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Bhawna Kukreti

Drama


4.6  

Bhawna Kukreti

Drama


"लॉक डाउन-17(आपबीती)"

"लॉक डाउन-17(आपबीती)"

4 mins 190 4 mins 190

आज सुबह हालत खराब हो गयी थी मेरी।

जुलाई के लिए प्लान करके आज सुबह 11:30 तक देना था। कल रात कुछ देर इनसे बात की ,बहुत थके हुए लग रहे थे तो मेरा सारा गुस्सा काफूर हो गया। उनसे रिकवेस्ट की, अपनी सुरक्षा को ले कर जरा लापरवाही ठीक नही , वे मान गए बोले कल कैप और आय गियर ले लूंगा और मास्क नही हटाऊंगा। फिर अपना लैपी (लैपटॉप) ले कर बैठी ।इ पाठशाला उस पर काम नही कर रहा था। दिमाग शायद स्लो हो गया है।अमूमन मैं कुछ भी छोड़ देती हूँ, दो एटेम्पट के बाद। पर कल जाने क्यों समझ नही आया कि क्रैश हो रहा है। दर्द होने लगा तो छोड़ा। अगर ये होते या बेटा जागा रहता तो वो मुझे 5 मिनट भी नही बैठने देता।

रात भर पैर में खिंचाव और बेचैनी रही। सुबह जरा आराम आया। 7 बजे के करीब मम्मी जी ने चाय दी और अब काम वाली आ गयी है और मम्मी जी नहाने चली गईं हैं।आज नाश्ते में मम्मी जी ने भीगे चने और पपीते का नाश्ता कहा है।पपीता मैने काट कर रख दिया है। मैं लैपी और मोबाइल लेकर डाइनिंग टेबल पर ही बैठ गयी हूँ ।

मैंने मोबाइल पर इ पाठशाला फिर इंस्टाल किया तब जाकर बात बनी और फिर शूरु हो गयी।15 मिनट भी नही बैठ पायी दुखने लगा फिर खड़े खड़े किया।आज 11:30 पर न दे पाऊंगी तो तो हमेशा के लिए टैग हो जावेगा कि ये मैंम लास्ट मोमेंट पर मना कर देती हैं।

8:30 हो रहा है , जुलाई सेकंड वीक तक का ही चाक आउट कर पाई हूँ। बेटा भी उठ गया है। अब वो मेरा चेहरा पढ़ने लगा है।बोल रहा है "दर्द हो रहा न ? तो क्यों आप जिद पे हैं।चलिए लेटिये नही तो अभी पापा को बताता हूँ ।

मैंने बहाना दिया है कि डॉक्टर ने थोड़ा चलने और बैठने की परमिशन दी है यार,तो भी नही माना और मैं वापस सीधे अपने बेड पर हूँ

अभी फोन आया है मेडिकल स्टोर से ,कल शाम जिसको नेट पर सर्च कर कॉल किया था न वही की दवा भिजवा रहा हूँ।

मम्मी जी ख़ुश हो गईं है कह रहीं है कि चलो हमारे डेढ़ महीने का इंतजाम हो गया।

शायद मम्मी जी ने ने बेटे को सोते रहने,और टीवी देखने को ले कर कुछ कह दिया है। वो नाराज चला आया है। समझ नही आ रहा कि कैसे ये संभालूं। मम्मी जी अपनी जगह सही है , इस उम्र में वो सुबह से नाश्ते , सब्जी धोने-रखने, ड्राइंग रूम सेट करने ,अपने दैनिक काम पर जुटी हैं और दूसरी तरफ बेटा उठते ही न नाश्ता किया, न नहाया बस टी वी पर डिस्कवरी चैनल देख रहा है।बहुरानी भी अपना लैपी लेकर बैठी कुछ देर और फिर वापस बेड पर लेटी अपने मोबाईल पर मस्त हैं,कुछ उलझन तो होती ही होगी देख देख कर ,स्वाभाविक ही है।इधर बेटा भी उनकी एक्सपेक्टेशन नही समझ नही पा रहा और अब वो भी जिद पर आ रहा है।

यार , मैं न बड़े को कुछ कह पा रही न छोटे को समझा पा रही।कम्बख़्त कोरोना न आती तो स्कूल खुलते,बच्चे स्कूल जाते।मम्मी जी को सुकून रहता कि पढ़ाई हो रही है,उनपर काम का प्रेशर जीरो होता,वो हैप्पी मूड में रहतीं।।बेटे जी को भी सुकून रहता कि दादी जी अब कुछ संतुष्ट हैं। मैं भी मेंटली रिलैक्स रहती। हे ईश्वर, कब निपटेगा ये कोरोना।

आज मेरे स्टूडेंट्स को व्हाट्सएप्प पर मुझे काम भेजना था।अभी तक नहीं भेजा। लॉक डाउन के बाद बेटे के स्कूल वालों से इंस्पायर होकर मैने भी ये शुरू किया था। तब कहा तो था की जी मैडम जी जरूर करवा देंगे ,दिनभर पड़े रहते है,उधम काटते हैं।पर अभी तक एक ने भी नही भेजा।कॉल करती हूँ।

मैंने एक ग्रुप बना दिया है पेरेंट्स का ।अब उसी पर बच्चों को काम और रोचक गतिविधियां करने को कहूंगी। एक पैरेंट ने अपने बच्चों की काम करती तस्वीर ग्रुप में भेजी है ।एक तो पर्सनली एक के बाद एक किया काम भेजे जा रहे है।अच्छा लग रहा है कि चलो कुछ तो अपने बच्चों के लिए जागरूक हैं। उस ग्रुप में अपनी इंचार्ज रेशु मैंम को भी जोड़ दिया है। उन्हें भी ये आईडिया सही लगा।उनकी ड्यूटी उसी गांव में लगी है।

बच गयी ,जिस जुलाई वाले काम के लिए लगी थी वो आज नही लिया जा सकेगा क्योंकि आज ज्यादातर लोग टी कॉन से नहीं जुड़ नही सकेंगे। ज्यादातर की कोरोना लॉक डाउन में ड्यूटी लगी है।अब धीरे धीरे पूरा कर लुंगी।

आज दिन में फिर खिचड़ी बनी है।मम्मी जी ने उसी में एक आलू डाल दिया था उसी का चोखा बना दिया है।बाकी सलाद ,दही और चटनी है ही।

इनका फोन आया था, बेटे को समझाया। मगर वह कह रहा है सब मुझको ही समझा रहे हैं।अब मैं किसी से कुछ नही कहूंगा। मेरे पास लेटा है,कुछ कुछ बोले जा रहा है। कह रहा है कि लॉक डाउन बढ़ा न तो मैं अब नीचे खेलने जाऊंगा। अब नहीं सुनूंगा किसी की भी। अब यहां लिखना छोड़ देती हूँ।


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