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Dr. Madhukar Rao Larokar

Tragedy

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Dr. Madhukar Rao Larokar

Tragedy

हास्पीटल के अवशेष

हास्पीटल के अवशेष

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कितने परिश्रम और धन कि व्यय कर मनुष्य, मनुष्यों के स्वास्थ्य लाभ के लिए हास्पीटल का निर्माण करता है ।यह सोचकर कि वह धन भी कमायेगा और मरीजों की सेवा भी होगी व उसका नाम भी तो होगा।

परन्तु जिनका उत्थान होता है, उनका पतन भी होना निश्चित है ।यह प्रकृति का अटल नियम है ।चित्र के अनुसार प्रसिद्ध हास्पीटल जो रहा होगा, वह निर्जन और वीरान तथा सन्नाटे से युक्त दिख रहा है ।खाली पड़े मरीजों के बैड,जिस पर बिछौना

भी नहीं, ना ही कोई मरीज, यत्र तत्र सर्वत्र चिकित्सा की रिपोर्ट्स,बिखरे पन्नों के रूप में फैले नजर आ रहे हैं ।

हास्पीटल कभी भव्य बिल्डिंग में निर्मित रहा होगा ।बड़े कमरे, ऊंची दीवारें, बड़ी खिड़कियां तो नजर आ रही है ।किन्तु ना जाने किस हादसे या दुर्घटना ने हास्पीटल को निर्जन,वीरान और सन्नाटे का स्वरूप दे दिया है ।

मरीज और मरीजों की सेवा कभी व्यापक तौर पर रही होगी ।अब हास्पीटल खंडहर सा नजर आ रहा है और मात्र दिख रहे हैं तो हास्पीटल के अवशेष ।



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