नयी परिपाटी
नयी परिपाटी
"सामान की लिस्ट तैयार हो गई ! पांच किलो फूल याद से लिख लो। मंदिर मे काफी लोग आयेंगे फूल कम न पड़े।" सुरेश जी ने सारी व्यवस्था पर नजर डालते हुये कहा।
"पापा ! फूल दादी की फोटो पर चढ़ाने के बाद उन फूलो का क्या करेंगे ?" लक्षित ने उत्सुकता से पूछा।
"ये कैसा प्रश्न ! जाकर किसी नदी मे बहा देंगे बेटा ।" सुरेश जी ने थोड़ा अचंभित होते हुये जवाब दिया।
"तो नदी प्रदूषित नहीं होगी इससे ?" लक्षित का बालमन फिर प्रश्न कर बैठा।
"पर बेटा पुष्पांजलि के बिना धर्म कर्म कैसे पूरा होगा।" सुरेश जी ने उसके गालों पर हल्की चपत लगाते हुये उत्तर दिया।
"पापा हम पुष्पांजलि के स्थान पर गेहूँ चावल अर्पित करें तो !!!" जिझासु लक्षित ने पापा की ओर देखते हुये पूछा।
"गेहूँ चावल अर्पित ! मतलब !"
सुरेश जी हैरानी से लक्षित की ओर देखते हुये बोले।
"मतलब दान किया गया गेहूँ चावल हम जरुरतमंदों में बांट देंगे जिससे उनका भी भला होगा।" लक्षित ने अपनी बात को समझाते हुये कहा।
"हम पशु पक्षियों को भी तो ये अनाज खिला सकते हैं, सोचिये दादी की आत्मा को कितना सुकून मिलेगा।"
इतनी देर से चुप बैठी नन्हीं तृप्ति बोल उठी।
".....और नदियों को मिलेगी प्रदूषण से मुक्ति !"
