Dishika Tiwari

Drama


4.5  

Dishika Tiwari

Drama


लॉक डाउन के दौरान जीवन

लॉक डाउन के दौरान जीवन

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लॉक डाउन के दौरान हमारा जीवन अच्छा तो व्यतीत हो रहा है, परंतु हमें इस बात की खुशी है कि हम अपने घर में बहुत अच्छे से रह रहे हैं। लेकिन हम से भी बाहर एक दुनिया है जिसमें कुछ लोग ऐसे हैं जो गरीब है और अमीर है। अमीरों का कहना है कि लोकडाऊन बढ़ना चाहिए। किसी ने यह नहीं सोचा कि जो गरीब है उनका जीवन कैसे व्यतीत हो रहा है। इससे तो पहले ही अच्छा था कि जो गरीब थे उन्हें इस प्रकार दुखों से तो नहीं मरना पड़ रहा था। कम से कम एक वक्त की रोटी तो खाते थे। अपनी दिन की दिहाड़ी करके घर में उनके चूल्हा जलता था और अब तो वह भी नहीं है।

हमारा भी कहना सही है ।एक नजर उन गरीब पर भी मार ले तो उससे ज्यादा सही और अच्छा होगा। कोरोना की वजह से लोकडाऊन लगा है अगर कोरोना नहीं होता तो लोक- दान भी नहीं होता। कोरोना को चीन वालों ने पैदा किया है। जिसे सहना और भुगतना हमें पड़ रहा है।

जिससे बहुत से लोग मारे जा रहे हैं। लेकिन हमें हार नहीं माननी है । हमें करोना को हराना है। पहले से ज्यादा खर्चा अब हो रहा है। लॉक डाउन में बच्चों को भूख ज्यादा लगना। पता है घर में रहेंगे भूख तो लगेगी और इस वजह से घर में ज्यादा राशन लगना तीनों समय खाना बनना अगर नहीं खाया तो वह भी बेकार हो जाता है बल्कि अभी राशन की बहुत ज्यादा जरूरत है। पहले तो हम स्कूल जाते थे मम्मी पापा काम पर जाते थे तो घर में कोई नहीं होता था तो राशन भी कम लगता था। साथ में बिजली का बिल आना घर में रहते हैं तो टीवी देखना फ्रिज का ज्यादा देर तक चलना पंखा चलना कई घरों में एसी कूलर चलते ही रहते हैं। अब पहले जैसा जमाना तो रहा नहीं की नीम के पेड़ की ठंडी हवा खा ले। नया जमाना नए लोग नई चीज । पहले तो घर में कोई नहीं रहता था तो ना ही ज्यादा टीवी चलता था ना ही ऐसी कूलर चलते थे।

अब तो बस की पहले से बहुत ज्यादा खर्चा हो रहा है। किसी के पास पैसे नहीं है। बोलो कैसे देंगे इतना सारे खर्चे के पैसे। बहुत सारा परिवर्तन आया है। पहले से अब तक के लॉकडाऊन उनके जीवन में। घर में जीवन व्यतीत करना कोई आसान काम नहीं है। घर में हमारी कितनी सारी परेशानी होती है क्या कोई जानता है। नहीं सबको यह लगता है कि लॉकडाऊन रहना चाहिए पर उन गरीब मज़दूरों को भी घर पहुँचाने का प्रबंध होना चाहिए ताकि जो लोग कहीं फंसे हुए हैं वह अपने घर गांव तक जा सके। कईयों की सैलरी भी फंसी हुई है वह भी अपनी सैलरी मिल सके।

न्यूज क्या चीज है कुछ भी नहीं अभी तक न्यूज़ में किसी ने यह नहीं बताया कि लॉक डाउन के दौरान जो लोग फंसे हुए हैं वह अपने गांव घर तक पहुँचे यह भी किसी ने नहीं बताया और साथ में कोई भी भूखा परिवार जो भूख से तड़प रहा है उसे अब मिला या ना मिला यह भी किसी ने नहीं बताया।

यद्यपि सरकार प्रयास कर रही है इन्हे अपने अपने राज्यों में पहुँचाने के पर अभी हालात ठीक नहीं हुए हैं। लॉक डाउन में हमें घर में रहकर न्यूज़ देख देख कर परेशान हो गए हैं। बात लॉक डाउन की नहीं है बात 

करोना की है जिससे कितने लोग मौत से जूझ रहे हैं। घर में टीवी देखने पंखे और ए. सी. के नीचे बैठने से कुछ नहीं होता। हमें उन लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए।

जिनके पास खाने के लिए रोटी नहीं है। वह लोग नमक रोटी खा रहे हैं और हम यहां अपने घर में इतना सारा अन बर्बाद कर रहे हैं। एक बारी उनके बारे में भी सोच कर देखिए आपकी आंखें भी भर आएँगी। जो इन बड़ी-बड़ी कोठियों इमारतों में रहते हैं क्या उन्होंने एक बार भी किसी गरीब के बारे में सोचा कि चलो हम उन्हें एक वक्त की रोटी दे देते हैं रोटी नहीं तो राशन ही दे दे बहुत है। किसी ने इन गरीब लोगों के बारे में नहीं सोचा क्या यही इंसानियत है। घर में समय व्यतीत हो रहा है लेकिन कैसे हो रहा है यह किसी को नहीं पता। लोग मुंह पर मुस्कान तो देखते हैं।

परंतु दिल में क्या दुख है क्या परेशानी है किसी को नहीं पता हमें हर चीज के बारे में सोचना चाहिए। जैसे यह लॉक डाउन के कारण जो लोग दिहाड़ी करने वाले मजदूर और लोग होंगे जो अपनी दिन में कमाई करते होंगे और वह काम पर नहीं जा पा रहे हैं इसलिए शायद उनके घर में आप चूल्हा नहीं जल रहा और सरकार भी उनके लिए कुछ नहीं कर रही। अगर उन लोगों के मकान मालिक किराया माँगे तो क्या करेंगे नहीं देंगे बोलो तो उन्हें घर से बाहर निकाल देंगे। मेरी आप सब से यही प्रार्थना है कि आप के यहां जहां पर भी आप रहते हैं उस गली में उस मोहल्ले में अगर कोई गरीब है तो उसकी मदद करें ज्यादा नहीं तो थोड़ी सी। घर में रहे सुरक्षित रहे।


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