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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Romance Fantasy

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Romance Fantasy

करवा-चौथ

करवा-चौथ

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प्रियतम का साथ सुहाना हो,

खुशियों का भरा खजाना हो।


चौथ-चंद्रमा पहर चला आया,

करवा-चौथ दिवस मनाना हो।


तुम बिन मैं नहीं मेरे बिन तुम,

पग-पग पर प्रेम बरसाना हो।


एक चाँद तो है नील गगन में,

दूसरा चाँद मेरा अफ़साना हो,


अर्क चढ़ा कर करूँ व्रत पूरा,

हर वर्ष वो लम्हा लुभाना हो।


भूखी करूँ दीर्घायु आराधना,

सदासुहागन रूप दीवाना हो।


शौहर ही तन-मन का स्वामी,

जीवन-भर साथ निभाना हो।


सोलह शृंगार में सुंदर काया,

रूप-सौंदर्य खूब मस्ताना हो।


बाल न बांका हो मेरे गिरधर,

जीने का सटीक निशाना हो।


मनसीरत मन मंदिर है मेरा,

हर पल पहर संग बिताना हो।


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