STORYMIRROR

Swapnil Ranjan Vaish

Tragedy

2  

Swapnil Ranjan Vaish

Tragedy

ग़लतफहमी

ग़लतफहमी

1 min
321

पूजा पाठ निपटा कर सरला काकी फिर दरवाज़े पर बैठ गईं, सूप में सूखे चावल बीन रही हैं कि तभी गाँव के पंडित जी आये और पूछा

"सरला बहन, कितने सालों से देख रहा हूँ तुम्हें। यूँ ही रोज़ सुबह से शाम तक दरवाज़े पर ही बैठी रहकर काम करती हो। किसका इंतज़ार है तुमको?"

"पंडित जी जो तुम मुझे इतने सालों से जानते हो तो ये नहीं जानते कि मैं हर शाम मंदिर में किसके नाम का दीपक जलाती हूँ भोले के आगे। मैं अपने पोते की राह देख रही हूँ। कभी ऐसा ना हो कि वो मुझे ढूँढता हुआ आये और मैं अंदर हूँ और वो यूँ ही घर ढूँढता हुआ निकल जाए। वो बड़े शहर में रहता है ना, गाँव के बारे में उसे क्या पता।"

"बहन तेरा बेटा जो शहर का हुआ वो तो आज तक पलट कर आया नहीं... तो पोता कहाँ से आएगा, अपने मन को भ्रम से जितनी जल्दी निकाल लोगी उतना अच्छा रहेगा"

"पंडित जी...कभी कभी ज़िंदा रहने को कुछ ग़लतफहमीयाँ ज़रूरी होती हैं"...



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Tragedy