सभी लोगों को बचाने और मुझे मारने आए थे ना। तो ठीक है। यह लो तलवार और मेरा अंगूठा काटकर मेरे रक्त से इन्हें जीवित कर दो। इसके लिए पहले मेरा मरना जरूरी नहीं है। मेरे रक्त से यह लोग इसलिए ठीक होंगे क्योंकि मेरे रक्त में अमृत है। उसने तुमसे कहा होगा कि मुझे मारकर इन्हें ठीक करना। मैंने कहा, हाँ उन्होंने यही कहा था। मैंने तलवार से उनका अंगूठा काटकर उनके रक्त को पक्षीं, मछली और कठपूतलीयों पर डाला। सभी के सभी तुंरत अपने इंसानी रूप में आ गए। इंसानी रूप में आते ही सभी ने खुशी से नाचना शुरू कर दिया। सभी उस बूढ़े जादूगर के सामने खड़े होकर कहने लगे। महाराज आज हम फिर से अपने रूप में आ ही गए। आखिर आपका और हमारा इंतजार पूरा हुआ। सभी जोर जोर से चिल्लाने लगे। महाराज की जय। महाराज की जय। उन्होंने सभी को शांत कराते हुए कहा, देखो मैं आप लोगों को आपके राजकुमार से मिलाता हूँ। यह है मेरा बेटा। सभी ने मुझे प्रणाम किया। अब मुझे समझ में आ गया था। कि इतने लोग झूठ नहीं बोलेंगे। ये सभी तो अभी अभी अपने रूप में आए हैं। अपने राजा को देखकर जो खुशी इन्हें मिली है वो इनके चेहरे पर दिख रही है।

पर इनका चेहरा मेरे पिताजी जैसा है इसलिए शायद यह लोग भी धोका खा गए। मैंने एक बुजुर्ग से कहा, हो सकता है कि यह तुम्हारे महाराज नहीं हों। उनका रूप लेकर वह जादूगर हो। उस बूजुर्ग ने कहा, बेटा सिर्फ हमारे राजा के अंगूठे का रक्त ही हमें ठीक कर सकता है। अमृत हमारे राजा ने पीया है उस जादूगर ने नहीं। यह सूनकर मेरे मन को तसल्ली मिली। ये मेरे असली पिता हैं। मैंने पिताजी के पैर छुकर कहा, पिताजी मुझे अब तक यह समझ नहीं आ रहा कि उन्होंने मुझे युद्ध कला क्यों सिखाई। मेरे शक्तियों को संभालना क्यों सिखाया? पिताजी ने कहा, ताकि तुम यहाँ तक पहुंच सको और मुझे मार सको। क्योंकि तुम मुझे इतने आसानी से नहीं मार सकते। भले तुम मेरे बेटे हो पर पहले मैं इस राज्य का राजा हूँ। मैंने सोचा पहले तुम्हें समझाकर देखूं। पर तुम समझदार निकले। मैंने कहा, क्या आपने भी अपने पिताजी को मारकर यह सिंहासन प्राप्त किया है? उन्होंने कहा, नहीं। मेरे पिताजी ने ही अमृत की खोज की। पर वह अमृत ग्रहण किए बिना ही मर गए। उन्होंने अमृत सिर्फ मुझे पिलाया ताकि मै हमेशा जीवित रहूं। वो मुझसे बहुत प्रेम करते थे। यह कहकर वो रोने लगे। मैंने कहा, पिताजी अब चलो हम चलते हैं और उस जादुगर से निपटते हैं। मैंने कहा, पिताजी माँ कैसे ठीक होगी। उन्होंने कहा, मेरे रक्त से। मेरे रक्त का एक बूंद उसके होंठों पर लगा देना। मैंने अपने जेब से जादुई कालीन निकाला और पिताजी को लेकर उड़ चला। उड़ते हुए मैंने सभी लोगों से अपने पीछे आने को कहा। सभी एक साथ दौड़ पड़े। पिताजी ने कहा, बहुत ही अच्छी कालीन है।

मैंने कहा, मैंने यह पैरेलल युनिवर्स के चक्र को पूरा करते समय हासिल किया है। मैंने पिताजी से कहा, पिताजी वह जादुगर कैसे मरेगा? पिताजी ने कहा, यदि किसी भी तरह उसके कमर से उसके दो तुकड़े कर दें तो वह मर जाएगा। हम जैसे ही राज महल के सामने उतरे कि जादुगर दौड़कर बाहर आया। उसने मुझे पिताजी के साथ देखकर कहा, अरे! यह क्या? इसे मारा क्यों नहीं? तुम्हारे राज्य के लोग कैसे जीवित हो पाएंगे? तभी सभी राज्य के लोग भागते हुए वहाँ पहुंच गए। उन्हें देखकर वह हैरान हो गया। वह तुरंत हड़बड़ा कर कहने लगा। अच्छा तो तुम्हें सच्चाई पता चल गई। मैं तो तुम्हें मुर्ख और बच्चा समझता था। यही मेरी गलती है। पर यह मत सोचो कि तुम मुझे मार दोगे। अभी भी तुम्हारी माँ और तुम्हारा कुत्ता मेरे पास है। दोनों को मार दुँगा। अगर तुम आगे बढ़ोगे या कोई होशियारी करोगे तो तुम्हारी माँ और उस कुत्ते की जान के दोषी तुम खुद होंगे। मैंने बिना अपना कदम बढ़ाए अपने गले में लटक रही घड़ी का बटन दबा दिया। बटन दबाते ही सभी मूर्तियों की तरह जम से गए। मैं भागकर महल के अंदर गया। तुरंत माँ को उठाकर पिताजी के पास लाया।

पिताजी के अंगूठे का एक बूंद रक्त माँ के मुंह में डाल दिया। मैं झट से सोनू को भी बाहर ले आया। घड़ी का बटन फिर दबाया। सभी चेतन अवस्था में आ गए। उसने जब मेरी माँ को जिवीत देखा तो बौखला सा गया। उसे समझ में नहीं आया कि अचानक पलक झपकते ही ऐसा कैसे हो गया। उसने अपने हाथ से एक आग का गोला मेरी ओर फेंका। मैंने अपने नान चाकू से उसे रोक लिया। मैं भी तेज गति से दौड़कर उसके पास गया और नानचाकू के वार से उसके दो तुकड़े कर दिए। वह वहीं तड़प कर अपने असली रूप में आ गया। उसका असली रूप बहुत ही भयानक था। सभी लोग खूशी के मारे नाचने लगे। मेरे माता पिता दोनों ही बहुत खुश हुए। दोनों ने मुझे गले से लगा लिया। सभी लोग इतने दिनों बाद आजाद हुए थे। सभी अपने घरों की ओर दौड़ पड़े। सभी अपने घरों को देखकर खुश हो रहे थे।

मैं माँ और पिताजी के साथ हवेली में गया। पिताजी ने माँ को इशारा किया। माँ कमरे में चली गईं। थोड़े देर बाद एक प्याले में चमकता हुआ नीला शरबत ले आई। पिताजी ने कहा, बेटा पी लो इसे। यही है वो अमृत। मैंने कहा, नहीं। मुझे नहीं चाहिए ऐसा अमृत। मेरे पास ऐसे भी बहुत सारी शक्तियां हैं। क्या करूंगा मैं इतनी शक्ति लेकर। अब तो जादुगर भी मर गया। पिताजी ने कहा, बेटा मैं और तुम्हारी मांँ तो कभी नहीं मरेंगे। पर हम नहीं चाहते कि हम तुम्हें कभी मरता देखें। मैंने कहा, ठीक है। मैंने वह प्याला पिताजी के हाथ से लेकर पी लिया। मुझे बहुत नींद आने लगी। माँ ने कहा, चलो मैं तुम्हें सुला दूँ। इतने दिनों बाद यह मौका मिला। माँ ने मुझे पलंग पर सुला दिया। अगले दिन जब मैं उठा तो राजमहल में रोशनी ही रोशनी थी। चारों तरफ खुशीयों की लहर थी। बाहर निकला तो मेरे सामने एक खुशहाल राज्य दिख रहा था। सोनू दौड़कर मेरे पास आया। हम दोनों पहले की तरह खुशी खुशी खेलने लगे।


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