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Ragini Ajay Pathak

Tragedy

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Ragini Ajay Pathak

Tragedy

लाइक क्यों नही करती?

लाइक क्यों नही करती?

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"मेरी मम्मी को पसंद नहीं तू" गाने का रिंगटोन मेरे पतिदेव अनिकेत के फोन पर लगातार बजे जा रहा था। और अनिकेत बाथरूम में नहा रहे थे| मैं दीया अपनी प्यारी सी रसोई में सुबह का नाश्ता बनाने में व्यस्त, मेरी चार साल की बेटी सिया टीवी पर कार्टून देखने में व्यस्त।

मैं गाने को सुनकर मन ही मन बोल रही थी गजब मुझ पर व्यंग करने वाला गाना लगाया है। अरे अरे मेरा मतलब मेरे पतिदेव की मम्मी यानी मेरी आदरणीय सासुमां की मैं आदर्श बहु नहीं हुँ। ना इसलिए ऐसा बोल रही हूं उनकी नजर में मैं एक तेज ,चालक और घर तोड़ने वाली बहु हुँ। क्योंकि सच कड़वा होता है और वो सच मैं शुरू से मुँह पर ही बोल देती हूँ ताकि मेरे दिल पर कोई बोझ ना रहे और मेरा दिल दिल की बीमारी से भी बचा रहे। दूसरा कारण हमारी शादी जो कि लवमैरिज है वो बात अलग है कि शादी के बाद लवमैरिज में से लव गायब हो चुका हैं सिर्फ मैरिज बची है क्योंकि अब पहले वाला प्यार कम तकरार ज्यादा हो गयी है हमारे बीच।

पहले मुझसे शादी करने के लिए अपने परिवार के खिलाफ गए और अब शादी होने के बाद परिवार के लिए मेरे खिलाफ हो जाते हैं जब भी कोई पारिवारिक मतभेद सास ननद से होता है पतिदेव कहते हैं कि तुम चुप नहीं रह सकती थी तुम्हारा बोलना जरूरी है क्या? इतना सुनकर रोज खुद से हजारों कसमें वादे करती हूँ अब कुछ भी हो जाये मैं नहीं बोलूंगी। वही वादा निभा रही थी बजते फोन को ना उठाकर।

अनिकेत (बाथरूम से आवाज लगाते हुए)-"अरे! यार दीया देखो तो किसका फोन है?"

इतना सुनते मैं चली गयी फोन के पास देखा तो ननद रेखा का फ़ोन था। सच मानिए फोन को पकड़ते ऐसा लगा जैसे हाई टेंशन का तार छू लिया हो। फिर भी बोल पड़ी "रेखा दीदी का फोन था कट गया।" शायद उनको भी आभास हो गया की मैं ही फोन उठाने जा रही हूँ तो मेरी शिकायत मुझसे कैसे करेंगी। ना जी ये तो माजक था फोन तो हमारे देर करने से कटा।

अनिकेत(बाथरूम से बाहर आकर)"तुम भी हद करती हो , उठा नहीं सकती थी फोन |खुद के मायके वालों का फोन तो ऐसे भागकर उठाती हो जैसे कोई कोहिनूर दे रहा हो तुम्हे,पता नहीं क्यों फोन कर रही थी? रेखा, लेकिन तुम्हें क्या पड़ी है तुम्हारी बहन थोड़ी ना है वो" कहते हुए वहाँ से अंदर अपने कमरे में चले गए।

और मैं जवाब ढूंढ रही थी आ तो बहुत सारे रहे थे लेकिन मैं सटीक जवाब के चक्कर में थी तब तक देर हो गयी और अनिकेत मुझे सुना कर चले गए बहन से बात करने। ये अकसर होता है मेरे साथ जवाब बाद में ही याद आता है। आप लोगो के साथ भी ऐसा होता है तो बताइयेगा जरूर। मैं सोचने लगी कि महाशय मेरे मायके का फोन तो कभी उठाते नहीं कभी किसी ने आग्रह किया कि जरा बात करा दो तो बात ऐसे करते है जैसे कोई सैलिब्रिटी हो। खैर दामाद जो ठहरे तो अभिमान स्वाभाविक है। मन ही मन मैं सोच रही थी। तबतक अनिकेत गुस्से में -दीया, दीया यहाँ तो आना,रेखा क्या कह रही है कि भाभी हमें लाइक नहीं करती"।

मैं-"क्या हुआ,इतना क्यों चिल्ला रहे हो ,ये किसने कहा कि मैं लाइक नहीं करती और वैसे भी मेरे लाइक करने ना करने से क्या फर्क पड़ता है किसी को?"

अनिकेत-" तुम्हारी परेशानी ही यही है कि तुम बोलती बहुत ज्यादा हो,ये लो रेखा तुमसे बात करना चाहती है।"

मैं-"मन ही मन सोचते हुए की अब क्या हुआ सुबह सुबह" हेलो

अनिकेत-"फोन स्पीकर पर ही रहने दो और बात करो।"

मैं- "हाँ दीदी कहिये।"

रेखा-"देखिये भाभी आप हमें लाइक नहीं करती ये तो हम लोग जानते है लेकिन ये बात दुनिया को बताने और जताने की क्या जरूरत थी।"

मैं हैरान परेशान सच से अनजान फिर भी दोषी- "मतलब!मै समझी नहीं मैंने किस से कही ये बात मैंने तो किसी से भी कुछ नहीं कहा।"

रेखा-"देखिये भाभी ज्यादा अनजान बनने का नाटक अब मत कीजिये,मेरी आदत पीठ पीछे बात करने की या बोलने की , तो बिलकुल नही, मैं जो बोलती हूं मुँह पर बोलती हुँ और भैया ये बात अच्छे से जानते है। इसलिए आपको बोल रही हूं।"

मैं--"लेकिन बात हुई क्या किस ने क्या कहा आप लोगो से,और मैंने किस से क्या कह दिया"

रेखा-"किसी से कुछ कहने की क्या जरूरत, पिछले कुछ दिनों से देख रही हूं कि आप फेसबुक और व्हाट्सएप पर दिनों रात ऑनलाइन रहती है मैंने देखा है आपको सुबह सुबह और रात के चार बजे तक ऑनलाइन लेकिन मेरी और माँ की एक भी पोस्ट पर आपने लाइक नहीं किया। कमेंट करना तो बंद कर ही दिया था, अब लाइक करना भी बंद कर दिया। मेरे ससुराल वाले पूछ रहे थे तुम्हारी भाभी लगता है हमें लाइक नहीं करती, क्या उनसे तुम्हारे रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे, कल तो मैंने आपको तीन बजे रात को ऑनलाइन देखा था इतनी इतनी रात को कौन ऑनलाइन रहता है।ये अच्छे घर की बहू बेटियों की निशानी नहीं बीच में सासुमां ने बोला तो पता चला कि ये कॉन्फ्रेंसिंग काल थी।

मैं सिर पर हाँथ रख सोचने लगी-"अच्छा !तो अब समझ आया कि अब पूरा परिवार मिलकर मेरी ऑनलाइन निगरानी कर रहा है।एक और बात जो मैं मन ही मन सोच रही थी रेखा मुँह पर बोले तो दिल की साफ मैं बोलू तो तेज ,चालक ,घर को बिगाड़ने वाली भाई एक ही शब्द और भाव के दो मतलब बहु और बेटी के लिए अलग अलग क्यों फिर तो बेटी भी चालक और शातिर हुई ना ,कमेंट कर दिया तो बुरा ना करो तो बुरा आखिर चले तो चले कैसे, मेरी समझ से तो बाहर था ये माजरा, अब फिर सोचने लगी कि बहुओं के लिए तो पहले मुसीबत कम थी जो ऑनलाइन वाली भी जुड़ गई ,कमेंट करो तो प्रॉब्लम, ना करो तो प्रॉब्लम, ऐसा कमेंट क्यों यहाँ क्यों वहां क्यों और ना जाने कितने क्यों क्या कब कैसे से भरें होते है ऑनलाइन से जुड़े सवाल"

अनिकेत-"अब बोलो क्यों चुप हो गयी जवाब दो। रात तक फेसबुक पर ऑनलाइन रहने का क्या मतलब है।"

इतना सुनते मैं सोच से बाहर आ गयी-"क्या बोलूं जब मैंने रेखा दी कि फ़ोटो देखी ही नहीं तो लाइक कहाँ से करुँ, और उनको मेरा कभी कमेंट पसन्द आता नही, तो तुम जैसे पहले कमेंट करते थे अब भी कर देते लाइक और कमेंट ,दूसरी बात की अगर रात में मैं ऑनलाइन थी तो दीदी भी तो ऑनलाइन थी फिर तो वो भी खराब हुई, दीदी और माँजी तो कभी मेरे किसी पोस्ट पर लाइक कमेंट नहीं करती, तब मैं तो कोई शिकायत नहीं करती। और अनिकेत तुम शायद भूल रहे हो कि मेरा फोन कल तुमने लिया था तुम्हें कुछ काम था और तुम तो बोल ऐसे रहे हो ,जैसे रात भर कही और रहते हो, कितने आश्चर्य की बात है कि एक कमरे में रहकर भी तुम्हे ये पता ही नहीं की मैं तीन बजे रात को सो रही थी या जाग रही थी अब तुम खुद ही जवाब दे दो कौन ऑनलाइन था क्योंकि मैं तो सो रही थी,रेखा दी आपको इस बात का जवाब अनिकेत ही दे सकते है मै नही, और आपकी पिछली पोस्ट पर भी कमेंट इन्होंने ही किया था जो आपको पसंद नहीं आया था तो अब आप सारे सवाल जवाब अपने भैया से करो,क्योंकि मेरा फोन इनके पास था,अच्छा किया आपने मुझे ये सवाल पूछ कर लेकिन आज एक बात और पता चली मुझे की आप सब अब ऑनलाइन निगरानी भी मुझ पर रखते है फिर चाहे वो पति हो या सास।

कहकर फोन अनिकेत के हाँथ में पकड़ाकर मैं दूसरे कमरे में चली गयी,और अनिकेत के सुर अब थोड़ा बदल गए, क्योंकि सवालों के घेरे में अब वो खुद थे।

मैं सोचने लगी कि अब तक तो मुझ पर निगरानी रखी जाती थी अब आज ये बात भी पता चली की ऑनलाइन निगरानी भी मेरी रखी जाती हूं।

अगले ही पल मैंने अपना फोन उठाया और दूर के, पास के, नजदीकी रिश्तेदार और सास ननद समस्त ससुराल के जासूस लोगो को सबको ब्लॉक कर दिया। फेसबूक प्रोफ़ाइल में चुपचाप बैठे जासूसों को चुन चुन कर अनफ़्रेंड कर दिया।अगले दिन फिर मोबाइल बजा और वही रिंगटोन मेरी मम्मी को पसन्द नहीं तू खूब तहलका मचा। लेकिन मुझे सुकून था कि कम से कम ये ऑनलाइन निगरानी बंद हो गई।

जिस फेसबुक व्हाट्सएप पर मैं खाली समय में टाइम पास के लिए ऑनलाइन होती हूँ , कभी कभी अपनी सिया के लिए कुछ स्कूल एक्टिविटी और आर्ट न क्राफ्ट के पोस्ट देख लेती हुँ कुछ मनपसंद कहानियां या वीडियो देख लेती हूँ लेकिन लोग यहाँ भी निगरानी करने लगे थे कि कब मैं ऑनलाइन थी कितने देर रहती हूँ। प्राइवेसी में भी जासूसी की हद हो गयी है।

तभी मेरी सहेली रेवा का फोन आया"कैसी है यार?"

मैं-"ठीक हुँ तू बता, मन की बात दबाते हुए औपचारिकता बस बोल दिया "कैसे कहूँ की बिना गलती के गुनाहों की हाजिरी दे रही हूं।"

रेवा-"मेरा तो सुबह सुबह ही पंगा हो गया पतिदेव और सासुमां से, पतिदेव बरस पड़े कि तुमने मेरे साथ की डीपी क्यों बदली? उस कहानी को क्यों लाइक शेयर किया, जब देखो मेरे फोन को लेकर चुपके से मेरी डीपी बदल देंगे| दोस्तों और मायके वालों के मैसेज पढ़ने लगते हैं और फिर ताने सुनाते रहते हैं कि तुम्हें ऐसे मैसेज आते हैं और सब सोचते हैं कि मैं ऑनलाइन होकर भी रिप्लाई क्यों नहीं कर रही" एक सांस में रेवा बोले जा रही थी ।और मैं सुनकर यही सोच रही थी कि अगर पति और ससुराल वालों का बस बहुओं की साँसों पर भी चलता तो उसको भी रोककर अपनी मर्जी चलाते"|

मैं-खैर रेवा को सांत्वना देकर मैंने फोन रख दिया। लेकिन मेरी सोच अभी भी जारी थी कि हर औरत कहीं ना कहीं कैद में है उसे अपने सोचने, समझने और पसन्द रखने का अधिकार नही, नहीं तो आखिर क्यों?

आपको पता चले इसका जवाब तो मुझे बताइएगा जरूर, यदि नहीं तो कहानी को शेयर करके ये सवाल पूछे जरूर, की आखिर कब एक औरत को अभिव्यक्ति की आजादी मिलेगी।यहाँ एक चीज और जोड़ते चलु दिए गए उपरोक्त अनुभवों में से कुछ लेखिका के स्वयं के भी है।


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