Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!
Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!

प्रीति शर्मा

Tragedy Classics

4.8  

प्रीति शर्मा

Tragedy Classics

"मां कहां हो तुम"

"मां कहां हो तुम"

1 min
271


हर रोज हर बात में,

हर काम और जज़्बात में,

जिक्र तुम्हारा है।


कहने को बाँटने को,

बहुत कुछ है मेरे पास

पर याद आ जाता है

अब नहीं हो तुम।।


एक अधूरापन

मन खाली-खाली

काश तुम होतीं।

थोङी सी भी हो परेशानी

तुम आस बँधाती थीं।


मन की कह देते थे।

तुम सहारा बन जाती थीं।।

नहीं अब कोई

जिसे कह सकें

बिन संकोच

गर कहें भी किसी अपने से,

दर्द दिल का तो..


याद करता है वो भी तुम्हें

तुम थी अवलम्ब उनका भी

फिर मिलके याद करते हैं

हम सब साथ-साथ

माँ कहाँ हो तुम!

माँ कहाँ हो तुम।


Rate this content
Log in

More hindi story from प्रीति शर्मा

Similar hindi story from Tragedy