Sneha Dhanodkar

Tragedy Inspirational


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Sneha Dhanodkar

Tragedy Inspirational


खुद से खुद की पहचान

खुद से खुद की पहचान

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आज ही पति देव क्वारंटाइन के चौदह दिन पुरे करके वापस आये थे। बड़ी खुश थी दिया आज  आखिर इतना बड़ा टेंशन ख़त्म हो गया। आखिर उसका पूजा पाठ काम आया। भगवान ने उसकी सुन ली उसके पति नीरज इतनी बड़ी बीमारी कोरोना से बच गए थे।

ज़ब से ये महामारी फैली थी सबकी हालात ख़राब ही थी दिया के पति शहर के जाने माने उद्योगपति थे जो पंद्रह दिन से दुबई मे थे वो जैसे ही आये उन्हें सरकार ने चौदह दिन के लिये एकांतवास के लिये भेज दिया था घर मे माँ पापा, बच्चों और दीदी का तो रो रो कर हाल ख़राब था बड़ी मुश्किल से आज ज़ब नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद नीरज घर आये थे  अब सब ठीक था

पर नीरज ज़ब से आये थे बदले बदले लग रहे थे उन्होंने आते ही सबसे पहले भगवान को धन्यवाद बोला। माँ पापा के पैर छुए। बच्चों को गले लगाया। इससे पहले तो नीरज हमेशा सिर्फ अपने काम मे ही लगे रहते थे  कभी किसी से बात करने की भीं फुर्सत नहीं होती थी।

दिया ने ज़ब नीरज का समान निकाला तो एक डायरी मिली दिया खोल कर पढ़ने लग गयी। उसे नीरज ने लिखा था।

खुद की खुद से पहचान।

ज़ब से दुबई मे इस महामारी के बारे मे सुना था ऐसा लगा की शायद अब तो मैं नहीं बचूंगा। सारी जिंदगी बस कमाने मे लगा दी  माँ पापा के कहने पर बस शादी करली पर पत्नी के साथ प्यार भरा समय भीं नहीं बिताया। बच्चे हो गए कभी उन्हें गोद मे लेकर खिलाया नहीं। हा उनके लिये ज्यादा कमाने के चककर मे ये भीं भूल गया की बहन की शादी करनी है  बस कोई अच्छा कमाने वाला बंदा ढूंढता रहा ये ध्यान ही नहीं दिया की उनकी उम्र बढ़ रही है। बच्चों को हर सुख सुविधा तो दी पर समय नहीं दिया।

बेचारी पत्नी पुरे घर को संभालती रहती है पर उसे कोई संभालने वाला नहीं है। अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरा अथाह पैसा इन सबके काम आएगा पर क्या मैं याद रहूंगा इन लोगो को। जिनके लिये मैं इतना कमा रहा हुँ उन्हें रत्ती भर भीं समय नहीं दे पाया  कभी उस भगवान की पूजा नहीं की जिसने मुझे इतना कुछ दिया। कभी माँ पापा का आदर नहीं किया। उनकी बात नहीं सुनी। क्या जिंदगी जी है मैंने।

करोडो रूपये है पहचान है नाम है पर ख़ुशी।  ख़ुशी के नाम पर तो एक पल नहीं है मेरे पास।  है भगवान आज पहली बार आपकी जरूरत महसूस हो रही है मुझे। मुझे मेरी सारी गलतियों के लिये माफ कर देना। अगर जिंदगी रही तो अपने आप को बदलने की कोशिश जरूर करूंगा अपनों के लिये जीऊंगा। अपने लिये जीऊंगा पैसो के लिये नहीं। है भगवान अगर मुझे कुछ हो जाये तो मेरे अपनों का ख्याल रखना।

नीरज

डायरी बंद करते समय दिया की आँखों मे आंसू थे। अब वो समझ पा रही थी नीरज के बदलने का कारण।  उसने भगवान को धन्यवाद कहां। अपने पति को वापस पाने के लिये और फिर लग गयी अपने परिवार के साथ समय बिताने।


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