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Chandresh Kumar Chhatlani

Tragedy

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Chandresh Kumar Chhatlani

Tragedy

महा-भारत

महा-भारत

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"नमस्कार...नमस्कार...नमस्कार... आज के हमारे 'लड़ाकूss नेता' कार्यक्रम में हमारे साथ हैं भ दल के हाजिरजवाब प्रवक्ता सुपात्र जी, क दल की प्रवक्ता प्रियंवेदी जी, म दल के अक्लमंद वक्ता ओरेसी जी और आ पार्टी से उर्जावान अचला आमबा।"

नाम लेते-लेते शायद टीवी चैनल ठाठ-बाट के एंकर का कंठ सूख गया था, उसने एक ग्लास पानी गटागट पीकर आगे कहा, "आज का विषय है - कुदरत के करिश्मे पर हक़ किसका?” और एक विशेष संगीत ‘ढन-ढन-ढन-ढन - ढनन-ढनन - ढन’ नेपथ्य में बज उठा।

एंकर बड़े जोश के साथ आगे बोला, “सिर्फ और सिर्फ आपके प्रिय चैनल ठाठ-बाट के लोकप्रिय कार्यक्रम महा-भारत पर देखिये... पांच साल की यह मासूम सी लड़की कुदरत का करिश्मा है.... यह न केवल शतरंज की बेहतरीन खिलाड़ी है बल्कि बातों की भी जादूगर है... कोई भी सवाल पूछें – जवाब हाज़िर है। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार प्राप्त पांच साल की इस मासूम-जादूगर का मैं दिल से स्वागत करता हूँ।"

और कैमरा चोकलेट खाती हुई एक बच्ची की तरफ घूम गया।

टीवी एंकर ने उस बच्ची से पूछा, "यह बताओ बेटा आपको इतना अच्छा शतरंज खेलना किसने सिखाया?"

वह कुछ कहती उसके पहले ही सुपात्र जी बोले, "सीधी सी बात है, हमारा राज चल रहा है! इसलिए इसकी सारी उपलब्धियां हमारे खाते में जायेंगी।"

प्रियंवेदी जी यह सुनते ही उखड़ गयीं और चिल्ला कर बोलीं, "आपके खाते में! भाईसाहब, पहले अपने गनधन खाते सम्भालिये। हमारे कामों को खुदका बताने की आपकी आदत जाती क्यों नहीं? यह जब गर्भ में थी तब हम सत्ता में थे, अभिमन्यू की तरह यह जन्म ही से शिक्षित थी, इसलिए इस बच्ची के सारे कारनामे हमारे कार्यों में दर्ज होने चाहिये।"

सुपात्र जी भी उखड़ गए और दहाड़ते हुए बोले, "मेरी बहन, तुम्हारे दल का चुनाव चिन्ह ही सबकी बाय-बाय करता है, इतने सालों से बाय-बाय कर रहे हो, इसलिए अब जनता भी आपको बाय-बाय कर रही है।"

प्रियंवेदी जी मुस्कुरा दीं और उसी भंगिमा में बोलीं, "भाईसाहब, आपका चुनाव चिन्ह तो कीचड़ में खिलता है... यही बात देश के लिए अपमानजनक है..."

टीवी एंकर ने तुरंत बात काटते हुए कहा, "चुनाव चिन्ह पर बात जाने का मतलब है - हम लोग मुद्दे से भटक रहे हैं...ओरेसी जी आप क्या कहेंगे इस बारे में।"

ओरेसी जी संयत स्वर में बोले, "यह बच्ची हमारे धर्म - हमारे मजहब की है... पति ने इसकी माँ को तीन तलाक कहा था, लेकिन उस वक्त यह प्रेग्नेंट थी। इसलिए तलाक हुआ नहीं और यह बच्ची इस जहां में आ गयी। हमारे मजहब में महिलाओं की इतनी इज्जत है... इसलिए इस बच्ची की शोहरत पर पर हमारा इख्तियार है।"

"अच्छा!!" सुपात्र जी आँखे तरेर कर बोले, "आपके चेहरे का नूर तो सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक के फैसले के साथ ही गुम हो गया है साहब....."

"ओह... तो फिर उसी सुप्रीम कोर्ट के लिए मंदिर के फैसले का भी इंतजार कीजिये जनाब।" ओरेसी जी का स्वर भी तेज़ हो गया।

अब अचला आमबा बोली, "मंदिर-मस्जिद के मुद्दों में उलझा कर देश की प्रतिभाओं को नष्ट करने का अच्छा षड्यंत्र है आप सभी का..."

सुपात्रा जी बोले, "अब आप क्यों बोल रही हैं.... इस बच्ची के राज्य में तो आप इलेक्शन लड़ ही नहीं रही हैं।"

"तो क्या हम भारत के नागरिक नहीं हैं? या फिर आप ही हमें राष्ट्रवादिता का सर्टिफिकेट देंगे?" अचला जी उखडती हुई बोलीं।

"बस-बस! बाकी बातें ब्रेक के बाद।" एंकर ने सभी को रोक दिया।

ब्रेक के बाद एंकर बोले, “एक छोटी सी बच्ची से चुनाव चिन्ह और राष्ट्रवादिता तक के मुद्दे उठे हैं, लेकिन जिस मुद्दे पर बात होनी है वह नहीं हो रही, मैं अब अचला आमबा से पूछना चाहता हूँ कि इस लड़की के कार्यों का श्रेय किसी राजनीतिक दल को क्यों जाना चाहिए, उसके माता-पिता को क्यों नहीं?”

अचला आमबा बोलीं, “... देखिये, इसके माता-पिता समझदार होते तो वे EVM के जरिये हो रही नकली जीतों के विरुद्ध हमारे साथ खड़े होते, नोटबंदी के वक्त बैंक की लाइन में लगा आम आदमी अपनी बच्ची को क्या इतना आगे बढ़ा सकता है? इस भ्रष्टतंत्र में एक बच्ची अपनी मेहनत से आगे बढ़ी है, जैसे हमारा दल बढ़ रहा है – बिना भ्रष्टाचार के। किसी भी दूसरे दल को यह बच्ची देने के बाद, यह बच्ची उनकी भाषा बोलना शुरू कर देगी और फिर उस बच्ची का भविष्य खत्म हो जाएगा।”

सुपात्र जी ने अपनी एक अंगुली उठा दी।

एंकर ने कहा, “सुपात्र जी कहिये, आप क्या कहना चाहते हैं?”

सुपात्र जी बोले, “अचला जी, पहले जाकर आप अपनी पार्टी का भविष्य सम्भालिये, नेता जी को खांसी हो रही होगी, उनको डॉक्टर के पास लेकर जाइए। देश का भविष्य हम और देश कि जनता देख लेंगे।“

अचला जी उखड़ गयीं, “आप पहले जाकर अपने नेता जी कि डिग्री देखिये, भविष्य छोडिये आपको भूतकाल देखने में भी शर्म आ जायेगी।“

प्रियंवेदी जी उनकी बात काटती हुई बोलीं, “भूतकाल में तो आप अंग्रेजों के एजेंट भी रहे हैं।”

“और आपका भूतकाल प्रियंवेदी जी?” अचला जी बोलीं, “देश में भ्रष्टाचार तंत्र किसने लगाया?”

प्रियंवेदी जी बोलीं, “और आप किस तरह राशनकार्ड बांटने में व्यस्त रहे जनता को नहीं पता है क्या?”

काफी देर से चुप बैठे ओरेसी जी अब बोले, “मिस्टर सुपात्र, आप भविष्य कि बात करते हैं... आपने देश का प्रेजेंट भी खराब कर दिया है।

सुपात्र जी ने तल्ख़ लहज़े में पलटवार किया, “”आप देशद्रोही लोग हैं... देश को बर्बाद आपने किया है।“

प्रियंवेदी जी भी चीखती हुई बोलीं, “देशद्रोही आपने हैं, आप देश को बेच रहे हैं।“

अचला जी भी मौका देख कर चिल्ला दीं, “देश को बेचने में अभी और पहले के सभी राजनीतिक दलों का हाथ है।“

टीवी एंकर ने उन सभी के माइक के स्वर धीमे करते हुए, उस बच्ची से प्यार से पूछा, "बेटा आपका नाम बताओ?"

हर प्रश्न का उत्तर जानती उस बच्ची ने इस प्रश्न का उत्तर दिया,

"अंकल आज मेरा नाम भारती है।"


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