माला के बिखरे मोती (भाग ९२)
माला के बिखरे मोती (भाग ९२)
अजय (गुस्से में): आप लोग ये सब कैसी बातें कर रहे हैं? इतना प्यार करने वाली और हम सबका इतना ध्यान रखने वाली मेरी भावना को मैं कैसे भूल जाऊं?
देविका: बहुत आसान है अजय भैया। जितनी आसानी से आप उनका जन्मदिन भूल गए थे, उतनी ही आसानी से उनको भी भूल जाइए। आख़िर पुरानी हो गई एक घरलू पत्नि की अहमियत क्या ही होती है! क्या ही उसकी कोई इच्छाएं होती हैं!क्या ही उसका जन्मदिन याद रखना! क्या ही उसको इतना महत्व देना! एक घरेलू पत्नि सिर्फ़ करवाचौथ और तीज पर पति की लंबी उम्र के लिए पूरा दिन भूखी रहती है। तो इसमें कौन सी बड़ी बात है! अगर एक "व्यस्त" पति घरेलू पत्नि का जन्मदिन भूल भी जाए, तो क्या ही कोई भूचाल आ जाएगा! भले ही वह घरेलू पत्नि आपकी हर चीज़ का ध्यान रखे और आपके हर आदेश का पालन करे। यह तो उसका फ़र्ज़ है। उसको तो यह फ़र्ज़ निभाना ही होगा।
अजय (रोते हुए): प्लीज़...बस करो देविका। मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई है। मुझे भावना का जन्मदिन याद रखना चाहिए था। एक पत्नि अपने पति से यह तो अपेक्षा कर ही सकती है कि उसका पति उसका जन्मदिन याद रख ले और उसको विश कर दे।
आरती: अजय भैया, मुझे लगता है कि अब आपको अपनी भूल का अहसास हो गया है। वैसे अभी भी देर नहीं हुई है। आप अपनी भावना को ढूँढ लाइए। फिर उससे अपनी ग़लती की माफ़ी माँगिए और फिर उसको प्यार से गले लगाकर विश कीजिए। अभी उसका जन्मदिन ख़त्म नहीं हुआ है। अभी बारह नहीं बजे हैं।
अजय (हाथ जोड़कर रोते हुए): लेकिन आरती भाभीजी, मैं अपनी भावना को इतनी रात को कहाँ से ढूँढकर लाऊं? हे ईश्वर, मेरी मदद करो।
आरती: अजय भैया, अगर आप सच्चे दिल से ईश्वर से भावना को माँगेंगे, तो ईश्वर आपकी मुराद पूरी कर देंगे। आप अपनी दोनों आँखें बंद करके ईश्वर से प्रार्थना कीजिए कि भावना जल्दी से जल्दी आपको मिल जाए।
अजय (सुबकते हुए): ठीक है भाभीजी। मैं अपनी दोनों आँखें बंद करके सच्चे दिल से ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि मेरी भावना जल्दी से घर वापस आ जाए। शायद ईश्वर मेरी प्रार्थना सुन लें।
फिर अजय अपनी दोनों आँखें बंद करके कुछ बुदबुदाने लगा है। अजय की आँखों से आँसू अब भी लगातार बह रहे हैं।
शायद परिवार में सभी को इसी पल का इंतज़ार था। जैसे ही अजय अपनी आँखें बंद करके बैठा है, वैसे ही देविका दबे पाँव वहाँ से जाकर आरती के कमरे में बैठी हुई भावना को अपने साथ ले आई है और चुपचाप अजय के सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
अजय ने कुछ पलों के बाद मायूसी से अपनी आँखें खोली हैं तो देखा है कि उसकी भावना उसके सामने खड़ी है। अजय खुशी के मारे उछल पड़ा है। अजय ने खुशी से भावना को गले लगा लिया है। भावना अब भी चुप है। अजय बोला,
"भावना तुम आ गईं! हे ईश्वर, आपका बहुत बहुत धन्यवाद!"
तभी आरती हैरान होने की एक्टिंग करते हुए बोली,
"अजय भैया, क्या हुआ है आपको? आप किससे बात कर रहे हैं?"
अजय: यह देखिए न आरती भाभीजी, मेरी भावना वापस आ गई है।
आरती (भावना के वहाँ न दिखने की एक्टिंग करते हुए): भैया, भावना कहाँ आ गई है? मुझे तो भावना कहीं नहीं दिख रही है। ईश्वर इतनी जल्दी किसी की मुराद पूरी नहीं करते हैं। शायद आपको वहम हुआ है।
अजय: अरे भाभीजी, भावना यहीं तो खड़ी है, ठीक आपके सामने।
आरती: अजय भैया, कहाँ है भावना? मुझे भावना दिखाई क्यों नहीं दे रही है?
आरती अपनी हँसी को बहुत मुश्किल से रोक पा रही है। फिर वह सबकी ओर देखते हुए बोली,
"क्या आपमें से किसी को भावना दिखाई दे रही है?"
माला (एक्टिंग करते हुए): आरती बहू, मुझे भी भावना कहीं नज़र नहीं आ रही है। मुझे लगता है कि मेरा अजय बेटा मेरी फ़ालतू सी बहू भावना के ग़म में पगला गया है।
अजय: मम्मी, प्लीज़ आप मेरी भावना को फ़ालतू मत बोलिए। मुझे अपनी ग़लती का अहसास हो गया है। मैं समझ गया हूं कि एक आम घरेलू पत्नि का भी बहुत महत्व होता है, अपने पति और अपने बच्चों के जीवन में। तो पति और बच्चों का भी फ़र्ज़ होना चाहिए कि उस आम घरेलू पत्नि और माँ को छोटी छोटी खुशियाँ दें। उसके जन्मदिन पर भले ही कोई उपहार न दें। भले ही उसके लिए कोई शानदार पार्टी न करें। लेकिन कम से कम वह अपने पति और बच्चों से बधाई की उम्मीद तो कर ही सकती है। उस घरेलू पत्नि और माँ को दुनिया की सारी खुशी उसी में मिल जाती है। आज सुबह मुझसे यह ग़लती हो गई कि मुझे भावना का जन्मदिन याद नहीं रहा और डाइनिंग टेबल पर इसको सज धजकर तैयार हुआ देखकर भी मैंने कुछ सोचने या जानने की कोशिश नहीं की। कल रात की बात तो छोड़ ही दीजिए, अगर मुझे आज सुबह ही याद आ जाता कि आज इसका जन्मदिन है, तो मैं एक शानदार पार्टी ज़रूर करता। लेकिन कोई बात नहीं, कल हम पार्टी ज़रूर करेंगे।
चाँदनी (हँसते हुए): एक और पार्टी करने की ज़रूरत नहीं है अजय भैया।
अजय: एक और पार्टी? मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझा हूं चाँदनी!
तभी ईशा हैरान होने की एक्टिंग करते हुए चिल्लाकर बोली,
"अरे...सब देखिए...अब भावना भाभीजी हमें भी दिखने लगी हैं। यह तो ईश्वर ने चमत्कार कर दिया है।"
ईशा के यह कहते ही सब ज़ोर से ठहाका मारकर हँसने लगे हैं। फिर माला अजय को आज सुबह से लेकर शाम तक हुई घटनाओं को विस्तार से बता रही हैं। जिसको सुनकर फिर से सब लोग हँसने लगे हैं। माला से सब कुछ सुनकर अजय भावना की ओर देखकर बोला,
"मुझे माफ़ कर दो भावना। मैंने तुम्हारा दिल बहुत दुखाया है। अधिकतर हम पति पत्नियों के जन्मदिन को ज़्यादा महत्व नहीं देते हैं। हम पति अक्सर पत्नियों को उनके जन्मदिन पर विश तक करना ज़रूरी नहीं समझते हैं। हम पति यह भूल जाते हैं कि एक घरेलू पत्नि की सारी दुनिया ही उसके पति और बच्चों से होती है। अगर उसका पति और बच्चे ही उसको ये छोटी छोटी खुशियाँ नहीं देंगे, तो और किसी से कितनी भी खुशियाँ मिलें, तो वे भी बेमानी सी लगने लगती हैं। मुझे खुशी है कि आज तुमने पूरे परिवार के साथ मिलकर पार्टी की। भले ही मुझे सबक़ सिखाने के लिए ही सही! तुमने कम से कम थोड़ा एंजॉय तो किया होगा।"
भावना (रोते हुए): नहीं जी। मुझे आपके बिना बिल्कुल मज़ा नहीं आया। बस मुझे आपको सबक़ सिखाना था। जिससे आपको यह दिन हमेशा याद रहे। आगे से आप मेरा जन्मदिन कभी न भूलें।
अजय (हँसते हुए): अरे, तुमने तो फिर से रोना शुरू कर दिया है! मैं वादा करता हूं कि आगे से तुम्हारा जन्मदिन कभी नहीं भूलूंगा।
यह कहते हुए एक बार फिर से अजय ने अपनी इमोशनल पत्नि भावना को गले लगा लिया है। अब अजय भावना को चिढ़ाने के लिए माला की ओर देखकर बोला,
"मम्मी, आप दिन में वह क्या कह रही थीं? प्लीज़, ज़रा फिर से बोलिए न। आप मेरे लिए दूसरी पत्नि और मेरे बच्चों के लिए दूसरी मम्मा लाएंगी...मुझे मंज़ूर है...हाहाहा!"
अजय के इतना कहते ही यश वर्धन ठाकुर का घर ठहाकों की आवाज़ से गूंज उठा है। लेकिन ठहाकों की यह आवाज़ इस घर में कितने दिन ठहर पाएगी, यह तो भविष्य ही बता सकता है। (क्रमश:)
