कीमत जान की

कीमत जान की

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मैं पिता जी को लेकर लखनऊ पी. जी. आई. में थी, ये समय हम सबके लिए बहुत नाजुक था, पिता जी को बीमारी की वजह से चलने फिरने में परेशानी होती थी बहुत।

डॉक्टर ने पूरा डायलिसिस पर निर्भर कर रखा था, एक बार महीनों रुकना पड़ा, खर्चा बढ़ता ही जा रहा था और सुधार कोई नहीं दिख रहा था। मेरे पास पैसे खत्म हो चुके थे और इस शहर में मैं अनजान थी, किसी से मदद नहीं ले सकती थी।

सोचा डॉक्टर छोड़ दे तो घर जाके कुछ पैसे का बंदोबस्त कर लें मगर डॉक्टर की भी क्या गलती, सुधार मिलता तो ज्यादा से ज्यादा ३0% बस।

मगर मेरा घर जाना जरूरी था, यहाँ अस्पताल में माँ-पिता जी को छोड़ कर अकेले जाना मेरी समझ से बाहर था। घर भी कोई ऐसा नहीं कि उनसे कह सके जो करना था खुद ही करना था क्यूँकि करने वाले पिता जी बेड पर थे।

एक दिन मेरे पास पैसे बिल्कुल नहीं थे और डायलिसिस के लिए डॉक्टर ने बेड के साथ डायलिसिस रूम भेज दिया। कई लोगों से बात की, मदद माँगी मगर कोई फोन नहीं उठाया तो किसी ने बहाना बनाया। उस वक्त मुझे १0 हजार तक की जरूरत थी मगर हर अपने सगे भी मुकर गए।  वो वक्त मेरे लिए सबसे बुरा था। वो पल आज भी याद करके मैं सहम जाती हूँ, मेरी आँखें भर आती हैं। 

मैं बिना माँ से कुछ कहे बाहर जाकर बस रोने लगी। इतने मुश्किल पलों ने भी मुझे नहीं हराया, मगर ये पल मेरे लिए सबसे बुरा था। आधे घंटे से एक घंटे बीत गए, कुछ समझ नहीं आ रहा था। बस यही सोच के रोना आता कि आज मेरे पिता जी ऐसे हो गए है तो कोई साथ खड़ा होने से भी पीछे हट जाता है जबकि सबकी हमेशा मदद ही करते रहे।

एक दोस्त (भाई) ने फोन किया, पहले तो मैंने बात नहीं करनी चाही फिर सोचा देखते हैं क्या कह रहें हैं। मैंने बात की, मेरी आवाज से वो पहचान गए, यही बोला क्या दिक्कत है बताओ। हम यहीं हैं लखनऊ में पहले तो मैं नहीं बताना चाहती थी मगर पिता जी को देखकर ये स्वाभिमान भी नहीं आड़े आया। मैंने सारी बातें बताई, और भाई ने मेरी मदद की, और फिर कुछ देर बाद ही डायलिसिस शुरू हो गया। मैं कभी इनका एहसान नहीं चुका सकती, कर्ज तो चूक जाता है मगर वो पल कभी नहीं कोई चुका सकता, जिस बुरे वक्त में वो मेरे साथ खड़े हुए। ये पल मैं जीते जी कभी नहीं भूल सकती, इस पल ने मुझे बहुत कुछ समझाया और सिखाया।

मुश्किल वक्त में अपने और रिश्तेदारों ने भी साथ नहीं दिया मगर कुछ रिश्ते खून से नहीं दिल से भी होते हैं, दिल से बनाए रिश्ते, खून से ज्यादा बेहतर साबित होते हैं।।


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