नई राह
नई राह
12वीं क्लास के बाद किसी कारण वश मेरी पढ़ाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिसके बहुत से कारण थे कुछ सामाजिक कारण थे तो कुछ पारिवारिक।
मेरे सामने दो बातें रखी की या तो में पढ़ाई छोड़ दूँ!! या फिर आर्ट्स के विषय लेकर आगे की पढ़ाई जारी रखूं। पर मेरी रुचि तो साइंस में थी और मैं उसी में आगे बढ़ना चाहती थी। मेरा संकल्प था कि मैं अगर आगे पढ़ाई करूंगी तो साइंस से ही वरना नहीं!!
मेरे इस संकल्प को पूरा करने में मेरे बड़े भाई ने मेरा सहयोग दिया। साइंस कॉलेज हमारे छोटे से जिले से बाहर था या यूं कह लीजिए की जहां पर जाना पैदल नामुमकिन था मेरे उस पास उस समय साइकिल भी नहीं हुआ करती थी। और इस नामुमकिन को आसान बनाया नई राह दिखाई मेरे बड़े भाई ने।
भाई ने मेरा प्राइवेट फॉर्म भरवा कर मेरी पढ़ाई जारी रखी। 2 वर्ष मैंने घर पर बैठकर ही पढ़ाई की फिर तृतीय वर्ष से मैं कॉलेज रेगुलर गई क्योंकि फाइनल प्राइवेट नहीं किया जा सकता था। उसके बाद मैंने एमएससी किया जंतु विज्ञान से। उस समय मैंने एमएससी में टॉप किया था। और मैंने अपने समाज में अपने माता-पिता का नाम ऊंचा कर दिखाया क्योंकि हमारे समाज में ज्यादा पढ़े लिखे लोग नहीं थे।
ज्यादातर लोग 12वीं के बाद अपना खानदानी बिजनेस ही करते थे। और जब लड़के ही पढ़े-लिखे नहीं होंगे तो लड़कियाँ कैसे आगे पढ़ सकती हैं।
कुछ गिने-चुने परिवार ही ऐसे होते थे जहां पर शिक्षा को महत्त्व दिया जाता था ।
