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मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी

Drama


4.0  

मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी

Drama


नया सवेरा

नया सवेरा

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रोहन की आज की रात भी बहुत स्याह थी। रात भर इंटरव्यू की तैयारी में गुज़र गई। फिर भी अपने आप को संतुष्टि नहीं मिल पा रही थी। जितना पढ़ो उतना कम है। ये कोई आज की बात नहीं थी। ऐसे तमाम इंटरव्यू पर उन अँधेरी काली रातों के साये ही छाये रहे। हर जगह मायूसी छायी हुई थी। एक तो पहले ही चारों ओर व्यवसाय में मंदी के चलते रोज़गार के अवसर बहुत सिमित थे। ऐसे में रोज़गार हासिल करना, वह भी मार्केटिंग के क्षेत्र में बहुत मुश्किल था। वो कहते हैं न कि जब मुश्किलें आती हैं तो चारों तरफ से के घेर कर आती हैं। एक तो विश्व व्यापी मंदी, दूसरी तरफ वैश्विक महामारी का प्रकोप? उम्मीद की कोई किरण नज़र नहीं आती थी। बस इसी कश्मकश में कब हाथ में किताब लिए हुए नींद लग गई पता ही नहीं चला। सुबह उसकी कमरे की खिड़की से अंदर आती हुई, सूरज की किरणों ने इतनी तपिश पैदा कर दी कि उसकी नींद खुल गई। भड़-भड़ा कर उठा।

अरे, आज दस बजे तो विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा इंटरव्यू है। लैपटॉप को चर्जिंग पर लगाया और फ्रेश होने चला गया। 

मिस्टर रोहन, आप तो जानते हो अगले सप्ताह लॉक-डाउन समाप्त हो जाएगा। दो माह से चल रहे लॉक डाउन के कारण सारा माल स्टोर में डंप पड़ा है। ऐसे में नए सिरे से पूरी टीम बनाना। सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए, डिस्ट्रीब्यूटर्स से संपर्क बनाना, एक दुष्कर कार्य है। आप इसे कैसे कर पाएंगे? 

जी सर, मैं समझ सकता हूँ। वर्तमान परिस्थितियों में हमें अपने कार्य करने की रणनीति बदलनी होगी। व्यक्तिगत संपर्क से अधिक महत्त्व, हमें ग्राहक तक हमारी बात पहुँचाने ने के सारे विकल्प खुले रखने होंगे। विश्व महामारी ने एक वैश्विक संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमारी सारी सम्भावनाएं समाप्त हो गईं हैं। इतिहास गवाह है कि ये दुनिया इससे पहले भी वैश्विक संकट से गुज़र चुकी है। लेकिन उसकी प्रगति के रास्ते और मज़बूत होकर निकले हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं अपने टीम लीडर में एक ऐसी ऊर्जा भर दूँगा कि हमरी टीम विषम से विषम परिस्थितियों का मुकाबला करने में सक्षम होगी। 

ओके, नाउ यू कैन ज्वाइन। एचआर विल प्रोसीड। 

इस बार तो सूरज की किरणें रोहन के लिए नया पैग़ाम लेकर आईं थीं। काम मुश्किल तो था लेकिन असंभव नहीं था। उसने ज्वाइन करते ही ऊर्जावान युवाओं को अपनी टीम में शामिल किया। सबसे पहले तो पुराने आर्डर के चेन को चालू करना था। पुरानी टीम के तमाम कर्मचारी लॉक डाउन के कारण या तो पलायन कर गए थे या फिर उदास होकर कहीं और चले गए थे। सबसे पहले पुराने कर्मचारियों से संपर्क कर उनको विश्वास में लेना बड़ी बात थी। उसने किसी तरह विश्वास दिलाया कि हम अपनी तनखाह से डबल मेहनत करेंगे। इतना काम करके देंगे कि कंपनी न केवल अपने नुक्सान की भरपाई करे बल्कि हमें बोनस भी सुचारु रूप से मिल सके। 

अंततः उसने अपने टीम लीडर्स को निर्धारित टारगेट पूरा करने के उपरांत कन्या कुमारी टूर का एक विशेष पैकेज भी टॉप मैनेजमेंट से स्वीकृत करवा लिया था। टीम लीडर्स , पंकज सिंह , सलीम खान, कैलाश वर्मा , संजय शर्मा को चारों जोन का भर सौंपा गया। पंकज सिंह के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम करना मुश्किल था। यहाँ लॉक डाउन पूरी तरह से नहीं हटा था। महामारी के प्रकोप के चलते केवल कुछ रियायतें दी गईं थीं। रोहन सर, मेरे क्षेत्र में अभी भी काम करना मुश्किल है। कर्मचारियों में इतना भय बैठ गया है कि उस इलाके में मटेरियल सप्लाई के लिए भी तैयार नहीं हैं। यदि हम अपने पुराने ग्राहकों तक माल नहीं पहुंचा पाएंगे तो वे दूसरी कंपनी का प्रोडक्ट खरीदने पर मजबूर हो जाएंगे। 

पंकज तुम सही कहते हो लेकिन तुम उस क्षेत्र से भलीभांति परिचित हो। तुम्हें ही उसका समाधान निकालना होगा। हमारी समस्याओं के समाधान हम से बेहतर और कोई नहीं निकाल सकता। इस तरह तो तुम्हारा टारगेट बाधित होगा। चाहो तो मैं भी तुम्हारे साथ चल सकता हूँ। हर समस्या का समाधान भी उसी समस्या में ही निहित होता है। हमें केवल विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

रोहन की प्रेरणा स्वरुप इस वर्ष की क्लोजिंग तक चारों लीडर्स ने, न केवल अपना टारगेट कम्पलीट किया। बल्कि उन्हें "एक्सीलेंस एवार्ड" से भी नवाज़ा गया। 

अब रोहन उसके चारों टीम लीडर कन्या कुमारी टूर पर था। तीन समुद्रों का संगम स्थल एक अद्भुत दृश्य निर्मित कर रहा था। इससे उठने वाली लहरें किसी भी इंसान के जीवन को ऊर्जावान बनाने के लिए काफी थीं। दूर-दूर तक फैली समुद्री लहरों के बीच सूर्योदय का नज़ारा बहुत ही अद्भुत था। जैसे ही पूर्व दिशा से सूर्य का लाल गोला समुद्र से बाहर निकलता हुआ दिखाई दिया, रोहन की टीम ने हाथ लहरा का उसका अभिवादन किया। 

अब सबका ये विश्वास और पुख्ता हो गया था कि "हर अँधेरी रात एक नई सुबह लेकर आती है।"

आज भी इस सुबह का सूरज जब निकला तो रात के काले सायों को अपने अंदर नील गया था। लाल-लाल, लालिमा लिए क्षितिज पर इसका आभा मंडल एक अलौकिक दृश्य बहुत सुन्दर लग रहा था। जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ रहा था उसके आभा मंडल का दायरा बढ़ता जा रहा था। दरअसल ये दायरा इतना बढ़ गया था कि इसने अपनी रौशनी से सारी दुनिया को रौशन कर दिया था। तभी तो ये किरणें बारीक़ से बारीक सुराख़ से भी गुज़र कर जहाँ-जहाँ भी अंधेरे का साम्राज्य था उसे नष्ट करने के लिए काफी थीं।

ऐसे ही उस एक दिन, रोहित की खिड़की से आने वाली सूरज की किरणों ने भी तो वास्तव में उसके अँधेरे भविष्य को भी रौशनी से भर दिया था।


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