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Abhilasha Chauhan

Inspirational


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Abhilasha Chauhan

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मानवता की जीत

मानवता की जीत

2 mins 47 2 mins 47

2020 का फरवरी माह , सबकुछ अच्छा चल रहा था।घर में एक उत्सव मनाया गया।सभी लोग एकत्र हुए थे। लेकिन उस समय पता नहीं था कि कैसा समय आने वाला है!बेटा यूएस चला गया और फिर कोरोना जीवन पर हावी होने लगा।सबकुछ अकस्मात ही बंद हो गया।

मेरी माँ कैंसर पेशेंट,उनका आपरेशन होना था,पति किडनी पेशेंट उनका ट्रीटमेंट चल रहा था।सब जैसे थम गया।अपने पराए लगने लगे। गली-मोहल्लों में सन्नाटा छा गया।एक अनजाना खौफ मन की खुशियों को लीलने लगा। दूरदर्शन पर आने वाले समाचार हरपल मौत का साक्षात्कार कराते। अपनों की चिंता और बढ़ते डर ने मन को शिकंजे में कस लिया।

रातों की नींद हवा हो गई।मन अवसाद से घिर गया।ऐसा लगने लगा कि अब जीवन का कोई अर्थ नहीं।किसी अपने को असमय जाते देखने से अच्छा है कि स्वयं ही जीवन का अंत कर दो।कोई घर में आता तो ऐसा लगता कि कोरोना तो नहीं आ गया।लाकडाउन ने इस भय को और बढ़ा दिया।माँ के कैंसर का इलाज नहीं हो पा रहा था,बेटा यूएस में फँस गया था। साफ-सफाई का काम बढ़ गया था।घर में कोई सामान लाते हुए डर लगता।लाकडाउन के कारण कहीं आना-जाना संभव नहीं था।सो अवसाद ने डेरा डाल लिया।

अपने आप से लड़ते हुए जीवन जीना मुश्किल हो चला था। लेकिन निराशा से ही आशा का जन्म होता है।मैंने देखा कि मैं जिस डर को अपना कर बैठी हूँ,वह व्यर्थ है इस समय की लोग ऐसे भी हैं जो एक वक्त का खाना भी नहीं खा पा रहे हैं। औरों की पीड़ा के सामने अपना डर छोटा लगने लगा ।हमारे इधर बाहर से आकर काम करने वाले बहुत से श्रमिक व्यथित और परेशान थे ,मुझे लगा जितना हो सके उनकी मदद की जानी चाहिए। हमारे घर के आसपास रहने वाले कुछ लोग भी मानवता की सेवा करना चाहते थे। अतः हमने मिलकर खाने के पैकेट बनाने शुरू किए और जरुरत मंदों में बाँटने का काम पुरुषों को सौंप दिया। कभी-कभी हम भी जाते ,उनके चेहरे की खुशी देखकर मन स्वस्थ होने लगा। आत्मचिंतन कर मैंने पाया कि यह लाकडाउन भले ही जिंदगी की दौड़ को रोक चुका हो,पर इसने हमें बहुत कुछ दिया है-

परिवार के प्रति सोचने का अवसर मिला,जीवन के प्रति नजरिया बदला,जीवन सिर्फ स्वयं तक सीमित नहीं है,यह किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु मिला है। आत्मचिंतन और आत्ममंथन के लिए लाकडाउन का समय सबसे बढ़िया था , मुझे प्रसन्नता है कि आज मैं सकारात्मकता के साथ जीवन जी रही हूँ।मृत्यु भय से दूर एक उजली किरण के इंतजार में।जब यह संकट समाप्त होगा और मानवता जीत जाएगी।



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