हर बेटा बुरा नहीं होता
हर बेटा बुरा नहीं होता
माँ से अपनी बहुत प्यार था उस बेटे को। अपनी माँ को वृद्धआश्रम में छोड़ कर वो बेटा लौट आया। उसने वो घर बेच कर वृद्ध आश्रम को दान कर दिया था।
माँ वृद्ध आश्रम जाना नहीं चाहती थी पर उसने माँ से कहा कि वो तो विदेश जा रहा है और जब वो लौट कर आएगा तो माँ मैं तुम्हें वापस ले आऊंगा। माँ बेटे के लौटने का इन्तजार करती रही।
बेटे की कुछ दिनों तक चिट्टियां और फ़ोन आते रहे बाद में कभी कभार पत्र आते थे। माँ बेटे का इन्तजार करते करते बीमार रहने लगी। तब वृद्ध आश्रम में माँ की एक दोस्त जो थी उसने वृद्ध आश्रम के मालिक से कहा कि इसके बेटे को बुला दो ना साहब उसकी आंखें थक गई अपने बेटे के इन्तजार में। वृद्ध आश्रम का मालिक बोला कहाँ से बुला दूँ इसके बेटे को उसको मरे हुए तो दो वर्ष बीत गए है। वो खुद कैंसर से पीड़ित था और अपनी माँ से अपनी बीमारी छुपा रहा था। उसकी ये ही इच्छा थी कि उसकी माँ को उसकी बीमारी और मौत की खबर ना लगे।
माँ अपने बेटे को जो अब तक गलत समझ रही थी। वृद्ध आश्रम के और अपनी दोस्त के बीच की बाते सुन अचंभित हो जाती है। उसको अटैक आता है और वो भी मर जाती है।
