लेकिन
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यहां क्या हर घर में छोटी-छोटी लड़कियां ही काम पर आती हैं? सुनीता जो कि अभी-अभी ही एक मकान में किराए पर रहने आई थी ने पूछा।
हाँ! सुनीता की पड़ोसन ने जवाब दिया। फिर आप लोग मना क्यों नहीं करते हैं। यह उम्र तो इनकी विद्यालय जाने की, खेलने-कूदने की है। सुनीता ने पूछा।हम सभी लोग मना करते हैं लेकिन इनकी माताएं रो-धोकर, गरीबी की दुहाई देकर सभी को मना लेती है। दूसरे दिन जब काम वाली अपनी बेटी के साथ काम के लिए सुनीता के घर आई तो, सुनीता ने कामवाली से कहा, तुम्हारी बेटी मेरे घर रोज आएगी जरूर लेकिन काम करने के लिए नहीं, पढ़ने के लिए और तुम आओगी काम के लिए। पढ़ने के लिए? कामवाली ने आश्चर्य भाव से पूछा। हां तुम्हारी बेटी की पढ़ाई की और एक वक्त के खाने की जिम्मेदारी मैं लेती हूँ। कृतज्ञता से उस कामवाली ने सुनीता के पैर पकड़ लिए और कहने लगी। मैडमजी मैं भी इसे पढ़ाना चाहती हूं लेकिन .....आज से लेकिन- वेकिन कुछ नहीं। कोई मजबूरी नहीं। कामवाली को बीच में ही रोकते हुए सुनीता ने कहा।
