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Seema sharma Pathak

Inspirational


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Seema sharma Pathak

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शुभ कदम

शुभ कदम

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"राधा तुम मां की बात का बुरा मत माना करो, उम्र हो गई है उनकी, बोलने से पहले सोचती कहां है।मुझे तुमसे कोई समस्या नहीं है और मैंने वादा किया था ना उम्र भर साथ निभाऊंगा तो मैं निभाऊंगा।बच्चा नहीं हुआ तो क्या हम दोनों हैं ना एक दूसरे के साथ।" श्याम ने अपनी पत्नी राधा के आंसू पौंछते हुये कहा।

राधा रोते -2 श्याम से लिपट गई।आज उसे फिर से सासु माँ ने ताना दिया था।14 साल हो गये थे शादी को लेकिन राधा मां नहीं बन पा रही थी।सासु माँ को जब धुन चढ़ती राधा को बांझ बुलाकर उसका दिल दुखा देती।श्याम जानता था मां गलत है लेकिन बूढी़ मां से कहे भी तो क्या राधा को ही समझा लेता।मां ने तो कितनी दफा दूसरी शादी के लिए भी श्याम पर दबाब बनाया था लेकिन राधा के प्रति उसके पवित्र प्रेम ने उसे ऐसा करने की गवाही नहीं दी और मां की हजार कोशिशों के बावजूद वह अपनी बात पर अटल रहा।

श्याम की मिठाई की दुकान थी उस पर एक राजू नाम का व्यक्ति काम करता था।श्याम ने देखा राजू कई दिन से बहुत परेशान था।श्याम ने पूछा तो राजू ने कहा, " साहब मेरी बीबी को बच्चा होने वाला है।डॉ. को दिखाया तो बताया कि उसकी कोख में दो बच्चे हैं।अब मैं यह सोच -सोचकर परेशान हूं कि ऐसी मंहगाई में तीन -2 बच्चों का पालन पोषण कैसे करूंगा।एक बिटिया पहले से ही है मेरे पास।आपकी दुकान पर काम करके जो कमाता हूं उसी से घर चलाता हूं।मां बाप की दवाईयों का खर्चा ,बच्ची की पढाई, अब ये दो और बच्चों का खर्चा।कैसे जियेगा मुझ जैसा गरीब।"

श्याम राजू की बात सुनकर काफी देर तक सोचता रहा फिर कहने लगा, " राजू तु बुरा न माने तो एक बात कहूं? " राजू ने हां में गर्दन हिला दी तो श्याम ने कहा, " तुझे 1 बच्चे की जरूरत नहीं है और हमें 1 बच्चे की बहुत जरूरत है तु तो जानता है 14 साल हो गये शादी को लेकिन मैं बाप नहीं बन सका हूं।तु अपना 1 बच्चा हमें दे देना हम गोद रख लेगें।तेरी परेशानियां भी खत्म हो जायेगीं और मुझे और राधा को भी मां बाप बनने का सौभाग्य प्राप्त हो जायेगा।"

श्याम की बातें सुनकर राजू ने एक बार में हां कर दिया क्योकिं वो जानता था कि उसके एक बच्चे को तो शानदार जीवन मिल जायेगा और मालिक का आंगन भी खुशियों से खिल जायेगा।

देखते देखते वो समय भी आ गया जब राजू की पत्नी ने एक बेटी और एक बेटे को जन्म दिया।श्याम और राधा राजू की बेटी को हॉस्पीटल से सीधा अपने घर ले आये।शुरू में तो श्याम की माता जी ने मुँह बनाया लेकिन कुछ दिनों में बच्ची की किलकारियों और प्यारी सी मुस्कान ने उनका दिल भी जीत लिया और वह भी उसके साथ हंसने खिलखिलाने लगी।श्याम ने देखा उस बच्ची के घर में आने से सबकुछ बहुत अच्छा हो रहा था।उदास राधा मुस्कराने लगी थी।हर वक्त चिढ़ चिढ़ करने वाली मां भी अब बच्ची बन गई थी।श्याम ने उस बच्ची का नाम शुभी रखा। शुभी के शुभ कदमों से घर का माहौल ही बदल गया था।

 कुछ महीनों बाद राधा को घबराहट और बैचेनी सी होने लगी।2 -3 दिन उल्टियां भी हो गई।श्याम राधा को दवा दिलाने डॉ. के पास ले गया।डॉ ने श्याम को जो बताया वो सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई, उसे विश्वास नहीं हो रहा था डॉ. की बात पर।खुशी के मारे उसकी आँखें नम हो गई और वह कहने लगा, " आप सच कह रही है डॉ. मेरी राधा मां बनने वाली है यानि मैं पिता बनने वाला हूं।" राधा ने जब सुना कि वह मां बनने वाली है तो उसकी आंखे भी नम हो गई और दोनों पति -2 पत्नी भगवान की इस कृपा और शुभी के शुभ कदमों से घर में आने वाले 1 और नन्हे मेहमान के बारे में सोच सोच कर खुश होने लगे।घर जाकर मां को बताया तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ।कई कई बार राधा और श्याम से पूछने लगी और जब उन्हें पूरी तरह से यकीन हो गया उनकी बात पर तो नन्ही शुभी को गोद में उठा कर खूब सारा लाड़ करने लगी।अब उनमें बहुत फुर्ती आ गई थी वो राधा का भी खूब ध्यान रखती और शुभी को भी खूब लाड़ करती।

देखते देखते नौ महीने भी बीत गये और राधा ने एक सुन्दर से बेटे को जन्म दिया।शुभी का पहला जन्मदिन था और राधा का बेटा शुभम उस दिन 11 दिन का हुआ था।श्याम ने बिटिया के जन्मदिन और बेटे के जन्म की खुशी में बहुत बडा़ उत्सव मनाया।गरीबों को दान दिया सभी रिश्तेदारों को तोहफे दिया।नन्ही शुभी के शुभ कदमों ने राधा के माथे से बांझ नाम की लकीर को हमेशा के लिए मिटा दिया और उसे मातृत्व का सुख दिया।बूढी़ मां भी वर्षों से पडे़ अपने सूने घर में दो दो बच्चों की किलकारियों और खिलखिलाहट सुनकर भावविभोर हो जाती और बच्चों की नजर उतार लेती।राधा को तो जीवन की सबसे बड़ी दौलत मिल गई थी तो वो तो अपने आप को दुनिया का सबसे भाग्यशाली इन्सान समझने लगी थी और श्याम जब भी जब भी शुभी के साथ खेलता उसे गोद में लेता तो उसके नन्हे शुभ कदमों को चूम लेता जिनकी वजह से आज उसके आंगन में इतनी सारी खुशियां बिखरी हुई थी।

अपने ही किसी खास की सच्ची दासता को अपने शब्दों में पिरोकर एक कहानी बनाकर आप सबके सामने प्रस्तुत करने की एक छोटी सी कोशिश।उम्मीद है आपको पसन्द आयेगी और आप भी इस कहानी से अपने आपको जुड़ा हुआ पायेगें क्योकिं आपने भी अपने आस पास किसी शुभी के शुभ कदमों की वजह से किसी के घर में खुशहाली आते हुये देखी होगी या सुनी होगी।


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