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ज्योतिषीय भ्रम या सत्य

ज्योतिषीय भ्रम या सत्य

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आज श्याम बाबू के घर सुबह से चहल-पहल थी। उनकी बेटी मीरा को देखने लड़के वाले आ रहे थे। काफी भाग-दौड़ के बाद ये रिश्ता तय कर पाए थे श्याम बाबू क्योंकि मीरा मांगलिक है। पंडित जी ने लड़का भी मांगलिक ही ढूंढने को कहा था। वैसे तो रिश्ते काफी आये थे क्योंकि मीरा थी ही काफी सुन्दर। पर मांगलिक लड़का ढूंढना थोड़ा मुश्किल हो गया था। काफी मुश्किल से घर वर सबकुछ ढंग का मिला था। शुभ मुहूर्त में लड़के-लड़की का देखना तय हुआ। और उसके बाद रोका यानि छेका, करने की योजना बनी। पंडित जी के पंचांग के हिसाब से ये मुहूर्त काफी शुभ था। सुबह से ही घर की साज- सज्जा हो रही थी। मीरा को सजाने के लिए पार्लरवाली भी आ चुकी थी। मीरा थी भी आकर्षक, ऊपर से मेकअप ने उसके रंग-रूप में और चार-चांद लगा दिए। इसलिए श्याम बाबू कुछ हद तक निश्चिन्त थे।

सुबह के साढ़े दस बज चुके थे। नाश्ता और खाने का भी इन्तजाम लगभग हो गया था। बस, इंतजार था तो लड़के वालों के आने का। वो लोग ग्यारह बजे तक आने का बोले थे। धीरे-धीरे बारह बज गये, एक बज गया। पर लड़के वालों का कुछ पता नहीं था। आखिरकार दो बजे तक श्याम बाबू ने लड़के के पापा के मोबाइल पर फोन किया। उधर से किसी पुलिस वाले ने फ़ोन उठाया और उन्हें जल्द ही सिटी हॉस्पिटल आने को बोला।

श्याम बाबू का मन आशंकाओं से घिर गया, वे भागते हुए हॉस्पिटल पहुँचे। वहाँ का नजारा देख उनके होश उड़ गए। जिस लड़के के साथ अपनी बेटी का ब्याह कुंडली मिला कर तय किये थे वो तो इस दुनिया को अलविदा कर गया। लड़की देखने आते समय हाइवे के पास उनके कार का एक्सीडेंट हो गया। लड़का ही ड्राइव कर रहा था, इसलिए उसे ज्यादा चोट आई थी। हॉस्पिटल आते-आते उसने दम तोड़ दिया। लड़के के माँ- पापा को भी कुछ चोटें आई थीं।

श्यामबाबू को तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। कुछ लोग लड़की के भाग्य को कोस रहे थे। तो कुछ लोग कुछ, जितने मुँह उतनी बातें सुनने को मिल रही थीं। ऐसे हृदय विदारक समय में वो सिर्फ मौन धारण किये, लड़के के परिवार को संभाल रहे थे। इस घटना ने एक तरफ लड़के के परिवार को अमूल्य क्षति पहुॅचाई तो दूसरी तरफ मीरा भी अपनी कुंडली के मांगलिक दोष को ही इसका जिम्मेदार समझ कर आत्मग्लानि से भर गई। इस घटना से वो काफी टूट गयी। श्याम बाबू को बिटिया का यूँ टूटना बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

ऐसे में उन्हें अजय का रिश्ता दिखा। अजय ने अपने सुदर्शन व्यक्तित्व,और मधुर व्यवहार से उनका मन जीत लिया। इसलिए इस बार कुंडली को दरकिनार करते हुए अपनी बिटिया का विवाह अजय से कर दिया। कुछ लोगों ने मीरा के मांगलिक दोष का जिक्र भी किया पर श्याम बाबू ने उन्हें ये जवाब देकर चुप करा दिया कि - अगर सबकुछ कुंडली के हिसाब से ठीक था तो वो हादसा ही क्यों हुआ?

अब तो मीरा की शादी को बाइस साल हो गए, वो दो बच्चों की माँ भी बनी। अजय और मीरा का वैवाहिक जीवन भी काफी सुखमय है। श्याम बाबू और उनकी पत्नी को दामाद के रूप में अजय जैसा बेटा मिल गया। जो हर दुःख-सुख में उनके साथ खड़ा रहता है। अपने बेटी के सुखमय वैवाहिक जीवन को देखते हुए श्याम बाबू के दिल में एक ख्याल आता है कि ,क्या वाकई मांगलिक दोष शादियों को प्रभावित करता है या ये सिर्फ एक ज्योतिषिय भ्रम है?


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