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Seema sharma Pathak

Inspirational


4.0  

Seema sharma Pathak

Inspirational


एक वचन और

एक वचन और

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"करूणा बेटा, ये वाली साड़ी पहनकर तो दिखा। मैं भी देखूं इस साड़ी में कैसी लगेगी मेरी गुड़िया रानी। कल दोपहर में आ रहे हैं श्याम के घरवाले तुझे देखने। बहुत ही अच्छा लड़का है बता रहे थे तेरे पापा। उन्हें तो बहुत पसन्द है श्याम और उसके परिवार वाले, तुम दोनों मिल लो एक बार पसन्द कर लो तो बात आगे बढे़" करूणा की मां ममता जी ने कहा।

अगले दिन करूणा को देखने श्याम आ रहा था। श्याम मल्टीनेशनल कम्पनी में काम करने वाला बहुत ही हैंडसम सुलझा हुआ और समझदार लड़का। करूणा साधारण से परिवार की साधारण सी लड़की थी, जिसके बहुत ऊंचे सपने नहीं थे। बस यही चाहती थी कि जो भी उसका जीवनसाथी बने, उसकी भावनाओं की कदर करे और उसे सपोर्ट करे। हर मुश्किल हालात में उसके साथ खड़ा रहे, उसके परिवार को अपना परिवार माने और ढेर सारा प्यार करे।

अगले दिन गुलाबी रंग की साड़ी पहनकर तैयार हुई करूणा बहुत ही सुन्दर लग रही थी। उसका मन बहुत ही बिचलित हो रहा था समझ नहीं आ रहा था जब मिलेगी श्याम से तो क्या पूछे क्या बात करे। श्याम की माँ और बडी़ बहन और श्याम करूणा के घर आ गये थे। चाय नाश्ता और बातचीत करने के बाद श्याम और करूणा को अलग कमरे में एक दूसरे से बात करने के लिए बैठाया गया। पहली मुलाकात थी तो दोनों ही झिझक महसूस कर रहे थे एक दूसरे से बात करने में, काफी देर तक चुप बैठने के बाद श्याम ने ही शुरूआत की।

" हैलो करूणा जी हम कुछ और बात करें या इस रिश्ते को लेकर कुछ भी सोचे मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ - ये तो आप जानती ही होंगी कि मेरे पिता जी नहीं है और बहन की शादी हो चुकी है। मेरे परिवार में मेरी मां के अलावा मेरा एक भाई भी है जिसके बारे में आप सब को नहीं बताया गया होगा। वो वैसे तो मुझसे दो साल छोटा है लेकिन बिल्कुल एक बच्चा है उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है मैंटल डिसआडर्र है सबसे ज्यादा मुझसे जुडा़ हुआ है और मैं भी उससे बहुत प्यार करता हूँ उसको देखे बिना एक दिन भी नहीं रह सकता वैसे तो मां उसे संभाल लेती है लेकिन मेरे साथ वो सबसे ज्यादा कम्फर्टेबल महसूस करता है। वो मेरा भाई नहीं मेरी जिम्मेदारी है मेरी जिन्दगी का अभिन्न हिस्सा हैं और किसी भी नये रिश्ते में बन्धने के लिए मैं उसे नहीं छोड़ सकता। अगर आपको मैं पसन्द हूँ और हमारा रिश्ता आगे बढ़ता है तो शादी में सात फेरों और सात वचनों के साथ एक वचन और देना होगा आपको मुझे। "

करुणा ने बडे़ ही सहज भाव से पूछा, " कैसा वचन"

"एक और वचन -आप मुझे कभी मेरे भाई से दूर नहीं करेंगी कैसे भी हालात हों आप मुझे उसके प्रति मेरी जिम्मेदारी निभाने से कभी नहीं रोकेगीं। मां की तबीयत भी ठीक नहीं रहती अगर मां को कुछ होता है तो मेरे अलावा कोई नहीं हैं उसका मैं अपनी नई दुनिया बसाने के लिए अपने भाई को नहीं छोड़ पाउंगा। "श्याम ने कहा 

करूणा श्याम के अपने भाई के प्रति प्रेम और समर्पण को देखकर उसकी दीवानी हो गई और बोली -

"श्याम जी आपने एक बार में अपने मन की सारी बातें कह दी मुझे बहुत अच्छा लगा आप दुनिया के सबसे अच्छे बेटे और भाई हैं और उससे भी पहले आप एक बहुत अच्छे इन्सान हैं मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब समझूगीं आप जैसा हमसफर पाकर और मैं पूरी कोशिश करूंगी आपके कर्तव्य निर्वाह करने में आपका साथ दे सकूं। "

करूणा की बात सुनकर श्याम बहुत खुश हुआ और दोनों ने अपने घरवालों से शादी के लिए हां कह दिया। कुछ महीनों बाद करूणा और श्याम ने सात फेरों और सात वचनों के साथ एक वचन और लिया और कुर्सी पर बैठे अपने भाई की तरफ देख श्याम मुस्करा रहा था। श्याम जैसे इंसान को पति रूप में पाकर करूणा बहुत खुश थी और मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद दे रही थी।


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