मृत्यु पर विजय
मृत्यु पर विजय
बैक्टीरिया से होने वाला एक रोग, जो पानी से फैलता है और जिसमें गंभीर दस्त और शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
तुरंत इलाज न होने पर हैजा जानलेवा हो जाता है।
जिसका नाम सुनकर ही मन घबरा जाता है जब उसी रोग के मरीज हर तरफ दिखने लगे हॉस्पिटल उनसे भर जाए हॉस्पिटल में एक एक बिस्तर पर तीन तीन जनों को लेटाया जाए जगह की कमी पड़े ऐसे समय में डॉक्टर्स और मेडिकल टीम समय सूचक वह सही इलाज से अगर एक भी मरीज मरता नहीं है तो यह उन डॉक्टर्स के द्वारा मेहनत करके लोगों को बचाना मृत्यु पर विजय पाने के समान ही है।
और यह सब आपकी आंखों के सामने होता है एक बार तो मन घबरा जाता है मगर अगर घर में काबिल डॉक्टर हों जो हर परिस्थिति में आप आना खोकर समय सूचक का से काम करें तो स्थिति कुछ और होती है
सन् 2006 8 जुलाई/9 जुलाई अचानक ही हॉस्पिटल में कोलेरा के मरीजों आने लगे। तादाद इतनी बढ़ गई कि हॉस्पिटल में भी जगह नहीं रही।
डॉक्टर जैन और उनकी अगुवाई मेंदूसरे डॉक्टर्स और मेडिकल टीम के सही इलाज और समय सूचकता से
,1, बड़े-बड़े ड्रम में जीवन रक्षक घोल बनाया गया सबको एंटीबायोटिक और उचित दवाइयां दी गई। सही इलाज बाथरूम की सफाई हाइपोक्राइट क्लोराइड सॉल्यूशन से ताकि और रोग फैलने ना पाए बहुत ध्यान रख कर के सब करने से रात दिन मेहनत करने से एक भी पेशेंट की मृत्यु नहीं हुई।
डॉक्टर्स के साथ-साथ पूरी टीम खासतर से सफाई कर्मचारी और सब धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सब की सेवा करें सेल्यूट है ऐसे लोगों को
ऐसा का ऐसा ही तिलकवाड़ा में नर्मदा नदी के तट पर दूषित पानी और से है हैजा फैल गया था। वहां पर भी डॉक्टर जैन और उनकी टीम ने एक भी पेशेंट को मरने नहीं दिया।
ऐसा ही पादरा वडोदरामें भी हुआ वहां पर भी इस टीम ने एक भी पेशेंट को मरने नहीं दिया इस तरह मृत्यु पर विजय पाई। इन सबकी में चश्मदीद गवाह हूं।
जीवन रक्षक घोल जिससे हम ओ आर एस/इलेक्ट्रॉल भी कहते हैं। वह हम घर में बना सकते हैं उसका माप है
1 लीटर पीने का स्वच्छ पानी में 3 । 5 ग्राम नमक सोडियम क्लोराइड
3:30 ग्राम /(पोन चम्मच) अंदाज और 2।5 ग्राम आधा चम्मच
सोडा बाइकारब खाने का सोडा।
1 ।5 ग्राम आगे पोटेशियम क्लोराइड बाजार मे पोट क्लोर के नाम से मिलता है। 15ml में १।५ ग्राम होता है।
नाप से बनाना जरूरी है 1 लीटर के माप से साथ में कोको कोला वगैरह कुछ नहीं देना चाहिए क्योंकि वह हाइपरटॉनिक होता है और नुकसान करता है।
तुरंत तकलीफ में अगर पोटक्लोर नहीं हो तो केला और नारियल का पानी दिया जा सकता है उसमें पोटेशियम होता है । यह है मैं आप सब की जानकारी के लिए लिख रही हूं। बच्चों में बुजुर्गों में जल्दी से जल्दी इसका इलाज होना बहुत जरूरी होता है और यह जीवन रक्षक है।
