किराया
किराया
उसने सुदूर नई नौकरी ज्वाइन की और अपने परिवार को भी वही ले जाने के वह वापस आया और जब उसने अपने परिवार को लेकर जाना था तभी लॉक डाउन हो गया।
लॉक डाउन के कारण किराया भी ना दे पाया और अपने परिवार को भी लेकर ना जा पाया। मकान मालिक ने भी उस से किराया नहीं मांगा वह यही चाहते थे कि किसी तरह से वह सुरक्षित परिवार के साथ नौकरी वाली जगह पर पहुंच जाए । लॉकडउन में छूट मिलने पर 2 महीने बाद जाते हुए मकानमालिक के मना करने के बावजूद भी उसने पूरा किराया यह कह कर दिया कि ऐसे घर बसाने का क्या फायदा जिसमें इतनी भी बचत ना हो कि तुम 3 महीने घर अपना बिना तनख्वाह के चला सको। मैंने अपने खर्चे इतने बड़ाए ही नहीं थे कि किसी भी संकट के समय मुझे हाथ फैलाना पड़े। आखिर उसके इस दृढ़ विश्वास के कारण ना चाहते हुए भी मकान मालिक को उस से किराया लेना ही पड़ा। काश सभी इतने समझदार होते।
