एक खत बेटी के नाम
एक खत बेटी के नाम
कुछ साल पहले की बात है एक दुखद घटना ने हमे अंदर तक झकझोर दिया। जब सुबह सुबह यह खबर सुनी की कल रात पायल ने आत्महत्या कर ली हमारे पैरो तले जैसे ज़मीन ही खिसक गई। कल शाम ही तो मिली थी उससे लिफ्ट में हमेशा हँसती खिलखिलाती रहती सबसे प्रेम से बोलती सोलह साल की थी। फिर ऐसी क्या बात हुई जो अचानक.... कुछ समझ नहीं आ रहा था।
एक खत उस माँ की तरफ से जिसने अपनी सोलह साल की बेटी को खोया...
मेरी लाडली पायल...
क्या कहूँ तुम्हें, क्यों किया तूने ऐसा? ऐसी क्या बात हुई जो तूने इतना बड़ा फैसला ले लिया। तेरे पापा के जाने के बाद तू मेरे जीने की इकलौती वजह थी। तुझे देख मैं अपने सारे दुख भूल जाती, पर आज तूने भी मेरा साथ छोड़ दिया। तुम जानती हो आस पड़ोस के लोग कितनी बातें बना रहे है। कोई कहता है बायफ्रेंड ने धोखा दिया होगा तो कोई कहता है भूत प्रेत का साया था। कोई मेरे संस्कारों पर ऊंगली उठा रहा है और कुछ तुम्हारी आज़ादी पर। पर मैं माँ हूँ तेरी जानती हूँ मेरी बेटी ऐसा कोई काम नहीं करती। तो फिर क्या हुआ? मैं लोगों के मुँह तो नहीं बंद कर सकती। पर क्या एकबार भी तेरे मन में ये ख्याल नहीं आया की जो कदम तू उठा रही है लोग तेरी माँ के संस्कारों पर कितनी ऊंगली उठायेंगे? क्या एकबार भी नहीं सोचा तेरी माँ का क्या होगा? एकबार मुझसे बात कर लेती शायद मैं तेरी समस्या का हल ढूंढ पाती शायद तेरी मुश्किलों का हल ढूंढ पाती। क्या कमी रह गई थी मेरे प्यार में जो तू मुझे अकेला कर चली गई?
जब तू छोटी थी कभी माँ बन मुझे डांटती और फिर प्यार बरसाती और कभी कभी मेरी सास बन जाती। कौन मेरे बीमार होने पर अब सिर पर हाथ फेरेगा एक कप चाय की प्याली से सारी थकान मिटा देगा। मैं जानती थी मेरे आंगन की ये चिड़िया एक दिन उड़ जायेगी लेकिन ये नही जानती थी इस तरह उड़ जायेगी की कभी वापस ही नहीं आयेगी।
ऐसा लग रहा है जैसे तेरे साथ इस घर का हर कोना निर्जीव हो गया है सब कुछ अपनी जगह वैसे का वैसे पड़ा है। तू ही बता अब किसे डांटू मैं थोड़ा रेस्पोंसिबल बन जाने के लिए। किसे डांटू अपना फैलाया हुआ सामान सही जगह पर रखने के लिए। किससे कहूँ थोड़ा रसोई का काम सीख ले पराये घर जाना है।
अब सोचती हूँ शायद मेरे ही प्यार मे कुछ कमी रही होगी जो तुम बिन बताये इस तरह चली गई। मैं अपने आप को एक परफेक्ट माँ समझती थी पर तुमने मुझे गलत साबित कर दिया। मैं फेल हो गई बेटा मैं फेल हो गई। जो आंगन तेरी किलकारियों से महक उठता था आज वहाँ मुझे सिर्फ एक शोर सुनाई दे रहा है माँ तुम मेरी कातिल हो।
तो दोस्तों अक्सर हम देखते है आज की युवा पीढ़ी किसी तनाव मे आकर किसी छोटी मोटी परेशानी की वजह से आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठा लेती है । एकबार भी नही सोचते इसका अंजाम क्या होगा। बस मेरी रिक्वेस्ट है उन बच्चों से अपने माता पिता से जब समय मिले बात करे उनसे अपनी परेशानी शेयर करे। वे माता पिता है डांटेगे शायद जरूरत पड़ने पर हाथ भी उठा दे पर तुम्हारा भला बुरा समझते है तुम्हें सही राह जरूर दिखायेंगे। ऐसा कोई कदम ना उठाये जिससे माँ बाप के संस्कारों पर ऊंगली उठे आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नही है।
