Gita Parihar

Inspirational


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कृतज्ञता

कृतज्ञता

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कृतज्ञता क्या है ?अकृतज्ञन होना अधर्मी होने से भी अधिक बुरा है। किसी वन में एक बड़े वृक्ष पर बहुत से पंछियों का बसेरा था, उन बहुत से पक्षियों के साथ एक तोता भी वहां रहता था। एक दिन वह पेड़ सूखने लगा और एक समय ऐसा भी आया कि वह ठूँठ बनकर रह गया। एक- एक करके उस पेड़ पर रहनेवाले पक्षी उसे छोड़कर अन्यत्र रहने चले गये, पर वह तोता वहीं रहता रहा। वृक्ष के भाग्य से निराश होकर उसने और कहीं जाना और दाना ग्रहण करना भी छोड़ दिया। उस समय देवराज इन्द्र ने उसे देखा और आश्चर्यचकित होकर उससे पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। तोते ने उत्तर देते हुए कहा" अपने अच्छे समय में इस वृक्ष ने मुझे भोजन और आश्रय दिया। अब इसके बुरे दिन आ गये हैं तो मैं इसे कैसे छोड़ सकता हूँ। इस प्रकार से इसका त्याग करना धर्म की दृष्टि से उचित नहीं हो सकता।"

तोते की बात से प्रभावित होकर इन्द्र ने उससे वरदान माँगने को कहा। तोते ने यही वरदान माँगा कि वह वृक्ष फिर से हरा -भरा हो जाय। इन्द्र ने उसे वह वरदान दे दिया और तोते की कृतज्ञता की भावना की प्रशंसा करते हुए चले गये। 


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