खून के रिश्तों का सच
खून के रिश्तों का सच
आज पुष्पा बहुत दुखी थी मन में बहुत ही बुरे बुरे ख्याल आ रहे थे वह अपने आप को कोस रही थी की क्यों इतना गहरा राज उसके मुंह पर आया और क्यों इन भाई बहनों के बीच में दरार आ गई और उस दिन को याद करने लगी।
15 साल पुराने अतीत में खो गई किस तरह वह डॉक्टर को दिखाने के लिए जा रही थी 7 महीने की प्रेग्नेंट थी और जाते-जाते कुछ अनहोनी होने से उसका बच्चा उसके पेट में ही मर गया।
बड़ी मुश्किल से उसको हॉस्पिटल लेकर गए उसके पास वाली खाट पर एक मजदूर औरत पड़ी थी। जिसका कोई सड़क हादसे में स्वर्गवास हो गया था डॉक्टर उसके बच्चे को बचाने की चिंता कर रही और उसने एक लड़की को जन्म दिया।
इसी समय पुष्पा को भी अस्पताल ले जाया गया। इमरजेंसी में उसने एक मरी हुई लड़की को जन्म दिया।
अस्पताल में वह और उसके पति दोनों ही थे ।
दोनों ने देखा एक बूढ़ी अम्मा छाती पीट पीट कर रो रही है। और बोल रही है तू तो चली गई मेरी भी तबीयत ठीक नहीं है मेरी भी पता नहीं कब आंखें मिच जाए।
अब इस बच्ची का क्या होगा यह लावारिस पड़ी रहेगी।
यह जिंदगी कैसे काटेगी इसका कोई नहीं और जोर-जोर से रो रही थी और सांस ले रही थी।
तभी पुष्पा और उसके पति ने आपस में बात करी कि अगर यह अपनी बच्ची को हमको दे देती है तो हम इसको अपनी बच्ची के जैसे ही पालेंगे और यह बात किसी को नहीं बताएंगे कि हमने मरी हुई बच्ची को जन्म दिया है अगर इसकी मां मान जाती है तो यह सही रहेगा। दोनों आपस में फैसला करके उसे बुढ़िया मां के पास गए और अपनी बात कही तो वह खुश हो गई।
और उसने बोला इसको माता-पिता मिल जाएंगे और मुझको क्या चाहिए मेरे तो आज का ही ठिकाना नहीं है तो मैं इसको कैसे रखूंगी इसके पिता तो इसके आने से पहले ही दुनिया से चल बसे।
बोलते बोलते ही उसकी सांसे तेज हो गई और वह 5 मिनट में चल बसी।
अपनी बच्ची का क्रिया कर्म करके वे लोग उस छोटी बच्ची को लेकर घर आए।
किसी को कानों कान खबर ना हुई कि वह किसी और की बच्ची है।
इसको कृष्ण जी का आशीर्वाद मानकर उन्होंने बच्ची का नाम कृष्णा रखा बेटे का नाम गोपाल था।
अब दोनों भाई बहन साथ-साथ बड़े होने लगे दोनों एक दूसरे का बहुत ध्यान रखते थे।
बहुत प्यार करते थे कृष्णा बड़े भाई की बहुत इज्जत करती थी। ।
दोनों पढ़ने में भी बहुत होशियार थे ।
गोपाल 18 साल का और वह 15 साल की गृहस्थी बड़े मजे से चल रही थी।
चारों तरफ खुशियां ही खुशियां थीं।
एक दिन सब बैठे हुए रात को बातें कर रहे थे हंसी टोल टप्पे चल रहे थे कि अचानक ही बेटे ने बोला मैं तो पापा पर गया हूं और कृष्णा मां पर गई है ना मम्मी कितनी सुंदर है यह तो आपसे भी सुंदर है।
कि अचानक इतने सालों से दबाया हुआ राज पुष्पा के मुंह पर आ गया।
उसने बोला यह इसकी मां जैसी है।
पहले तो गोपाल ने ध्यान नहीं दिया और कृष्णा ने भी ध्यान नहीं दिया।
फिर वापस उनके ध्यान में आया की मां जैसी कैसे है मां तो यह ही है।
अब तो गोपाल अपनी मां के पीछे पड़ गया।
दोनों भाई बहन मां के पीछे पड़ गए इसकी मां तो आप ही हैं ।
बताइए यह आपके जैसी है तब प्रश्न पर प्रश्न कर जा रहे थे तो पुष्पा ने पूरी कहानी बता दी।
यह भी बता दिया कि किस तरह से वह कृष्णा को घर लेकर आए।
यह सुनकर दोनों भाई बहनों के सर पर तो जैसे बिजली ही गिर पड़ी ।
अचानक ही गोपाल ने कृष्णा से कहा तू मेरी बहन नहीं
मैं तेरा भाई नहीं ।
उसकी मां ने बहुत बोला
देवकी मां यशोदा मां का उदाहरण भी दिया।
मगर गोपाल के मन को बहुत ठेस पहुंची थी।
दूसरे दिन सुबह वह कृष्णा को बिठाकर मोटरसाइकिल पर स्कूल छोड़ने जा रहा था।
उसके बाद उसको कॉलेज जाना था अचानक उसके ध्यान में पुरानी बात आ गई जो कल रात की बात थी और उसका दिमाग भटक गया ।
उसकी मोटरसाइकिल स्लिप हो गई पीछे बैठी हुई कृष्णा जमीन पर गिरी और किसी पत्थर से टकरा गई तो उसके सर से बहुत खून निकलने लगा।
इस समय लोग इकट्ठे हुए उसे अस्पताल लेकर गए।
पुष्पा और उसके पति को भी खबर कर दी गई वह भी पहुंच गए।
बेटी की ऐसी दशा देखकर बहुत ही दुखी हुए ।
बहुत चिंतित डॉक्टर से बार-बार मिन्नतें कर रहे थे कि हमारी बेटी को बचा लो।
उधर गोपाल बहुत ही दुखी बहुत परेशान रो-रो करके भगवान से कह रहा था।
मेरी बहन को बचा लो 1 मिनट के लिए मेरे को ऐसा लगा यह मेरी बहन नहीं है।
इसलिए मेरे जहन में यह बात आई और मोटरसाइकिल चलाने से ध्यान हट गया भगवान मेरे को सजा देना मगर इसको सही कर देना इसको जिंदा रखना और भी पता नहीं क्या-क्या वह जोर-जोर से बोल रहा था और रो रहा था।
इसका इतना बड़ा एक्सीडेंट हो गया मैं दोषी हूं।
तभी ऑपरेशन थिएटर से डॉक्टर आए बोले ए पॉजिटिव खून की जरूरत है किसी का खून ए पॉजिटिव हो तो जल्दी से दो बोतल चाहिए ।
उसको पता लगा जैसे ही उसने कहा मेरा खून ले लो मेरा ए पॉजिटिव है दोनों का खून मैच किया गया और मैच हो गया।
दो बोतल खून उसको चढ़ा दिया गया और कृष्णा खतरे से बाहर हो गई।
बाहर आकर जब डॉक्टर ने बोला अब खतरे से बाहर है।
थोड़ी देर में इसको होश आ जाएगा फिर आप इसे मिल सकते हैं।
गोपाल भगवान जी को जाकर धन्यवाद देता है और अपने मां बाप के पास जाकर बोलता है। अब इसकी रगों में मेरा खून हो गया है मेरा खून दौड़ रहा है अब तो यह मेरी सगी बहन हो गई ना।
अब तो यह मेरी सगी बहन हो गई ना जोर-जोर से बोलने लगा और रोने लगा और मम्मी को गले लगने लगा।
कि उसकी बहन ठीक हो गई डॉक्टर को भी धन्यवाद देकर अपने मन में वापस बहन के प्रति वही प्यार महसूस कर हल्का हो गया।
संबंधों के ताने बाने हमेशा खून के रिश्ते से ही नहीं होते हैं। कभी-कभी दिल के रिश्ते भी बहुत भारी होते हैं।
एक राज जो बहुत बड़ा था मगर उन्होंने 15 साल तक छुपा के रखा मगर अनायास मुंह से निकली बात ने भाई बहनों के बीच में रिश्ते में दरार पैदा करने की कोशिश करी ।
ईश्वर तेरी माया अजीब है इस हादसे के बाद दोनों भाई बहन वापस पुराने भाई बहन बन जाएंगे इस आशा के साथ पुष्पा और उसके पति भी काफी खुश हो गए और मन में विचारने लगे अब आगे की जिंदगी अच्छी तरह से चलेगी।
कल रात को कितना ज्यादा बेचैनी और टेंशन था।
इस एक्सीडेंट ने और खून ने बुरे में भी यह अच्छा कर दिया कृष्ण जी को धन्यवाद देते हुए बोलते हैं कृष्णा तेरी माया अजीब है कभी हंसाता है ।कभी रुलाता है कभी जिंदगी को सुखी बनाता है।
