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Man Singh Negi

Inspirational Others

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Man Singh Negi

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हल्का

हल्का

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मैं अपनी पत्नी पुष्पा से बात कर रहा था। आज का जीवन अधिकतर लोग अहंकार में जीते हैं। पुष्पा ने कहा आपका यह अनुभव सही नहीं है। मैंने कहा हो सकता है हमारा अनुभव गलत हो। जैसा आप मान कर चल रही हो। परंतु आप घर के चारदीवारी की होम मिनिस्टर हो। परंतु हम ना जाने घर से निकल कर कार्यालय तक पहुंचने। कार्यालय से निकलकर घर तक पहुंचने पर असंख्य लोगों से मुलाकात करते हैं। बातचीत करते हैं दिल मिले तो तकरार करते हैं। कई बार जीवन में वह व्यक्ति भी मिल जाते हैं। जिनसे बात करने से पहले ही हमारे मन में बैठा परमात्मा चुपके से अंतर्मन से होता हुआ कानों में कह देता है। इन लोगों से आप किनारा कर लो मत रखो इन लोगों से वास्ता इनसे दूर दूर की राम-राम रखो। मेरी पत्नी पुष्पा ने कहा चलिए मान लेते हैं। आपका अनुभव सत्य की कसौटी पर खरा उतरता है। परंतु उससे पहले आपको यह साबित करना होगा उदाहरण के साथ कि लोग जीवन में अधिकतर लोग जीवन में अहंकार के साथ जीते हैं।

मैंने कहा पुष्पा पहले मन कुछ कहता नहीं है। परंतु जब कहता है तो बस उसे साबित करने के लिए ऐसी योजनाएं बनाता है।

जहां आप ही नहीं दुनिया भी उसे स्वीकार करने में संकोच नहीं करती। हल्का होना सीखिए आप भी हल्का होना सीखिए। याद रहे व्यक्ति जितना हल्का हो जाएगा। उतना ऊपर उठेगा ऊपर उठने के लिए आप उदाहरण पतंग का ले सकते हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे-जैसे हम तरक्की करते हैं। वैसे वैसे हमारा व्यवहार बदलना शुरू हो जाता है इसको यदि परिवार के उदाहरण से जोड़ा जाए तो कुछ इस प्रकार होगा विवाह के संबंध में बंधने के पश्चात बच्चे बड़े हो जाने के पश्चात बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाने के पश्चात मन हल्का हो जाता है।  व्यवहार हल्का हो जाता है नाती पोते हो जाने के पश्चात मन और हल्का हो जाता है। उम्र के पड़ाव में परिपक्वता अपना स्थान बना लेती है।


पुष्पा ने कहा अब भी हमारी समझ में आपकी बातें नहीं आ रही है। आप क्या कहना चाहते हो जरा खुल के हमें बताएं। हमने कहा यह समझाना अत्यंत आवश्यक है कि हम हल्के होने के पश्चात ही जगत को जीत सकते हैं। जगत को जीतने से पहले हमें अपने आप में बदलाव करने होंगे। जब हम कहते हैं पुष्पा तुमने यह काम सही नहीं किया। उस समय भी तीन उंगलियां हमारी तरफ इशारा कर रही होती है कि गलत तो आप भी हो। इसीलिए कहते हैं हल्के होने के लिए पहले अपने दोष खत्म करने पड़ते हैं। पहले अपने व्यवहार में बदलाव करना पड़ता है। पहले अपने व्यवहार के अवगुणों पर नियंत्रण लगाना पड़ता है। 

पुष्पा जैसे जैसे व्यवहार बदलता है। वैसे वैसे देखने में आता है हमारा गुस्सा हमारा क्रोध हमारा अहंकार हमारा तनाव कम हो रहा है। जैसे-जैसे हमारा गुस्सा हमारा क्रोध हमारा तनाव हमारा अहंकार कम होते चला जाता है। वैसे वैसे इन अवगुणों के स्थान पर नम्रता विनम्रता विराजमान होने लगती है। इसीलिए कहता हूं हल्के हो जाओ हल्के होना सीख लो। जितना हल्का रहोगे उतना जीवन का सफर करने में आनंद प्राप्त होगा। वरना ऑटो कार वाला पैसे ले या ना ले। परंतु हवाई यात्रा करने पर 15 किलो से ऊपर वजन के पैसे देने ही पड़ेंगे।इसीलिए बार-बार कहता हूं अहंकार को त्याग कर हल्के हो जाओ।  गुस्से को त्याग कर हल्के हो जाओ।

यह भी याद रख लीजिए हल्के होने से तरक्की संभव है। हल्के होने से तात्पर्य है। किसी की बातों पर ध्यान मत दीजिए। मन में बदले की भावना मत रखिए। किसी से जलना नहीं चाहिए। हल्के होने से तात्पर्य है बहुत से लोगों के अवगुणों को नजरअंदाज करते चलिए। कौन क्या कह रहा है कौन क्या कर रहा है। सब कुछ नजरअंदाज कर दीजिए अन्यथा इसमें ही उलझे रहेंगे।

कौन क्या कर रहा है उसने मुझे क्या कह दिया। इससे सीधा तात्पर्य है बदले की भावना मन में घर कर गई।  इसीलिए कहता हूं हल्के मन से कर्तव्य का भारी बोझ उठाया जा सकता है। इसीलिए कहता हूं जीवन में यह याद रखना आंसुओं का कोई वजन नहीं होता, परंतु आंखों से बह निकलने के पश्चात मन हल्का हो जाता है। मन के उदगार जो विस्फोटक हो सकते थे।

वह मन के भाव आंसू के रूप में निकल जाने के पश्चात। मन ने ऐसा रूप धारण कर लिया। जैसे कुछ हुआ ही ना हो। इसीलिए कहता हूं हल्के हो जाओ हल्के होने के बहुत से कारण एवं फायदे हैं। सबसे महत्वपूर्ण हैं आप स्वयं से हल्का होना चाहते हैं।यदि हां तो झूठी हंसी से अच्छा है खुल कर रो लो। जिससे मन हल्का हो जाए। मन हल्का होने पर उसी प्रकार फलने फूलने लगता है। जैसे गुब्बारे में भरी गैस उसे ऊंचाइयों तक ले जाती है। हल्का हो जाओ मेरे दोस्तों हल्का हो जाओ मेरी प्यारी पत्नी। 

हल्का हो जाओ हल्के होने से तरक्की संभव होती है। हल्के होने से यात्रा आसान होती है। हल्के होने से दूसरों के दिल जीते जा सकते हैं। हल्के होने पर बड़े से बड़ा कार्य आसानी से किया जा सकता है। हल्के होने से दूसरे को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है। हल्के होने से तात्पर्य है आस-पड़ोस समाज देश में प्रतिष्ठा पाना।


क्या आप सब हल्का होने के लिए तैयार हैं। मेरी पत्नी ने भी हां में हां मिलाते हुए कहा वास्तव में आपका अनुभव जीत गया। मैं प्रतिदिन प्रयास करूंगी हल्का होने की। दोस्तों मेरी पत्नी पुष्पा हल्का होने के लिए तैयार है। आप में से जो भी हल्का होना चाहता है। वह हमें अपने संदेश देकर अवश्य बताएं। याद रहे हल्के होने से तरक्की आसानी से प्राप्त की जा सकती है। 

इसका सबसे बड़ा उदाहरण है रॉकेट जो आसमान को भेद कर बुलंदियों को छूता है।



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