Neha Yadav

Abstract


5.0  

Neha Yadav

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कीमत जान की

कीमत जान की

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मैं पिता जी को लेके लखनऊ पी. जी. लेके आई थी . में थी, ये समय हम सबके लिए बहुत नाजुक था, पिता जी को बीमारी की वजह से चलने फिरने में परेशानी होती थी बहुत।

डॉक्टर ने पूरा डायलिसिस पे निर्भर कर रखा था, एक बार महीनों रुकना पड़ा, खर्चा बढ़ता ही जा रहा था और सुधार कोई नहीं दिख रहा था, मेरे पास पैसे ख़त्म हो चुके थे और इस शहर में मैं अनजान थी किसी से मदद नहीं लेे सकती थी।

सोचा डॉक्टर छोड़ दे तो घर जा के कुछ पैसे का बंदोबस्त कर लेे मगर डाक्टर की भी क्या गलती सुधार मिलता तो ज्यादा से ज्यादा 30% बस।

मगर मेरा घर जाना जरूरी था, यहां अस्पताल में माँ पिता जी को छोड़ के अकेले जाना मेरी समझ से बाहर था, घर भी कोई ऐसा नहीं कि उनसे कह सके जो करना था खुद ही करना था क्यूंकि करने वाले पिता जी बेड पर हैं,

एक दिन मेरे पास पैसे बिल्कुल नहीं थे और डायलसिस के लिए डॉक्टर ने बेड के साथ डायलिसिस रूम भेज दिया।

कई लोगों से बात की मदद मांगी मगर कोई फोन नहीं उठाया तो किसी ने बहाना बनाया।

उस वक्त मुझे 10 हजार तक की जरूरत थी मगर हर अपने सगे भी मुकर गए,

वो वक्त मेरे लिए सबसे बुरा था वो पल आज भी याद करके में सहम जाती हूँ मेरी ऑंखे भर आती हैं,

मैं बिना माँ  से कुछ कहे बाहर जा के बस रोने लगी इतनी मुश्किल पलों ने भी मुझे नहीं हराया, मगर ये पल मेरे लिए सबसे बुरा था आधे घंटे से एक घंटे बीत गए कुछ समझ नहीं आ रहा था, बस यही सोच के रोना आता कि आज मेरे पिता जी ऐसे हो गए है तो कोई साथ खड़ा होने से भी पीछे हट जाता है जबकि सबकी हमेशा मदद ही करते रहे।

एक दोस्त (भाई) ने फोन किया, पहले तो मैंने बात नहीं करना चाहा फिर सोचा देखते है क्या कह रहे, मैंने बात की, मेरी आवाज से वो पहचान गए यही बोला क्या दिक्कत है बताओ हम यही है लखनऊ में पहले तो मैं नहीं बताना चाहती थी मगर पिता जी को देख के ये स्वाभिमान भी नहीं आड़े आया, मैंने सारी बाते बताई, और भाई ने मेरी मदद की, और फिर कुछ देर बाद ही डायलिसिस शुरू हो गया, मैं कभी इनका एहसान नहीं चुका सकती, कर्ज तो चूक जाता है मगर वो पल कभी नहीं कोई चुका सकता जिस बुरे वक्त में वो मेरे साथ खड़े हुए। ये पल मैं जीते जी कभी नहीं भूल सकती, इस पल ने मुझे बहुत कुछ समझाया और सिखाया।

मुश्किल वक्त में अपने और रिश्तेदारों ने भी साथ नहीं दिया मगर कुछ रिश्ते खून से नहीं दिल से भी होते है, दिल से बनाए रिश्ते, खून से ज्यादा बेहतर साबित होते हैं।



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