लाइफ नोट्स
लाइफ नोट्स
पिछले कुछ दिनों मन बहुत खराब था।कुछ दोस्तों से बात करने की कोशिश भी की कुछ ने सुना भी पर हर किसी के पास अपनी अलग समस्याएं हैं। हर कोई सर्वाइव ही कर रहा जैसे तैसे।जो जहाँ है वो वहाँ खुश नहीं है।किसी के पास इतनी फुर्सत तो नहीं कि मुझे अवसाद से निकालने के लिये अपना वक्त जाया करे और करे भी तो तब जब उसे वक्त मिले।
खैर मुद्दे की बात ये है कि चाहे सुख हो या दुःख। हर स्थिति में आपको ही खुद को सम्हालना है।मेरी आदत है जब लगता है कि बहुत निगेटिव हो रही हूं खुद पर नियंत्रण नहीं है किसी को कॉल लगा लेती हूं इसलिये नहीं कि वो मुझे सुनकर मेरी समस्याएं हल कर देगा बल्कि इसलिये कि कुछ समय के लिये ही उन नकरात्मक बातों से ध्यान हट जाता है। कभी जब आधी रात ऐसा होता है कि अचानक मन खूब व्यथित होता है कोई किताब उठाकर जबरदस्ती पढ़ने लगती हूँ ।
सच बताऊँ तो जब आप बहुत निगेटिव होते हैं तो बिल्कुल मन नहीं करता किसी से बात करने का या कुछ पढ़ने का पर जब आप ये सब सोचना शुरू करते हैं उसके बाद कब ये सब आपके दिमाग मे इस कदर जाल बना लेता है कि आप घुसते ही चले जाते हैं निकलने का कोई रास्ता नहीं नजर आता ,आपको पता ही नहीं चलता। बस उस वक्त जरूरी है कि आप उठे और अपने आप को कहीं और जबरदस्ती धकेलिये, झोंकिये किसी किताब में ,किसी से बात करने में, किसी मूवी को देखने में। कुछ देर तक मन नहीं लगेगा बस उस वक्त में आपको खुद को जबर्दस्ती वहाँ टिकाये रखना है। थोड़ी देर बाद चीजें अपने आप नॉर्मल लगने लगेगी। आपके दिमाग मे ,जो कुछ भी आप पढ़ रहे हैं या देख रहे हैं या जिससे बात कर रहे हैं वो सब घुस जाएगा और जो नकरात्मकता अंदर घर कर रही थी वो छट जायेगी।
सबकुछ दिमाग और मन का खेल है। आपको पसन्द है अगर कि लोग आप पर दया करें आपसे सहानुभूति जताएं तो आप उस तरह ही बिहेव करने लगेंगे। लेकिन अगर आपने दूसरों की समस्याओं को देखकर ये समझ लिया कि कोई नहीं हम इससे तो बेहतर ही है तो बस थोड़ी देर बाद सब ठीक लगने लगता है।
इस दौर में जहाँ हर कोई जी कम रहा है सर्वाइव ज्यादा कर रहा है किसी तरह। किसी से उम्मीद मत रखिये कि कोई आपको सुनेगा और सुन कर सब ठीक कर देगा।
केवल आप ही अकेले है जो सब ठीक कर सकते हैं।
पर सबसे पहले जरूरी है कि खुद की जिंदगी को वैसे ही अपनाना जैसी वो है और फिर उसे बेहतर करने की कोशिश करना।
