Amrita Singh

Abstract

3.5  

Amrita Singh

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कुदरत का कहर कोरोना

कुदरत का कहर कोरोना

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ना जाने कुदरत ने क्या सोचा है 

इंसान की किस खता से नाराज हो गयी 

इस कदर रुसवा हुई है इंसानियत से कुदरत, 

की इंसानियत की जान ही खतरे में पड़ गयी है !


और सोचे भी क्यू कुदरत इंसान के लिए 

जब इंसानों ने ही कुदरत मे गंदगी फैलाई, 

फिर कुदरत भी इंसानों से अपने तरीके से

हिसाब लेने पर आमदा हो गयी !


कोरोना की महामारी इस कदर फ़ैल गयी की,

रोज विश्व भर मे हज़ारो जाने जा रही है,

ईश्वर ने भी क्या खूब साथ दिया कुदरत का, 

अपने मंदिर, मस्जिद, गुरद्वारा और

चर्च के रास्ते बंद कर दिए और दिखा दिया

ईश्वर एक है और इसके रूप अनेक है।


तो कृपया कर के एहतियात बरते अपना

और अपने आस पास का परिवेश स्वच्छ रखे !

जागरूक और जिम्मेदार इंसान बनो और

इंसानियत की रक्षा के लिए एकांत में घर पर रहे,

स्वस्थ रहे सुरक्षित रहे !


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