गरीब

गरीब

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माँ माँ ! सुनो

ये देखो आज क्या लाया हूँ,

क्या है बताओ अभी हम खाना पका रहे हैं आके देखते हैं।

ठीक है माँ आना तो ही देख के बताना,

अरे!ये साड़ी कहाँ से लाए हो नमन, सच सच बताओ।

माँ सुनो तो पहले मेरी बात, वो बड़े साहब ! रोशन अंकल हैं न उन्होंने मुझसे कहा बालकनी की सफाई करने को तो मैंने कर दी।

इसलिए वो खुशी से मुझे दो सौ रुपये दिए तो आपके लिए पहने को कपड़े नही थे तो ले आया।

माँ इसलिए देरी हुई आने में आप नाराज मत हो माँ,

बेटा तू पढ़ लिखकर बड़ा हो जा तो हमारी गरीबी खत्म हो जाएगी, तेरे पापा के जाने के बाद इसलिए तो घर घर जाके झाड़ू पोछा कर रही,

इतना कह कर सरला, नमन को गले से लगा ली।


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